मदर टेरेसा के 34 अनमोल विचार | 34 Mother Teresa Quotes In Hindi
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मदर टेरेसा के 34 अनमोल विचार | 34 Mother Teresa Quotes In Hindi

मदर टेरेसा के 34 अनमोल विचार | 34 Mother Teresa Quotes In Hindi

मदर टेरेसा (Mother Teresa) कौन थी? यह नाम सुनते ही सबसे पहले आपके जहन में यही सवाल (question) आता होगा। मदर टेरेसा (Mother Teresa) यह वो नाम हैं जिसे भारत (India) का बच्चा बच्चा जानता है।

क्योंकि स्कूलों के lessons मे मदर टेरेसा (Mother Teresa) के बारें में पढ़ाया जाता है और प्रश्नपत्रो में मदर टेरेसा (Mother Teresa) पर निबंध, मदर टेरेसा (Mother Teresa) की जीवनी, मदर टेरेसा (Mother Teresa) का जीवन परिचय, मदर टेरेसा (Mother Teresa) का योगदान के विषय में लिखने (writing) के लिए भी आता रहता है।

मदर टेरेसा (Mother Teresa) ऐसे व्यकतित्व की धनी थी, जिन्होंने दुखी और पीडित व्यक्तियों (poor peoples) की सेवा साधना में अपना सम्मपूर्ण जीवन समर्पित (dedicate) कर दिया था। जिसके लिए उन्हें विश्व का सर्वोच्च नोबेल पुरस्कार (nobel prize) , शांति और सदभावना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान (Significant contribution) के लिए प्रदान किया गया।

ममतामयी मां, गरीबों की मसीहा (god for poors), विश्व जननी और कही तो मदर मैरी (mother merry) जैसे अनेक उपनामो से पुकारी जाने वाली मदर टेरेसा (Mother Teresa) का जीवन मानव सभ्यता के इतिहास में एक ऐसा अध्याय (chapter) बनकर उभरा, जिसका उदाहरण ओर कही देखने को नहीं मिलता है।

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मदर टेरेसा का जन्म कहां हुआ था | Mother Teresa’s Birth Place

यह सच है कि मदर ने अपना सम्पूर्ण जीवन भारत (India) मे ही रहकर दीन दुखियों की सेवा करने में बिताया और वह भारतीय नागरिक (indian citizen) भी थी, किंतु वह  जन्म से ही भारत (India) की नागरिक नहीं थी।

भारत (India) की पवित्र भूमि और भारत (India) के लोगों के साथ उनके असीम प्रगाढ़ और अटूट सम्बंधों को देखकर यह अविश्वसनीय (unbelievable) लग सकता है, किंतु यह सच है कि उनका जन्म भारत (India) से हजारों मील दुर एडियाट्रिक सागर के पार स्थित यूगोस्लाविया के स्कोपजे शहर (city) में हुआ था। मदर टेरेसा (Mother Teresa) का जन्म 27 अगस्त 1910 को एक अल्बेनियाई परिवार में हुआ था।।

मदर टेरेसा का पूरा नाम क्या था | What is the full name of Mother Teresa

मदर टेरेसा (Mother Teresa) का बचपन से नाम “एग्नेस गौंझा बोनास्क्यू” था। बचपन (child age) की यह एग्नेस आगे चलकर “टेरेसा” और फिर मदर टेरेसा (Mother Teresa),  ममतामयी मां, गरीबों की मसीहा, विश्व जननी, मदर मैरी, संत (Saint) आदि अनगिनत नामों से जानी जाती है।

मदर टेरेसा के माता पिता | Parents of Mother Teresa

मदर टेरेसा (Mother Teresa) के पिता का नाम निकोला बोयाजू था, जो एक मेहनतकश और ईमानदार अल्बेनियाई किसान (farmer) थे, हालांकि बाद में उन्होंने कृषि का धंधा (farming business) छोड़कर भवन निर्माण के कार्य से जुड़ चुके थे। मदर टेरेसा (Mother Teresa) की माता का नाम द्राना बोयाजू था, जो एक कुशल गृहिणी थी। मदर अपने माता पिता (parents) की चौथी संतान थी। मदर टेरेसा (Mother Teresa) के दो बहन और एक भाई थे, जो इनसे बड़े (elder) थे।

मदर टेरेसा का बचपन | Childhood of Mother Teresa

मदर का बचपन (childhood) बहुत ही दुख भरा और आर्थिक तंगी (financial problem) में गुजरा था। सन् 1914 में जब मदर की आयु लगभग 4 वर्ष की थी, प्रथम विश्वयुद्ध (first world war) का सूत्रपात हो चुका था। मदर के बाल ह्रदय पर इस विश्वयुद्ध (world war) की विभीषिका ने क्या प्रभाव डाला होगा?। यह तो कह पाना मुश्किल है।

किंतु उनके माता पिता (parents) को अवश्य ही चिंतित कर दिया था। वास्तव में इस युद्ध (war) की लहर ने उस समय के समस्त मानव समाज (human society) विशेषकर मध्यम और निम्नवर्गीय समाज को सामाजिक और आर्थिक (social and financial) दोनों ही स्तरों पर अव्यवस्थित कर दिया था। मदर का परिवार (family) भी इससे अछूता नहीं रहा।

इस सबके बाद भी मदर के माता पिता (parents) किसी तरह खुद को और अपने परिवार (family) को संभाले हुए थे, कि सन् 1917 में जब विश्वयुद्ध (world war) की समाप्ति में अभी एक वर्ष और शेष था, मदर के परिवार (family) पर घोर विपदा आन पड़ी। इसी वर्ष मदर टेरेसा (Mother Teresa) के पिता का आकस्मिक देहांत (sudden death)हो गया।

इस अल्बेनियाई, धार्मिक परिवार (spiritual family) पर यह आघात आसमान टूटने जैसा था। मदर की आयु (age) उस समय मात्र 7 वर्ष की थी। परिवार की एक मात्र कर्ताधर्ता और मुखिया (head) के चले जाने से, पहले से ही असीम दुख (immense sadness) में डूबे इस परिवार को शीघ्र ही आर्थिक संकट (financial problem) ने भी आ घेरा।

संकट की उस घड़ी (bad times) में मदर की मां ने बिना किसी की ओर मदद (help) की आश लगाए, अपने परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी को बडी दृढता (determination) से निभाया।

हांलाकि वह एक साधारण गृहिणी (house wife) थी, परंतु सिलाई कढ़ाई और बुनाई में निपुण (perfect) थी, सो उन्होंने अपने इसी कला कौशल को परिवार (family) की आजीविका का सहारा बनाया। साथ ही साथ उन्होंने अपने बच्चों (children’s) की शिक्षा दीक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया।

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मां की शिक्षा से लिया बड़ा सबक

मदर की मां (mother) जो एख धर्मपरायण महिला और आदर्श गृहिणी थी, उन्होंने कभी अपने बच्चों (children’s) को उनके पिता की कमी का अहसास न होने दिया।

बच्चों में अच्छे संस्कार (good manners) डालने के लिए वे निरंतर प्रयत्न करती रहती थी, संतो (saint) और महापुरुषों के जीवन की गाथाओं को सरल और रोचक कहानियों (interesting stories) के रूप में सुनाकर वे उनको भी वैसा ही बनने और करने के लिए प्ररेरित (motivate) करती थी।

मदर (mother) अपनी मां की इन शिक्षाओं का बहुत गहरा प्रभाव (strong effect) पड़ा। मदर की मां का शिक्षा देने का यह तरीका (way) मुझे भी बहुत प्रभावित लगा। जिससे जुडी एक कहानी (story) में आप के साथ भी शेयर (share) करना चाहता हूँ।

एक बार स्कूल (school) की छुट्टी के बाद मदर घर लौटी। उस समय वे लगभग 10 वर्ष (years) की रही होंगी। उस समय पर एक भाई और बहन (brother and sister) थे। मां अपनी एक बेटी के साथ किसी काम से कहीं गई थी। शाम होने पर तीनों भाई बहन (all children’s) कमरे में पढ़ने की पुस्तक खोलकर बैठ गए।

