Bharat Ko China Se Yudh Ladna Chahiye Ke Nahi | भारत को चीन से युद्ध लड़ना चाहिए या नहीं
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Bharat Ko China Se Yudh Ladna Chahiye Ke Nahi | भारत चीन युद्ध

Bharat Ko China Se Yudh Ladna Chahiye Ke Nahi | भारत को चीन से युद्ध लड़ना चाहिए या नहीं

चीन (China) में करीब 25 सौ साल पहले एक युद्ध (war) रणनीतिकार हुए, सुन जू। उन्होंने युद्ध (war) को लेकर ‘द आर्ट ऑफ वॉर’ नाम से किताब (book) लिखी। इसके 13 चैप्टर apter) जंग में फतह पाने के तरीकों से भरे (filled) पड़े हैं। (Bharat Cheen Yudh)

समय के साथ ये सूत्र बिजनेस जगत (business world) को सीख देने और जीवन की परेशानियों (problems) से निपटने का नुस्ख़ा भी बन चुके हैं। चीन (China) के साथ 50 साल के सबसे कटु दौर से गुजर रहा भारत (Bharat) भी इन सूत्रों से कुछ सबक ले सकता है;

क्या शिवलिंग रेडियोएक्टिव होते हैं?

  1. सबसे बड़ी जीत वो होती है, जिसमें लड़ने की ही जरूरत न पड़े। Jeet Wahi Jisme Ladna Na Pade

जीतने के लिए लड़ना ज़रूरी नहीं। भारत (Bharat) को वो रास्ते तलाश करने चाहिए, जिससे चीन (China) को सबक सिखाया जा सके। फिलहाल यह रास्ता व्यापार (businesS) से होकर जाता दिखता है।

गलवान वैली Galwab valley) में हुई खूनी झड़प के बाद सरकार ने चीन (China) से आयातित माल को लेकर कड़ा रुख दिखाया। बताया जा रहा है कि चीन (China) से आने वाले घटिया सामानों की लिस्ट (list) मांगी गई है। मकसद है आत्मनिर्भर भारत (Bharat) बनाना।

अगर इस दिशा में हम एक कदम (step) भी बढ़ते हैं, तो ड्रैगन के लिए बड़ा झटका होगा और हमारी वह जीत (win), जो बिना लड़े मिलेगी। सुन जू (Sun Ju) कहते भी हैं कि एक बुद्धिमान योद्धा युद्ध (war) टालता है।

  1. अपना युद्ध चुनें। Apna Yudh Choone

जीतने वाला जानता है कि उसे कब लड़ना (fight) है और कब नहीं। टाइमिंग महत्वपूर्ण है। निर्णय (decision) लेने की क्षमता बाज़ के उस गोते की तरह होनी चाहिए, जो अपने शिकार पर झपटता (attack) है।

भारत (Bharat) को इस समय कई मोर्चे पर लड़ना पड़ रहा है। देश में कोरोना के मरीज (corona patients) बढ़ते जा रहे हैं और मौतों का आंकड़ा भी। ऊपर से लॉकडाउन (lockdown) ने अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। छोटे-बड़े हज़ारों उद्योग-धंधे बंद (business closed) हो गए और करोड़ों लोग बेरोज़गार हुए हैं। आशंका है कि विकास (vikas) दर माइनस में रह सकती है।

यह तो हुई अर्थव्यवस्था की बात। सीमाओं (border) पर देखें तो पुराने दोस्त नेपाल के साथ भी तनाव चल रहा है। पाकिस्तान (Pakistan) की तरफ से सीमा पार आतंकवाद (terrorism) का ख़तरा बना ही हुआ है।

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में हमारे सुरक्षाबल रोज़ाना ऐसे ख़तरों (danger) से निपट रहे हैं। ऐसे में अगर एक मोर्चा और खुलता (open) है, तो उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा।

  1. Winner योद्धा पहले जीतते हैं और फिर युद्ध के मैदान में जाते हैं, जबकि हारे हुए fighter पहले लड़ने जाते हैं और फिर Jeet की तलाश करते हैं।

