6 Bhoot ki Kahani –  6 भूत की कहानी
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6 Bhoot ki Kahani –  6 भूत की कहानी

6 Bhoot ki Kahani –  6 भूत की कहानी  

अंधेरे का भूतAndhere ka Bhoot

Bhoot ki Kahani –  भूत की कहानी

एक शिवपुर नाम का बेहद बड़ा और खूबसूरत गांव था। गाव मे सब लोग ज्यादातर खेती करने वाले सामान्य किसान ही रहा करते थे।

गांव मे एक कौने में कच्चे और पुराने जंगल के पास एक वृक्ष के पास एक भूत रहा करता था। लेकिन गांव के लोगो को इस भूत के बारे मे कुछ भी नहीं पता था।

वह भूत दिन के वक़्त मे गायब ही रहा करता था। परंतु जैसे ही रात होती थी। वह भूत एकदम से गांव मे जाता और वह आकर वह उन गांव वालो का बेहद नुकसान किया करता था।

उसकी शरारतो में वह कभी किसी की गाय को या फिर भैस को छुड़ाकर भगा देता था या फिर जानवरों को मारना शुरू कर देता था, और वह उस गाँव के किसानो को रात में सोने भी नही देता था और उन्हे बहुत परेशान करता था।

इस तरह से उस गांव के सभी लोग उस भूत से बेहद डरा करते थे। भूत द्वारा इस प्रकार के व्यवहार से गांव मे हर पल हलचल मची रहती थी। क्योंकि अब गांव वालो को पता चला चूका था के उसे रात को परेशान करने एक भूत आता है.

गाव वालो ने भूत वाली बात सरपंच को बताई और सरपंच को इस मुद्दे को हल करने के बारे मे कुछ करने को कहा.

एक दिन गाँव के सरपंच ने एक महान साधू बाबा को उस शरारती भूत को गाँव में पकड़ने के लिये बुलाया।

साधू बाबा उस गाँव में आये और उस पेड़ के पास जहा भूत रहता था उस भूत को पकड़ना चाहा परंतु वह भूत साधू बाबा के हाथ में आता ही नही था। साधू बाबा के बहुत कोशिश करने पर भी जब वह भूत काबू में नही आ पाया तो..

साधू बाबा ने हारकर गांव वालो से कहा :- गाँव वालो, इस भूत को रोशनी से बहुत डर लगता है। अगर आपको इसे ख़तम करना है आप इसे केवल रोशनी के सहारे ही खत्म कर सकते हो।

गांव वालो ने साधू बाबा के कहे अनुसार योजना को बनाया और सभी गाव वालो ने अपने घर के लिए लाइट ले लिया और रात को सबके द्वारा बनी योजना अनुसार सो गए।

रात होते ही भूत पेड़ पर से निकलता है। और गाँव के लोगो और किसानो के पास उन्हें तंग करने जाता है।

जैसे ही गाँव वालो और किसानो को पता चलता है कि भूत आ गया तो वह तुरंत चिलाते है के भाइयो आ जाओ भूत आ गया है।

ऐसा सुनते ही सभी गांव वाले जल्दी से भूत को लालटेन और अन्य प्रकार की रौशनी को जलाकर भूत को दिखाना शुरु कर देते है। भूत रोशनी से डर जाता हाउ भय के कारण खूब तेजी से वह से भागता है। (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

लेकिन गांव वाले और किसान लोग उस भूत को पकड़कर उसे रोशनी दिखाने लगते है। और भूत ऐसे में कूछ भी नही कर पाता है।

गांव वाले भूत को उसी के पेड़ से बाँधकर पेड़ के साथ ही भूत को जला देते है।

और इस तरह से भूत अपने पेड़ के साथ ही जलकर राख हो जाता है और उसका अंत हो जाता है।

अत: इस प्रकार से गांव वाले उस भूत को मार डालते है और फिर से अपनी जिंदगी व्यतीत करनी शुरू कर देते है.

भूतिया सड़क Bhootiya Sadak

Bhoot ki Kahani –  भूत की कहानी

एक रामपुर नाम का गांव था. गांव से व्यापारी बेचने के लिए माल को शहर लेकर जाते थे परन्तु उनके आने-जाने के लिये वह केवल एक ही सड़क थी.

