एंग्जायटी डिसऑर्डर लक्षण प्रकार और बचाव – Anxiety Disorder Symptoms Causes Treatment
Health

एंग्जायटी डिसऑर्डर लक्षण प्रकार और बचाव

एंग्जायटी डिसऑर्डर लक्षण प्रकार और बचाव – Anxiety Disorder Symptoms Causes Treatment

हमेशा अपने साथ कुछ गलत होने की आशंका, छोटी-छोटी बातों को लेकर बेवजह घबराहट और चिंता में घिरे रहना एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) का लक्षण (symptoms) हो सकता है। पहले से बरती गई सजगता ही इससे बचाव (safety) का बेहटार तरीका है!

सब गडबड हो गया, अब क्या होगा, कुछ समझ (understand) नहीं आ रहा, क्या करें..उफ हरदम मेरे ही साथ ऐसा क्यों होता है? हममें से ज्यादातर लोगों के मन (mind) में कभी न कभी ऐसी बातें चल रही होती हैं। जीवन (life) की कुछ स्थितियां (Situations) ऐसी होती हैं, जब मजबूत दिल वाला इंसान भी चिंतित (tension) और भयभीत हो जाता है।

Google में नौकरी कैसे पाए

विदेश में नौकरी कैसे पाए

मुश्किल (difficult) हालात में थोडी देर के लिए ऐसा होना स्वाभाविक (natural) है, लेकिन जब किसी व्यक्ति (person) को हमेशा चिंता या डर (fear) में जीने की आदत पड जाए तो आगे चलकर यही मनोदशा एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) जैसी गंभीर (serious) समस्या (problem) में बदल सकती है।

जब ऐसी नकारात्मक भावनाओं पर व्यक्ति (person) का कोई नियंत्रण न हो और तमाम कोशिशों के बावजूद छह महीने से ज्यादा लंबे समय तक इसके लक्षण (symptoms) दिखाई दें तो यह समस्या (problem) एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) का रूप धारण कर सकती है।

क्या है मर्ज – Cause of Anxiety Disorder

हमेशा चिंता, बेचैनी, वास्तविक (reality) या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित भविष्य का डर (fear)  शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। हालांकि, हर व्यक्ति (person) में इसके अलग-अलग लक्षण (symptoms) नजर आते हैं, लेकिन स्थायी डर (fear) और चिंता लगभग (almost)  सभी में देखे जाते हैं।

अगर ये लक्षण (symptoms) ज्यादा तीव्र न हों तो समय बीतने के साथ समाप्त हो जाते हैं, अन्यथा एंग्जाइटी डिसऑर्डर की समस्या (problem) हो सकती है। इससे व्यक्ति (person) की रोजमर्रा की दिनचर्या प्रभावित होने लगती है।

80 Quotes of Swami Vivekananda in Hindi | स्वामी विवेकानन्द के 80 अनमोल विचार

Top 10 Chanakya Niti in Hindi | चाणक्य की 10 बातें जो आपका जीवन बदल सकती है

क्यों होती है समस्या– Why This Problem Happens

आजकल महानगरों की युवा आबादी (young people) का एक बडा हिस्सा इस मनोवैज्ञानिक समस्या (problem)  से जूझ रहा है। दरअसल आधुनिक जीवन शैली (lifestyle)  में लोगों की व्यस्तता इतनी बढ गई है कि वे हमेशा जल्दबाजी में रहते हैं और उन पर काम का दबाव (pressure) भी बहुत ज्यादा है। इसी वजह से उनमें चिडचिडापन (irritation) और आक्रोश बढता जा रहा है।

इसके अलावा आधुनिक समाज में हर व्यक्ति (person) अकेला है। किसी के भी पास दूसरे की बातें सुनने की फुर्सत (time) नहीं है। इसलिए अब लोगों में शेयरिंग की भावना (feeling) ख्ात्म हो रही है। शहरी समाज इतना व्यक्ति (person)वादी और आत्मकेंद्रित हो चुका है कि अब पहले की तरह रिश्तेदारों या पास-पडोस (nearby) का कोई सपोर्ट सिस्टम नहीं रह गया है। लगातार तनाव (stress), अकेलेपन और उदासी (sadness) में जीने की वजह से ही लोग एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) के शिकार हो रहे हैं।