लड़ाई (Fight) केवल मैदान में नहीं होती। उससे पहले भी एक जंग (war) लड़ी जाती है, जिसे कहते हैं कूटनीति और राजनीति। चीन (China) आज अगर अपने सभी पड़ोसियों से एक साथ पंगा लिए बैठा है और अमेरिका (America को भी आंखें दिखा रहा है तो इसके पीछे है उसकी आर्थिक ताकत (financial power)।

वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट (road project) के नाम पर उसने कई देशों में निवेश किया है। भारत (Bharat) के पड़ोस में भी सस्ते दर पर कर्ज़ बांटा है। ग्लोबल सप्लाई चेन (global supply chain) उसकी मुट्ठी में है। पहले इस वर्चस्व को तोड़ना (break) होगा और यह काम होगा कूटनीति से।

  1. दुश्मन को जानो| Dushman Ko jaano

अगर आप अपने दुश्मन (dushman) को जानते हैं और ख़ुद को भी, तो फिर सौ युद्धों के परिणाम से भी डरने की ज़रूरत नहीं है। यदि आप केवल अपने को जानते हैं, दुश्मन (enemy) को नहीं, तब हर जीत के साथ एक हार (lose) भी मिलेगी। लेकिन अगर आप किसी को नहीं जानते तो हर लड़ाई (Fight) हारेंगे।

क्या हम चीन (China) को पूरी तरह जानते हैं? जो लोग युद्ध (war) के लिए शोर मचा रहे हैं, क्यों उन्होंने हमारे पड़ोसी की ताकत (power) का आकलन किया है? बार-बार यह बात उठ रही है कि भारत (Bharat) अब 60 के दशक वाला देश नहीं रहा।

लेकिन यह सचाई (truth) कोई नहीं बोल रहा कि चीन (China) में भी 60 बसंत बीते हैं और इस दरम्यान उसने हमसे कुछ तेज़ ही दौड़ (run faster) लगाई। आज हमारा हर दूसरा प्रोडक्ट चीनी है। हम बाहर से जो सामान (product) मंगाते हैं, उसमें से करीब 18 फ़ीसदी चीन (China) से आता है।

एक मीडिया रिपोर्ट (media report) कहती है कि हमारे टॉप 30 startups में से 18 में चीनियों का पैसा लगा है। मोबाइल फोन, television, माइक्रोवेव से लेकर दूसरे electronic products और खिलौनों से लेकर medicines तक- उस पार से हमारे देश तक आने वाले सामानों की list बहुत लंबी है। लड़ना है तो पहले इन numbers को कम कीजिए।’

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5. अराजकता के बीच भी एक मौका होता है। Arajkta ke Beech bhi ek Mauka

पहले महामारी और फिर सीमा (border) पर तनाव ने एक बात हमें बहुत अच्छे ढंग से समझा दी, आज ही तारीख में चीन (China) की अहमियत। कोरोना के कारण जब ग्लोबल सप्लाई चेन (global chain supply)  टूटी तो दुनियाभर में इसी तरह की लोकल चेन (local chain) बनाने की बात हुई।

एक ऐसी कड़ी, जिसमें चीन (China) का दबदबा कम से कम हो। भारत (Bharat) में भी पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकल के लिए वोकल (vocal for local) होने की बात कही। स्वदेशी की यह अहमियत (importance) फिर समझ आने लगी है।

जैसा कि जाने-माने शिक्षाविद, scientist और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने कहा है कि Software in a week and Hardware in a year यानी चीनी सॉफ्टवेयर एक हफ्ते और हार्डवेयर एक साल में अपने life से दूर करें। शुरुआत करने का chance यही है।

