Bhagat Singh ke 20 Krantikari Anmol Vichar | भगत सिंह के 20 क्रांतिकारी अनमोल विचार

Bhagat Singh ke 20 Krantikari Anmol Vichar | भगत सिंह के 20  क्रांतिकारी अनमोल विचार

  1. इंसान (insaan) तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसा कि हम विधान सभा (vidhaan sabha) में बम फेंकने को लेकर थे।
  1. व्यक्तियों (people) को कुचल कर, वे विचारों (thoughts) को नहीं मार सकते।
  1. कानून (law) की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक कि वो लोगों की इच्छा (wish) की अभिव्यक्ति करें।
  1. क्रांति मानव जाति (human) का एक अपरिहार्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक कभी न खत्म (finish) होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है, श्रम समाज (society) का वास्तविक निर्वाहक है।
  1. निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र (independent) विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण (symptoms) हैं।
  1. मैं एक मानव (human) हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित 9affect) करता है उससे मुझे मतलब है।
  1. जिंदगी (life) तो अपने दम पर ही जी जाती है… दूसरों के कंधों (shoulder) पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।
  1. तेरे वादे (promise) पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना, कि खुश से मर (die) न जाते अगर एतबार होता।
  1. अपने दुश्मन (enemy) से बहस करने के लिए उसका अभ्यास (practice) करना बहुत जरुरी है।
  1. क्रांति लाना किसी भी इंसान (insaan) की ताकत के बहार की बात है। क्रांति कभी भी अपने आप नहीं आती बल्कि किसी विशिष्ट वातावरण (atmosphere), सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में ही क्रांति (kranti) लायी जा सकती है।
  1. देशभक्तों को अक्सर लोग पागल (mental) कहते हैं।
  1. क्रांति की तलवार (sword) विचारों की शान से तेज होती है।
  1. जिंदगी (life) का उद्देश्य अब दिमाग को नियंत्रित करना नहीं बल्कि उसके साथ तालमेल (balance) बिठाना है, मुक्ति पाना नहीं बल्कि उसका बेहतरीन उपयोग (use) करना है और सच, सुंदरता और अच्छाई को जानना नहीं बल्कि दैनिक जीवन (daily life) के अनुभवों को जानना है। क्योंकि सामाजिक विकास (growth) कुछ लोगों के उदात्तीकरण से नहीं बल्कि लोकतंत्र के सम्पन्निकरण से होता है। वैश्विक बन्धुता सभी को समान रूप (equal law) से अधिकार देने से ही आती है।
  1. प्रेम (love) हमेशा व्यक्ति के चरित्र को ऊपर उठता है, यह कभी उसे कम (cant reduce) नहीं करता, बल्कि प्रेम (love) और प्रदान करता है।
  1. महान आवश्यकता के समय, हिंसा (war) अनिवार्य है।
  1. जन संघर्ष (Stuggle) के लिए अहिंसा आवश्यक है।
  1. आत्मबल को शारीरिक बल (physical strength) के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि अत्याचारी दुश्मन (enemy) की दया पर बने न रहे।
  1. अगर आप मानते हैं कि एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर (god) है, जिसने पृथ्वी या ब्रह्मांड बनाया है, तो कृपया सबसे पहले मुझे बताएं, उसने इस दुनिया (world) को क्यों बनाया? यह दुनिया जो दुःख से भरी है, जहाँ एक व्यक्ति (person) भी शांति में नहीं रहता… कहाँ है भगवान? वह क्या कर रह है? क्या वह ये सब देखकर खुश (happy) हो रहा है?
  1. अपने व्यक्तित्व (personality) को पहले कुचल दें, निजी आराम के सपने से मुक्त हो जाएँ और फिर काम करना शुरू करें, इंच से इंच (inch by inch) आपके बढना होगा। इसे साहस, ताप और दृढ संकल्प (determination) की आवश्यकता है। कोई कठिनाई और कोई विपत्ति (problem) आपकी हिम्मत नहीं तोड़ सकती। कोई विफलता और धोखा (ditch) आपको निराश नहीं करेगा। ये सब चीजें आपके अंदर की क्रांतिकारी इच्छाशक्ति (will power) को खत्म कर सकती हैं लेकिन कष्टों और त्यागों की परीक्षा (test) के माध्यम से आप जीत हासिल करेंगे। और ये जीत क्रांति की बहुमूल्य संपत्ति (property) होगी।
  1. जब आक्रमण (aggression) रूप से लागू किया जाता है तो बल हिंसा (fight) होता है और इसलिए, नैतिक रूप से अनुचित है, लेकिन जब किसी वैध (legal) कारण के आगे उपयोग किया जाता है, तो इसे नैतिक समर्थन मिलता है।

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