योग गुरु स्वामी रामदेव जी के 10 प्रेरणादायक वचन , Yog Guru Baba Ramdev Biography In Hindi
Biography in Hindi Facts in Hindi

Baba Ramdev Biography and Quotes in Hindi

योग गुरु स्वामी रामदेव जी के 10 प्रेरणादायक वचन – Yog Guru Baba Ramdev Biography In Hindi

Baba Ramdev Biography and Quotes in Hindi – योग गुरु स्वामी रामदेव (swami Ramdev) को कौन नहीं जानता, स्वामी रामदेव किसी परिचय के मोहताज (he don’t need any introduction) नहीं हैं।

स्वामी रामदेव ने योग को एक नया आयाम (new dimensions to yog) दिया है या यूँ कहें कि योग को जन जन तक पूरी दुनिया (whole world) में पहुँचाने में स्वामी रामदेव का बहुत बड़ा (very big contribution) योगदान है। तो आइये जानते हैं (lets know about) योग गुरु स्वामी रामदेव के कुछ अनमोल प्रेरणादायक वचन (valuable motivational and inspirational quotes of baba Ramdev).

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बाबा रामदेव से जुड़ी 15 रोचक जानकारियाँ – 15 Facts of Baba Ramdev

  1. क्या बाबा रामदेव (Baba Ramdev) धूम्रपान करते हैं ? नहीं
  1. क्या बाबा रामदेव (Baba Ramdev) शराब पीते हैं ? नहीं
  1. रामदेव (Baba Ramdev) ने आठवीं कक्षा तक स्कूल में पढ़ाई की, और फिर वह बाद में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय (university) में चले गए। उन्होंने वहा से संस्कृत और योग में अध्ययन (study) किया।
  1. वर्ष 1990 में उन्होंने त्रिपुरा योग आश्रम, कनखल, हरिद्वार में आचार्य बालकृष्ण (acharya balkrishan) से मुलाकात की, और बाद में वह दोनों हिमालय में अध्ययन (study) करने के लिए चले गए। जहां रामदेव (Baba Ramdev) ने योग पर और बालकृष्ण ने आयुर्वेद पर अपना ध्यान केंद्रित (focus) किया।
  1. एक संन्यासी बनने के बाद उन्होंने अपना नाम (change name) बदलकर बाबा रामदेव रख (Baba Ramdev) लिया और योग करना शुरू कर दिया।
  1. उन्होंने हिंदू शास्त्रों का गहन अध्ययन (deep research) किया है और हरिद्वार में अलग-अलग गुरुओं (various teachers) से शिक्षा हासिल की हैं।
  1. बचपन में अधिक दवाइयों (medicines) के सेवन के कारण उनका शरीर लकवाग्रस्त (handicapped) हो गया था। उनके शरीर के बाईं तरफ के हिस्से (left side) ने काम करना बंद कर दिया था। वह अपने स्वास्थ्य (health) में चमत्कारी लाभ के लिए योग को श्रेय देते है।
  1. वर्ष 1996 में, उन्होंने आचार्य करमवीर (acharya karamveer)  के साथ मिलकर “दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट” कि स्थापना की।
  1. वर्ष 2003 में, उन्होंने आस्था टीवी (Astha TV) पर योग दिखाना शुरू कर दिया।
  1. प्राणायाम कार्यक्रम )program) के दौरान वह 7 प्रकार से साँस लेने का अभ्यास (practice – अनुक्रम में) करते हैं, जैसे कि- भस्त्रिका प्राणायाम, कपालभाती प्राणायाम, बाह्य प्राणायाम, अनुलोम विलोम प्राणायाम (pranayam), भ्रामरी प्राणायाम, उद्गीथ प्राणायाम और प्रणव प्राणायाम।
  1. वह बिस्मिल्ला ख़ाँ और सुभाष चंद्र बोस (subhash chander bose) को अपना आदर्श मानते हैं।
  1. वर्ष 2006 में, उन्होंने हरिद्वार, उत्तराखंड में “पतंजलि योगपीठ” (Patanjali Yogpeeth) की स्थापना की, जिसमे लगभग 6000 लोगों की क्षमता के साथ आयुर्वेद (aurveda) और योग के लिए विश्व का सबसे बड़े केंद्र (biggest center of world) माना जाता है। बाबा रामदेव पतंजलि योगपीठ|
  1. उन्होंने अपने व्यापारिक (businesS) उद्यम का नाम महर्षि पतंजलि के नाम पर रखा। बाबा रामदेव (Baba Ramdev) के गुरु महर्षि पतंजलि|
  1. वह एक अत्यंत परिश्रमी व्यक्ति (hard working person) हैं। वह सुबह 3 बजे उठ जाते हैं और 18 से 20 घंटे तक कार्य (work) किया करते हैं।
  1. ऐसा माना जाता हैं कि वह कोई भी अनाज नहीं खाते (not eating grain) और वह केवल उबली हुई सब्जियां, फल और गाय का दूध (milk) पीते हैं।

