माता पिता की सेवा – Hindi Kahani
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माता पिता की सेवा – Hindi Kahani

माता पिता की सेवा – Hindi Kahani

पुण्डलीक अपने माता-पिता की सेवा किया करता था। उसकी सेवा कोई साधारण सेवा नहीं थी, ऐसी सेवा थी जिसकी खबर भगवान् तक पहुँची। उन्होंने कहा- “मैं मिलूँगा पुण्डलीक से।” (माता पिता की सेवा)

भगवान् जब पहुँचे पुण्डलीक के घर, तब रात का समय था। पुण्डलीक अपने पिता के पैर दबा रहा था। भगवान् ने पुकारा उसे।

“कौन है?”-पुण्डलीक ने पैर दबाते-दबाते ही पूछा। “मैं हूँ भगवान्, जिसकी तुम पूजा करते हो।” भगवान् ने उत्तर दिया।

भगवान ने सोचा था कि यह सुन कर पुण्डलीक दौड़ा आयेगा और खशी के मारे उनके पैरों पर गिर पड़ेगा; लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अन्दर से उसकी आवाज सुनायी पड़ी— “दरवाजा खुला है, अन्दर आ जाइए।” भगवान् अन्दर गये और पुण्डलीक के पास जा कर खडे हो गये। थोड़ी देर बाद पुण्डलीक बोला- “वह ईंट पड़ी है, उस पर बैठ जाइए।”

भगवान ईंट पर बैठ गये। थोड़ी देर बाद पिता को नींद आ गयी। तब पण्डलीक ने पैर दबाना बन्द किया और भगवान् के चरणों पर झकते हए बोला-“पिता की सेवा कर रहा था, इसलिए आपको प्रणाम नहीं कर पाया। अब कर रहा हूँ प्रणाम।”

ऐसी होती है माँ-बाप की सेवा, जिसकी खातिर पुण्डलीक ने भगवान् को दूसरे नम्बर पर स्थान दिया। पुण्डलीक ने सेवा की, तो भगवान् उससे मिलने दौड़े आये। बच्चो, तुम भी अपने माता-पिता की सेवा करोगे, तो भगवान् तुमसे भी मिलने दौड़े आयेंगे।

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