अध्ययनों के अनुसार गंभीर (serious) या लंबे समय तक चलने वाले तनाव (stress) की वजह से अनिद्रा की समस्या (problem) होती है। इससे मस्तिष्क से निकलने वाले हॉर्मोस (hormones) के बीच असंतुलन पैदा हो जाता है, जो एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) का कारण बन सकता है। आनुवंशिकता भी इसकी प्रमुख (major)  वजह है।

एंग्जाइटी डिसऑर्डर के प्रकार (Types Of Anxiety Disorders)

स्वीडन की मशहूर कहावत है, ”चिंता (stress) कई बार हमें एक छोटी सी चीज देती है, ये है उसके बड़े होने का डर (fear)।” (“Worry often gives a small thing a big shadow.”)

ये बात किसी हद तक सही (right) भी जान पड़ती है क्योंकि एंग्जाइटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) कई बार लोगों में ऐसा ही असर (effect) डालता है। जो चीज होती भी नहीं है, उसका भी डर (fear) इंसान दिमाग में लेकर घूमता रहता है।

एंग्जाइटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) के वैसे तो कई प्रकार हैं, लेकिन कुछ प्रमुख निम्नलिखित हैं। जैसे :

कोरोना वायरस से जुडी हर जानकारी – Coronavirus

जनरलाइज्ड एंग्जाइटी डिसऑर्डर (Generalized Anxiety Disorders)

इस डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों (Affected people) को विभिन्न स्थितियों और घटनाओं के दौरान बहुत ज्यादा घबराहट और चिंता (anxiety and stress) होती है। कई बार वे अपनी इस बेचैनी पर काबू (control) भी नहीं रख पाते हैं। उनकी हालत (situation) इतनी खराब होने लगती है कि उन्हें लगता है कि शायद उन्हें हार्ट अटैक (heart attack) पड़ने वाला है या उनकी मौत होने वाली है।

मरीज (patient) की ये हालत किसी खास समय या हालात (situation) में हो ऐसा जरूरी नहीं है। ये बिना वजह और कभी (anytime) भी हो सकती है।

ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर (Obsessive Anxiety Disorders)

इस डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों (affected peoples) को लगातार ऐसे विचार आते रहते हैं जिनसे उनकी बेचैनी (anxiety) बढ़ जाती है। वे इस हालात से राहत पाने (to get relief) के लिए एक ही तरह की हरकत दोहराते रहते हैं। जैसे उन्हें अगर ये लग गया कि उनके हाथ (hand) किसी के छूने से गंदे हो गए हैं तो वह लगातार अपने हाथ (hand) या घर के बर्तन धोते रहेंगे।

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर (Social Anxiety Disorders)

सोशल एंग्जाइटी डिसऑर्डर (Social Anxiety Disorder) से पीड़ित लोगों को सामाजिक या सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाने से डर (fear) लगता है। उन्हें समाज में जाने से इसलिए डर (fear) लगने लगता है क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग उनकी परीक्षा (test) लेंगे और बाकी लोग उनका मजाक उड़ाएंगे।

उन्हें इस बात का भी डर (fear) सताता है कि वे जो कुछ भी करेंगे उससे उनका अपमान (insult) होगा और उन्हें शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी। ऐसे लोग रोजमर्रा (daily life) की स्थितियों का सामना नहीं कर पाते हैं, जैसे कहीं बोलना, बातचीत करना (talking) या फिर सबके सामने भोजन करना।

डर या फोबिया – Fear or Phobia

फोबिया अतार्किक और निराधार डर (fear) हैं और जिन लोगों को फ़ोबिया (phobia) होता है वे बेचैनी या घबराहट से बचने के लिए उन वस्तुओं या स्थितियों (situations) से दूर रहने की भरसक कोशिश करते हैं जिनसे उनमें अनावश्यक डर (fear) बन जाता है। जैसे विमान में सफर करने, भीड़भाड़ वाली (crowds place) जगह में जाने से लेकर मकड़ी और ऊँची इमारतों को देखने तक से उन्हें डर (fear) लगता है।

पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (Post Traumatic Stress Disorder)

बहुत ज्यादा तकलीफ, यातना या सदमे (shock) वाली किसी घटना से गुजरना, उसे देखना या फिर खुद पर कोई कोई जानलेवा हमला (attack) भी कुछ वक्त के बाद पीटीएसडी में तब्दील हो सकता है। इस समस्या (problem) से पीड़ित व्यक्ति (person) को नींद (sleep) नहीं आती हैं, वह ठीक से आराम भी नहीं कर पाता है। उसे लगातार पुरानी (old things) बातें बार-बार याद आती रहती हैं।

पैनिक डिसऑर्डर (Panic Disorder)

इस समस्या (problem) के मरीजों में अचानक बहुत ज्यादा डर (fear) जाने की समस्या (problem) होती है। मरीज (patient) को चक्कर आते हैं। सांस लेने में समस्या (problem) होती है, बहुत ज्यादा पसीना आता है। कुछ मरीजों (patients) को ऐसा लगता है जैसे सब कुछ तबाह (destroy) होने वाला है जबकि कुछ मरीजों (patients) को अपनी मौत का भय सताने लगता है। इन समस्याओं (problem) की कोई खास वजह नहीं होती है। इसके बाद भी मरीज (patient) इनके दोबारा आ जाने की चिंता से लगातार परेशान (problem) रहता है।

सामाजिक चिंता विकार – Social Anxiety

इसे सामाजिक भय (social fear) के रूप में भी जाना जाता है। इसमें रोजमर्रा की सामाजिक परिस्थितियों (social situations) के बारे में आत्म-चेतना और जबरदस्त चिंता (anxiety) शामिल है। इस चिंता में ऐसे तरीके से व्यवहार करने का डर (fear) शामिल है जो शर्मिंदगी या सामाजिक उपहास (fun) का कारण बन सकता है।

विशिष्ट फोबिया – Phobia

यह एक निश्चित स्थिति (specific situation) या उड़ने या ऊंचाई जैसे वस्तु के डर (fear)  के एपिसोड द्वारा विशेषता है। यह डर (fear) आपको दिन-प्रतिदिन की गतिविधियों (activities) को करने से रोक सकता है।

111 Short Inspirational Quotes in Hindi  | 111 प्रेरणादायक कोट्स

15 Simple Tips to build confidence in kids

सामान्यीकृत चिंता विकार-  General Stress Disorder

चिंता विकार का यह रूप अवास्तविक और अत्यधिक तनाव (stress) और चिंता से विशेषता है, भले ही चिंता (anxiety) करने की कोई बात न हो।

ऐंग्जाइटी के लक्षण – Symptoms of Anxiety

ऐंग्जाइटी से पीड़ित व्यक्ति (person) टेंशन और डर (fear) में तो रहता ही है, इसके अलावा वह खुद को अन्य लोगों से काट (cut) लेता है। वह अकेला रहना पसंद (like) करता है और उन्हीं बातों के बारे में ज्यादा सोचता(thinks a lot)  है जो उसे दुख देती हैं।

सांस फूलने और दिल की धड़कन (heart beat) बढ़ने के अलावा ऐंग्जाइटी के शिकार व्यक्ति (person) को नींद (sleep) नहीं आती और वह रातभर जागता (awake) रहता है।

हर वक्त उस मन (mind) में नकारात्मक ख्याल ही चलते रहते हैं।

सिर में दर्द (headache) होने लगता है और किसी भी काम में मन (mind) नहीं लगता।

डायरिया हो जाता है और कई बार तो उबकाइयां (nausea) आने लगती हैं।

मुंह सूखने लगता है और व्यक्ति (person) बेहोश हो जाता है।

जो लोग ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर (anxiety disorder) हैं, उन्हें अपनी कुछ आदतें (habit) बदलने की जरूरत है। जैसे कि:

