Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani | बच्चो के लिए 5 प्रेरणादायक कहानियां
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Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani | बच्चो के लिए 5 प्रेरणादायक कहानियां

Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani | बच्चो के लिए 5 प्रेरणादायक कहानियां

बड़ा बनने के लिए बड़ा सोचो | Think Big and Grow Big

अत्यंत गरीब परिवार (family) का एक  बेरोजगार युवक (Unemployed youth) नौकरी की तलाश में किसी दूसरे शहर (city) जाने के लिए रेलगाड़ी से सफ़र (travel) कर रहा था | घर में कभी-कभार ही सब्जी (food) बनती थी, इसलिए उसने रास्ते में खाने के लिए सिर्फ रोटीयां (roti) ही रखी थी |

आधा रास्ता गुजर (half way) जाने के बाद उसे भूख लगने लगी, और वह टिफिन (tifin) में से रोटीयां निकाल कर खाने लगा | उसके खाने (eating) का तरीका कुछ अजीब था , वह रोटी का एक टुकड़ा (piece) लेता और उसे टिफिन के अन्दर कुछ ऐसे डालता मानो रोटी (roti) के साथ कुछ और भी खा रहा हो, जबकि उसके पास तो सिर्फ रोटीयां (roti) थीं!!

उसकी इस हरकत को आस पास (nearby) के और दूसरे यात्री देख कर हैरान (shocked) हो रहे थे | वह युवक हर बार रोटी का एक टुकड़ा (piece of roti) लेता और झूठमूठ का टिफिन में डालता और खाता | सभी सोच nk) रहे थे कि आखिर वह युवक ऐसा क्यों कर रहा था |

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परियों की कहानी – Pariyon ki Kahani

आखिरकार (and then) एक व्यक्ति से रहा नहीं गया और उसने उससे पूछ ही लिया की भैया (brother) तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, तुम्हारे पास सब्जी (sabji) तो है ही नहीं फिर रोटी के टुकड़े को हर बार खाली टिफिन (tiffin) में डालकर ऐसे खा रहे हो मानो उसमे सब्जी (sabji) हो |

तब उस युवक (boy) ने जवाब दिया, “भैया , इस खाली ढक्कन (empty cover) में सब्जी नहीं है लेकिन मै अपने मन (mind) में यह सोच कर खा रहा हू की इसमें बहुत सारा आचार (pickle) है,  मै आचार के साथ रोटी (roti) खा रहा हू|” (Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani)

फिर व्यक्ति (person) ने पूछा , “खाली ढक्कन में आचार (pickle) सोच कर सूखी रोटी को खा रहे हो तो क्या तुम्हे आचार (pickle) का स्वाद आ रहा है ?”

“हाँ, बिलकुल आ रहा है , मै रोटी (roti) के साथ अचार सोचकर खा (eat) रहा हूँ और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा है |”, युवक ने answer दिया|

उसके इस बात को आसपास (nearby) के यात्रियों ने भी सुना, और उन्ही में से एक व्यक्ति (person) बोला , “जब सोचना ही था तो तुम आचार की जगह पर मटर-पनीर (muttor paneer) सोचते, शाही गोभी सोचते….तुम्हे इनका स्वाद (taste) मिल जाता| तुम्हारे कहने के मुताबिक तुमने आचार (pickle) सोचा तो आचार का स्वाद आया तो और स्वादिष्ट चीजों (tasty things) के बारे में सोचते तो उनका स्वाद (taste) आता| सोचना ही था तो भला छोटा क्यों सोचे तुम्हे (think small) तो बड़ा सोचना चाहिए था |”

Friends, इस story से हमें यह lesson मिलती है की जैसा सोचोगे वैसा पाओगे | छोटी सोच (small thinking) होगी तो छोटा मिलेगा, बड़ी सोच (big thinking) होगी तो बड़ा मिलेगा | इसलिए जीवन में हमेशा बड़ा सोचो | बड़े सपने (dreams) देखो, तो हमेश बड़ा ही पाओगे |