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बाबा रामदेव के 65 प्रेरणादायक वचन – 65 Prernadayak Vachan of Baba Ramdev

  1. अगर जीवन में समृद्धि (growth) और सफलता (success) चाहिये तो सबसे पहले आलस्य का (sacrifice your laziness) त्याग करो।
  1. माता-पिता (parents) का अपनी संतान (children’s) के लिये,गुरुजनों (teachers) का अपने शिष्यों (students) के लिये,देशभक्तों (patriots) का अपने देश (राष्ट्र- country) के लिये प्रेम ही सच्चा प्रेम (true love) है।
  2. किसी रोगी (patient) को आरोग्य (health) देना एक सच्ची सेवा (true service) है।
  1. हमारे सुख-दुःख का कारण कोई अन्य व्यक्ति (other problem) या परिस्थियां (situation) नहीं बल्कि हमारे अच्छे एवं बुरे विचार (our good or bad thoughts) ही होते हैं।
  1. मैं जब तक जीयूंगा देश के लिये समर्पित (dedicated to my country) रहूँगा और देश के हित (for my country) में कुछ भी करना पड़े तो जरूर करूँगा।
  1. आहार (diet) से मानव का स्वभाव और प्रकृति (tendency and nature) प्रभावित होती है,शाकाहार (vegetarian) से स्वभाव शांत और गंभीरता (calm and serious) आती है जबकि मांसाहार (non-veg) से मानव हिंसक और उग्र (angry and aggressive) बनता है। (Baba Ramdev Biography)
  1. अपने अतीत (future) को कभी मत (never forgot) भूलो,अतीत का स्मरण (always remember your past) हमे गलतियाँ दोहराने (repeating same mistake) से बचाता है।
  1. जीवन को छोटे लक्ष्यों (small targets) को समर्पित करना, जीवन का अपमान (insult) है।
  1. माता-पिता (parents) से बड़कर ना ही कोई पूजा (prayer) है और ना ही कोई धाम है। इस धरती पर माता-पिता (parents are god) ही भगवान हैं।
  1. बिना कर्म (work) के जीवन का कोई अस्तित्व (no presence) नहीं है अतः हमेशा अपना कर्म (always do your work) करते रहें।

बाबा रामदेव के अनमोल वचन

  1. जीवन भगवान (bhagwan) की सबसे बडी सौगात है। मनुष्य का जन्म हमारे लिए भगवान (bhagwan) का सबसे बडा उपहार है।
  1. जीवन को छोटे उद्देश्यों (objective) के लिए जीना जीवन का अपमान है। (Baba Ramdev Biography)
  1. अपनी आन्तरिक क्षमताओं (internal capabilities) का पूरा उपयोग करें तो हम पुरुष से महापुरुष, युगपुरुष, मानव से महामानव (mahamanav) बन सकते हैं।मैं परमात्मा का प्रतिनिधि हूँ।
  1. मैं माँ भारती (ma bharti) का अम्रतपुत्र हूँ, “माता भूमि: पुत्रोहं प्रथिव्या:”
  1. प्रत्येक जीव की आत्मा (soul) में मेरा परमात्मा विराजमान है।
  1. मैं पहले माँ भारती का पुत्र (son) हूँ बाद में सन्यासी, ग्रहस्थी, नेता अभिनेता, कर्मचारी (employee) , अधिकारी या व्यापारी हूँ।
  1. “इदं राष्ट्राय इदन्न मम” मेरा यह जीवन राष्ट्र के लिए है।
  1. मैं सदा प्रभु (prabhu) में हूँ, मेरा प्रभु सदा मुझमें है।
  1. मैं सौभाग्यशाली (lucky) हूँ कि मैंने इस पवित्र भूमि व देश में जन्म लिया है।
  1. और मैं अपने जीवन पुष्प (jeevan pushp)से माँ भारती की आराधना करुँगा।
  1. मैं पुरुषार्थवादी, राष्ट्र्वादी, मानवतावादी (humanity) व अध्यात्मवादी हूँ।
  1. कर्म ही मेरा धर्म (religion) है। कर्म ही मेरि पूजा है। (Baba Ramdev Biography)
  1. मैं मात्र एक व्यक्ति (person) नहीं, अपितु सम्पूर्ण राष्ट्र व देश की सभ्यता व संस्कृति (culture) की अभिव्यक्ति हूँ।
  1. निष्काम कर्म, कर्म का अभाव नहीं, कर्तृत्व के अहंकार (Attitude) का अभाव होता है।

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Baba Ramdev Quotes in Hindi

  1. पराक्रमशीलता, राष्ट्रवादिता, पारदर्शिता, दूरदर्शिता, आध्यात्मिक (spiritually) , मानवता एवं विनयशीलता मेरी कार्यशैली के आदर्श हैं।
  1. जब मेरा अन्तर्जागरण हुआ तो मैंने स्वयं (myself) को संबोधि व्रक्ष की छाया में पूर्ण त्रप्त पाया।
  1. इन्सान का जन्म (birth) ही, दर्द एवं पीडा के साथ होता है। अत: जीवन भर जीवन में काँटे रहेंगे। उन काँटों के बीच तुम्हें गुलाब के फूलों (rose flower) की तरह, अपने जीवन-पुष्प को विकसित करना है।
  1. ध्यान-उपासना के द्वारा जब तुम ईश्वरीय शक्तियों (powers of god) के संवाहक बन जाते हो तब तुम्हें निमित्त बनाकर भागवत शक्ति कार्य (working) कर रही होती है।
  1. बाह्य जगत में प्रसिध्दि (famous) की तीव्र लालसा का अर्थ है-तुम्हें आन्तरिक सम्रध्द व शान्ति उपलब्ध (availability) नहीं हो पाई है।
  1. ज्ञान (knowledge) का अर्थ मात्र जानना नहीं, वैसा हो जाना है।द्रढता हो, जिद्द नहीं। बहादुरी हो (bravery), जल्दबाजी नहीं। दया हो, कमजोरी नहीं। (Baba Ramdev Biography)
  1. मेरे भीतर (inside) संकल्प की अग्नि निरंतर प्रज्ज्वलित है। मेरे जीवन (life) का पथ सदा प्रकाशमान है।
  1. सदा चेहरे पर प्रसन्नता (happiness) व मुस्कान रखो। दूसरों को प्रसन्नता दो, तुम्हें प्रसन्नता (happiness) मिलेगी।
  1. माता-पिता (parents) के चरणों में चारों धाम हैं। माता-पिता (parents) इस धरती के भगवान हैं।
  1. “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्यदेवो भव, अतिथिदेवो भव” की संस्कृति (culture) अपनाओ!
  1. अतीत (past) को कभी विस्म्रत न करो, अतीत का बोध हमें गलतियों (mistakes) से बचाता है।
  1. यदि बचपन व माँ (mother) की कोख की याद रहे तो हम कभी भी माँ-बाप के क्रतघ्न नहीं हो सकते। अपमान (insult) की ऊचाईयाँ छूने के बाद भी अतीत की याद व्यक्ति (person) के जमीन से पैर नहीं उखडने देती।
  1. सुख बाहर से नहीं भीतर (inside) से आता है।
  1. भगवान (bhagwan) सदा हमें हमारी क्षमता, पात्रता व श्रम से अधिक (more) ही प्रदान करते हैं।
  1. हम मात्र प्रवचन से नहीं अपितु आचरण (behavior) से परिवर्तन करने की संस्कृति में विश्वास (believe) रखते हैं।
  1. विचारवान व संस्कारवान ही अमीर (rich and great) व महान है तथा विचारहीन ही कंगाल व दरिद्र है।
  1. भीड में खोया हुआ इंसान (person) खोज लिया जाता है परन्तु विचारों की भीड के बीहड में भटकते हुए इंसान (person) का पूरा जीवन अंधकारमय हो जाता है। (Baba Ramdev Biography)