अगर बहुत ज्यादा कॉफी (coffee) पीने के शौकीन हैं तो इसे कम कर दें। ज्यादा कैफीन पीने से हार्टबीट (heartbeat) बढ़ जाती है और यह व्यक्ति (person) को नर्वस फील करा सकती है। अत्यधिक कॉफी (coffee) पीने से कई समस्या (problem) हो सकती हैं, जैसे कि हथेलियों में पसीना (sweat) आना, कान बजना और बहुत तेज दिल धड़कना आदि।

अनियमित खान-पान से भी ऐंग्जाइटी की समस्या (problem) गंभीर (serious) रूप ले सकती है। कई लोग सुबह का नाश्ता (breakfast) छोड़ देते हैं या फिर दिनभर कुछ नहीं खाते। बिना कुछ खाए सो जाते हैं या कुछ जंक फूड (junk food) खाकर सो जाते हैं।

ये सब आदतें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (immune system) को तो कमजोर बनाती ही हैं, साथ ही ऐंग्जाइटी के स्तर (anxiety level) को और बढ़ावा देती हैं। भूखे रहने से स्ट्रेस लेवल (stress level) बढ़ जाता है और ब्लड शुगर का स्तर गिर जाता है। इससे ऐंग्जाइटी (anxiety) हो जाती है।

ऐंग्जाइटी (anxiety) से ग्रस्त कई लोग देर रात तक नहीं सोते और तनाव (stress) को अपने ऊपर और हावी होने देते हैं। यह बढ़ता हुआ तनाव (stress) उनकी बची-खुची नींद (sleep) भी ले उड़ता है। फिर यह तनाव (stress) दिन में भी आपका पीछा नहीं (not leaving) छोड़ता। इसलिए देर रात (late night) तक खुद को न जगाएं। एक दिनचर्या (daily routine) बना लें और कोशिश करें जितनी जल्दी हो सके, बिस्तर (bed) पर चले जाएं।

एंग्जायटी डिसऑर्डर क्या है नुकसान – What is the Loss in Anxiety Disorder?

एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) से पीडित व्यक्ति (person) की पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ पर बहुत बुरा असर पडता है। इससे उसकी रोजमर्रा की दिनचर्या (daily routine) अस्त-व्यस्त हो जाती है। वह किसी भी काम पर ध्यान केंद्रित (focus) नहीं कर पाता।

ऐसे लोगों की स्मरण-शक्ति कमजोर (weak) पड जाती है और इनका दांपत्य जीवन (life) भी तनाव (stress)ग्रस्त रहता है। अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि अगर स्त्रियों (women’s) में एंग्जायटी डिसऑर्डर (Anxiety Disorder) हो तो वे जल्द ही इससे बाहर निकल आती हैं, लेकिन पुरुषों में यह समस्या (problem) गंभीर (serious)  रूप धारण कर लेती है, क्योंकि उनका अहं समस्या (problem) को आसानी से स्वीकार नहीं पाता।

इसलिए वे उसका हल ढूंढने की कोशिश भी नहीं करते। अगर लंबे समय तक समस्या (problem)  हो तो वह डिप्रेशन का रूप ले सकती है। ज्यादा गंभीर (serious) स्थिति होने पर व्यक्ति (person) में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ जाती है।

प्रमुख लक्षण (symptoms)

-शारीरिक दुर्बलता

-याद्दाश्त में कमी

-लगातार चिंतित (tension) रहना

-एकाग्रता में कमी आना (lack of focus), आंख के आगे तैरते हुए बिंदु दिखाई देना

-घबराहट, डर (fear) और बेचैनी

-नकारात्मक विचारों पर काबू (control) न होना व डरावने सपने दिखना

-अनिद्रा (insomnia)

-शरीर के तापमान में असंतुलन (imbalance), कभी हाथ-पैरों का ठंडा पड जाना तो कभी बुखार (fever) जैसा महसूस होना

