Bhagat Singh ke 10 Krantikari Vichar | भगत सिंह के 10 क्रांतिकारी विचार

Bhagat Singh ke 10 Krantikari Vichar | भगत सिंह के 10 क्रांतिकारी विचार

  1. प्रेमी, पागल, और कवि (poet) एक ही चीज से बने होते हैं।
  1. राख का हर एक कण मेरी गर्मी (heat) से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूँ जो जेल (jail) में भी आजाद है।
  1. अगर बहरों (deaf) को सुनाना है तो आवाज को बहुत जोरदार होना होगा। जब हमने बम गिराया (blast bomb) तो हमारा उद्देश्य किसी को मारना नहीं था। हमने अंग्रेजी हुकूमत (english rulers) पर बम गिराया था। अंग्रेजों को भारत छोड़ना (leave india) चाहिए और उसे आजाद करना चाहिए।
  1. किसी को क्रांति शब्द (kranti word) की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द (word) का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब (as per their benefit) से इसे अलग-अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।
  1. जरुरी नहीं था कि क्रांति (kranti) में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल (bomb and pistol) का पन्थ नहीं था।
  1. आमतौर )normally) पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार (thought of change) से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता (dead) की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने (change) की जरुरत है।
  1. जो व्यक्ति भी विकास (growth) के लिए खड़ा है उसे हर एक रुढ़िवादी चीज (old thing) की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा और उसे चुनौती (challenge) देनी होगी।
  1. मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्वाकांक्षा, आशा और जीवन (life) के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ। पर मैं जरुरत पड़ने पर ये सब त्याग (quit) सकता हूँ और वही सच्चा बलिदान है।
  1. अहिंसा को आत्मबल (self power) के सिद्धांत का समर्थन प्राप्त है जिसमें अंततः प्रतिद्वंदी पर जीत की आशा में कष्ट (pain) सहा जाता है, लेकिन तब क्या हो जब ये प्रयास अपना लक्ष्य (target) प्राप्त करने में असफल हो जाएं? तभी हमें आत्म-बल को शारीरिक बल (physical power) से जोड़ने की जरुरत पड़ती है ताकि हम अत्याचारी और क्रूर दुश्मन (enemy) के रहमोकरम पर न निर्भर (depend) करें।
  1. किसी भी कीमत पर बल (not using power) का प्रयोग न करना काल्पनिक आदर्श है और नया आंदोलन जो देश (started in country) में शुरू हुआ है और जिसके आरंभ की हम चेतावनी दे चुके हैं वो गुरु गोबिंद सिंह (guru gobind singh) और शिवाजी, कमाल पाशा और राजा खान, वाशिंगटन (washington) और गैरीबाल्डी, लाफायेतटे और लेनिन के आदर्शों से प्रेरित है।

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