उस समय मदर अपने स्कूल (school) की एक अध्यापिका की समालोचना करने बैठ गई। दोनों भाई बहन भी ध्यान से उनकी कहानी (story) सुनने लगे। सहसा उस कमरे की बत्ती गुल (black out) हो गई और अंधेरा हो गया। कहानी (story) बीच में ही रूक गई। पास वाले कमरे की बत्ती जल (light) रही थी, तीनों भाई बहन सोच विचार (thinking) करने लगे आखिर हमारे कमरे की बत्ती (light) कैसे गुल हुई?।

तभी पड़ोस के कमरे (room) से उनकी मां निकली और उनसे बोली– इस कमरे की बत्ती (light) मैने बंद की है। दूसरों के व्यक्तिगत जीवन की समालोचना (gossip) में रोशनी जलाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं है।

हांलाकि घटना मामूली थी, लेकिन मदर (mother) ने मां के कहे शब्दों में छिपे पाठ को समझ लिया और जीवन भर (whole life) उसका पालन किया।

एक दिन मदर टेरेसा (Mother Teresa) की मां बाजार से कुछ सेब (apple) खरीदकर लाई। जिनमें एख सेब थोड़ा खराब भी था। मां ने मदर (mother) को बुलाकर कहा, जाओ इन सभी को एक टोकरी (bucket) में रख दो। मदर ने वैसा ही किया। कुछ दिन बाद मां ने टोकरी (bucket) लाने को कहा।

टोकरी से ढक्कन (cover) हटाते ही देखा तो उसमे सब सेब (apple) सड़ गए थे। मां ने अपने बच्चों को वहां बुलाया और टोकरी (bucket) दिखाकर बोली, देखो एक सड़े सेब ने टोकरी (bucket) के सारे सेब सड़ा दिए। इसलिए अगर तुम अच्छे होकर भी बुरे लोगों (bad peoples) से मिलोगे तो तुम्हारी हालत भी इन सडे सेबों (apples) की तरह हो जाएगी।

मां के यही उपदेश बचपन (childhood) से ही मदर के मन में गहरा प्रभाव डालते थे।

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 मदर टेरेसा मानवता की सेवा मे कैसे, क्यों और कब आई

मदर ने अपनी छोटी सी आयु (young age) में जिस प्रकार मानवता की सेवा के मार्ग (way) पर चलने का संकल्प लिया, कुछ लोग इसके संदर्भ में एक अनूठा तथ्य (interesting fact) देते है। कहते है कि जिस वर्ष मदर का जन्म (birth of mother) हुआ, उसी वर्ष दीन दुखियों और पीडितों की सेवा (help) में समर्पित एक महान आत्मा “फलोरेंस नाइटिंगेल” की मृत्यु (death) हुई थी। पुनर्जन्म में विश्वास (believe) रखने वाले लोगों का मानना है कि मदर (mother) के रूप मे फलोरेंस नाइटिंगेल ने ही दूसरा जन्म (second birth) लिया था।

मदर टेरेसा (Mother Teresa) ने जब पहली बार मानवता सेवा (humanity) की ओर आकर्षित हुई, उस समय उनकी age 12-13 वर्ष की होगी। सरकारी स्कूल (government school) में पढ़ते समय वह सोडालिटी की बाल सदस्या (young member) बन गई। सोडालिटी मानव सेवा को समर्पित ईसाई संस्था (christian society) का एक अंग थी। जिसका प्रमुख कार्य लोगों, विशेषकर विद्यार्थियों (students) को स्वंय सेवी कार्यकर्ताओं के रूप मे तैयार (prepare) करना था।

उन दिनों यूगोस्लाविया (Yugoslavia) के बहुत से जेसुइट (ईसाई धर्म के प्रचारक और कार्यकर्ता) भारत (India) में कर्सियांग और कोलकाता (kolkatta) में रहकर सेवाकार्यो में जुटे थे। ये जेसुइट लोग (Jesuit people) समय समय पर अपने अनुभव और कार्यो (experience and work) के विषय में आयरलैंड के लोरेटा सम्प्रदाय के मुख्यालय (head office) में पत्र भेजते रहते थे। इन पत्रो को सोडालिटी के सदस्यों को नियमित (regularly) रूप से पढ़ाया जाता था।

