दुनिया का बादशाह कौन – Baadshah aur Fakir ki Kahani
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दुनिया का बादशाह कौन – Baadshah aur Fakir ki Kahani

दुनिया का बादशाह कौन – Baadshah aur Fakir ki Kahani

पंजाब में युद्ध करके जब सिकन्दर वापस लौट रहा था, तो रास्ते में उसे एक फकीर मिला। बड़ा मस्त था वह फकीर। एक पेड़ के नीचे बैठा हआ बेफ़िक्री से भजन गा रहा था। सिकन्दर उसके पास खड़ा हो गया; सोच रहा था कि मुझे देख कर वह फकीर उठ कर खड़ा हो जायेगा। लेकिन उस फकीर ने कहा- “एक तरफ़ हट जाओ। धूप आने दो।” (Baadshah aur Fakir ki Kahani)

सिकन्दर बोला- “तुम्हें पता है कि मैं कौन हूँ?’ फकीर ने भी कहा- “तुम्हें पता है कि मैं कौन हूँ?’ सिकन्दर ने जवाब दिया- “तुम फकीर हो।’ फकीर ने कहा- “नहीं, मैं दुनिया का बादशाह हूँ।” सिकन्दर ने ताज्जुब से कहा- “दुनिया के बादशाह तुम! तुम!!” “हाँ-हाँ’-फकीर ने कहा- “दुनिया का बादशाह मैं।”

सिकन्दर बोला- “लेकिन, आधी दुनिया तो मैंने जीती है। दुनिया का बादशाह तो मैं हूँ।”

फकीर ने कहा- “लेकिन, दुनिया के बादशाह तुम्हारी तरह मारे-मारे नहीं फिरते। मुझे देखो न! बेफिक्री और मस्ती का खज़ाना भरा पड़ा है मेरे अन्दर। यह है दुनिया के बादशाह का लक्षण।” ।

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सिकन्दर ने पूछा- “लेकिन, तुम मस्त कैसे बने?’ “अपने स्वार्थ को भूल कर दूसरों के हित की बात सोच कर। दूसरों को प्यार करके। दूसरों पर करुणा करके। घृणा की आग बुझाने के लिए प्रेम की वर्षा करके।”- फकीर बोला।

सिकन्दर सुनता रहा। सोचता रहा—मैं विजय प्राप्त करने के लिए मारा-मारा फिरता रहा हूँ, लेकिन दौलत के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा। और इस फकीर ने बैठे-बैठे ही दुनिया की बादशाहत पा ली।

दौलत से भी ऊँचे होते हैं निस्स्वार्थता, करुणा और प्रेम के गुण। जिसके पास ये गुण हैं, वही दुनिया का बादशाह है।

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