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बाबा रामदेव के अनमोल कथन

  1. बुढापा (old age) आयु नहीं, विचारों का परिणाम है।
  1. विचार शहादत, कुर्बानी, शक्ति, शौर्य, साहस (bravery) व स्वाभिमान है। विचार आग व तूफान है साथ ही शान्ति व सन्तुष्टी (satisfaction) का पैगाम है।
  1. पवित्र विचार-प्रवाह ही जीवन (life) है तथा विचार-प्रवाह का विघटन ही मत्यु (death) है।
  1. विचारों (thoughts) की अपवित्रता ही हिंसा, अपराध, क्रूरता, शोषण, अन्याय, अधर्म और भ्रष्टाचार (corruption) का कारण है।
  1. विचारों की पवित्रता (purity) ही नैतिकता है।
  1. सदविचार ही सद्व्यवहार (good behavior) का मूल है।
  1. विचारों का ही परिणाम (result) है-हमारा सम्पूर्ण जीवन। विचार ही बीज (seed) है, जीवनरुपी इस व्रक्ष का।
  1. विचारशीलता ही मनुष्यता (humanity), और विचारहीनता ही पशुता है।
  1. पवित्र विचार प्रवाह ही मधुर (calm) व प्रभावशाली वाणी का मूल स्त्रोत है।
  1. अपवित्र विचारों से एक व्यक्ति (person) को चरित्रहीन बनाया जा सकता है, तो शुध्द सात्विक एवं पवित्र विचारों (sacred thoughts) से उसे संस्कारवान भी बनाया जा सकता है। (Baba Ramdev Biography)
  1. हमारे सुख-दुःख का कारण दूसरे व्यक्ति (person) या परिस्थितियाँ नहीं अपितु हमारे अच्छे या बूरे विचार (thoughts) होते हैं।
  1. वैचारिक दरिद्रता ही देश (country) के दुःख, अभाव पीडा व अवनति का कारण है।
  1. वैचारिक द्रढता ही देश (country) की सुख-सम्रध्दि व विकास (growth) का मूल मंत्र है।
  1. हमारा जीना व दुनियाँ (world) से जाना ही गौरवपूर्ण होने चाहिए।
  1. आरोग्य (living healthy) हमारा जन्म सिध्द अधिकार है।
  1. उत्कर्ष के साथ संघर्ष (struggle) न छोडो!
  1. बिना सेवा (helping) के चित्त शुध्दि नहीं होती और चित्तशुध्दि के बिना परमात्मतत्व की अनुभूति (feeling) नहीं होती।

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Baba Ramdev Quotes (Baba Ramdev Biography)

  1. आहार से मनुष्य का स्वभाव (behavior) और प्रक्रति तय होती शाकाहार से स्वभाव शांत रहता मांसाहार मनुष्य को उग्र (aggressive) बनाता है।
  1. जहाँ मैं और मेरा जुड जाता है वहाँ ममता, प्रेम (love), करुणा एवं समर्पण होते हैं। (Baba Ramdev Biography)
  1. स्वधर्म में अवस्थित रहकर स्वकर्म से परमात्मा (prayer of god) की पूजा करते हुए तुम्हें समाधि व सिध्दि मिलेगी।
  1. प्रेम, वासना नहीं उपासना (worship) है। वासना का उत्कर्ष प्रेम की हत्या है, प्रेम समर्पण एवं विश्वास (trust) की परकाष्ठा है।
  1. माता-पिता (parents) का बच्चों के प्रति, आचार्य का शिष्यों के प्रति, राष्ट्रभक्त (patriot) का मातृभूमि के प्रति ही सच्चा प्रेम है।

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