उन्हीं दिनों यूगोस्लाविया के जेसुइट लोगों (Jesuit people) ने कोलकाता आर्कडायसिस योजना पर काम करने के लिए 30 December सन् 1925 को जेसुइटो का एक दल कोलकाता (kolkata) भेजा। इस दल में से कर्सियांग गए एक जेसुइट ने कोलकाता (kolkata) के दीन दुखियों की दशा और उस संबंध में किए जा रहे जेसुइटो के कार्यों (Jesuit works) का वर्णन बडे ही भावात्मक ढंग (emotional way) से सविस्तार लिखकर भेजा।

यही वह पत्र (letter) था, जिसका वृत्तांत पढ़ सुनकर मात्र 15 साल की स्कूली छात्रा (school student) मदर का मन कोलकाता (kolkata) जाने के लिए मचल उठा। उन्हें लगा जैसे हजारों मील दूर (thousand miles away) के दुखियों और पीडितों की करूण पुकार उनके मन मस्तिष्क (mind) में गुंजने लगी।

जब उन्होंने अपने अध्यापकों (teacher) को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया तो उनकी भावना का सम्मान (respect) करते हुए, उन्हें आयरलैंड के लोरेटो मठ की सन्यासियों के सम्पर्क (contact) में भेज दिया गया। इस मठ की सन्यासिनियों और मिशनरी कार्यकर्ताओं (Missionary workers) के त्याग और सेवा भावना से पूर्ण जीवन (whole life) ने मदर को इतना अभिभूत कर दिया की उन्होंने इसी समय अपना पूर्ण जीवन (whole life) मानव की सेवा को समर्पित करने का निर्णय (decision) ले लिया।

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मदर टेरेसा का भारत आगमन और मदर टेरेसा का योगदान | Mother Teresa in India and Contribution

लोरेटो के आधिकारियों (officers) ने एक ही दृष्टि में करूणा की मूर्ति स्वरूप इस 18 years old सन्यासिनी को पहचान लिया था। मदर (mother) को पहले आयरलैंड के लोरेटो मुख्यालय (head office) र फिर डब्लिन भेजा गया। यहां उनको मिशनरी के कार्यों (Missionary work) और नियमों आदि से परिचित कराया गया।

और फिर August सन् 1929 में मदर टेरेसा (Mother Teresa) को पहली बार भारत (India) भेजा गया। भारत (India) पहुंचते ही सबसे पहले उनको दार्जिलिंग (Darjeeling) में नोविसिएट का कार्य सौंपा गया।

वहां से कोलकाता (kolkatta) के इंटाली के सेंट मैरी स्कूल में भूगोल की अध्यापिका (teacher) के रूप में कार्य करने के रूप में भेजा गया। इस school में उन्होंने year 1929 से 1948 तक लम्बा समय व्यतीत किया। इस दौरान कुछ समय वे school teacher भी रही।

Sister of Loreto के रूप में भारत (India) आई मदर को loreto की ननों के साथ परोक्ष रूप से युक्त doctors of saint ऐन का भार भी सौंपा गया।

24 May सन् 1931 को मदर टेरेसा (Mother Teresa) ने स्वेच्छा से स्वयं को loreto के कार्यों के लिए समर्पित करने की oath ली। इसके छः साल बाद ही उन्होंने इसी स्कूल (school) में अध्यापन करते हुए। सन् 1937 में अंतिम रूप से दूसरी oath ली।

10 December सन् 1946 का वह दिन मदर (mother) को सदैव स्मरण रहा, जब ट्रेन द्वारा कोलकाता से दार्जिलिंग (Darjeeling) जाते समय मदर को लगा जैसे कोई अद्भुत शक्ति (immense power) उन्हें पुकारकर कह रही है। सब कुछ sacrifice कर मेरे पिछे चली आओ। बस्ती में दरिद्रतम human help करने से ही मेरी सेवा होगी।

मदर (mother) ने उसी समय इस आह्वान को अपने inner soul की गहराइयों में अनुभव करते हुए निर्णय (decision) कर लिया कि वह अब अपना समस्त जीवन (entire life) द्ररिद्र मानव की सेवा मे व्यतीत करेगीं। यह प्रण (promise) करते ही मदर ने (loreto convent)  और उनके द्वारा मिल रही सभी सुख सुविधाओं (all facilities) को छोड़ दिया।

इतना ही नहीं उन्होंने अपने (beautiful and expensive clothes)  का भी त्याग कर दिया, और सफेद साड़ी wear कर ली। पूरे आस्तीन का white blouse और गले में टंगा क्रास का निशान। कैथोलिक सन्यासिनियों (Catholic saints) में मदर पहली महिला थी, जिन्होंने indian dress saree को अपने मिशन की dress के रूप में धारण किया।

इस सेवा के मार्ग (way) पर चलने हेतु प्रेम के साथ साथ चिकित्सा और औषधि (medicine) का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करने की भी अत्यंत आवश्यकता (immense need) थी। लोरेटो को अलविदा कहकर मदर अपनी नई वेशभूषा (new dressup) में ही 18 August सन् 1948 को nursing training लेने के लिए पटना Bihar की American Medical Missionary की सिस्टरों के पास गई। वहां 3 महीने की training लेकर वे December month में कोलकाता लौट आई। और लिटिल सिस्टर्स ऑफ द पुअर संस्था (Little Sisters of the Poor Society) में आकर रहने लगी।

मदर टेरेसा के अवार्ड – मदर टेरेसा की उपलब्धियां- मदर टेरेसा को मिले सम्मान, पुरस्कार | Mother Teresa Awards and Achievements

1962— भारत (India) सरकार द्वारा “पद्मश्री” से सम्मानित (honored) किया गया

1962– फिलिपींस (Philippines) के दिवंगत राष्ट्रपति के नाम पर “रेमन मैगसेसे” पुरस्कार (prize) दिया गया।

1963—- 23 मार्च को कोलकाता (kolkata) के आर्चबिशप द्वारा मदर के मार्गदर्शन में “मिशनरीज ऑफ ब्रदर्स” (Missionaries Of Brothers) के शुभ अवसर पर ही आशीर्वाद (blessings) दिया गया।

1964— ईसाई धर्मगुरु महामान्य पोप (Christian reverend pope) ने भारत (India) आगमन पर मुम्बई की यूकरिस्टिक कांग्रेस (Eucharistic Congress) में मदर को अपनी निजी “फोर्ड लिंकन” (ford Lincoln) गाडी उपहार स्वरूप प्रदान की।

1969— 26 मार्च को “द इंटरनेशनल एशोसिएशन ऑफ कोवर्कर्स” (The International Association of Coworkers) ऑफ मदर टेरेसा को मिशनरीज ऑफ चैरिटीज (Missionaries of Charities) का अनुमोदन मिला और पोप पाल (pop paul) छठे द्वारा उन्हें आशीर्वाद दिया गया।

1971—- 6 January को मदर को पोप जॉन तेरहवें का “शांति पुरस्कार” (peace prize) प्रदान किया गया।

1971— न्यूयॉर्क (New york) में “गुड सैमेरिटन” का अवार्ड मिला।

1971— वाशिंगटन (Washington) में “केनेडी इंटरनेशनल अवार्ड” मिला।

1971—- कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका (Catholic University of America) द्वारा “डॉक्टर ऑफ ह्यूमन लैटर्स” (Doctor of Human Letters) की सम्मान सुचक उपाधि।

1972— दिल्ली (Delhi) में ”जवाहर लाल नेहरू अवार्ड फॉर इंटरनेशनल अंडरस्टेंडिंग” (Jawaharlal Nehru Award for International Understanding) पुरस्कार (prize) से सम्मानित (honored) किया गया।

1973— लंदन में “फाउंडेशन प्राइज फॉर प्रॉग्रेस इन रिलीजन” (Foundation prize for progress in relief) सम्मान दिया गया।

1975— मैक्सिको में “अंतरराष्ट्रीय नारी वर्ष” International women’s year) के उपलक्ष्य मे आयोजित सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि (chief guest) के रूप में सम्मानित किया गया।

1975— मिशनरीज ऑफ चैरिटी (Missionaries of Charity) की पच्चीसवीं वर्षगांठ पर “रौम्य जयंती उत्सव” (Mourning anniversary) मनाया गया, जिसमें देश विदेश के अनेक गणमान्य लोगों (respectable peoples) ने मदर के सेवा कार्यों के प्रति कृतज्ञता (gratitude) प्रकट की।

