रामायण के 3 किस्सों से सीखे के पति-पत्नी के बीच कैसा होना चाहिए रिश्ता
Dharmik Ramayan

रामायण के 3 किस्सों से सीखे के पति-पत्नी के बीच कैसा होना चाहिए रिश्ता

रामायण के 3 किस्सों से सीखे के पति-पत्नी के बीच कैसा होना चाहिए रिश्ता

दोस्तों, आज के वक़्त में अधिकांश लोगों के वैवाहिक जीवन (married life) में आपसी तालमेल की कमी आ गई है। इस कारण पति और पत्नी (husband and wife) मानसिक तनाव और परेशानियों (problem) का सामना करते हैं। (रामायण के 3 किस्सों से सीखे)

ऐसी स्थिति में जीवन (life) बोझ लगने लगता है और निराशा (sadness) हावी हो जाती है। इन परिस्थितियों (situations) से बचने के लिए पति और पत्नी, दोनों को यहां बताई जा रही तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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  1. कभी भी बुरे समय में न छोड़ें एक-दूसरे का साथ
  2. आगे बढ़ने के लिए पति-पत्नी को समझनी चाहिए एक-दूसरे के मन की बात
  3. एक दुसरे को गलत काम करने से रोकना चाहिए

जब श्रीराम को मिला वनवास तो सीता माता जी ने दिया साथ

रामायण (ramayan) में जब कैकयी ने राजा दशरथ (dashrath) से दो वरदानों में भरत (bharat) के लिए राज्याभिषेक और श्रीराम (shriram) के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगा और दशरथ (dashrath) को यह दोनों बातें मानना पड़ी थी। तब श्रीराम (shriram)  वनवास जाने के लिए तैयार हो गए।

उस समय लक्ष्मण (lakshman) के साथ ही सीता भी श्रीराम (shriram) के साथ वनवास जाने के लिए तैयार हो गईं। सीता (sita mata) सुकोमल राजकुमारी थीं, इस कारण सभी ने उन्हें वनवास (vanvaas) पर न जाने के लिए रोकना चाहा था। वन (jungle) में नंगे पैर चलना, खुले वातावरण में रहना, सीता के संभव (not possible)  नहीं था।

फिर भी सीता (sita) ने अपने पतिव्रत धर्म का पालन करते हुए श्रीराम (shriram) के दुख में भी साथ देने के लिए वनवास पर गईं। उस काल में श्रीराम (shriram) और सीता ने कई दुखों का सामना साथ-साथ किया।

आज भी पति-पत्नी (husband and wife) के रिश्ते में यह बात होना जरूरी है। सुख के दिनों (happy days) में तो सभी साथ देते हैं, लेकिन दुख (bad times) के दिनों में पति-पत्नी के सच्चे प्रेम और समर्पण की परीक्षा (test) होती है। इस परीक्षा में सफल होने के बाद वैवाहिक जीवन (married life) सुखद और आनंद से भरपूर हो जाता है।

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जब सीता जी ने समझ ली थी श्रीराम के मन की बात

वनवास पर जाते समय श्रीराम (shriram), लक्ष्मण और सीता के साथ ही निषादराज को केवट ने अपनी नाव से गंगा नदी (ganga nadi) पार करवाई थी। जब केवट ने उन्हें गंगा नदी (ganga nadi) के दूसरे किनारे पर पहुंचा दिया तब श्रीराम (shriram) उसे भेंट स्वरूप कुछ देना चाहते थे।

श्रीराम (shriram) के पास केवट को देने के लिए कुछ नहीं था। श्रीराम (shriram) के कहे बिना ही सीता ने उनकी मन:स्थिति को समझकर अपनी अंगूठी (ring) उतारकर केवट को भेंट करने के लिए आगे बढ़ा दी।

इस प्रसंग से समझा (understand) जा सकता है कि पति-पत्नी (husband wife) के बीच ऐसा तालमेल होना चाहिए कि बिना कुछ कहे (understand without saying) ही वे एक-दूसरे की इच्छा समझ सके। जो दंपत्ति (couple) ये बात ध्यान रखते हैं, उनके जीवन में चाहे कितनी भी परेशानियां (problems) क्यों न आए, उनका वैवाहिक जीवन (married life) सुखद ही रहता है। (रामायण के 3 किस्सों से सीखे)

मंदोदरी ने रावण को समझाया था श्रीराम जी से बैर न करें

जब श्रीराम (shriram) अपनी वानर सेना के साथ समुद्र पार कर लंका (lanka) पहुंच गए थे तब मंदोदरी समझ गई थी कि लंकापति रावण (ravan) की पराजय तय है। इस कारण मंदोदरी ने रावण (ravan) को समझाने का बहुत प्रयास किया कि वे श्रीराम (shriram) से युद्ध ना करें। सीता को लौटा दें।

श्रीराम (shriram) स्वयं भगवान का अवतार हैं। मंदोदरी ने कई बार रावण (ravan) को समझाने का प्रयास किया कि श्रीराम (shriram) से युद्ध करने पर कल्याण नहीं होगा, लेकिन रावण (ravan) नहीं माना। श्रीराम (shriram) के साथ युद्ध किया और अपने सभी पुत्रों और भाई कुम्भकर्ण (kumbhkarna) के साथ ही स्वयं भी मृत्यु (death) को प्राप्त हुआ।

पति-पत्नी (couples) के जीवन में यह बात भी महत्वपूर्ण (important) है कि एक-दूसरे को गलत काम करने से रोकना (stop) चाहिए। गलत काम का बुरा नतीजा (bad results) ही आता है। सही-गलत को समझते हुए एक-दूसरे को सही सलाह (suggestion) देनी चाहिए। साथ ही, दोनों को ही एक-दूसरे की सही सलाह (suggestion) माननी भी चाहिए। पति-पत्नी ही एक-दूसरे के श्रेष्ठ सलाहकार होते हैं। (रामायण के 3 किस्सों से सीखे)

तो दोस्तों यह थी अच्छी ज़िन्दगी जीने के लिए तीन रामायण से ली गयी तीन बेहतरीन बाते, जिन्हें आप अपने जीवन में इस्तेमाल करके अपने जीवन को और बेहतर बनाये.

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