सड़क के दोनो तरफ से बेहद घना और डरावना जंगल था। वह जंगल बेहद डरावना था, और इसलिए गांव के लोग उस तरफ से अकेले नही जाया करते थे।

इसका एक कारण यह भी था के वहा पर दिन – रात दोनो समय ही दुर्घटना होती रहती थी जिसमे से ज्यादातर गाँव के व्यापारी होते थे जो माल को बैलगाड़ी से बेचने लेकर लाते थे।

वह पर रात के समय लोगो को सड़क पर भूत दिखाई देते थे। और वह भूत वह से आने–जाने वालो लोगो को डराकर उनसे दुर्घटना करवाकर उन्हें मार डालता था. ज्यादातर भूत लोगो को बैलगाड़ी और कार में तककर करवाके मार डालता था जिससे दोनों तरफ के लोगो की मौत हो जाया करती थी।

इसी कारण से दुर्घटना ज्यादा होने पर कारण गांव वालो ने उस सड़क से आना‌-जाना छोड़ दिया था. और ऐसा करने से गांव से शहर मे होने वाले व्यापार का धंधा बिलकुल बंद हो गया था.

और इसी कारण से उस सड़क से कुछ दूरी पर दूसरी सड़क बननी शुरू हो गयी थी। और यह देख गांव वाले दूसरी सड़क के बनने का बेसब्री से इंतजार करने लगे। और जब कुछ दिनो मे ही दूसरी सड़क बन गयी थी. (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

जब नयी सड़क बन गयी तो गांव वाले ने भूतिया सड़क के रास्ते को अपनी तरफ से पुरी तरह से बंद कर दिया और वह पर पेड़ और पत्थर तोड़कर सड़क पर गिरा दिये ताकि कोई और उस रास्ते से न गुज़रे और दुर्घटना ना हो सके साथ मे सूचना भी लिख कर लगा दी थी.

और अब नयी सड़क से आना जाना शुरु हो गया और साथ मे वहा पर किसी प्रकार की दुर्घटना जैसी कोई संभावना नही थी। जबकि भूतिया सड़क अब पूरी तरह से हमेशा – हमेशा के लिये बंद हो गयी थी.

डायनासोर की गुफाDinosour ki Gufa

Bhoot ki Kahani –  भूत की कहानी

एक मिरपुर नाम का गांव था। गांव के दक्षिण ओर बहुत ही घना जंगल था।

उस जंगल मे एक बेहद डरावनी गुफा थी। उस गुफा में एक उड़ने वाला डायनासोर रहा करता था।

वह बेहद डरावना था क्योंकि डायनासोर के मुँह से आग निकलती थी जिससे वह खूब भयानक दिखाई देता था।

वह डायनासोर हर माह गांव मे आता और गाँव के बहुत से घरो को जलाकर राख करके वापस चला जाता था।

इस बार भी वह डायनासोर गाँव में आया और अबकी बार वह ज्यादा गांवो को जला कर राख करके गया। जिससे के गांव मे गाँव वालो का बहुत बड़ा नुकसान हुआ था।

डायनासोर ने बहुत से खेत-खलिहान भी जला दिए थे। सभी गांव वाले एकत्रित होकर राजा के पास गए और रजा को डायनासोर के बारे में बताया।

जब राजा ने यह सब सुना तो वह भी डायनासोर को मारने की तरकीब सोचने लगे क्योकि उसने गाँव वालो का बहुत नुकसान कर दिया था। राजा अपने सैनिको को लेकर उस गुफा में लेकर गए। (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

रजा बहुत सारे सैनिको को तलवार लेकर गुफा के अंदर भेजता है। जैसे ही दो सैनिको ने डायनासोर पर जैसे चाकू मारा तभी डायनासोर जाग गया। और उसके मुह से निकली आगे ने सैनिको को जलाकर राख कर दिया। राजा हार मानकर वापिस आ गया। और वह दरबार मे जाकर हुक्म देते है के..

राजा :- जो भी उस खतरनाक डायनासोर को मारेगा मैं उसे बीस हजार सोने की मोहरे इनाम के रूप में उसे दूंगा।

उस गांव मे एक बेहद बुद्धिमान व्यक्ति रहता था। उसे जब रजा की इस बात का पता चला तो वह राजा के पास गया और उसने राजा को एक युक्ति बताई के हम लौहे को पिघलाकर उसका लावा बनायेंगे और उस लावे को डायनासोर के ऊपर डालेगे।

और जैसे ही वह डायनासोर उड़ने की कोशिश करेगा तो वह गुफा के पत्थरो से टकरायेगा।

और पत्थर उस पर गिरने लगेंगे और वह उन पत्थरों में दब कर वह मर जायेगा। उस व्यक्ति की यह योजना राजा को भी सही लगी.