1975— अंतरराष्ट्रीय संस्था एफ.ए.ओ (F.A.O) के सिरेस पदक के एक ओर मदर (mother) का ममतामयी चित्र तथा दूसरी ओर नवजात शिशु (newborn baby) को थामे हुए हाथ का दृश्य चित्रित किया गया। ये चित्र ब्रिटेन (Britain) के कलाकार माइकेल रिजेला द्वारा बनाए गए।

1976— विश्वभारती शांति निकेतन (Shanti Niketan) द्वारा देशिकोतम की मानद उपाधि प्रदान की।

1979— मदर को विश्व शांति और सदभावना (World peace and goodwill) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित (honored) किया गया।

1980– भारत (India) सरकार द्वारा उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान (Highest civilian honor) भारत रत्न से सम्मानित (honored) किया गया।

1983— 25 नवंबर को महारानी एलिजाबेथ (Queen Elizabeth) द्वारा ब्रिटेन के सर्वोच्च सम्मान “ऑर्डर ऑफ मैरिट” (order of merit) से सम्मानित (honored) किया गया।

1990— 15 नवंबर सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड से सम्मानित (honored) किया गया।

1990– रॉयल कॉलेज लंदन द्वारा सर्वोच्च फैलो अवार्ड से सम्मानित (honored) किया गया।

1993— राजीवगांधी सद्भावना पुरस्कार से सम्मानित (honored) किया गया।

मदर टेरेसा की मृत्यु | Death of Mother Teresa

जीवन भर (whole life) दीन दुखियों की सेवा के लिए देश विदेश के किसी भी कोने (corner of every world) से आई एक ही पुकार पर दौड़ी चली जाने वाली मदर अपने जीवन (life) के 86 वर्ष पूरे करते करते काम के इस अत्यधिक बोझ (immense burden) से भीतर ही भीतर थकने लगी थी।

किंतु उन्होंने अपने निरंतर बिगड़ते स्वास्थ्य (Continuous deteriorating health) को अपने काम के आगे कुछ नहीं समझा। इसका परिणाम (result) यह हुआ कि year 1997 के शुरू मे ही उनका स्वास्थ्य (health) इस कदर बिगड़ गया की उन्हें अस्पताल मे एडमिट (admit in hospital) कराना पड़ा।

और कई महीनें एड़मिट (admit) रहने के बाद 5 September) 1997 को मदर टेरेसा (Mother Teresa) का देहांत हो गया। मानवता के इतिहास (history of humanity) मे प्रेम करूणा समर्पण और त्याग का एक अनूठा और अमर अध्याय Immortal chapter) जोडकर सदा के लिए इस दुनिया से रूखसत हो गई।

आज मदर (mother) हमारे बीच नहीं है किंतु उनकी संस्थाओं (association) और उनके द्वारा की जा रही मानव सेवा (helping human) में हम हर क्षण उनकी उपस्थिति अनुभव feel) कर सकते है।

मदर टेरेसा के अनमोल विचार | Mother Teresa Quotes In Hindi

  1. सबसे बड़ी बीमारी (Disease) कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है, बल्कि अवांछित होना ही सबसे बड़ी बीमारी (Disease) है।
  1. जिस व्यक्ति (person) को कोई चाहने वाला न हो, कोई ख्याल रखने वाला न हो, जिसे हर कोई भूल चुका हो, मेरे विचार (thought) से वह किसी ऐसे व्यक्ति (person) की तुलना में जिसके पास कुछ खाने को न हो, कहीं बड़ी भूख (hunger), कहीं बड़ी गरीबी से ग्रस्त है।
  1. अगर आप यह देखेंगे कि लोग (people) कैसे हैं तो आप के पास उन्हें प्रेम (love) करने का समय नहीं मिलेगा।
  1. शांति की शुरुआत (start) मुस्कुराहट से होती है।
  1. जहाँ जाइए प्यार (love) फैलाइए। जो भी आपके पास आए वह और खुश (happy) होकर लौटे।
  1. प्रेम (love) की शुरुआत निकट लोगों और संबंधो की देखभाल और दायित्व से होती है, वो निकट संबंध (relation) जो आपके घर में हैं।
  1. पेड़, फूल और पौधे शांति में विकसित (develop) होते हैं, सितारे, सूर्य और चंद्रमा शांति से गतिमान रहते हैं, शांति (peace) हमें नई संभावनाएं देती है।