-दिल की धडकन (heart beat) तेज होना

-मांसपेशियों में तनाव (stress) होना

-पेट में दर्द (stomach ache)

एंग्जाइटी डिसआर्डर की रोकथाम – How To Stop Anxiety Disorder

जीवन शैली में बदलाव: Change in Lifestyle

एंग्जाइटी (anxiety)से निजात पाने के लिए अस्त-व्यस्त जीवन शैली (lifestyle) को सुधारना बेहद जरूरी है। नियमित (regular) समय पर खाएं और सोने तथा उठने का भी एक निश्चित समय (time) बनाएं। नींद (sleep) की कमी से मस्तिष्क अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। अनिद्रा (insomnia) से एंग्जाइटी और अवसाद जैसे रोगों का खतरा (danger) बढ़ जाता है।

साइकोथेरेपी: Psychotherapy

साइकोथेरेपी का उपयोग मानसिक रोगों (mental diseases) या भावनात्मक आघातों के लिए किया जाता है। मरीज (patient) से विस्तार से बात कर मानसिक अवस्था का अध्ययन (research) किया जाता है। इससे रोगी को परिस्थितियों (situations) से तालमेल बिठाने व मस्तिष्क को शांत करने में मदद (help) मिलती है।

40 Motivational Quotes For Students in Hindi | स्टूडेंट्स के लिए 40 शक्तिशाली कोट्स

26 Motivational Story In Hindi

सामाजिक बनें – Be Social

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी (social animal) है। अच्छे खुशहाल रिश्ते मनुष्य की सेहत (health of person) के लिए बहुत जरूरी हैं। हाल ही में किए एक शोध (research) में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों का सामाजिक जीवन (life) जितना सक्रिय होता है, उतनी ही उनके मानसिक रोगों (mental diseases) के चपेट में आने की आशंका कम होती है।

मन पर लगाएं लगाम – Control your Thoughts

अपने लिए समय (time) निकालना सीखें। हर बात में न उलझते हुए, जो काम (work) कर रहे हैं, उसे मन (mind) लगा कर करें। अपनी अपेक्षाओं को कम (less) करें। अपनी क्षमताओं का आकलन करके व्यावहारिक लक्ष्य (target) बनाएं। कामों की प्राथमिकता तय करें। एक साथ कई काम करने से (avoid) बचें। दिनभर में 15 मिनट का समय अपने लिए जरूर निकालें आत्मविश्लेषण करें।

– रिश्तों को एंज्वॉय (enjoy) करें।

-नियमित दिनचर्या अपनाएं क्योंकि नींद (sleep) की कमी से मस्तिष्क पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाता। अनिद्रा से एंग्जायटी और डिप्रेशन (depression) का खतरा बढ जाता है।

-शरीर की तरह मस्तिष्क (brain) को भी पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। इसलिए अपने भोजन (food) में फलों और हरी सब्जियों को प्रमुखता (major) से शामिल करना चाहिए।

-नियमित एक्सरसाइज और योगाभ्यास करें। इस समस्या (problem) से बचने के लिए ध्यान भी फायदेमंद होता है। इससे सेरिब्रल कोरटेक्स को मजबूती (strength) मिलती है, मस्तिष्क का यही हिस्सा स्मरण-शक्ति, एकाग्रता और तर्क शक्ति (argument power) के लिए जिम्मेदार होता है।

-अगर जीवन (life) में कभी कोई मुश्किल (difficult) आए तब भी आत्मविश्वास बनाए रखें।

-लोगों के साथ दोस्ती बढाएं (increase friendship) और खुलकर अपनी भावनाएं शेयर करें।

-अपनी क्षमताओं का आकलन करके व्यावहारिक लक्ष्य (target) बनाएं। कार्यो की प्राथमिकता तय करें। एक साथ कई काम (multi tasking) करने से बचें।

-अगर कभी किसी बात को लेकर एंग्जायटी (anxiety) हो तो उसका सामना करने की आदत डालें। उससे बचने की कोशिश कभी न करें, क्योंकि व्यक्ति (person) ऐसी मनोदशा से जितना अधिक बचने की कोशिश (try) करता है, समस्या (problem) उतनी ही तेजी से बढती जाती है।

-ऐसी समस्या (problem) ओं को छोटे-छोटे टुकडों में बांट कर हल करने की कोशिश (Try) करें। एक ही दिन में इनका समाधान संभव नहीं है। इसलिए धैर्य (patience) के साथ प्रयास करें।

-नियमित रूप से एंग्जायटी डायरी मेंटेन (maintain anxiety diary) करना भी फायदेमंद साबित होगा। रोजाना रात को सोने (sleep) से पहले अपनी डायरी में विस्तृत रूप से लिखें कि आज दिन भर (daily diary) में आपको किस चिंता या भय ने सबसे ज्यादा परेशान (problem) किया और उसे दूर करने के लिए आपकी ओर से क्या कोशिश की गई।

-मन (mind) को तार्किक ढंग से समझाने की कोशिश करें कि यह आशंका (possibility) निराधार है।

-एंग्जायटी (anxiety) दूर करने के लिए अपने मन (mind) से कोई दवा न लें।

-कैफीन और एल्कोहॉल (alcohol) से दूर रहें, क्योंकि ऐसी चीजों के सेवन से एंग्जायटी (anxiety) बढती है।

-इन प्रयासों के बाद भी अगर मनोदशा में कोई सुधार (improvement) न आए तो किसी मनोवैज्ञानिक सलाहकार से संपर्क (contact) करना चाहिए।

ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर है? छोड़ दें ये आदतें – Leave These Habits If You Are Suffering from Anxiety

अगर आप ऐंग्जाइटी डिसऑर्डर (anxiety disorder) से ग्रस्त हैं तो ये आदतें जितनी जल्दी हो सके, बदल लीजिए। ये आदतें आपके डिसऑर्डर (anxiety disorder) को बुरी तरह से बढ़ाने का काम कर रही हैं।

अनियमित खान-पान: irregular Eating habit

सुबह का नाश्ता छोड़ देना या दिन-दिनभर कुछ नहीं खाना या लगभग (almost) रोज रात को ही बिना कुछ खाए सो जाना या कुछ जंक फूड (junk food) खाकर सो जाना। यह ऐसी आदत (habit) है जो आपके शरीर के साथ-साथ आपके ब्रेन (brain) को भी कमजोर करती है। भूखे रहकर आप अपना स्ट्रेस लेवल (stress level) बढ़ा रहे हैं।

केवल संतुलित खान-पान (balanced diet) से ही ऐंग्जाइटी से सम्बन्धित कई समस्या (problem) हल हो सकती हैं। ज्यादा देर तक भूखे रहने पर आपका ब्लड शुगर लेवल (blood sugar level) गिर जाता है और इस वजह से आपकी ऐंग्जाइटी की समस्या (problem)  और बढ़ जाती है।

बहुत ज्यादा कॉफी: Drink Excess Coffee

कैफीन आपकी हार्टबीट (heartbeat) बढ़ाकर आपको नर्वस महसूस करा सकती है। जो लोग पहले से ही ऐंग्जाइटी (anxiety) के शिकार हैं, उनके लिए तो कॉफी समस्या (problem) को और बढ़ाने का ही काम करती है। हथेलियों में पसीना आना, कान बजना और बहुत तेज दिल धड़कना (heartbeat), बहुत ज्यादा कॉफी पीने से आपको ये समस्या (problem) एं हो सकती हैं।

देर रात तक जागना: Sleeping Late Night

ऐंग्जाइटी से(anxiety)  ग्रस्त कई लोग देर रात तक सोते नहीं हैं, और तनाव (stress) को अपने ऊपर और हावी होने देते हैं, और यह बढ़ता हुआ तनाव (stress) उनकी बची-खुची नींद (sleep)  भी ले उड़ता है। फिर यह तनाव (stress) दिन में भी आपकी पीछा नहीं छोड़ता।

