प्रेम – Hindi Kahani
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प्रेम – Hindi Kahani

प्रेम – Hindi Kahani

एक आदमी सड़क पर जा रहा था। रास्ते में एक भिखारी ने हाथ फैला कर कहा-“बाबू, कुछ मिल जाये।” (प्रेम)

उस आदमी ने अपना हाथ जेब में डाला, परन्तु वह अपना बटुआ तो घर पर ही भूल आया था। अब वह क्या दे? उसने कुछ देर तक सोचा: फिर आगे बढ़ कर भिखारी के फैले हुए हाथ को अपने हाथों में ले लिया और बड़े प्यार से बोला- “बाबा! बटुआ तो मैं घर पर भल आया। जेब में कुछ भी नहीं है। तुम्हें क्या दूँ?”

उस भिखारी की उदास आँखें खुशी से चमक उठी। बोला- “बाबू! तुमने इतना-कुछ दिया; कहते हो, तुम्हें क्या दूँ?” ।

वह आदमी उस भिखारी की यह बात समझ नहीं पाया। सोचने लगा-मैंने क्या दिया इसे?

भिखारी बोला-“मेरा हाथ अपने हाथों में ले कर तुमने जो प्यार दिया, वह कितना कीमती है—यह मालूम है? इतनी कीमती भीख तो किसी ने आज तक मुझे नहीं दी। एक विनती करता हूँ-जब कभी इस रास्ते से गुजरना, तब थोड़ी देर को रुक कर मेरे इन हाथों को अपने हाथों में ले लेना। और कुछ नहीं चाहिए मुझे।”

बच्चो, यह बात महत्त्वपूर्ण नहीं है कि तुम किसी को क्या देते हो, महत्त्वपूर्ण यह है कि तुम उसे कितना प्यार देते हो। जब भी तुम्हें प्यार दिखाने का अवसर मिले, चूकना मत। चूक गये, तो चूकने की आदत पड़ जायेगी। प्यार दिखाने के लिए कुछ देना अनिवार्य है, ऐसी बात नहीं।

और कुछ न सही, किसी को प्रेम से देख तो सकते हो, किसी को धीरज तो बंधा सकते हो, किसी का हाथ तो अपने हाथों में ले सकते हो। तुम अपना प्रेम जितना बाँटोगे, तम्हारे प्रेम की सम्पदा उतनी ही बढ़ेगी।

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