झूठ फरेब का महल - हिंदी कहानी
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झूठ फरेब का महल – हिंदी कहानी

झूठ फरेब का महलहिंदी कहानी

एक राजा ने अपने राज्य के सबसे कुशल कारीगर से कहा- “तुम मेरे लिए एक बहुत सुन्दर महल बनाओ। धन की कमी नहीं है। तुम जितना माँगोगे, उतना मिलेगा। (झूठ फरेब का महल – हिंदी कहानी)

कारीगर महल बनाने में जुट गया। काम करते-करते उसके मन में एक बुरा विचार उठा क्यों न रद्दी, घटिया किस्म का सामान लगा कर ऊपर से महल को सुन्दर बना दूं। और, यही किया उसने।

अन्दर से भुसभुसी दीवारे खड़ी होती गयीं, ऊपर से सीमेंट का मुलम्मा चढ़ता गया। अन्दर से खोखला, परन्तु ऊपर से सोने की चमक-दमक वाला, महल जिस दिन तैयार हुआ, कारीगर राजा की सेवा में उपस्थित हुआ और बोला- “महाराज, महल तैयार है।”

राजा महल का निरीक्षण करने के लिए आये। महल वास्तव में बहुत सुन्दर दिखायी पड़ रहा था। उन्होंने कारीगर की भूरि-भूरि प्रशंसा की। बाल- में बहुत प्रसन्न हँ। तम्हें क्या पुरस्कार दूँ, यही सोच रहा हू मैं फिर थोड़ी देर बाद वह बोले-“अच्छा लो, यही महल में पुरस्कार में देता हूँ।” ‘राजा चले गये। कारीगर मुँह छिपा कर रोने लगा।

क्यों रोया कारीगर? वह खोखला-पोला महल उसी के पास गया। जो दुसरो के लिए गड़ा खोदता है, उसी को पहले उस गढ़े में पैर रखना पड़ता है। जो झूठ-फरेब का महल खड़ा करता है, उसी में हिस्से में वह पड़ता है।

बच्चो, कभी मन में गलत काम करने की बात उठे, तो कारीगर की इस कहानी को याद कर लेना।

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