इसलिए देर रात (late night) तक खुद को न जगाएं। एक दिनचर्या बना लें और कोशिश करें जितनी जल्दी हो सके, बिस्तर (bed) पर चले जाएं। कहते हैं कि रात 10 बजे से सुबह 4 बजे का समय सोने के लिए परफेक्ट होता है।

शुरू में कुछ दिन आपको बिस्तर पर लेटे-लेटे भी नींद (sleep)  नहीं आएगी, लेकिन धीरे-धीरे जब आपकी शेड्यूल बन जाएगा, तब नींद (sleep)  आने लगेगी।

रामायण से जुडी 15 रहस्यमयी बाते जिन्हें दुनिया अभी भी नहीं जानती

अकबर बीरबल के 5 मजेदार किस्से

तन्हाई: Lonely

ऐंग्जाइटी (anxiety) के चलते लोग खुद को बाकी दुनिया (world) से काट लेते हैं और ज्यादातर अकेले रहना ही पसंद करने लगते हैं। अकेले (living alone) रहकर वे बस उन्हीं बातों के बारे में सोचते रहते हैं, जो उन्हें परेशान (problem) करने वाली होती हैं।

इसलिए खुद को अकेला मत (avoid being alone) होने दीजिए। दोस्तों से बात करिए, नए दोस्त बनाइए, उनसे बात करिए, फिर भले ही ये बातें अपनी ऐंग्जाइटी (anxiety) के बारे में ही क्यों न हो। जो मन (mind) में है, बस निकाल दीजिए। आपकी लाइफ (life) में जितने करीबी रिश्ते होंगे, ऐंग्जाइटी आपसे उतना ही दूर भागेगी।

व्यायाम करना: Not Doing Exercise

जब हम व्यायाम (exercise) करते हैं तो हमारा शरीर फील-गुड केमिकल्स रिलीज (release) करता है, जिनसे हमारा ब्रेन और शरीर बेहतर महसूस (feeling better) करने लगता है। और जब हम अच्छा फील करेंगे तो ऐंग्जाइटी (anxiety) तो दूर ही रहेगी न!

ऐंग्जाइटी को इग्नोर किया जाए तो यह विकराल रूप (big thing) ले सकता है। यह वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति (person) को हर वक्त इस बात का डर (fear) लगा रहता है कि कुछ गलत होने वाला है। यह पैनिक अटैक (panic attack) से एकदम अलग होता है।

पैनिक अटैक के लक्षण (symptoms) ऐंग्जाइटी अटैक की तुलना में ज्यादा घातक होते हैं। ऐंग्जाइटी अटैक में व्यक्ति (person) को हर समय चिंता, डर (fear) और बेचैनी महसूस होती है। दिल की धड़कन तेज (heart beat) हो जाती है और सांस फूलने लगती है। इसलिए ऐंग्जाइटी को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क (contact doctor) करें।

मनोवैज्ञानिक से मिलें – Consult Psychologist

– हमारे देश में मानसिक रोगों (mental patients) के प्रति जागरूकता का अभाव है। 90% रोगी तो उपचार के लिए कभी अस्पताल (hospital) भी नहीं जाते। यदि एंग्जाइटी की समस्या (problem) से लंबे समय से जूझ रहे हैं तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक (psychologist) से मिलने से परहेज न करें।

– दवाओं से किसी मानसिक रोग (mental disease) के उपचार को फार्मेकोथेरेपी कहते हैं। एंग्जाइटी डिसऑर्डर (anxiety disorder) के उपचार के लिये बाजार में कईं प्रभावकारी दवाएं (medicine) उपलब्ध हैं। कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह (without consult) के नहीं लेनी चाहिए।

दोस्तों, आप यह Article Prernadayak पर पढ़ रहे है. कृपया पसंद आने पर Share, Like and Comment अवश्य करे, धन्यवाद!!

Private Job Kaise Paye

यूके में नौकरी कैसे पाए

https://prernadayak.com/%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%88%e0%a4%95-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%a1%e0%a5%87-black-friday-facts/

9xRockers 2020 – Download Bollywood, Hollywood, Telugu, Punjabi, Kannada, Tamil Hindi Movies

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *