नवदुर्गा से जुड़े तथ्य | नवरात्रि से जुड़े तथ्य | नवरात्र के दिन कौन सा रंग शुभ | नवरात्रि का खान पान
त्यौहार | Festivals

नवदुर्गा से जुड़े तथ्य | नवरात्रि से जुड़े तथ्य | नवरात्र के दिन कौन सा रंग शुभ | नवरात्रि का खान पान

नवदुर्गा से जुड़े तथ्य | नवरात्रि से जुड़े तथ्य | नवरात्र के दिन कौन सा रंग शुभ | नवरात्रि का खान पान

नवरात्रि (navratri) का महत्व तो सभी जानते हैं. हिंदू धर्म में दुर्गा की पूजा के लिए खास ये दिन बहुत ही शुभ होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं देवी दुर्गा का जन्म कब हुआ था, उससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं और क्यों कन्या पूजा की जाती है?

नवरात्रि (navratri) यानी वो 9 दिन जब शक्ति की पूजा की जाती है जिसे देवी के रूप में मान्यता दी गई है. वो शक्ति जिसे देवताओं के महिला रूपी अवतार में देखा जाता है.

दुर्गा के जन्म से लेकर उनके युद्ध में विजय पाने तक शक्ति के अनेक रूपों के बारे में हिंदू शास्त्र बताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस नवरात्रि (navratri) में हम दुर्गा पूजा करते हैं उससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं, क्यों कन्या पूजा की जाती है, कैसे देवी का जन्म हुआ और क्यों दुर्गा की सवारी शेर है?

  1. कैसे हुआ देवी का जन्म?

देवी का जन्म सबसे पहले दुर्गा के रूप में ही माना जाता है जिसे राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए जन्म दिया गया था और यही कारण है कि उन्हें महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार देवताओं को भगा कर महिषासुर ने स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था तब सभी देवता मिलकर त्रिमूर्ती के पास गए थे. ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपने शरीर की ऊर्जा से एक आकृति बनाई और सभी देवताओं ने अपनी शक्तियां उस आकृति में डाली. इसीलिए दुर्गा को शक्ति भी कहा जाता है. दुर्गा की छवि बेहद सौम्य और आकर्षक थी और उनके कई हाथ थे.

क्योंकि सभी देवताओं ने मिलकर उन्हें शक्ति दी इसलिए वो सबसे ताकतवर भगवान मानी जाती हैं. उन्हें शिव का त्रिशूल मिला, विष्णु का चक्र, बह्मा का कमल, वायु देव से उन्हें नाक मिली, हिमावंत (पर्वतों के देवता) से कपड़े, धनुष और शेर मिला और ऐसे एक-एक कर शक्तियों से वो दुर्गा बनी और युद्ध के लिए तैयार हुईं.

दुर्गा की शक्तियों के बारे में रिगवेद के श्लोक 10.125.1 से लेकर 10.125.8 तक देवी सूक्त: में पढ़ा जा सकता है.

  1. आखिर पूजा 9 दिन ही क्यों की जाती है?

जब दुर्गा या देवी ने महिषासुर पर हमला किया और एक-एक कर दैत्यों को मारना शुरू किया तब भैंसे का रूप धारण करने वाले महिषासुर को मारने के लिए उन्हें 9 दिन लगे.

इसलिए नवरात्रि (navratri) को 9 दिन मनाया जाता है. इससे जुड़ी अन्य कथाएं भी हैं जैसे नवरात्रि को दुर्गा के 9 रूपों से जोड़कर देखा जाता है और कहते हैं कि हर दिन युद्ध में देवी ने अलग रूप लिया था और इसलिए 9 दिन 9 अलग-अलग देवियों की पूजा की जाती है. हर दिन को अलग रंग से जोड़कर भी देखा जाता है.

नवरात्रि, दुर्गा पूजा, हिंदू, धर्म, पुराणदुर्गा पूजा में दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है

  1. क्यों है अष्ट भुजाओं वाली?

देवी दुर्गा को अष्ट भुजाओं वाली कहा जाता है. कुछ शास्त्रों में 10 भुजाओं वाला भी कहा जाता है. वास्तु शास्त्र में 8 अहम दिशाएं होती हैं, लेकिन कई जगहों पर 10 कोण या दिशाओं की बात की जाती है.

इनमें हैं प्राची (पूर्व), प्रतीची (पश्चिम), उदीची (उत्तर), अवाचि (दक्षिण), ईशान (नॉर्थ ईस्ट), अग्निया (साउथ ईस्ट), नैऋत्य (साउथ वेस्ट), वायु (नॉर्थ वेस्ट), ऊर्ध्व (आकाश की ओर), अधरस्त (पाताल की ओर). कई जगह 8 दिशाएं ही मानी जाती हैं क्योंकि आकाश और पाताल की ओर को दिशा का दर्जा नहीं दिया जाता.

हिंदू शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना गया है कि देवी दुर्गा हर दिशा से अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और यही कारण है कि उनकी 8 भुजाएं हैं जो आठों दिशाओं में काम करती हैं.

  1. शेर की सवारी ही क्यों?

देवी को शेर पर सवार बताया जाता है. दुर्गा का वाहन शेर है और इसे अतुल्य शक्ति से जोड़कर देखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि शेर पर सवार होकर दुर्गा मां दुख और बुराई का अंत करती हैं.

  1. दुर्गा को त्रयंबके क्यों कहा जाता है?

दुर्गा को त्रयंबके कहा जाता है यानी तीन आखों वाली. शिव भी त्रिनेत्र कहलाएं हैं जिनकी तीन आखें थी. Durga को शिव का ही आधा रूप माना जाता है जिसे शक्ति भी कहा जाता है. दुर्गा की तीन आखें अग्नि, सूर्य और चंद्र का प्रतीक मानी जाती हैं.

  1. दुर्गा की पूजा के लिए 108 मंत्रों का जाप क्यों होता है?

नवरात्रि (navratri) को दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि भगवान राम ने मां दुर्गा की पूजा की थी जिन्हें राम ने महिषासुर मर्दिनी के नाम से ही संबोधित किया था.

ये पूजा रावण से युद्ध करने के पूर्व की गई थी और इसीलिए दशहरा नवरात्रि (navratri) के अंत में मनाया जाता है जिस दिन रावण का वध हुआ था. माना जाता है कि राम जी ने दुर्गा पूजा के वक्त 108 नीलकमल चढ़ाए थे दुर्गा को और इसलिए ही 108 को शुभ माना जाता है.

  1. पितृपक्ष के अंत में नवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

पितृपक्ष में पितृों की पूजा के बाद ऐसा माना जाता है कि घर की शुद्धी होती है और उसके बाद आता है देवी पक्ष यानी नवरात्रि (navratri) और इसके बाद से हर तरह के त्योहारों की शुरुआत होती है. ऐसा माना जाता है कि देवी पक्ष के पहले दिन मां दुर्गा अपने बच्चों के साथ पृथ्वी की ओर यात्रा करना शुरू करती हैं.

  1. क्यों ली जाती है तवायफ के घर की मिट्टी?

इस प्रथा से जुड़ी मान्यता ये है कि तवायफ के घर जाने से पहले एक पुरुष अपनी सारी अच्छाइयां और पवित्रता उसके आंगन में छोड़कर ही अंदर जाता है. और यही कारण है कि तवायफ के आंगन की मिट्टी बहुत पवित्र हो जाती है. इसी मिट्टी को मिलाकर दुर्गा की मूर्ति बनती है.

  1. कन्या पूजन या कुमारी पूजन क्यों होता है?

कन्याओं को देवी का रूप माना जाता है और उन्हें सबसे पवित्र माना जाता है जब तक उनकी महावारी शुरू नहीं होती. क्योंकि नवरात्रि (navratri) को देवी यानी महिला रूप को पूजने के लिए मनाई जाती है इसीलिए इसे छोटी कन्याओं को इससे जोड़ा जाता है.

असल में ये पूजा स्वामी विवेकानंद ने 1901 में बेलुर मठ में शुरू की थी. इसे दुर्गा की शक्ति से जोड़कर भी देखा जाता है.

नवरात्रि त्योहार के बारे में दिलचस्प तथ्यों – Navratri Hinduism Facts

सबसे शुभ हिंदू त्योहार में से एक नवरात्रि है और यह ‘दुर्गा मा’ की पूजा के लिए समर्पित है। अभिवादन पवित्र नवरात्रि (navratri) त्योहार के बारे में दिलचस्प तथ्यों का एक बड़ा संग्रह :-

1- “नवरात्रि” – यह शब्द दो शब्दों का एक संयोजन है – नावा (नौ अर्थ) और रत्ती (अर्थ रात)। नौ रात और नौ दिनों के लिए मनाया जाता है।

2- आसादा सीजन (यानी जुलाई-अगस्त के महीने) के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य में शदा नवरात्रि मनाया जाता है।

3- शरद नवरात्रि,  नवरात्रि (navratri) उत्सवों में सबसे महत्वपूर्ण है। यह सर्दियों के प्रारंभ में मनाया जाता है अर्थात शरद ऋतु (सितंबर / अक्टूबर का महीना), और देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध करने के जश्न में मनाया जाता है

4- नवरात्रि (navratri) की तारीख चंद्र कैलेंडर के अनुसार निर्धारित की जाती है। ग्रीष्मकाल की शुरूआत और सर्दियों की शुरुआत में पर्यवेक्षक|

5- शरद नवरात्रि (navratri) का दसवें दिन, जो विजयादशमी है, को दसहे पर्व के रूप में मनाया जाता है।

6- वसंत नवरात्रि ग्रीष्मकाल की शुरूआत यानी वसंत का मौसम (मार्च / अप्रैल के महीने) के दौरान मनाया जाता है, और उत्तर भारत में मनाया जाता है।

7- भारत में मनाए जाने वाले तीन मुख्य नवरात्र हैं: शरद नवरात्री, वसंत नवरात्री और आश्र्दा नवरात्रि

8- नौ दिनों में से प्रत्येक देवी शक्ति के 9 रूपों में से एक: दुर्गा, भद्रकाली, जगदम्बा, अन्नपूर्णा, सर्वमंगल, भैरवी, चंदिका, ललिता, भवानी और मुकाम्बिका का प्रतीक है।

9- नवरात्रि (navratri) या दुर्गा पूजा प्रत्येक वर्ष नौ दिन के लिए दो बार मनाई जाती है।

नवरात्रि से जुड़े कुछ अनोखे तथ्य

इस आर्टिकल में आप पढ़ेंगे नवरात्रि (navratri) की शुरुआत और इस साल नवरात्रि (navratri) कब से कब तक मनाया जाएगा एवं नवरात्रि (navratri) कर आप अपनी इच्छा के अनुसार फल पा सकते हैं.

नवरात्रि (navratri) की शुरुआत मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने की श्री राम माता सीता को लाने जा रहे थे तब युद्ध में विजय हेतु भगवान राम ने मां दुर्गा की पूजा अर्चना 9 दिन तक की थी. और दक्षिणी दिन रावण का वध लंका में किया तब से दुर्गा पूजा यानि नवरात्रि पूजन प्रचलन में आया. विजयदशमी को विजय पर्व भी कहा जाता है.

Navratri की शुरुआत 21 सितंबर और 29 सितंबर को नवमी और 30 सितंबर को विजयदशमी पूरे भारत में जोर शोर से मनाया जाएगा.

नवरात्रि (navratri) में मां दुर्गा के सभी रूपों की मां अपने भक्तों को मनचाहा फल देती है. मां दुर्गा अपने भक्तों के घर का सुख शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती है एवं भक्तों की सारी मुरादें पूरी करती है. मां दुर्गा शक्ति की प्रतीक भी है.

नवरात्रि (navratri) के 9 दिनों में माता के नौ रूपों की आराधना की जाती है.

9 दिनों में माता के नौ स्वरुप में से सबसे पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है जो एक वृषभ पर सवार होती है पहाड़ों की पुत्री भी कहा जाता है

दूसरे दिन माता के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है जिनके एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में रुद्राक्ष की माला होती है

माता का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है जो चांद की तरह चमक प्रदान करने वाला होता है

Mata के चतुर्थ स्वरुप में कुष्मांडा माता की पूजा की जाती है कहा जाता है इनके पैरों के नीचे सारा जगत विद्यमान है

माता के पंचम स्वरुप में स्कंदमाता की पूजा की जाती है जो भगवान कार्तिकेय की माता भी कहलाती हैं

छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा की जाती है , कहां जाता है संत कता ने घोर तपस्या करने के बाद मां दुर्गा के आशीर्वाद के रूप में अपने संतान के रूप में पुत्री प्राप्त की. और उस पुत्री का नाम कात्यानी रखा.

सातवें दिन माता के विकराल रात्रि की पूजा की जाती है. भक्तों के हर प्रकार के कष्टों को हर कर कर उनसे दूर करती है. कालरात्रि की पूजा करने से आपके ऊपर आए हुए संकट से मिलती है. कई स्थानों पर इस दिन काली पूजा का दिवस भी मनाया जाता है.

आठवें दिन मां दुर्गा के अष्टम रूप मां महागौरी का पूजा किया जाता है और कहा जाता है कि महागौरी की आराधना करने से वर्तमान भूत और भविष्य के पाप धुल जाते हैं और जीवन खुशियों से भर जाता है.

नवमी के दिन मां के नौवे रूप की पूजा आराधना की जाती है मां सिद्धि दात्री जो मां का ज्ञानी रूप है. वेद पुराणों में कहा गया है देवी पुराण में भगवान शिव को कई महाशक्ति की पूजन करने से प्राप्त हुई थी. यानी कि देवों के देव महादेव भी इनकी पूजा अर्चना करते हैं. तो हम मानव को पूजा करने से अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं.

नवरात्रि (navratri) का पूजन पूरे भारत के साथ-साथ जहां पर भारतीय रहते हैं वहां पर भी श्री का पूजन जोर शोर से किया जाता है. नवरात्रि की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति का घर में वास होता है.

नवरात्रि (navratri) के दिन कई क्षेत्र में मेला का भी आयोजन किया जाता है. और लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं..

नवरात्र के दिन कौन सा शुभ रंग का उपयोग करें

नवरात्री, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘नौ रातों’ का संस्कृत में अर्थ है, ‘नवा’ जिसका मतलब नौ और ‘रत्ती’ अर्थ रातों, हिंदू कैलेंडर के अनुसार अनुसूचित नौ दिनों में देवी दुर्गा का अपने 9 रूपों में मनाया जाता है।

नवरात्रि (navratri) देवी दुर्गा के सम्मान में मनाया जाने वाला एक बहु-दिवसीय उत्सव है। नौ शुभ रातों में इस त्यौहार के दौरान, लोग उपवास रखते हुए मनाते हैं, दंडिया रातों और गरबा को पकड़ते हैं। इस लेख में, आप रंगों के रंगों के बारे में जानेंगे, प्रत्येक शुभ दिन के विषय के साथ जाना होगा। नवरात्र के दिन कौन सा शुभ रंग का उपयोग करें तोह आइये पढ़े

नवरात्रि दिवस 1 का रंग – पीला Yellow

रंग जो ऊर्जा और खुशी का प्रतिनिधित्व करता है, वर्ष 2017 के लिए नवरात्रि शुरू करने के लिए एक उपयुक्त रंग है।

नवरात्रि दिवस 2 का रंग – ग्रीन Green

Navratri के दूसरे दिन, आइए हम रंगीन ग्रीन के हल्के और गहरे रंगों के साथ पारिस्थितिकी-मित्रता की भावना का जश्न मनाते हैं। अपने सभी रंगों में ग्रीन सुखदायक, सामंजस्य और उर्वरता जैसा दिखता है और इसलिए इसे प्रकृति का रंग कहा जाता है।

नवरात्रि दिवस का रंग 3 – ग्रे Grey

इस रंग के साथ, आप सामान, जूते इत्यादि को संतुलित कर सकते हैं जैसे कि गहरे रंग के काले रंग के साथ सबसे अच्छा लग रहा है।

दिन 4 का नवरात्र रंग – ऑरेंज Orange

रंग जो ऊर्जा का उत्सर्जन करता है और भावनाओं से भी जुड़ा होता है, नवरात्रि (navratri) का 4 दिन इस उज्ज्वल छाया के साथ मनाया जा सकता है। ऑरेंज का रंग भी रचनात्मकता और उत्साह का प्रतिनिधित्व करता है

दिन 5 का नवरात्र रंग – सफेद White

रंग, जो पूर्णता, पवित्रता और शांति का प्रतीक है, नवरात्रि के लिए एकदम सही है। कार्यस्थल पर सफेद संगठन बहुत अच्छी तरह से करते हैं दिन 5 पर एक सफेद रंग की पोशाक या साड़ी पहनना, निश्चित रूप से आपकी ऊर्जा को बढ़ावा देगा और आपका दिन सुखदायक होगा

नवरात्रि दिवस 6 का रंग – लाल Red

भारत में किसी भी हिंदू त्योहार के लिए एक आदर्श रंग विषय है जो शक्ति और चमक का प्रतीक है। तो नवरात्रि (navratri) के दिन 6 पर, एक सुशोभित व्यक्ति पर सुंदर लाल रंग का रंग भरने के लिए सभी आंखों को पकड़ो।

दिन 7 का नवरात्रि रंग – रॉयल ब्लू Royal Blue

एक शाही ब्लू रंग संगठन आपको अच्छा महसूस करता है। कॉलेजों में युवाओं के बीच आकस्मिक पहनने का आम रंग होने के अलावा, लोग भी उत्सव के दिनों में इस रंग को पहनते हैं।

नवरात्रि दिन का रंग 8 – गुलाबी Pink

यदि आप गुलाबी रंग के शौकीन हैं, तो अपने आप को इस चंचल, मिठाई और सुंदर रंग से नवरात्रि के साथ खिलें। सभी माताओं के लिए विशेष रूप से, यह एक दिन है कि शिशुओं / बच्चों के साथ मिलान करने वाले संगठनों के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें।

नवरात्रि दिन 9 का रंग – बैंगनी Purple

लक्जरी और शक्ति का प्रतीक है जो रंग के साथ नवरात्र का अंतिम दिन बैंगनी नवरात्रि के नौवें दिन के लिए सही चुनौती होगी।

रख रहे हैं नवरात्रि का व्रत तो सेहत की करें अनदेखी

व्रत का भले ही धार्मिक महत्व होता है, लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक तथ्य भी होता है। व्रत रखने से व्यक्ति को रोजमर्रा के भोजन से ब्रेक मिलता है और वह खुद को संयमित करने के साथ−साथ अपने शरीर की भीतर से सफाई भी करता है। लेकिन आजकल लोग व्रत के दिनों अपेक्षाकृत ज्यादा तला−भुना व हैवी खाते हैं।

नवरात्रि (navratri) आते ही हर किसी के मन में एक उत्साह व उमंग की लहर दौड़ जाती है। इन नौ दिनों में लोग पूरी भक्तिभाव से माता की अर्चना व पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं।

लेकिन इन नौ दिनों के दौरान जिस चीज की सबसे अधिक अनदेखी की जाती है, वह है सेहत। अब जब गर्मी बढ़ने लगी है तो ऐसे में अगर नवरात्रि (navratri) व्रत के दौरान बहुत अधिक हैवी या तला−भुना जैसे पूरी आदि खाई जाए तो इससे सेहत पर विपरीत असर पड़ता है। चलिए आज हम आपको बताते हैं नवरात्रि (navratri) व्रत में हेल्दी और एक्टिव रहने का तरीका−

सात्विक आहार

व्रत का भले ही धार्मिक महत्व होता है, लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक तथ्य भी होता है। व्रत रखने से व्यक्ति को रोजमर्रा के भोजन से ब्रेक मिलता है और वह खुद को संयमित करने के साथ−साथ अपने शरीर की भीतर से सफाई भी करता है।

लेकिन आजकल लोग व्रत के दिनों अपेक्षाकृत ज्यादा तला−भुना व हैवी खाते हैं। ऐसा बिल्कुल भी न करें, खासतौर से गर्मी के मौसम में तो बिल्कुल भी नहीं। जहां तक संभव हो, सात्विक आहार का सेवन करें। व्रत के दिनों में पूरी, परांठे, टिक्की, नमकीन या आलू को तलकर चाट आदि खाने की बजाय फलों, सब्जियों व दूध को प्राथमिकता दें। इससे आपको हल्कापन व एनर्जेिटक तो महसूस होगा ही, साथ ही इससे बॉडी डिटॉक्सीफाई भी होगी।

ठंडी चीजों को प्राथमिकता

चूंकि अब गर्मी बढ़ने लगी है, इसलिए शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप ऐसी चीजों को प्राथमिकता दें, जो शरीर को ठंडक प्रदान करती हों। मसलन, व्रत में चाय या कॉफी पीने के स्थान पर दही खाएं। आप इसमें फल मिलाकर भी खा सकते हैं। इसी तरह, नवरात्रि (navratri) व्रत में नारियल पानी पीना भी अच्छा विचार हो सकता है।

ताकि मिलती रहे एनर्जी

जो लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते है, उन्हें अपने शरीर में काफी लो फील होता है। ऐसे में उनका काम में भी मन नहीं लगता। लेकिन अगर आप शरीर में एनर्जी का स्तर बनाए रखना चाहते हैं तो पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लें। जैसे आप व्रत के दौरान पनीर, दही या छाछ पीकर प्रोटीन की कमी को दूर कर सकते हैं। वहीं हल्की भूख लगने पर केले, संतरा, सेब या कुछ नट्स जैसे बादाम, पिस्ता व अखरोट खाए जा सकते हैं, इससे भूख तो शांत होती है ही, साथ ही शरीर में उर्जा का स्तर भी बना रहता है।

होने दें पानी की कमी

गर्मी के मौसम में शरीर को पानी की अधिक आवश्यकता होती है। वैसे कुछ लोग व्रत के दौरान सिरदर्द आदि की शिकायत करते हैं, इसके पीछे का मुख्य कारण पानी की कमी होता है। इसलिए अगर आप व्रत के दौरान बाहर जा रहे हैं या आपका काम फील्ड का है तो अपने साथ पानी की बोतल कैरी करें। वहीं ऑफिस में काम करने वाले लोग अपनी टेबल पर पानी की बोतल रखे और थोड़ी−थोड़ी देर में पानी अवश्य पीते रहें। वैसे आप पानी के अतिरिक्त ताजा फलों का रस या सब्जियों का सूप बनाकर पी सकते हैं।

जरूरी है आराम

व्रत के दौरान काम का अत्यधिक बोझ अपने सिर पर न लें और न ही काम के दौरान बहुत अधिक देर तक भूखे रहें। अगर आप लंबे समय तक काम करने वाले हैं तो बीच−बीच में कुछ हेल्दी अवश्य खाएं। इसके अतिरिक्त व्रत के दौरान पूरी नींद लें ताकि आपको खुद को फ्रेश व एक्टिव महसूस करें। साथ ही हल्का व्यायाम, योगा व मेडिटेशन भी अवश्य करें।

दोस्तों, आप यह Article Prernadayak पर पढ़ रहे है. कृपया पसंद आने पर Share, Like and Comment अवश्य करे, धन्यवाद!!

26 Motivational Story In Hindi

https://prernadayak.com/10-life-changing-quotes-hindi-%e0%a4%9c%e0%a4%bc%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *