Bhagat Singh ke 20 Krantikari Anmol Vichar | भगत सिंह के 20 क्रांतिकारी अनमोल विचार
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Bhagat Singh ke 20 Krantikari Anmol Vichar in Hindi

Bhagat Singh ke 20 Krantikari Anmol Vichar | भगत सिंह के 20  क्रांतिकारी अनमोल विचार

भगत सिंह (Bhagat Singh) को भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों (Influential revolutionaries) में से एक माना जाता है। वो कई क्रन्तिकारी संगठनों के साथ मिले और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन (Indian National Movement) में अपना बहुत बड़ा योगदान दिया था। भगत सिंह (Bhagat Singh) जी की मृत्यु 23 वर्ष की आयु में हुई जब उन्हें ब्रिटिश सरकार ने फांसी पर चढ़ा दिया।

भगत सिंह (Bhagat Singh) का जन्म 27 सितंबर, 1907 को लायलपुर ज़िले के बंगा (Banga of Lyallpur district) में हुआ था, जो अब पाकिस्तान (Pakistan) में है। उनका पैतृक गांव खट्कड़ कलां (Khattad Kalan) है जो पंजाब, भारत में है। उनके जन्म (birth) के समय उनके पिता किशन सिंह, चाचा अजित और स्वरण सिंह जेल (jail) में थे।

उन्हें 1906 में लागू किये हुए औपनिवेशीकरण विधेयक (Colonization Bill) के खिलाफ प्रदर्शन करने के जुल्म में जेल (jail) में डाल दिया गया था। उनकी माता का नाम विद्यावती था। भगत सिंह (Bhagat Singh) का परिवार एक आर्य-समाजी सिख परिवार था। भगत सिंह (Bhagat Singh) करतार सिंह सराभा और लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai) से अत्याधिक प्रभावित रहे।

परिवार से मिले क्रांतिकारी के संस्कार | Revolutionary rites from family

उनके एक चाचा, सरदार अजित सिंह ने भारतीय देशभक्त संघ (Patriot union of India) की स्थापना की थी। उनके एक मित्र सैयद हैदर रजा (Haider Raza) ने उनका अच्छा समर्थन किया और चिनाब नहर कॉलोनी बिल (Chenab Canal Colony Bill) के खिलाफ किसानों को आयोजित किया।

अजित सिंह (Ajit Singh) के खिलाफ 22 मामले दर्ज हो चुके थे जिसके कारण वो ईरान पलायन के लिए मजबूर हो गए। उनके परिवार ग़दर पार्टी (Gadar Party) के समर्थक थे और इसी कारण से बचपन से ही भगत सिंह (Bhagat Singh) के दिल में देश भक्ति की भावना (feeling) उत्पन्न हो गयी।

भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अपनी 5वीं तक की पढाई गांव (village) में की और उसके बाद उनके पिता किशन सिंह ने दयानंद एंग्लो वैदिक हाई स्कूल, लाहौर (Dayanand Anglo Vedic High School, Lahore) में उनका दाखिला करवाया। बहुत ही छोटी उम्र (young age) में भगत सिंह, महात्मा गांधी जी (Gandhi Ji) के असहयोग आन्दोलन से जुड़ गए और बहुत ही बहादुरी से उन्होंने ब्रिटिश सेना (British Army) को ललकारा।

जलियांवाला कांड ने डाला भगत के बाल मन पर प्रभाव | Jallianwala scandal affects Bhagat’s child mind

13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre) ने भगत सिंह (Bhagat Singh) के बाल मन पर बड़ा गहरा प्रभाव डाला। उनका मन इस अमानवीय कृत्य (Inhuman acts) को देख देश को स्वतंत्र करवाने की सोचने लगा। भगत सिंह (Bhagat Singh) ने चंद्रशेखर आज़ाद के साथ मिलकर क्रांतिकारी संगठन (Revolutionary organization) तैयार किया।

लाहौर (lahore) षड़यंत्र मामले में भगत सिंह,  सुखदेव और राजगुरू (Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru) को फांसी की सज़ा सुनाई गई और बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) को आजीवन कारावास दिया गया। भगत सिंह (Bhagat Singh) को 23 मार्च, 1931 की शाम सात बजे सुखदेव और राजगुरू (Sukhdev and Rajguru) के साथ फांसी पर लटका दिया गया। तीनों ने हंसते-हँसते देश (country) के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया

कैसे अपनाया क्रन्तिकारी जीवन | How he adopt a revolutionary life

1921 में जब महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ असहयोग आंदोलन (Asahyog Ansdolan) का आह्वान किया तब भगत सिंह (Bhagat Singh) ने अपनी पढाई छोड़ आंदोलन में सक्रिय (Active) हो गए। वर्ष 1922 में जब महात्मा गांधी ने गोरखपुर (Gorakhpur) के चौरी-चौरा में हुई हिंसा के बाद असहयोग आंदोलन बंद कर दिया तब भगत सिंह (Bhagat Singh) बहुत निराश हुए।

अहिंसा में उनका विश्वास कमजोर (Confidence weak) हो गया और वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि सशस्त्र क्रांति ही स्वतंत्रता (independence) दिलाने का एक मात्र उपयोगी रास्ता है। उन्होंने जुलूसों (rallies) में भाग लेना प्रारम्भ किया तथा कई क्रान्तिकारी दलों (krantikari dal) के सदस्य बने।

अपनी पढाई जारी रखने के लिए भगत सिंह (Bhagat Singh) ने लाहौर में लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai) द्वारा स्थापित राष्ट्रीय विद्यालय में प्रवेश लिया। यह विधालय क्रांतिकारी गतिविधियों (School revolutionary activities) का केंद्र था और यहाँ पर वह भगवती चरण वर्मा, सुखदेव (Bhagwati Charan Verma, Sukhdev) और दूसरे क्रांतिकारियों के संपर्क में आये।

काकोरी काण्ड (Kakori Kand) में राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ सहित 4 क्रान्तिकारियों को फाँसी व 14 अन्य को कारावास की सजाओं से भगत सिंह (Bhagat Singh) इतने अधिक उद्विग्न हुए कि पण्डित चन्द्रशेखर आजाद (Pandit Chandrashekhar Azad) के साथ उनकी पार्टी हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन (Hindustan Republican Association) से जुड गये और उसे एक नया नाम दिया हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (Hindustan Socialist Republican Association) । इस संगठन का उद्देश्य सेवा, त्याग और पीड़ा झेल सकने वाले नवयुवक (youngster) तैयार करना था।

उपलब्धियां | Achievements

भारत (India) के क्रन्तिकारी आंदोलन को एक नई दिशा दी, पंजाब में क्रांति (Kranti in Punjab) के सन्देश को फ़ैलाने के लिए नौजवान भारत सभा (Youth Council of India) का गठन किया, भारत में गणतंत्र की स्थापना के लिए चंद्रशेखर आजाद (Chandershekar Azad) के साथ मिलकर हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ (Hindustan Samajwadi Republic Association) का गठन किया, लाला लाजपत राय (Lala Lajpat Rai) की मौत का बदला लेने के लिए पुलिस अधिकारी सॉन्डर्स की हत्या की, बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) के साथ मिलकर केन्द्रीय विधान सभा में बम (bomb) फेका!

लेखक भी थे भगत सिंह | Bhagwat Singh was Write too

भगत सिंह (Bhagat Singh) एक अच्छे वक्ता, पाठक व लेखक (writer) भी थे। उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए लिखा व संपादन भी किया।

उनकी मुख्य कृतियां हैं, ‘एक शहीद की जेल नोटबुक (संपादन: भूपेंद्र हूजा), सरदार भगत सिंह (Bhagat Singh) : पत्र और दस्तावेज (संकलन : वीरेंद्र संधू), भगत सिंह (Bhagat Singh) के संपूर्ण दस्तावेज (संपादक: चमन लाल)।