राजा तुंरत अपने सैनिक को हुक्म देकर लोहे का लावा तैयार करवाता है और गुफा से थोडी ही दूर लोहे का लावा बनवा लेते है।

लावा के तैयार होते ही सैनिको ने मौका देखकर तुरंत लावा को उस डायनासोर पर फ़िक्वा दिया। (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

अचानक से ही डायनासोर के उपर लोहे का लावा गिरने से डायनासोर एकदम झटके मे उड़ा और वह गुफा के उपरी भाग से टकराकर एकदम से गिर गया और गुफा के ऊपर के सभी पत्थर उसपर गिरने लगे.

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सैनिक यह सब देख वह से भाग निकले। और पूरी गुफा के पत्थर उस डायनासोर पर गिर गए. बेहद ज्यादा बड़े पत्थर गिरने से डायनासोर वही पर जलने और दबने से मर गया।

और इस प्रकार से उस बुद्धिमान व्यक्ति की तरकीब सफल हुई और वह खतरनाक डायनासोर भी मारा गया।

राजा ने खुश होकर उसे बीस हजार सोने की मोहरे ईनाम के रूप मे उस व्यक्ति को दिये और उसे अपना मंत्री भी बना लिया.

भूतिया पेड़Bhootiya Ped

Bhoot ki Kahani –  भूत की कहानी हिंदी में

एक कनकपुर नामक छोटा सा गांव था। गांव का राजा कनकसिंह हमेशा अपने प्रजा की रक्षा और उनका भला करता था।

एक दिन की बात है के एक गिद पक्षी जो के एक भूतिया पेड़ का बीज अपने साथ लेकर उड़ रहा था। और जब वह गिद कनकपुर गांव के ऊपर से गुजरा तो अचानक से वह बीज उसके मुँह से गांव के बीचों – बीच मे जाकर गिर गया।

और वह बीज तुरंत ही अगले दिन एक पौधा बन गया। और गांववालो की नजर उस काले रंग के पौधे पर पड़ी तो उन्हे लगा के कोई खरपतवार का पोधा होगा।

परन्तु केवल दुसरे ही दिन वह पौधा और भी बड़ा हो गया था. गांव वाले उस पोधे को देखकर आश्चर्यकित हो गये के कल ही तो यह एक छोटा सा पौधा था और आज एक ही दिन में इतना बड़ा हो गया है। (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

 फिर ही बातों-बातों मे गांव वाले उड़ पेड़ को भूल गये। परन्तु वह पौधा तीसरे ही दिन एक काला पौधा एक विशालकाय पेड़ का रूप धारण कर चूका था।

यह बात जब गाँव वालो को पता चली तो पूरे गांव मे हलचल मच गयी के तीन दिन मे ही इतना बड़ा पेड़ कैसे उग गया।

और इस बात के बारे मे बताने के लिए गांव वाले राजा जी के पास गए। राजा उनसे सब बात जानकार एक दिन रुके रहे।

और उतने में चौथे दिन में वह पेड़ और भी अधिक बड़ा हो गया। सभी गांव वाले उस भूतिया पेड़ को देखर दांग रह गये और उस से डरने लगे।

राजा उस पेड़ को देखने के लिए तुरंत उस जगह पर पहुँचे जहा वो भुतिया पेड़ लगा हुआ था, और अब सब उसे देख रहे थे तो वह पेड़ भी बहुत बड़ा हो गया था।

राजा ने हुक्म दिया के की जो भी व्यक्ति इस पेड़ को खत्म करे देगा उसे दो हजार सोना की मोहरे ईनाम स्वरूप दी जायेगी मेरे बाद में वही इस राज्य का राजा भी बनेगा।

सभी मंत्री –अपनी तरकीब से उस भुतिया पेड़ को ख़तम करने के लिए लगे। कई मंत्रीयो ने तो पेड़ के पास आग लगे के वो पेड़ जल जाएगा परन्तु पेड़ को कुछ नही हुआ।

एक मंत्री ने तो उस भूतिया पेड़ को हाथीयो द्वारा भी खिचवाया लेकिन वह भूतिया पेड़ को कुछ नहीं कर सके.