छोटी सोच में भी उतनी ही उर्जा और समय (energy and time) खपत होगी जितनी बड़ी सोच में, इसलिए जब सोचना (thinking) ही है तो हमेशा बड़ा ही सोचो|

Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani | बच्चो के लिए 5 प्रेरणादायक कहानियां

चिल्लाओ मत | Don’t’ Shout

एक हिन्दू सन्यासी (Hindu Sanyasi) अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने (bath) पहुंचा. वहां एक ही परिवार (family) के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित (angry) हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे.

संयासी (sanyasi) यह देख तुरंत पलटा और अपने शिष्यों (students) से पुछा ;

” क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं?’

शिष्य (student) कुछ देर सोचते रहे ,एक ने उत्तर दिया, ” क्योंकि हम क्रोध (anger) में शांति खो देते हैं इसलिए !”

” पर जब दूसरा व्यक्ति (person) हमारे सामने ही खड़ा है तो भला उस पर चिल्लाने (shout) की क्या ज़रुरत है, जो कहना है वो आप धीमी आवाज़ (slow voice) में भी तो कह सकते हैं “, सन्यासी ने पुनः प्रश्न किया.

कुछ और शिष्यों (students) ने भी उत्तर देने का प्रयास किया पर बाकी लोग संतुष्ट (satisfy) नहीं हुए.

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अंततः सन्यासी ने समझाया …

“जब दो लोग आपस में नाराज (angry) होते हैं तो उनके दिल एक दूसरे से बहुत दूर (far away) हो जाते हैं . और इस अवस्था (situation) में वे एक दूसरे को बिना चिल्लाये (shouting) नहीं सुन सकते … .वे जितना अधिक क्रोधित (angry) होंगे उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक (more) हो जाएगी और उन्हें उतनी ही तेजी से चिल्लाना (shout) पड़ेगा.

क्या होता है जब दो लोग प्रेम (love) में होते हैं ? तब वे चिल्लाते (shout) नहीं बल्कि धीरे-धीरे बात करते हैं , क्योंकि उनके दिल करीब (near heart) होते हैं , उनके बीच की दूरी नाम मात्र की रह जाती है.” (Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani)

सन्यासी (sanyasi) ने बोलना जारी रखा ,” और जब वे एक दूसरे (each other) को हद से भी अधिक चाहने लगते हैं तो क्या होता है ? तब वे बोलते (talking) भी नहीं , वे सिर्फ एक दूसरे की तरफ देखते (see each other) हैं और सामने वाले की बात समझ (understand) जाते हैं.”

“प्रिय Students; जब तुम किसी से बात करो तो ये ध्यान are) रखो की तुम्हारे ह्रदय आपस में दूर (away) न होने पाएं , तुम ऐसे शब्द मत बोलो जिससे तुम्हारे बीच की दूरी बढे (increase difference) नहीं तो एक समय (time) ऐसा आएगा कि ये दूरी इतनी अधिक बढ़ (increase more) जाएगी कि तुम्हे लौटने का रास्ता भी नहीं मिलेगा. इसलिए चर्चा (discussion) करो, बात करो लेकिन चिल्लाओ मत.”

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जौहरी की मूर्खता | Stupidity of Jeweler

एक बार एक गांव में मेला (mela) लगा हुआ था| मेले (mela) में एक अनपढ़ आदमी ने कांच के सामान (glass shop) की दुकान लगा रखी थी| दुकान में रंग-बिरंगे अलग-

अलग कांच (glass) के बने हुए सुंदर आभूषण और कई तरह के कांच के टुकड़े (glass piece) सजे हुए थे| लोग अलग-अलग दुकानों (different shops) पर सामान देख रहे थे और खरीद रहे थे| 

मेले (mela) में एक जौहरी भी आया| अचानक उसकी नजर उस दुकान (shopमें रखे हुए एक कांच के टुकड़े (glass piece) पर पड़ी जो सबसे ज्यादा चमक रहा था|

जौहरी (jeweler) को देखते ही समझ में आ गया कि वह कांच का टुकड़ा एक मूल्यवान हीरा है|

उसने दुकानदार (shopkeeper) से पूछा:-” यह कांच का टुकड़ा कितने का दोगे?”

