डिप्रेशन यानी अवसाद है क्या | Depression in Hindi
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डिप्रेशन यानी अवसाद है क्या | Depression in Hindi

डिप्रेशन यानी अवसाद है क्या | Depression in Hindi

हम सब ज़िंदग़ी (Life) में कभी न कभी थोड़े समय के लिए नाख़ुश होते हैं मगर डिप्रेशन (Depression) यानी अवसाद उससे कहीं ज़्यादा गहरा, लंबा और बहुत  दुखद होता है. इसकी वजह से लोगों की लाइफ से रुचि ख़त्म होने लगती है और रोज़मर्रा के कामकाज से मन उचट जाता है. (Depression in Hindi)

मगर डिप्रेशन  यानी अवसाद है क्या? What is Depression in Hindi

अभी तक ये सही रूप से नहीं बताया जा सका है कि अवसाद किस वजह से होता है, मगर ह अवश्य माना जाता है कि इसमें कई चीज़ों की अहम भूमिका (Roll) होती है.

ज़िंदग़ी (Life)  के कई अहम पड़ाव जैसे- किसी घर के या नज़दीक़ी की मौत, नौकरी चले जाना या शादी का टूट जाना, सामान्य तौर पर अवसाद की वजह बनते हैं.

इनके साथ ही अगर आपके मन में हर समय कुछ न कुछ बुरा होने की आशंका रहती है तो इससे भी आपके अवसाद में जाने का ख़तरा बना रहता है. इसके तहत लोग सोचते रहते हैं ‘मैं तो हर काम में विफल हूँ’.

कुछ मेडिकल कारणों से भी लोगों  में अवसाद होता है, जिनमें एक है थायरॉयड की कम सक्रियता होना भी शामिल है. कुछ दवाओं के साइड इफ़ेक्ट्स से भी अवसाद हो सकता है. इनमें ब्लड प्रेशर कम करने के लिए इस्तेमाल में आने वाली कुछ दवाएँ शामिल हैं. (Depression in Hindi)

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डिप्रेशन के प्रकार – Depression Types in Hindi

डिप्रेशन (Depression)  के शुरुआती लक्षण अगर समझ आ जाएं तो डिप्रेशन (Depression)  का इलाज (Treatment)  आसान होता है। Depression के शिकार इंसान को तो समझ में ही नहीं आता है कि वो क्या कर रहा है। डिप्रेशन (Depression)  या अवसाद तीन तरह का होता है। कुछ लोगों में माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  होता है है तो कुछ लोगों को मॉडरेट डप्रेशन की समस्या भी होती है। मेजर डिप्रेशन (Depression) की समस्या सबसे खतरनाक मानी जाती है।

Depression के शिकार इंसान को समझ में ही नहीं आता है कि वो क्या कर रहा है। डिप्रेशन (Depression)  या अवसाद तीन तरह का होता है। कुछ लोगों में माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  होता है है तो कुछ लोगों को मॉडरेट डप्रेशन की समस्या होती है। मेजर डिप्रेशन (Depression) की समस्या सबसे खतरनाक मानी जाती है।

Depression  की बीमारी या परेशानी (Problem)  इंसान की ज़िंदगी बर्बाद कर देती है। भारत जैसे देशों में अभी भी डिप्रेशन (Depression)  को लेकर कई तरह की परेशानियां हैं। कुछ लोगों को तो इसकी जानकारी भी नहीं होती है कि वो डिप्रेशन (Depression) के शिकार हैं। डिप्रेशन (Depression)  के शुरुआती लक्षण अगर समझ आ जाएं तो डिप्रेशन (Depression)  का इलाज (Treatment)  आसान होता है।

डिप्रेशन (Depression) के शिकार इंसान को समझ में ही नहीं आता है कि वो क्या कर रहा है। डिप्रेशन (Depression) या अवसाद तीन तरह का होता है। कुछ लोगों में माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  होता है है तो कुछ लोगों को मॉडरेट डप्रेशन की समस्या होती है। मेजर डिप्रेशन (Depression) की समस्या सबसे खतरनाक मानी जाती है। डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  क्या डिमेंशिया में बदल सकती है ?

