America Iran War से India को होंगे यह सबसे बड़े नुकसान
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America Iran War से India को होंगे यह सबसे बड़े नुकसान

America Iran War से India को होंगे यह सबसे बड़े नुकसान

ईरान (Iran) और अमेरिका (America) जैसे दो Oil producer countries में टकराव का effect सिर्फ उन दोनों countries पर ही नहीं बल्कि पूरे world पर पड़ेगा. दोस्तों, आज हम आपको समझने की कोशिश करते हैं के कैसे भारत (India) के लिए ये टकराव dangerous हो सकता है? (America Iran War)

13 June, 2019 को Strait of Hormuz के नजदीक Gulf of Oman में Norway and Japan के दो Oil Tankers में attack के बाद अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच tension increase ही होता जा रहा है. अमेरिका (America) इस हमले के लिए ईरान (Iran) को responsible मान रहा है.

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Pentagon ने 17 June को एक statement जारी करते हुए कहा कि Middle-East में 1000 Additional forces को भेजा जाएगा. ईरान (Iran) ने यह कहते हुए tension और increase कर दिया के अगले दस दिनों में वह Nuclear Deal में वह Uranium Stockpile Limit को तोड़ते हुए अब 3.7% की जगह 20% तक uranium को संवर्धित करेगा.

इससे न केवल अमेरिका (America) बल्कि European Countries भी stress में आ गए है क्योंकि Uranium को यदि 90% तक संवर्धित किया जाए तो इससे Nuclear Weapon बनाया जा सकता है. 20 June को Iranian Revolutionary Guard द्वारा American Surveillance Drone ‘AnRQ – Global Hawk’ को कथित तौर पर Persian airspace में घुसने के कारण मार गिराने से यह stress अपने peak पर पहुंच गया है.

इन incidents को देखते हुए ऐसा लगता है के अगर इस stressful situation को जल्द से जल्द नहीं रोका गया तो यह World को एक और World war face करना पड़ सकता है.

क्योंकि अगर Washington and Tehran के बीच war start हुई तो Russia और China जैसे country भी ज़ाहिर है ईरान (Iran) के support में कूद पड़ेंगे और उधर America के साथ NATO countries तो रहेंगे ही.

Russian President Vladimir Putin ने तो अमेरिका (America) को warning देते हुए यहां तक कह दिया कि “ईरान (Iran) पर attack का result बहुत ही Destructive होगा”.

Putin का कहना correct भी है क्योंकि इससे न केवल large scale पर financial and human loss होगा बल्कि Global Economy को भी heavy loss पहुंचेगा विशेषकर crude oil की value तो आसमान छूएंगी. इस loss से अपना India भी बाख नहीं पायेगा.

अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच जिस तरह से stress level बढ़ा है, उससे भारत (India) बहुत tension में है. Current situation में भारत (India) के लिए जिनता important अमेरिका (America) है, उतना ही important ईरान (Iran) भी है. इन both countries के बीच जंग से भारत (India) को double chock लगेगा. इसलिए भारत (India) लगातार both countries के contact में है और stress reduce करने में important role play कर रहा है.

हालात पर भारत की पैनी नजर – India’s close watch on the situation

Indian Foreign Minister S. Jaishankar situation पर अपनी नजर बनाए हुए हैं. अगर America Iran Warहोती है तो ऐसी situation में भारत (India) को gulf area से अपने citizens को निकालने में Oman and UAE की help लेनी पड़ सकती है.

इन दोनों countries में Millions of Indians रहते हैं. इससे पहले भी इन area में war की situation में भारत (India) को अपने citizens को safely बाहर निकालना पड़ा था. साथ ही ये both countries भारत (India) के major oil supplier भी हैं.

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As per data, South Asian Countries में करीब 80 लाख Indians रहते हैं. इसमें से mostly Indian Persian Gulf के तटीय area में रहते हैं. Big numbers में भारतीय ईरान (Iran) के करीब संयुक्त अरब अमीरात यानि के UAE, Bahrain, Qatar and Kuwait में रहते हैं. Foreign Ministry के मुताबिक अकेले ईरान (Iran) में 4000 Indians रहते हैं.

ऐसा माना जा रहा है कि ईरान (Iran) के साथ बढ़ते stress के बीच Trump administration को इन area में अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए Pakistan की requirement होगी. अपने पाले में Pakistan को लाने के लिए अमेरिका (America) Pakistan को financial help कर सकता है.

इससे terrorism पर Pakistan को घेरने की Indian मुहिम को shock लग सकता है. साथ ही Afghanistan में भी भारत (India) के हितों को loss हो सकता है. यही वजह है कि Indian Foreign Minister S. Jaishankar ने ईरान (Iran) से contact साधा है.

भारत (India) और ईरान (Iran) Afghanistan को लेकर एक equal thinking रखते हैं. भारत (India) को इन both countries के stress से बहुत से मोर्चो पर shock लगने वाले हैं.

  1. शेयर बाजार को झटका – Shock to the Stock Market

America Iran War का effect दुनियाभर के stock market पर दिख रहा है. Indian Stock Market भी इससे अछूता नहीं है. Friday को Sensex 162.03 point की गिरावट के साथ 41,464.61 पर close हुआ, Nifty की closing 55.55 points down 12,226.65 पर हुई थी. (America Iran War)

और फिर उसके बाद Monday को भी Stock market में earthquake आ गया है. Sensex 700 points और Nifty 200 point से ज्याद गिर गया. Foreign Investors बड़े पैमाने से Indian Market से investment निकाल रहे हैं. वहीं Indian investors भी tension में हैं.

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  1. तेल सप्लाई हो सकती है बाधित – Oil Supply may be interrupted

अगर America Iran War हुआ तो भारत (India) को crude oil import करने में भी difficulty आएगी. हालांकि last 2 years में ईरान (Iran) और अमेरिका (America) के बीच जारी stress से भारत (India) ने Irani Oil Import को बहुत reduce कर दिया है.

लेकिन अब भी India में oil बड़ी quantity में Iraq, Saudi Arabia, United Arab Emirates से import होता है. जिसका भारत (India) तक पहुंचने का रास्ता Persian Gulf में Hormuz Corridor से होकर गुजरता है. Financial crisis के इस दौर में भारत (India) के लिए expensive oil import जेब पर बहुत costly पड़ सकता है.

  1. तेल की कीमतों में आ सकता है उछाल – Oil Prices May Rise

भारत (India) अपनी requirement का 83% oil import करता है. अमेरिका (America) और ईरान (Iran) में stress से crude oil की price में भी लगातार increment हो रहा है. Friday को Brent Crude Oil 4.4% चढ़कर 69.16 dollar per barrel पर पहुंच गया था.

वहीं Friday को रुपया 42 paisa टूटकर 71.80 per dollar पर आ गया था. War की situation में foreign exchange पर भी very bad effect पड़ेगा. Foreign exchange बढ़ा तो recession और गहरा जाएगी. खाने-पीने की चीजें, Transport, Railways, Private Transport पर भी bad effect होगा. unemployment और बढ़ जाएगी.

  1. विदेशी निवेश पर पड़ेगा असर – Foreign investment will be affected

भारत (India) के अमेरिका (America) और ईरान (Iran) दोनों के साथ अच्छे relations हैं. Investment के नजरिये से भी ये दोनों देश भारत (India) के लिए important है. अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच war होने पर भारत (India) को heavy financial loss होगा.

भारत (India) का 100 billion से ज्यादा का business gulf countries से होता है, और बड़े पैमाने पर investment भी इन इलाकों से है. खासकर चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) पर effect पड़ सकता है. भारत (India) और ईरान (Iran) के बीच year 2014 में चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) और जाहेदान रेल परियोजना (Jahedan Rail Project) को लेकर करार हुआ था.

दोनों countries के बीच चाबहार बंदरगाह (Chabahar Port) को develop करने के लिए भारत (India) के 85 million dollar investment का contract हुआ था, war की situation में इस पर भी bad effect पड़ेगा.

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  1. सोने के दाम में आ सकता है उछाल – Gold Price May Rise

Financial uncertainty के दौरान में हर investor gold जैसे safe option को अपना रहे हैं. जिससे gold prices लगातार increase हो रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव चार महीने के ऊंचे स्तर पर है. (America Iran War)

भारत (India) के Spot and futures market में Monday को gold 41,000 रुपये प्रति 10 gram के psychological level को तोड़ते हुए new high’s पर चला गया है. Market expert’s की मानें तो next three months में Bullion में तेजी का way बना रह सकता है.

  1. महंगाई हो सकती है बेकाबू – Inflation may be Uncontrollable

Crude oil के दाम increase से petrol and diesel की prices में increase होगा. Oil price increase होने से inflation बढ़ेगी. इसका straight effect general लोगों की pocket पर पड़ेगा. Indian Government लगातार महंगाई दर पर control पाने की जी-जान से कोशिश कर रही है.

America Iran War की situation में महंगाई दर के मोर्चे पर Government को heavy shock लग सकता है. November में Retail inflation में heavy increase report की गई. November में खुदरा महंगाई दर 4.62% से बढ़कर 5.54% हो गई.

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  1. वित्तीय घाटा बढ़ सकता है – Financial Losses may increase

Current Indian Government हर हाल से economy को speed देने के लिए financial loss को reduce करने में जुटी है. 30 November तक India का financial loss 8.07 लाख करोड़ rupees है. Financial loss पर जब लगाम लगेगी तब कही जाकर financial growth possible है.

लेकिन ईरान (Iran) और अमेरिका (America) में stress से Indian Government की Income घट जाएगी और expense बढ़ जाएगा. इससे financial loss के मोर्चे पर Indian government को shock लग सकता है.

  1. खाड़ी देशों से लोग घर लौट आएंगे – People from Gulf Countries will Return Home

अगर अमेरिका (America) और ईरान (Iran) में और stress बढ़ता है तो खासकर gulf countries में रह रहे Indians देश वापस आ जाएंगे. इससे भारत (India) को financial position पर heavy loss उठाना पड़ सकता है.

क्योंकि gulf countries ज्यादातर लोग earning के लिए गए हैं और वहां से heavy amount अपने घरों में भेजते हैं. जो भी पैसा foreign  से आता है वो India के Foreign exchange reserves का एक important part बनाता है. अगर ये लोग वापस India आए तो भारत (India) को काफी financial loss होगा.

  1. निर्यात पर पड़ेगा बुरा असर – Exports will be affected

पिछले financial year में भारत (India) ने 32,800 करोड़ रुपये के Basmati Rice का decision किया था. जिसमें से करीब 10,800 करोड़ रुपये का Basmati rice केवल ईरान (iran) को export किया गया था.

इस बार भी बड़े पैमाने से rice export को लेकर ईरान (Iran) से agreement हुआ है. लेकिन war की situation में export पर effect पड़ना possible है. इसके अलावा tea Export को भी भारी झटका लग सकता है.

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  1. 5 ट्रिलियन का लक्ष्य नहीं हो पायेगा पूरा – 5 Trillion Target Will Not Be Met

सबसे अहम Indian Modi Government ने 2024 तक भारत (India) को 5 Trillion Dollar की economy वाला देश बनाने का target रखा है. इस target तक पहुंचने के लिए भारत (India) को अमेरिका (America) और ईरान (Iran) दोनों की indirectly जरूरत होगी.

Large scale पर इन दोनों देशों से भारत (India) में investment की उम्मीद की जा रही है. क्योंकि 5 trillion economy के लिए foreign investor की अहम भूमिका होगी. Expert’s का कहना है कि Government investment के जरिये इस target को achieve नहीं किया जा सकता है. ऐसे में America Iran war हुआ तो भारत (India) इस target को पूरा नहीं कर पाएगा.

अब आगे क्या? – Now What’s Next?

भारत (India) के सामने biggest challenge यह है कि यदि America Iran War हुई तो India किसके साथ खड़ा हो? एक तरफ ईरान (Iran) है जिससे हमारे historical relationship होने का साथ-साथ crude oil के लिए निर्भरता भी है. (America Iran War)

तो दोस्तों यह थी अब तक की America and Iran से वाले India को loss की. अगर आपको यह पोस्ट पसंद आये तो शेयर करना न भूले, धन्यवाद.

हालांकि, अमेरिकी सेंक्शन के कारण ईरान (Iran) से तेल नहीं खरीदने से होने वाली कमी को साउदी अरब और युएई जैसे देशों से पूरी कि जा सकती लेकिन ईरान (Iran) हमें CIF mode of shipping से तेल निर्यात करता है और साथ ही 60 दिनों के अंदर भुगतान करने की सुविधा भी देता है.

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इसका मतलब यह है कि खरीदे गए माल को सुरक्षीत भारतीय पोर्ट में पहुंचाने का पूरा खर्च ईरान (Iran) वहन करता है और दो महीनें का क्रेडिट भी देता है. दूसरी ओर अमेरिका (America) है जिससे हमारा व्यापारिक और रणनीतिक हित जुड़ा हुआ है.

अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री मोदी, नेहरू जी की गुट- निरपेक्षता की विदेश नीति को कायम रखते है या मोदी नीति अपनाते है. वैसे यह बुध्द का देश है और वे मध्य मार्ग की बात करते हैं.

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