महाभारत की दो घटनाएं - हिंदी कहानी
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महाभारत की दो घटनाएं – हिंदी कहानी

महाभारत की दो घटनाएं हिंदी कहानी

दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे बहुत छोटे पर बहुत दम रखने वाले महाभारत से जुड़े ऐसे दो वाकया जो आपको जीवन के बारे में काफी कुछ बताएँगे. (महाभारत की दो घटनाएं)

कोई काम छोटा बड़ा नहीं है – महाभारत की दो घटनाएं

पाण्डव राजसूय यज्ञ कर रहे थे। भगवान् कृष्ण पधारे। युधिष्ठिर से बोले- “मेरे योग्य कोई काम बताइए।”

‘युधिष्ठिर ने विनयपूर्वक उत्तर दिया-“आप भगवान् है। आप कृपा-दृष्टि बनाये रखें; सब काम निपट जायेंगे।”

भगवान् कृष्ण ने कहा-“भगवान् भी बिना काम किये नहीं रह सकता। अच्छा, मैं स्वयं चुन लेता हूँ अपना काम।”

और, भगवान् ने जूठी पत्तले उठाने का काम चुना। सारे संसार का स्वामी जो हो, उसे भी काम किये बिना चैन और, काम भी कौन-सा चुना-जूठी पत्तले उठाने का काम।

बच्चो. याद रखना भगवान् ने वह काम चुना, जिसे हम-तुम छोटा माने; परन्तु उनकी दृष्टि में कोई भी काम अच्छा है. परन्त छोटा-बड़ा नहीं है। और, दूसरी बात-भगवान काम किये बिना नहीं रह सकते।

और, ये दोनों बातें तुम्हारे अपने जीवन के लिये उपयोगी हैं। भगवान कृष्ण की तरह तुम सब काम करो, खूब काम करो और एक आदर्श कर्मशूर बनो और किसी काम को छोटा-बड़ा नहीं समझो.

साग विदुर घर खाये – महाभारत की दो घटनाएं

महाभारत का युद्ध टालने और पाण्डवों-कौरवों के बीच समझौता कराने के लिए भगवान् कृष्ण हस्तिनापुर आने वाले थे। उनके ठहरने के। लिए धृतराष्ट्र का महल चुना गया; लेकिन भगवान् ने कहा- “मैं राजमहल में नहीं ठहरूँगा। मैं ठहरूँगा विदुर के घर।” |

महात्मा विदुर ने अपनी छोटी-सी कुटिया में भगवान् का स्वागत किया। कुटिया में भोजन के नाम पर बना था सिर्फ साग। बड़े संकोच के साथ विदुर ने भगवान् के सामने साग परोसा। बहत प्रसन्न को कर उन्होंने वह भोजन किया। बहुत सन्तुष्ट हो कर वह जमीन पर चटाई बिछा कर सोये।

आँखों का तारा – Maa aur Bete ki Kahani

भगवान् ने राजमहल की सुख-सुविधा छोड़ कर कुटिया में रहना पसन्द किया। राजमहल के छप्पन प्रकार के व्यञ्जन छोड़ कर वह रूखा-सूखा खाने को तैयार हो गये। क्यों किया उन्होंने ऐसा? जो उन्हें प्यार करता है, उसे वह भी प्यार करते हैं। विदर भक्त थे, भगवान् को प्यार करते थे; इसलिए उन्हें अपना प्यार देने के लिए भगवान उन्हीं की कुटिया पर ठहरे।

बच्चो, तुम भगवान् को प्यार करोगे, तो वह भी तम्हें अपना प्यार देने के लिए तुम्हारे पास अवश्य आयेंगे। उन्हें तुम्हारी अमीरी-गरीबी से मतलब नहीं है, उन्हें मतलब है इस बात से कि कितनी सच्चाई है तुम्हारे प्यार में। क्या तुम्हें यह बात मालूम है कि जब तुम सच्चे मन से भगवान् की पूजा करते हो, तब वह भी तुम्हारे नाम की माला जपने लगते हैं?

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