भगवान कृष्ण और सुदामा – Bhagwan ki Kahani
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भगवान कृष्ण और सुदामा – Bhagwan ki Kahani

भगवान कृष्ण और सुदामा – Bhagwan ki Kahani

गरीबी की मार खाये हुए सुदामा की पत्नी उनके पैरों पर कई बार गिर कर रोई थी—“अपने सखा कृष्ण भगवान के पास जाओ न! वह सारे संसार के स्वामी हैं, क्या तुम्हारी कुछ भी सहायता नहीं करेंगे?” (Bhagwan ki Kahani)

सुदामा बड़े स्वाभिमानी ब्राह्मण थे। हाथ कैसे फैलायें किसी के सामने? और, भगवान् के आगे तो हाथ फैलाने का सवाल ही नहीं उठता। क्या वह समझते नहीं हैं सब-कुछ?

लेकिन, अपनी पत्नी के हठ के आगे उन्हें झुकना पड़ा। द्वारका पहुँचे। भगवान् कृष्ण ने जैसे ही सुना कि सुदामा आये हैं, नंगे पैरों भागे उनसे मिलने के लिए। उन्हें अपने महल में लिवा लाये। उनके कन्धों पर सर रख कर फूट-फूट कर रोये। कहने लगे—’मैं तो राज-काज में फँस गया, लेकिन तुमने क्यों भुला दिया मुझे?”

कितनी अनोखी बात! एक सम्राट एक गरीब ब्राह्मण के कन्धे पर सर रखे रो रहा था।

फिर भगवान् ने पूछा- “मेरे लिए क्या लाये? भाभी ने मेरे लिए क्या भेजा?”

सुदामा संकोच में पड़ गये। उनकी पत्नी ने एक कपड़े में थोड़े से चावल बाँध कर दिये थे; लेकिन क्या उसे दें? वह पोटली छिपाने की कोशिश करने लगे। भगवान् ने छीन ली पोटली और चावल ही फाँकने लगे। कोटि-कोटि ब्रह्माण्डों के स्वामी भगवान् कृष्ण चावल फाँकने लगे। सुदामा आँखें फाड़े देखते रहे।

कुछ दिनों तक सुदामा भगवान् के पास रहे । फिर चले आये। न उन्होंने कुछ माँगा, न भगवान् ने देने की कोई बात चलायी। रास्ते में सुदामा सोचते रहे—भगवान् ने नहीं कुछ दिया, तो क्या हुआ; उन्होंने प्रेम दिया, यही बहुत है।

लेकिन भगवान् ने प्रेम के अतिरिक्त बहुत-कुछ दिया था। उनकी टूटी झोपड़ी सोने की हो गयी थी और उसमें उनकी पत्नी रानी की तरह रह रही थी।

सुदामा ने मन-ही-मन भगवान् को प्रणाम किया और पत्नी से बोले- “यह सम्पत्ति भगवान् ने दी है, इसलिए उन्हीं की है। इसे अपनी मत मानना।”

इस कहानी से बहुत-सी अच्छी बातें जानने को मिलती हैं। पहली बात, पढ़-लिख कर तुम खूब धनवान् बन जाओ और तुम्हारा कोई गरीब मित्र तुम्हारे पास आये, तो उससे खूब प्यार से मिलना और उसकी सहायता करना। लेकिन जो भी सहायता करना, उसके बारे में मुँह से एक शब्द भी नहीं निकालना: भूल जाना कि तुमने सहायता की है।

दूसरी बात, किसी से माँगना पड़े, तो पाने की आशा से मत माँगना। जिससे माँगा है, वह प्रेम के मीठे शब्द बोल दे, यह क्या कम है? धन-सम्पत्ति की तुलना में प्रेम बहुत ऊँचा होता है। (Bhagwan ki Kahani)

तीसरी बात, अगर तुम्हारे ऊपर ऐसी कृपा हो जाये, जैसी भगवान् कृष्ण ने सुदामा के ऊपर की थी; तुम खूब धनवान् और साधन-सम्पन्न बन जाओ, तो धन-साधन को भगवान् का ही मानना। और, भगवान् की जो भी चीज तुम्हारे पास है, वह निश्चित रूप से दूसरों के काम आने के लिए है—इस बात को भी मत भूलना।

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