Bhagat Singh ke Krantikari Anmol Vichar | भगत सिंह के क्रांतिकारी अनमोल विचार

  1. इंसान (insaan) तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है, जैसा कि हम विधान सभा (vidhaan sabha) में बम फेंकने को लेकर थे।
  1. व्यक्तियों (people) को कुचल कर, वे विचारों (thoughts) को नहीं मार सकते।
  1. कानून (law) की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक कि वो लोगों की इच्छा (wish) की अभिव्यक्ति करें।
  1. क्रांति मानव जाति (human) का एक अपरिहार्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक कभी न खत्म (finish) होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है, श्रम समाज (society) का वास्तविक निर्वाहक है।
  1. निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र (independent) विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण (symptoms) हैं।
  1. मैं एक मानव (human) हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित (affect) करता है उससे मुझे मतलब है।
  1. जिंदगी (life) तो अपने दम पर ही जी जाती है… दूसरों के कंधों (shoulder) पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।

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  1. तेरे वादे (promise) पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना, कि खुश से मर (die) न जाते अगर एतबार होता।
  1. अपने दुश्मन (enemy) से बहस करने के लिए उसका अभ्यास (practice) करना बहुत जरुरी है।
  1. क्रांति लाना किसी भी इंसान (insaan) की ताकत के बहार की बात है। क्रांति कभी भी अपने आप नहीं आती बल्कि किसी विशिष्ट वातावरण (atmosphere), सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में ही क्रांति (kranti) लायी जा सकती है।
  1. देशभक्तों को अक्सर लोग पागल (mental) कहते हैं।
  1. क्रांति की तलवार (sword) विचारों की शान से तेज होती है।
  1. जिंदगी (life) का उद्देश्य अब दिमाग को नियंत्रित करना नहीं बल्कि उसके साथ तालमेल (balance) बिठाना है, मुक्ति पाना नहीं बल्कि उसका बेहतरीन उपयोग (use) करना है और सच, सुंदरता और अच्छाई को जानना नहीं बल्कि दैनिक जीवन (daily life) के अनुभवों को जानना है। क्योंकि सामाजिक विकास (growth) कुछ लोगों के उदात्तीकरण से नहीं बल्कि लोकतंत्र के सम्पन्निकरण से होता है। वैश्विक बन्धुता सभी को समान रूप (equal law) से अधिकार देने से ही आती है।
  1. प्रेम (love) हमेशा व्यक्ति के चरित्र को ऊपर उठता है, यह कभी उसे कम (cant reduce) नहीं करता, बल्कि प्रेम (love) और प्रदान करता है।
  1. महान आवश्यकता के समय, हिंसा (war) अनिवार्य है।
  1. जन संघर्ष (Struggle) के लिए अहिंसा आवश्यक है।
  1. आत्मबल को शारीरिक बल (physical strength) के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि अत्याचारी दुश्मन (enemy) की दया पर बने न रहे।

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  1. अगर आप मानते हैं कि एक सर्वशक्तिमान परमेश्वर (god) है, जिसने पृथ्वी या ब्रह्मांड बनाया है, तो कृपया सबसे पहले मुझे बताएं, उसने इस दुनिया (world) को क्यों बनाया? यह दुनिया जो दुःख से भरी है, जहाँ एक व्यक्ति (person) भी शांति में नहीं रहता… कहाँ है भगवान? वह क्या कर रह है? क्या वह ये सब देखकर खुश (happy) हो रहा है?
  1. अपने व्यक्तित्व (personality) को पहले कुचल दें, निजी आराम के सपने से मुक्त हो जाएँ और फिर काम करना शुरू करें, इंच से इंच (inch by inch) आपके बढना होगा। इसे साहस, ताप और दृढ संकल्प (determination) की आवश्यकता है। कोई कठिनाई और कोई विपत्ति (problem) आपकी हिम्मत नहीं तोड़ सकती। कोई विफलता और धोखा (ditch) आपको निराश नहीं करेगा। ये सब चीजें आपके अंदर की क्रांतिकारी इच्छाशक्ति (will power) को खत्म कर सकती हैं लेकिन कष्टों और त्यागों की परीक्षा (test) के माध्यम से आप जीत हासिल करेंगे। और ये जीत क्रांति की बहुमूल्य संपत्ति (property) होगी।
  1. जब आक्रमण (aggression) रूप से लागू किया जाता है तो बल हिंसा (fight) होता है और इसलिए, नैतिक रूप से अनुचित है, लेकिन जब किसी वैध (legal) कारण के आगे उपयोग किया जाता है, तो इसे नैतिक समर्थन मिलता है।

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