रावण का पुत्र मेघनाद इंद्र को हराकर कहलाया इंद्रजीत
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मेघनाद इंद्र को हराकर कहलाया इंद्रजीत

रावण का पुत्र मेघनाद इंद्र को हराकर कहलाया इंद्रजीत

रामायण (Ramayan) और श्रीरामचरित मानस के अलावा श्रीराम और रावण (Ravan) से जुड़ी कई लोक कथाएं भी प्रचलित हैं। एक कथा रावण (Ravan) और शनि (Shani Dev) से जुड़ी है। (इंद्रजीत)

ज्योतिषाचार्य के अनुसार जब रावण (Ravan) के पुत्र (Son) मेघनाद (Meghnad) का जन्म होने वाला था, तब रावण (Ravan) ने सभी ग्रहों को शुभ और सर्वश्रेष्ठ स्थिति में रहने का आदेश दिया था।

उस समय शनि (Shani Dev) के अलावा शेष सभी ग्रह रावण (Ravan) की मनचाही स्थिति में थे। रावण (Ravan) ये बात जानता था कि शनि (Shani Dev) आयु के देवता हैं और वे आसानी से मेघनाद (Meghnad) के लिए शुभ योग नहीं बनाएंगे। शनि (Shani Dev) ने मेघनाद (Meghnad) के जन्म के समय ऐसा योग बना दिया था, जिससे मेघनाद (Meghnad) लक्ष्मण के हाथों मारा गया था।

पूरा प्रसंग

जब रावण (Ravan) और मंदोदरी के पुत्र (Son) मेघनाद (Meghnad) का जन्म होने वाला था। तब रावण (Ravan) चाहता था कि उसका पुत्र (Son) अजेय हो, जिसे कोई भी देवी-देवता हरा न सके, वह दीर्घायु हो, उसकी मृत्यु हजारों वर्षों बाद ही हो। उसका पुत्र (Son) परम तेजस्वी, पराक्रमी, कुशल यौद्धा, ज्ञानी हो।

रावण (Ravan) ज्योतिष का जानकार भी था। इसी वजह से मेघनाद (Meghnad) के जन्म के समय उसने ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रहों और नक्षत्रों को ऐसी स्थिति में बने रहने का आदेश दिया कि उसके पुत्र (Son) में वह सभी गुण आ जाए जो वह चाहता है। (इंद्रजीतर)

रावण (Ravan) का प्रभाव इतना था कि सभी ग्रह-नक्षत्र, देवी-देवता उससे डरते थे। इसी वजह से मेघनाद (Meghnad) के जन्म के समय सभी ग्रह वैसी ही राशियों में स्थित हो गए जैसा रावण (Ravan) चाहता था। रावण (Ravan) ये बात जानता था कि शनि (Shani Dev) देव न्यायाधीश हैं और आयु के देवता हैं।

शनि (Shani Dev) इतनी आसानी से रावण (Ravan) की बात नहीं मानेंगे। रावण (Ravan) ने बल प्रयोग करते हुए शनि (Shani Dev) को भी ऐसी स्थिति में रखा, जिससे मेघनाद (Meghnad) की आयु वृद्धि हो सके।

शनि (Shani Dev) न्यायाधीश हैं, इस वजह से रावण (Ravan) की मनचाही स्थिति में रहते हुए भी उन्होंने ठीक मेघनाद (Meghnad) के जन्म के समय अपनी नजर तिरछी कर ली थी।

शनि (Shani Dev) की तिरछी नजरों के कारण ही मेघनाद (Meghnad) अल्पायु हो गया। जब रावण (Ravan) को इस बात का अहसास हुआ तो वह शनि (Shani Dev) पर अत्यंत क्रोधित हो गया। क्रोधवश रावण (Ravan) ने शनि (Shani Dev)देव के पैरों पर गदा से प्रहार कर दिया। इसी प्रहार की वजह से शनि (Shani Dev) देव लंगड़े हो गए। तब से शनि (Shani Dev) की चाल धीमी हो गई।

शनि (Shani Dev) के अलावा शेष सभी ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण मेघनाद (Meghnad) बहुत पराक्रमी और शक्तिशाली था। रावण (Ravan) पुत्र (Son) ने देवराज इंद्र को भी परास्त कर दिया था। (इंद्रजीतर)

इसी वजह से मेघनाद (Meghnad) का एक नाम इंद्रजीत भी पड़ा। शनि (Shani Dev) की तिरछी नजरों के कारण मेघनाद (Meghnad) अल्पायु हो गया था। श्रीराम और रावण (Ravan) के बीच हुए युद्ध में लक्ष्मण के हाथों मेघनाद (Meghnad) मारा गया।

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