माइल्ड डिप्रेशन क्या होता है ? What is Mild Depression in Hindi

माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  को बहुत ज्यादा खतरनाक नहीं माना जाता है। माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  की समस्या से लगभग हर तरह का इंसान परेशान हो सकता है। प्यार में धोखा खाये लोगों में उदासी और भावुकता को भी माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  ही माना जाता है।

कभी-कभी माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  कुछ घंटों तक ही रहती है तो कभी-कभी यह कुछ दिनों तक रह सकती है। माइल्ड डिप्रेशन (Depression)  का इलाज (Treatment)  साइकोथेरपी या मेडिकल के बिना भी किया जा सकता है।

मॉडरेट डिप्रेशन क्या है ? What is Moderate Depression in Hindi

मॉडरेट डिप्रेशन (Depression)  की समस्या दो हफ्तों से ज्यादा हो सकती है। मॉडरेट डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  से गुजरने वाले इंसान को भूख नहीं लगती उसके बिहेवियर में अचानक बदलाव हो सकता है।

मॉडरेट डिप्रेशन (Depression)  की समस्या को काउंसलिंग के द्वारा आसानी से ठीक किया जा सकता है। मॉडरेट डिप्रेशन (Depression)  का अगर ठीक से इलाज (Treatment)  न किया जाय तो यह मेजर डिप्रेशन (Depression)  में बदल सकता है। क्या विटामिन बी के सेवन से डिप्रेशन (Depression)  की समस्या होती है दूर, जानें। (Depression in Hindi)

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मेजर डिप्रेशन  क्या होता है ? What is Major Depression in Hindi

मेजर डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  में इंसान भावनात्मक रूप से टू़टने लगता है। मेजर डिप्रेशन (Depression)  के शिकार इंसान के व्यवहार और खान-पान पर सीधे तौर से असर पड़ता है। मेजर डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  में इंसान नींद की कमी का भी शिकार हो जाता है।

अगर सही समय पर मेजर डिप्रेशन (Depression)  का इलाज (Treatment)  न किया जाए तो इंसान आत्महत्या (suicide) जैसे गलत कदम भी उठा लेता है। मेजर डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  में इंसान को ज्यादा ख्याल रखना होता है।

डिप्रेशन  के लक्षण Depression Symptoms in Hindi

डिप्रेशन (Depression)  यानि अवसाद एक ऐसी समस्या है जिससे दुनिया भर में बहुत सारे लोग ग्रस्त हैं। अवसाद कई बार थोड़े समय के लिए ही रहता है, पर कभी-कभी यही अवसाद भयानक रूप ले लेता है। अवसाद की स्थिति तब ड़ेवेलोप होती है जब व्यक्ति अपने जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक रूप (negative thinking) से सोचने लग जाता हैं।

जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति (Person)  को अपना जीवन निरूद्देश्य लगने लगता है। जब इंसान के मस्तिष्क को पूरा आराम (full rest) नहीं मिल पाता और उस पर हमेशा किसी प्रकार का दबाव बना रहता है तो समझिए के वह इंसान तनाव (Stress) के चपेट में आ गया है।

तनाव (Stress) के कारण शरीर में कई हार्मोन (Hormones) का स्तर बढ़ता जाता है, जिनमें एड्रीनलीन और कार्टिसोल प्रमुख हैं। लगातार तनाव (Stress) की स्थिति अवसाद में बदल जाती है। अवसाद (depression) एक गंभीर स्थिति है।

हालांकि यह कोई रोग नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि आपका शरीर (body) और जीवन असंतुलित हो गया है। अवसाद को मानसिक बीमारी माना जाता है मगर इसके लक्षण आपको बाहर से भी दिखाई देते हैं।

एक अवसादग्रस्त व्यक्ति (Person)  में कई स्तर जैसे शारीरिक, मानसिक व व्यावहारिक स्तर पर बदलाव होते हैं और इन्हीं बदलावों के आधार पर व्यक्ति (Person)  के अवसादग्रस्त होने की पहचान की जा सकती है। साथ ही इसी से पता चलता है कि व्यक्ति (Person)  की स्थिति कितनी खराब है।

मूड यानी मिज़ाज – Mood

सामान्य उदासी इसमें नहीं आती लेकिन (but) किसी भी काम या चीज़ में मन न लगना, कोई रुचि (interest) न होना, किसी बात से कोई खुशी (Happy)  न होनी, यहां तक गम का भी अहसास न होना अवसाद का लक्ष्ण (symptom of depression) है.

2- विचार यानी हर समय नकारात्मक सोच (negative thinking) होना.

3- शारीरिक जैसे नींद न आना या बहुत नींद (sleep) आना. रात को दो-तीन बजे नींद का खुलना और अगर यह दो सप्ताह (weeks) से अधिक चले तो अवसाद की निशानी है.

इतना ही नहीं अवसाद बिना किसी एक ख़ास कारण (special reason) के भी हो सकता है. ये धीरे-धीरे घर कर लेता है और बजाए मदद (Help)  की कोशिश के आप उसी से संघर्ष करते रहते हैं.

दिमाग़ के रसायन अवसाद की हालत में किस तरह की भूमिका (Roll) अदा करते हैं अभी तक ये भी पूरी तरह नहीं समझा जा सका है. मगर ज़्यादातर विशेषज्ञ (specialist) इस बात से सहमत हैं कि ये सिर्फ़ दिमाग़ (brain) में किसी तरह के असंतुलन की वजह से ही नहीं होता. (Depression in Hindi)

किसी काम में मन लगना – Feeling Bored

अवसाद का सबसे प्रमुख लक्षण यही है कि व्यक्ति (Person)  हर समय परेशान रहता है और उसका किसी काम में मन (mood) नहीं लगता है। सामान्य उदासी (normal sadness) इसमें नहीं आती लेकिन किसी भी काम या चीज में मन न लगना, कोई रुचि न होना, किसी बात से कोई खुशी (Happy)  न होनी, यहां तक गम का भी अहसास (feel) न होना अवसाद (symptoms) के लक्षण हैं।

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नकारात्मकता – Negativity

अवसाद एक तरह से व्यक्ति (Person)  के दिमाग को प्रभावित करता है। इसके कारण व्यक्ति (Person)  हर समय नकारात्मक सोचता रहता है। जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो व्यक्ति (Person)  को अपना जीवन निरूद्देश्य लगने लगता है। इसके अलावा हमेशा हीन भावना से ग्रस्त होना अवसाद का मुख्य लक्षण हो सकता है।

होते हैं कई बदलाव – Changes

एक अवसादग्रस्त व्यक्ति (Person)  में कई स्तर जैसे शारीरिक, मानसिक व व्यावहारिक स्तर पर बदलाव होते हैं और इन्हीं बदलावों के आधार पर व्यक्ति (Person)  के अवसादग्रस्त होने की पहचान की जा सकती है। साथ ही इसी से पता चलता है कि व्यक्ति (Person)  की स्थिति कितनी खराब है। हालांकि यह लक्षण एक व्यक्ति (Person)  से दूसरे व्यक्ति (Person)  में भिन्न हो सकते हैं। (Depression in Hindi)

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उदासी – Sadness

अवसादग्रस्त व्यक्ति (Person)  अक्सर उदास, निराश या चिंतित ही नजर आता है। ऐसे व्यक्ति (Person)  की बातों में किसी भी प्रकार की जीवंतता या उत्साह (excitement) नहीं होता। कुछ लोग तो स्वभाव (nature) में बेहद चिड़चिडे़ भी हो जाते हैं। वह हमेशा ही सामान्य (normal) से अधिक बैचेन व परेशान नजर आते हैं। वह किसी से बात करने या किसी के साथ भी इन्लॉन्व (involve) होने में कोई रूचि नहीं दिखाते।

असफलता – Failure

कई बार व्यक्ति (Person)  की असफलता भी उसके अवसाद (depression) के रास्ते पर धकेल देती है। ऐसे व्यक्ति (Person)  अपनी असफलता के लिए खुद को ही दोष (mistake) देने लगते हैं या फिर खुद को बेहद असहाय व बेकार समझते हैं।

वह हमेशा ही अपनी असफलताओं (failure) के बारे में सोच−सोचकर दुखी होते हैं। कभी−कभी तो वह इस हद तक नकारात्मक (negative) हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि अब उनके जीवन में कुछ भी अच्छा (good) नहीं होने वाला।

गतिविधियों में अरूचि – Lack of Activity

ऐसे व्यक्ति (Person) यों में उर्जा का स्तर न के बराबर होता है। वह किसी भी तरह की गतिविधि (activity) में भाग लेना पसंद नहीं करते। यहां तक कि रोजमर्रा (daily activity) के काम भी ठीक ढंग से नहीं करते।

एकाग्रता में कमी – lack of Concentration

अवसादग्रस्त व्यक्ति (Person)  हमेशा ही मन में कुछ न कुछ नकारात्मक सोचते (negative thinking) रहते हैं और यही कारण है कि वह किसी भी चीज में अपना ध्यान एकाग्र (focus)  नहीं कर पाते। कुछ लोगों के लिए तो किताब पढ़ने व टीवी देखना भी मुश्किल (difficult) होता है। ऐसे लोग चीजों को याद (remember) नहीं रख पाते और न ही किसी भी तरह का निर्णय करने में सक्षम होते हैं। (Depression in Hindi)