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  1. सबसे बड़ा रोग (disease) किसी के लिए भी कुछ न होना है।
  1. बिना प्रेम (love) के कार्य करना दासता है।
  1. 1 अगर आप सौ लोगों (100 peoples) को नहीं खिला सकते तो एक को ही खिलाइए।
  1. एक जीवन (life) जो दूसरों के लिए नहीं जिया गया वह जीवन (life) नहीं है।
  1. हर वस्तु जो नहीं दी गई है खो (lost) चुकी है।
  1. हम सभी महान कार्य (great work) नहीं कर सकते लेकिन हम अन्य कार्यों को प्रेम (love) से कर सकते हैं।
  1. मैं एक छोटी पेंसिल के समान हूँ जो ईश्वर (bhagwan) के हाथ में है जो इस संसार को प्रेम (love) का संदेश भेज रहे हैं।
  1. हम सभी ईश्वर (bhagwan) के साथ में एक कलम के समान है।
  1. यह महत्वपूर्ण (important) नहीं है आपने कितना दिया, बल्कि यह है कि देते समय आपने कितने प्रेम (love) से दिया।
  1. मैं सफल (successful)ता (success) के लिए प्रार्थना नहीं करता मैं सच्चाई के लिए करता हूँ।
  1. प्रेम (love) हर ऋतू में मिलने वाले फल की तरह है जो हर (everyone) की पहुँच में है।
  1. किसी नेता की प्रतीक्षा (wait) मत करो, अकेले करो, व्यक्ति (person) से व्यक्ति (person) द्वारा।
  1. वे शब्द को ईश्वर (bhagwan) का प्रकाश नहीं देते अँधेरा फैलाते हैं।
  1. कार्य में प्रार्थना प्यार (love) है, कार्य में प्यार (love) सेवा है।
  1. खुबसूरत लोग (people) हमेशा अच्छे नहीं होते। लेकिन अच्छे लोग (people) हमेशा खूबसूरत होते हैं।
  1. दया और प्रेम (love) भरे शब्द छोटे हो सकते हैं लेकिन वास्तव में उनकी गूंज (wave) अनंत होती है।
  1. अकेलापन (loneliness) और किसी के द्वारा न चाहने की भावना का होना भयानक गरीबी (poor) के समान है।
  1. आप दुनिया (world) में प्रेम (love) फैलाने के लिए क्या कर सकते हैं? घर जाइए और अपने परिवार से प्रेम (love) कीजिए।
  1. कल जा चुका है, कल अभी आया नहीं (not) है, हमारे पास सिर्फ आज है, चलिए शुरुआत (start) करते हैं।
  1. चलिए (lets) जब भी एक-दूसरे से मिलें मुस्कान के साथ मिलें, यही प्रेम (love) की शुरुआत है।
  1. सिर्फ धन (money) देने भर से संतुष्ट न हों, धन (money) पर्याप्त नहीं है, वह पाया जा सकता है लेकिन उन्हें आपके प्रेम (love) की आवश्यकता है, तो जहाँ भी आप जाएँ अपना प्रेम (love) सबमें बांटें।

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15 Simple Tips to build confidence in kids

  1. प्रेम (love) एक ऐसा फल है, जो हर मौसम में मिलता है और जिसे सभी पा सकते हैं।
  1. भगवान (bhagwan) यह अपेक्षा नहीं करते कि हम सफल (successful) हों। वे तो केवल इतना चाहते हैं कि हम प्रयास करें।
  1. कुछ लोग (people) अपनी जिंदगी में आशीर्वाद की तरह कुछ लोग (people) एक सबक की तरह।
  1. उनमें से हर कोई किसी-न-किसी भेष में भगवान (bhagwan) है।
  1. ईश्वर (bhagwan) हमसे यह अपेक्षा नहीं करते कि हम सफल (successful) हों। वे तो केवल इतना चाहते हैं कि हम प्रयास करें।
  1. आप स्दुनिया में प्रेम (love) फ़ैलाने के लिए क्या कर सकते हैं? घर जाइए और अपने परिवार से प्रेम (love) कीजिए।

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