दुकानदार (shopkeeper) बोला:-” 20 रुपए|”

जौहरी बोला:-” 15 रुपए का दोगे?”

दुकानदार (shopkeeper) ने मना कर दिया|

जोहरी (jeweler) नहीं सोचा थोड़ी देर घूम फिर कर आता हूं, हो सकता है वापस आने पर दुकानदार (shopkeeper) का मन बदल जाए|

थोड़ी देर बाद जोहरी (jeweler)जब वापस लौटा तो उसने देखा कि वह कांच का टुकड़ा (glass piece) दुकान से गायब था| यह सब देखते ही जोहरी (jeweler)को गुस्सा आ गया.

और उसने तुरंत दुकानदार (shopkeeper) से पूछा:-” वह कांच का टुकड़ा कहां गया|”

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दुकानदार (shopkeeper) बोला:-” वह तो मैंने 25 रुपए में बेच दिया|” (Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani)

जौहरी (jeweler)ने झुंझला कर कहा:-” तुम बड़े मुर्ख (stupid) हो| वह कांच नहीं, बल्कि बहुत कीमती हीरा (precious diamond) था जिसकी कीमत 1 लाख रुपए थी|”

दुकानदार (shopkeeper) बोला:” मूर्ख मैं नहीं, मूर्ख (stupid) तुम हो| जब तुम्हें पता था कि वह कांच का टुकड़ा (glass piece) बहुत कीमती है फिर भी तुमने उसका मोलभाव (bargain किया और 15 रुपए पर अड़े रहे|” यह सुनकर जोहरी (jeweler) को अपनी stupidity पर बहुत पछतावा हुआ| (Bacchon Ke Liye)

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अवसर की पहचान | Identify the Chance

एक बार एक ग्राहक (customer) चित्रो की दुकान पर गया । उसने वहाँ पर अजीब से चित्र (picture) देखे। पहले चित्र (picture) मे चेहरा पूरी तरह बालो से ढँका (covered with hairs) हुआ था और पैरोँ मे पंख थे ।एक दूसरे चित्र (picture) मे सिर पीछे से गंजा था।

ग्राहक (customer) ने पूछा – यह चित्र (picture) किसका है?

दुकानदार (shopkeeper) ने कहा – अवसर का ।

ग्राहक (customer) ने पूछा – इसका चेहरा बालो से ढका क्यो है?

दुकानदार (shopkeeper) ने कहा -क्योंकि अक्सर जब अवसर (chance) आता है तो मनुष्य उसे पहचानता नही है ।

ग्राहक (customer) ने पूछा – और इसके पैरो मे पंख क्यो है?

दुकानदार (shopkeeper) ने कहा – वह इसलिये कि यह तुरंत वापस भाग (run back) जाता है, यदि इसका उपयोग (use) न हो तो यह तुरंत उड़ जाता है ।

ग्राहक (customer) ने पूछा – और यह दूसरे चित्र (picture) मे पीछे से गंजा सिर किसका है?

