3 Short Moral Story in Hindi | 3 लघु नैतिक कहानियाँ
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3 Short Moral Story in Hindi | 3 लघु नैतिक कहानियाँ

3 Short Moral Story in Hindi | 3 लघु नैतिक कहानियाँ

Short Moral Story in Hindi

दयालु लकड़हारा

बहुत समय पहले किशनपुर गाँव (village) में रामू (Ramu) नाम का एक गरीब लकड़हारा (wood cutter) रहता था। वह दुसरो की मदद (help) के लिए हमेशा तैयार रहता। जीवो के प्रति उसके मन में बहुत दया थी।

एक दिन वह जंगल (jungle) से लकड़ी इकट्ठी करने के बाद थक गया तो थोड़ी देर सुस्ताने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। तभी उसे सामने के पेड़ से पक्षियों के बच्चो (baby birds) के जोर-जोर से चीं-चीं करने की आवाज़ सुनाई दी।

उसने सामने देखा तो डर गया। एक सांप घोंसले (nest) में बैठे चिड़िया के बच्चो (baby birds) की तरफ बढ़ रहा था। बच्चे (children’s) उसी के डर से चिल्ला रहे थे। रामू (Ramu) उन्हें बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ने लगा।

सांप लकड़हारे के डर से नीचे उतरने लगा। उसी दौरान चिड़िया भी लौट आई। उसने जब रामू (Ramu) को पेड़ पर देखा तो समझा कि उसने बच्चो (baby birds) को मार दिया।

वह रामू (Ramu) को चोंच मार-मारकर चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ से और चिड़िया भी आ गईं। सभी ने रामू (Ramu) पर हमला कर दिया। बेचारा रामू (Ramu) किसी तरह पेड़ से नीचे उतरा। (Short Moral Story in Hindi)

चिड़िया जब घोंसले (nest) में गई तो उसके बच्चे (children’s) सुरक्षित बैठे थे। बच्चो (baby birds) ने चिड़िया को सारी बात बताई तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

वह रामू (Ramu) से माफी मांगना चाहती थी और उसका शुक्रिया अदा करना चाहती थी। उसे कुछ दिन पहले दाना ढूंढ़ते हुए एक कीमती हीरा मिला था। उसने हीरे को अपने घोंसले (nest) में लाकर रख लिया था।

Suvichar in Hindi

चिड़िया ने वह हीरा रामू (Ramu) के आगे डाल दिया और एक डाली पर बैठकर अपनी भाषा में धन्यवाद करने लगी। रामू (Ramu) ने हीरा उठा लिया और चिड़िया की तरफ हाथ उठाकर उसका धन्यवाद (thanks) किया और वहां से चल दिया।

तभी कई चिड़िया आईं और उसके ऊपर उड़कर साथ चलने लगीं मनो वे उसका आभार (regards) करते हुए विदा करने आई हो।

किसी भी जीव पर किये गये उपकार का फल सदैव ही सकारात्मक नतीजे (positive results) के रूप में वापस मिलता हैं।

यह भी कट जाएगा

Very Motivational Story in Hindi

एक बार एक राजा (King) की सेवा से प्रसन्न होकर एक साधू नें उसे एक ताबीज दिया और कहा की राजन इसे अपने गले मे डाल लो और जिंदगी में कभी ऐसी परिस्थिति (situation) आये की जब तुम्हे लगे की बस अब तो सब ख़तम होने वाला है, परेशानी (problem) के भंवर मे अपने को फंसा पाओ, कोई प्रकाश की किरण नजर ना आ रही हो, हर तरफ निराशा (sadness) और हताशा हो तब तुम इस ताबीज को खोल कर इसमें रखे कागज़ (paper) को पढ़ना, उससे पहले नहीं

राजा (King) ने वह ताबीज अपने गले मे पहन लिया !

एक बार राजा (King) अपने सैनिकों के साथ शिकार करने घने जंगल (jungle) मे गया!

एक शेर का पीछा करते करते राजा (King) अपने सैनिकों से अलग हो गया और दुश्मन राजा (King) की सीमा मे प्रवेश कर गया, घना जंगल (jungle) और सांझ का समय, तभी कुछ दुश्मन सैनिकों के घोड़ों की टापों की आवाज राजा (King) को आई और उसने भी अपने घोड़े को एड लगाई, राजा (King) आगे आगे दुश्मन सैनिक पीछे पीछे! बहुत दूर तक भागने पर भी राजा (King) उन सैनिकों से पीछा नहीं छुडा पाया ! (Short Moral Story in Hindi)

भूख प्यास से बेहाल राजा (King) को तभी घने पेड़ों के बीच मे एक गुफा सी दिखी, उसने तुरंत स्वयं और घोड़े को उस गुफा की आड़ मे छुपा लिया! और सांस रोक कर बैठ गया, दुश्मन (enemy) के घोड़ों के पैरों की आवाज धीरे धीरे पास आने लगी !

दुश्मनों से घिरे हुए अकेले राजा (King) को अपना अंत नजर आने लगा, उसे लगा की बस कुछ ही क्षणों में दुश्मन उसे पकड़ कर मौत के घाट उतार देंगे! वो जिंदगी से निराश हो ही गया था, की उसका हाथ अपने ताबीज पर गया और उसे साधू (saint) की बात याद आ गई!

उसने तुरंत ताबीज को खोल कर कागज को बाहर निकाला और पढ़ा! उस पर्ची पर लिखा था —“यह भी कट जाएगा”

राजा (King) को अचानक ही जैसे घोर अन्धकार मे एक ज्योति की किरण दिखी,

डूबते को जैसे कोई सहारा मिला ! (Short Moral Story in Hindi)

उसे अचानक अपनी आत्मा (soul) मे एक अकथनीय शान्ति का अनुभव हुआ ! उसे लगा की सचमुच यह भयावह समय भी कट ही जाएगा, फिर मे क्यों चिंतित होऊं !

अपने प्रभु और अपने पर विश्वास (trust) रख उसने स्वयं से कहा की हाँ, यह भी कट जाएगा और हुआ भी यही, दुश्मन के घोड़ों के पैरों की आवाज (sound) पास आते आते दूर जाने लगी,

कुछ समय बाद वहां शांति छा गई! राजा (King) रात मे गुफा से निकला और किसी तरह अपने राज्य मे वापस आ गया

दोस्तों,

यह सिर्फ किसी राजा (King) की कहानी नहीं है| यह हम सब की कहानी है! हम सभी परिस्थिति, काम, तनाव (stress) के दवाव में इतने जकड जाते हैं की हमे कुछ सूझता नहीं है,हमारा डर हम पर हावी होने लगता है, कोई रास्ता, समाधान (solution) दूर दूर तक नजर नहीं आता, लगने लगता है की बस, अब सब ख़तम, है ना ?

जब ऐसा हो तो 2 मिनट शांति (sit calm) से बेठिये, थोड़ी गहरी गहरी साँसे लीजिये ! अपने आराध्य को याद कीजिये और स्वयं से जोर से कहिये –यह भी कट जाएगा ! आप देखिएगा एकदम से जादू सा महसूस होगा, और आप उस परिस्थिति से उबरने की शक्ति अपने अन्दर महसूस करेंगे !

ऐसा आजमाया हुआ है! बहुत कारगर है| आशा है जैसे यह सूत्र मेरे जीवन मे मुझे प्रेरणा देता है, आपके जीवन मे भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा

जब तक हो सके, आत्मनिर्भर रहो

Moral Story in Hindi

कल दिल्ली से गोवा (Goa) की उड़ान में एक बुजुर्ग (Old Person) मिले। साथ में उनकी पत्नि भी थीं। बुजुर्ग (Old Person) की उम्र करीब 80 साल रही होगी।

मैंने पूछा नहीं लेकिन उनकी पत्नी भी 75 पार ही रही होंगी। उम्र के सहज प्रभाव को छोड़ दें, तो दोनों करीब करीब फिट थे।

बुजुर्ग (Old Person) की पत्नी खिड़की की ओर बैठी थीं, बुजुर्ग (Old Person) बीच में और मै सबसे किनारे वाली सीट पर था।

Short Story in Hindi

उड़ान भरने के साथ ही बुजुर्ग (Old Person) की पत्नी ने कुछ खाने का सामान निकाला और बुजुर्ग (Old Person) की ओर किया। बुजुर्ग (Old Person) कांपते हाथों से धीरे-धीरे खाने लगे। (Short Moral Story in Hindi)

फिर फ्लाइट में जब भोजन सर्व होना शुरू हुआ तो उन लोगों ने राजमा-चावल का ऑर्डर (Order) किया। दोनों बहुत आराम से राजमा-चावल खाते रहे। मैंने पता नहीं क्यों पास्ता ऑर्डर (Order) कर दिया था।

खैर, मेरे साथ अक्सर ऐसा होता है कि मैं जो ऑर्डर (Order) करता हूं, मुझे लगता है कि सामने वाले ने मुझसे बेहतर ऑर्डर (Order) किया है। अब बारी थी कोल्ड ड्रिंक की।

