जब रामायण में स्वयंवर से पहले मिले श्रीराम और सीता माता
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जब रामायण में स्वयंवर से पहले मिले श्रीराम और सीता माता

जब रामायण में स्वयंवर से पहले मिले श्रीराम और सीता माता

श्रीराम चरित मानस में श्रीराम (Shri Ram) और सीता से जुड़ी कई रोचक प्रसंग बताए गए हैं। स्वयंवर से भी पहले श्रीराम (Shri Ram) और सीता ने एक-दूसरे को देखा था। श्रीराम चरित मानस के बालकाण्ड में ये प्रसंग दिया गया है। जानिए ये प्रसंग रामायण में स्वयंवर.

कहां देखा था श्रीराम ने पहली बार सीता को

रामायम में जब राक्षसी ताड़का का आतंक काफी बढ़ गया तो ऋषि विश्वामित्र श्रीराम (Shri Ram) के पास पहुंचे। विश्वामित्र ने राजा (king) दशरथ से श्रीराम (Shri Ram) और लक्ष्मण को उनके भेजने का निवेदन किया। राजा (king) दशरथ ऋषि की बात टाल नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने राम-लक्ष्मण को ऋषि के साथ जाने की आज्ञा दे दी।

जब श्रीराम (Shri Ram) और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ वन (Forest) में पहुंचे तो वहां राक्षसी ताड़का आ गई। ऋषि विश्वामित्र ने श्रीराम (Shri Ram) को उसका वध करने की आज्ञा दी।

श्रीराम (Shri Ram) ने गुरु की आज्ञा मिलने के बाद ताड़का का वध कर दिया। इसके बाद श्रीराम (Shri Ram) और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे।

राजा (king) जनक सभी को आदरपूर्वक अपने साथ महल लेकर आए। अगले दिन सुबह दोनों भाई फूल लेने बाग में गए। उसी समय राजा (king) जनक की पुत्री सीता भी माता पार्वती (Mata Parvati) की पूजा करने के लिए वहां आईं। सीता श्रीराम (Shri Ram) को देखकर मोहित हो गईं और एकटक निहारती रहीं। श्रीराम (Shri Ram) भी सीता को देखकर बहुत आनंदित हुए।

इस संबंध में श्रीराम चरित मानस में लिखा है कि

देखि सीय सोभा सुखु पावा। ह्रदयं सराहत बचनु न आवा।।

जनु बिरंचि जब निज निपुनाई। बिरचि बिस्व कहं प्रगटि देखाई।।

इन चौपाइयों का अर्थ यह है कि सीताजी को शोभा देखकर श्रीराम (Shri Ram) ने बड़ा सुख पाया। हृदय में वे उनकी सराहना करते हैं, लेकिन मुख से वचन (vachan) नहीं निकलते। मानों ब्रह्मा ने अपनी सारी निपुणता को मूर्तिमान बनाकर संसार को प्रकट करके दिखा दिया हो।

इसके बाद माता पार्वती (Mata Parvati) का पूजन करते समय सीता ने श्रीराम (Shri Ram) को पति रूप में पाने की कामना की। अगले दिन स्वयंवर का आयोजन हुआ। आयोजन में शर्त रखी गई कि जो योद्धा भगवान शंकर के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह किया जाएगा।

राजा (king) जनक के बुलावे पर ऋषि विश्वामित्र व श्रीराम (Shri Ram) व लक्ष्मण भी उस स्वयंवर में गए। स्वयंवर में जब सभी राजा (king) उस धनुष को उठाने में असफल हो गए, तब श्रीराम (Shri Ram) को ऋषि विश्वामित्र ने आज्ञा दी कि वे इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएं।

श्रीराम (Shri Ram) ने धनुष उठाया और उस प्रत्यंचा चढ़ाने लगे, तभी वह धनुष टूट गया। इस प्रसंग के बाद सीता और श्रीराम (Shri Ram) को विवाह हुआ।

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