दुकानदार (shopkeeper) ने कहा – यह भी अवसर का है । यदि अवसर (chance) को सामने से ही बालो से पकड़ लेँगे तो वह आपका (yours) है ।अगर आपने उसे थोड़ी देरी से पकड़ने की कोशिश (try) की तो पीछे का गंजा सिर हाथ आयेगा और वो फिसलकर (slip) निकल जायेगा । वह ग्राहक (customer) इन चित्रो का रहस्य जानकर हैरान था पर अब वह बात समझ (understand) चुका था ।

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बेवकूफ गधा– A Stupid Donkey story

Vikas जिस ऑफिस (office) में काम करता था उसमें ऐसे लोग भी थे जो Vikas के अच्छे काम से बहुत चिढ़ते थे| एक दिन जब Vikas खाना खा रहा था| तो उसे अपने पीछे वाली टेबल (table) पर कुछ फुसफुसाहट सुनाई दी| टेबल (table) के बीच में लकड़ी की एक दीवार थी|

Vikas कान लगाकर सुनने लगा| उसने सुना कि उसके ऑफिस (office) के 2 लोग प्रमोशन (promotion) के बारे में कुछ बात कर रहे हैं| उसमें से एक ने कहा इस बार वह चाहे जो भी कर ले उसे प्रमोशन (promotion) नहीं लेने दूंगा|

दूसरा बोला लेकिन ऐसा क्यों? इस पर पहला बोला, बॉस (boss) ने कहा है कि वह अगले महीने तक Vikas को कोई ना कोई बहाना (trick) बनाकर बाहर निकाल देंगे|

अब Vikas जल्दी-जल्दी खाना खा अपना काम करने लगा एक हफ्ता बीत (1 week) गया| एक दिन बॉस ने Vikas को अपने कमरे (room) में बुलाया और और उससे पूछा:- Vikas, आजकल तुम्हारे काम की speed कुछ कम हो गई है ऐसा क्यों है? क्या कोई special बात है?

Vikas को लगा कि अपने बारे में जो कुछ मैंने सुना था वह बात अब true होने जा रही है| Vikas बोला, सर, मुझे पता है कि आप मुझे company से निकालना चाहते हैं|

Vikas की इस बात को सुनकर बहुत परेशान (tense) हो गए और उन्होंने पूछा, यह बात तुम्हारे दिमाग में किसने डाली कि कंपनी (company) तुमको निकालना चाहती है| Vikas ने पूरी घटना अपने बॉस को सुनाई| बॉस (boss) बोले, तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं|

क्या है टिक-टॉक? | What is Tik Tok?

जंगल (jungle) में एक गधा (donkey) रहता था औरवह शेर (tiger) का बहुत अच्छा मित्र था| शेर (tiger) हर रोज एक जानवर को खा जाता था लेकिन क्योंकि गधा (donkey) उसका दोस्त था इसलिए शेर (tiger) उसकी तरफ कभी भी नहीं देखता था|

लोमड़ी (fox) को यह बात हजम नहीं होती थी| एक दिन जब गधा (donkey) एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था तो लोमड़ी (fox)और खरगोश पेड़ (tree) के पीछे जाकर बात करने लगे| (Bacchon Ke Liye 5 Prernadayak Kahani)

अब गधे (donkey) से रहा नहीं गया| गधा (donkey) उनकी बातें सुनने लगा| लोमड़ी बोली, पता है, गधा (donkey) अभी तक कुंवारा क्यों हैं?

क्योंकि जो भी गधी जंगल (jungle) में आती है शेर (tiger) उसे खा जाता है| गधे (donkey) को इस बात से बड़ी ठेस पहुंची| लोमड़ी की वजह से गधे (donkey) और शेर (tiger) के बीच में दरार आ गई थी| एक दिन जब शेर (tiger) अपने शिकार पर निकला तो गधा (donkey) उससे जाकर बैठ गया और बोला मैं तुम्हें शिकार (shikar) नहीं करने दूंगा| (Bacchon Ke Liye)

शेर (tiger) ने उसे बहुत समझाया लेकिन गधा (donkey) नहीं समझा|आखिरकार बेचारा गधा (donkey) शेर (tiger) का शिकार बन गया|

Boss हंसते हुए बोले, देखो Vikas, लोमड़ी हर जगह मिलेगी, जो तुम्हारे काम को, तुम्हारे relation को खराब करने की try करेगी| यह तुम्हें तय करना है कि तुम क्या करोगे?

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