पीने में मैंने कोक का ऑर्डर (Order) दिया था। अपने कैन के ढक्कन को मैंने खोला और धीरे-धीरे पीने लगा। बुजुर्ग (Old Person) ने कोई जूस लिया था। खाना खाने के बाद जब उन्होंने जूस की बोतल (juice bottle) के ढक्कन को खोलना शुरू किया तो ढक्कन खुल ही नहीं रहा था। (Short Moral Story)

बुजुर्ग (Old Person) कांपते हाथों से उसे खोलने की कोशिश कर रहे थे। मैं लगातार उनकी ओर देख रहा था। मुझे लगा कि ढक्कन खोलने में उन्हें मुश्किल आ रही है तो मैंने शिष्टाचार हेतु कहा कि लाइए… “मैं खोल देता हूं!”

बुजुर्ग (Old Person) ने मेरी ओर देखा, फिर मुस्कुराते हुए कहने लगे कि… “बेटा ढक्कन तो मुझे ही खोलना होगा। मैंने कुछ पूछा नहीं, लेकिन सवाल भरी निगाहों से उनकी ओर देखा। यह देख, बुजुर्ग (Old Person) ने आगे कहा…

बेटाजी, आज तो आप खोल देंगे। लेकिन अगली बार..? कौन खोलेगा.?

इसलिए मुझे खुद खोलना आना चाहिए। उनकी पत्नी (wife) भी अपने पति की ओर देख रही थीं। जूस की बोतल का ढक्कन उनसे अभी भी नहीं खुला था।

पर वो बुजुर्ग (Old Person) लगे रहे और बहुत बार कोशिश कर के उन्होंने ढक्कन (cap) खोल ही दिया। दोनों आराम से जूस पी रहे थे। (Short Moral Story in Hindi)

मुझे दिल्ली से गोवा (Goa) की इस उड़ान में ज़िंदगी का एक सबक मिला

बुजुर्ग (Old Person) ने मुझे बताया कि उन्होंने.. ये नियम बना रखा है, कि अपना हर काम वो खुद करेंगे। घर में बच्चे (children’s) हैं, भरा पूरा परिवार है।

सब साथ ही रहते हैं। पर अपनी रोज़ की ज़रूरत के लिये वे सिर्फ अपनी पत्नी की मदद (help) ही लेते हैं, बाकी किसी की नहीं। वो दोनों एक दूसरे की ज़रूरतों को समझते हैं!

बुजुर्ग (Old Person) ने मुझसे कहा कि जितना संभव हो, अपना काम खुद करना चाहिए। एक बार अगर काम करना छोड़ दूंगा, दूसरों पर निर्भर हुआ तो समझो बेटा कि बिस्तर (bed) पर ही पड़ जाऊंगा। फिर मन हमेशा यही कहेगा कि ये काम इससे करा लूं, वो काम उससे।

फिर तो चलने के लिए भी दूसरों का सहारा (help) लेना पड़ेगा। अभी चलने में पांव कांपते हैं, खाने में भी हाथ कांपते हैं, पर जब तक आत्मनिर्भर (self dependent) रह सको, रहना चाहिए।

हम गोवा (Goa) जा रहे हैं, दो दिन वहीं रहेंगे। हम महीने (month) में एक दो बार ऐसे ही घूमने निकल जाते हैं। बेटे-बहू कहते हैं कि अकेले मुश्किल होगी, पर उन्हें कौन समझाए कि मुश्किल तो तब होगी जब हम घूमना-फिरना (outing) बंद करके खुद को घर में कैद कर लेंगे। पूरी ज़िंदगी खूब काम किया। (Short Moral Story)

Pari ki Kahani

अब सब बेटों (son’s) को दे कर अपने लिए महीने के पैसे तय कर रखे हैं। और हम दोनों उसी में आराम से घूमते हैं। जहां जाना होता है एजेंट टिकट बुक (ticket book) करा देते हैं। घर पर टैक्सी आ जाती है। वापिसी में एयरपोर्ट पर भी टैक्सी ही आ जाती है। होटल (hotel) में कोई तकलीफ होनी नहीं है। (Short Moral Story in Hindi)

स्वास्थ्य, उम्रनुसार, एकदम ठीक है। कभी-कभी जूस की बोतल (bottle of juice) ही नहीं खुलती। पर थोड़ा दम लगाओ, तो वो भी खुल (open) ही जाती है।

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