  1. हर युद्ध छल-कपट पर आधारित होता है। Har Yudh Chhal Kapat Par Based Hota hai

अपने प्लान (plan) को छुपाएं। जब हमला करने की क्षमता रखते हों, तब दिखना चाहिए कि अक्षम हैं। जब अपनी फोर्स (force) का इस्तेमाल करें, उस समय लगना चाहिए कि सक्रिय (active) नहीं हैं। जब पास हों, तब दुश्मन को भरोसा (trust) कराएं कि दूर हैं और जब दूर हों, तब दुश्मन (enemy) को यह यक़ीन दिलाना चाहिए कि हम उसके पास हैं।

युद्ध (war) की रणनीतियां टीवी स्क्रीन पर नहीं बनतीं और न ही उनके बारे में सार्वजनिक बयानबाजी (publically share) की जाती है। इस सूत्र को समझने के लिए सुन जू (Sun Ju) की भी ज़रूरत नहीं। हमारे सामने जो सबसे बड़ा दुश्मन खड़ा है यानी चीन (China), उसी को देख लीजिए। उसने हमेशा अपने प्लान को भारत (Bharat) से छुपाकर रखा।

फिर चाहें 1962 की लड़ाई (Fight) हो, डोकलाम का मसला या अब गलवान वैली। चीन (China) ने कभी जाहिर नहीं होने दिया कि वह आक्रामक तेवर (aggressive behavior) अपनाने जा रहा है। गलवान (Galwan) में तो उसने हद कर दी। उसके शीर्ष स्तर (high level) पर कहा जाता रहा कि चीनी सैनिक (chinese army) पीछे हटेंगे और फिर धोखे से वार किया। इसे आप कायराना हरकत कह सकते हैं, लेकिन यह भी युद्ध (war) नीति का हिस्सा है।

आर्ट ऑफ वार (art of war) कहता है कि पूरा रहस्य दुश्मन को भ्रमित करने में छुपा है, ताकि वो हमारे असली इरादों (real intention) का पता न लगा सके। और एक बार जिस रणनीति से जीत (win) मिल जाए, उसे फिर न दोहराएं।

  1. जो लड़ना चाहता है, उसे पहले युद्ध की कीमत का अंदाज़ा लगा लेना चाहिए। Ladne se Pehle Uski Keemat ka Andaza Laga Le

मोदी सरकार (Modi government) ने पिछले साल देश के सामने एक लक्ष्य रखा, पांच ट्रिलियन इकनॉमी (five trillion economy) का। कोरोना के पहले तक एक मोटा अंदाज़ा था कि इसके लिए अगले पांच बरसों में जीडीपी आठ प्रतिशत (8 percent GDP) होना चाहिए।

महंगाई काबू में रहे और निवेश बढ़े। अगर युद्ध (war) होता है तो इन सारी चीज़ों को भूल जाइए। दुनिया (world) की कोई कंपनी एक अशांत क्षेत्र में पैसा (money invest) नहीं लगाती। नया निवेश नहीं तो नया काम नहीं। मतलब नई नौकरियां नहीं (no jobs)। मतलब हुआ कि हाथ में पैसा नहीं और बाज़ार (market) भी नहीं। लड़ाई (Fight) की यह वो कीमत है, जिसका अनुमान हमें पहले से लगाकर रखना होगा।

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  1. लंबे युद्ध से किसी को फायदा नहीं होता। lambe Yudh se Kisi ko Fayda Nahi Hota

अफगानिस्तान (Afghanistan) में अमेरिका करीब 20 साल से मौजूद है। अब तक जिनसे लड़ता रहा, आख़िर में उन्हीं के साथ बातचीत की मेज़ (table पर आना पड़ा। दूसरी ताकत रूस (Russia) पिछले पांच साल से सीरिया में उलझा है।

सुन जू (Sun Ju) की बातों पर भरोसा न हो तो ये दोनों उदाहरण देख लीजिए। लंबा युद्ध (war) एक अंतहीन कहानी (never ending story) बन जाता है। भारत (Bharat) और चीन (China) के भरोसे ही दुनिया कहती है कि आने वाली सदी एशिया (asia) की होगी। अब इन दोनों को देखना है कि उन्हें यह चमकदार सपना (shining dreams) पूरा करना है या लिखनी है एक और अंतहीन कहानी।

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