उसी गांव मे एक अत्यंत ही समझदार व्यक्ति रहता था और जब उसे इस बात के बारे मे पता चला तो वह अपने गुरु से उस भूतिया पेड़ के बारे मे उपाए पूछने चला गया।

तब उस व्यक्ति के गुरु जी ने उसे उसके एक समाधान के बारे मे बताया। और उस से कहा :- उस भूटिया पेड़ को खत्म करने के लिये तुम्हे उसके आस–पास नमक डालना पड़ेगा।

यह जानकार वह व्यक्ति समय से पहले ही राजा को इस बात के बारे मे बता दिया तो तुरंत ही राजा सैनिकों को हुक्म दिया और ख्ब्बो भर-भर के नमक लाकर उस भूतिया पेड़ के आस-पास डाल दिया गया, जिससे के वह भुतिया पेड़ ख़तम हो जाए. (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

और फिर कुछ ही समय मे उस भुतिया पेड़ का आकार धीरे-धीरे कम होने लगा और पाँचवें दिन में ही वह पेड़ एकदम से छोटा होकर गल गया।

राजा उस व्यक्ति की तरकीब से बेहद खुश हुए और उसे इनाम में दो हजार सोने की मुहरे दी  और अपने बाद उसे राजा बनाने का वचन दिया.

और इस तरह से राज्य के सभी लोग फिर से अपना गुजर बसर करने लगे.

कुएं का भूत – Ghost of Well

Bhoot ki Kahani in Hindi –  भूत की कहानी

एक शिवपुर नामक गांव था। गांव मे ज्यादातर  लोग खेती करने वाले किसान ही रहा करते थे।

गांव मे केवल दो ही कुए थे। जिसमे से एक कुँआ तो पूरी तरह से सूख चुका था। केवल दूसरा कुँआ ही था जिससे गांव वालो को सहारा था। परंतु कुछ दिनो से उस गांव के रहने वालो को दुसरे कुएँ मे भूत के होने का अनुभव हो रहा था।

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जब भी गांव के किसान उस कुए से पानी भरने जाते तब उन्हे उस कुएँ से बहुत आवाज सुनाई देता था। गांव महिलाये डर के मारुए से पानी भरने नही जाती थी। और फिर धीरे– धीरे से उस कुएँ को लोग भूतिया कुँआ कहने लगे और फिर रात मे कोई भी उस कुएँ के आस-पास नहीं जाता था।

एक दिन उस गो में लोगो को एक बच्चे के गुम होने की खबर मिली। गांव वालो ने उस बच्चे को खूब ढूँढा लेकिन उस बच्चे की कोई खोज-खबर नही मिली। पर जब गांव वालो ने बच्चे को  कुएँ मे देखा तो मे बच्चा उन्हें कुएँ में मिला। वह बच्चा अब मर चुका था। इसके साथ ही उस कुएँ का पानी भी खराब हो चूका था।

गांव वालो ने वह पर एक और कुँआ खोद लिया। और उस नए कुएं से उन्हें पानी मिल गया।

एक बार उस गांव के बच्चे भूतिया कुएँ के पास खेल रहे थे। और तभी एक और बच्चे की उस कुएँ मे गिरने की आवाज आई। यह सुनकर सभी गांव वाले बेहद घबरा गये।

गांव वाले तेजी से दौड़ते– दौड़ते उस कुएँ की तरफ आये और उन्हें देखा तो वह बच्चा भी उन्हें मरा हुआ मिला। जब उन बच्चों से गाँव वालो द्वारा पूछा गया तो उन बच्चो ने उन्हें बताया के हम सब यहाँ पर साथ में खेल रहे थे. के यह बच्चा उस कुए मे पानी देखने लगा था के वह अचानक से उस कुएँ मे गिर गया।

जब गांव वालो ने यह बात सुनी तो उन्होंने तुरंत भूत को भगाने वाले एक तांत्रिक को बुलाया। तांत्रिक अपने मंत्रशक्ति के द्वारा उस भूत को लोगो के सामने लाया। तांत्रिक बाबा ने उस भूत को वह से जाने के लिये कहा लेकिन भूत ने वह से जाने से मना कर दिया और कहा :- ये मेरे परदादा का कुँआ है और में इसे नही छोड़ सकता, कृपया आप कही और कुआ ओ और इस जगह को छोड दो। (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

तांत्रिक ने यह बात गांव वालो को बताओ और कहा :- कृपया करके आप सब लोग इस कुएँ को अच्छे से ढक दो जिससे आपमें से किसी को भी कुछ नही होगा। यह सब सुनकर तुरंत दुसरे ही दिन गांव के मुखिया ने रेत और सीमेंट से कुएँ पर जाली डालकर उसको ढक दिया। जिससे के कोई अन्य दुर्घटना न हो पाए। और फिर ऐसी कोई भी दुर्घटना दोबारा नही हुई। और गांव मे फिर से वापस शन्ति आ गयी और लोग अपनी ज़िन्दगी फिर से हसी ख़ुशी काटने लगे.

