बहनों की ताक़त – Behno ki Kahani
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बहनों की ताक़त – Behno ki Kahani

बहनों की ताक़त – Behno ki Kahani

जब इस देश पर अँगरेज शासन कर रहे थे, तब की बात है। (Behno ki Kahani)

गान्धी जी ने सोचा कि शराब की बिक्री का विरोध किया जाये। जब शराब बिक रही हो, उस समय शराब के विरोध में नारे लगाये जायें. धरना दिया जाये।

बुरा जो देखन मैं चला

कौन करेगा यह काम?—यह प्रश्न उठा। “बहनें करेंगी।” गान्धी जी का उत्तर था।

“शराबियों के बीच बहनें कैसे कर पायेंगी यह काम?”-दूसरा प्रश्न उठा।

गान्धी जी ने कहा-“बहनों के प्यार में बड़ी ताक़त होती है। इस ताकत से वे सारी दुनिया को जीत सकती हैं।”

और, बहनों ने धरना दिया शराब की दुकानों पर। पुलिस की लाठियाँ खायीं। शराबी लोग शरमिन्दा हुए। कई शराबियों ने तो हमेशा-हमेशा के लिए शराब छोड़ दी।

बच्चो, तुम्हारी अपनी बहनें, पास-पड़ोस की बहनें, स्कूल में तुम्हारे साथ पढ़ने वाली बहनें, जानी-अनजानी बहनें—सबके अन्दर एक बहुत बड़ी ताक़त छिपी पड़ी है। भाई बन कर तुम उन्हें प्यार करोगे तथा सम्मान दोगे, तो वे अपनी ताक़त तुम्हारे ऊपर न्यौछावर करने के लिए तैयार हो जायेंगी।

भैयादूज के रोज बहनें जब तक अपने भाई के रोचना न लगा लें, तब तक भूखी बैठी रहती हैं तो क्या यों ही? नहीं, इसके पीछे एक छिपी हुई बात है। भाई जितनी ललक से रोचना लगवाता है, उतनी ही ललक से बहन अपने प्यार की ताक़त उसे दे देती है। फिर वह रक्षाबन्धन के दिन कहती है- “मैंने अपनी ताक़त तुम्हें दे दी, अब रक्षा करो मेरी।”

बच्चो! भाई-बहन के बीच जो यह प्यार-भरा लेन-देन चलता है, इसमें छिपी बहनों के प्यार की ताक़त की बात को कभी न भूलना।

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