भूतनी का घरBhootni ka Ghar

Bhoot ki Kahani –  भूत की कहानी

एक बार की बात है। कही पर एक एक घर था जो के बेहद ही पुराना था। वह घर कई बार कई लोगो द्वारा खरीदा जा चूका था। लेकिन किसी न किसी वजह से वहा पर कोई न कोई घटना हो जाती जिस से के वहा पर किसी न किसी की मृत्यु हो जाती थी।

एक दिन राजीव नाम के एक व्यक्ति ने वह घर खरीद लिया था और वह भी बहुत ही सस्ते भाव मे और वह वह अपने बेटे संजू के साथ रहने लगा।

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उसे घर खरीदे हुए अभी एक दो दिन ही हुए थे राजीव को उस घर मे किसी अद्रश्य शक्ति की मोजुदगी महसूस होने लगी थी।

तीसरे ही दिन संजू ने कहा :- पापा गुसलखाने का नल अपने आप चालू हो जाता और फिर बंद हो जाता है।

राजीव ने संजू से पूछा :- क्या कोई वहा पर था?

संजू :- हा पापा मैंने वह पर एक साड़ी पहनी औरत देखि थी और फिर संजू ने कहा “पापा वह औरत अब आपके पीछे ही खड़ी हैं।“

राजीव :- बीटा अभी वो औरत क्या कर रही है?

संजू :- पापा अब वह आगे की और जा रही है।

तब राजीव काफी डर गया और झट से संजू के पास आ गया। उसी दिन राजीव ने एक कुता खरीद लिया और उसे घर ले लाया। कुता भी घर पर आने के बाद दिन रात भोंकता रहता था।

एक दिन रात में बहुत तेज बरसात होने लगी और आँधी भी चलने लगी थी. तब राजीव ने घर का दरवाजा और खिड़की सब बंद कर दिए। उसी वक़्त घर की बिजली भी चली गई। घर मे फिर से उस साड़ी वाली औरत का आना-जाना शुरू हो गया था। राजीव ने डर के मारे वापस खिड़की खोल दी.

और अब उसने बाहर देखा तो आस पास के सभी के घरो में बिजली था केवल उसी के घर पर बिजली नही था। राजीव झट से टॉर्च लेकर घर के निचे बेसमेंट में बने पावर हाउस मे गया तो उसका कुत्ता भी भोकते – भोकते उसके पीछे पीछे आने लगा।

राजीव जैसे ही पावर हाउस का दरवाजा खोलता है उसे वहा पर एक डेडबॉडी दिखाई देती है। और राजीव डर के मारे तुरंत वहा से भागा और अपने बेटे संजू को अपने पास लेकर घर का दरवाजा बंद करके घर से भागने लगा. (Bhoot ki Kahani – भूत की कहानी)

बारिश बेहद तेजी से तेज बरस रही थी और राजीव अपने बेटे संजू को साथ लेकर भाग रहा था, और भागते – भागते राजीव का पैर एक खड्डे मे अटक गया।

संजू राजीव को गड्ढे से निकलना चाह रहा था लेकिन कोई उसे खींच रहा था। संजू ने खूब कोशिश के लेकिन वह निकल नही पाया।

इतने में कोई संजू और उसके कुत्ते को लेकर घर गाया और दरवाजा बंद कर दिया।

राजीव को वह से निकलने मे पाँच मिनट लगा। वह वापस घर गया तो घर का दरवाजा खुला था। राजीव ने संजू और कुत्ते को खुब ढूँढा लेकिन उसे संजू और कुत्ता कही भी नही दिखाई दिये।

राजीव को इस बात का गहरा दुःख लगा और वह वही मर गया. जब वह मरा तो उसे वहा पर उसके बेटे संजू और कुते की आत्मा दिखाई दी. और अब वह तीनो वही पर उस औरत के भूत के साथ रहने लगे.

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