खानपान में बदलाव – Change in Diet Habit

अवसाद (depression) का मुख्य असर उसके खानपान के तरीकों पर पड़ता है। ऐसे व्यक्ति (Person)  या तो जरूरत से काफी अधिक खाते हैं या फिर बिल्कुल ही भोजन (diet) करना छोड़ देते हैं। जिसके कारण उनका वजन (weight) तेजी से बढ़ता या घटता है।

प्रभावित स्लीप साइकिल – Sleeping Disorder

जो व्यक्ति (Person)  डिप्रेशन (Depression)  में होता है, उसके सोने के तरीकों में भी बदलाव आता है। या तो वह व्यक्ति (Person)  देर रात जागता है और सुबह काफी जल्दी उठ जाता है, मसलन उसे नींद (sleep) नहीं आती या फिर ऐसे व्यक्ति (Person)  जरूरत से कुछ ज्यादा ही सोना शुरू कर देते हैं।

डिप्रेशन  किसे हो सकता है? – Who Can Be a Victim of Depression

इसका एक छोटा जवाब है- ये किसी को भी हो सकता है.

वैसे शोध (research) से पता चलता है कि इसके पीछे कोई आनुवांशिक वजह (reason) भी हो सकती है. इसके तहत कुछ लोग जब चुनौतीपूर्ण समय (challenging time) से गुज़र रहे होते हैं तो उनके अवसाद (depression) में जाने की आशंका अधिक रहती है.

जिन लोगों के परिवार में अवसाद (depression) का इतिहास रहा हो वहाँ लोगों के डिप्रेस्ड (depression) होने की आशंका भी ज़्यादा होती है. इसके अलावा गुणसूत्र 3 में होने वाले कुछ आनुवांशिकीय बदलावों से भी अवसाद (depression) हो सकता है. इससे लगभग चार प्रतिशत लोग प्रभावित होते हैं. (Depression in Hindi)

डिप्रेशन : बचने के तरीक़े Depression Treatment in Hindi

  1. नींद (sleep) को नियमित रखना.
  2. अच्छा खाना (food) और समय पर खाना.
  3. तनाव (Stress) तो सभी को होता है लेकिन ऐसा विचार (thinking) रखना कि इसे कैसे कम रखना है.
  4. महत्वाकांक्षा को उतना ही रखना जितना हासिल (achieve) करना संभव हो.
  5. परिवार (family) के साथ जुड़े रहना.
  6. अपने कार्य (Work) में व्यस्त और मस्त रहना.

 कैसे करें डिप्रेशन से बचाव – How To Get Rid of Depression in Hindi

कुछ लोगों को जितना भी काम मिलता जाता है, लालच (greed) में लेते जाते हैं। ज्यादा मेहनत करना अच्छी बात है लेकिन अपने हाथ (in hand) में काम उतना हीं लें जितना आप बिना किसी तनाव (Stress) में आये समय पर पूरा कर सकें। अपनी क्षमता से ज्यादा ऑर्डर या काम लेने से आप काम करते वक्त तनाव (Stress) में रहेंगे जिससे आपके साथ साथ आपके घरवाले भी तनाव (Stress) में रहेंगे जिसका बुरा प्रभाव सब पर पड़ेगा और आपके काम कि क्वालिटी भी ख़राब (bad quality) होगी जिसके चलते आपको अलग से तनाव (Stress) झेलना होगा।

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दवाओं की भूमिका – Roll of Medicine in Depression in Hindi

दिमाग़ में रसायन जिस तरह काम करता है एंटी डिप्रेसेंट्स (antidepressant) उसे प्रभावित करता है. मगर इन रसायनों की अवसाद में क्या भूमिका (Roll) होती है ये पूरी तरह समझी नहीं जा सकी है और एंटी डिप्रेसेंट्स (antidepressant) सबके लिए काम भी नहीं करते.

दिमाग़ में न्यूरोट्रांसमिटर (neurotransmitter) जिस तरह काम करते हैं उसका संतुलन भी अवसाद (depression) के चलते बिगड़ जाता है. ये रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो कि न्यूरॉन्स (neuron) यानी दिमाग़ की कोशिकाओं के बीच संपर्क क़ायम करते हैं.

न्यूरोट्रांसमिटर (neurotransmitter) जो संदेश भेजते हैं उन्हें अगले न्यूरॉन में लगे रेसेप्टर ग्रहण (accept) करते हैं. कुछ रेसेप्टर किसी ख़ास न्यूरोट्रांसमिटर (neurotransmitter) के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो सकते हैं या फिर असंवेदनशील हो सकते हैं.

एंटी डिप्रेसेंट्स (antidepressant), मूड बदलने वाले न्यूरोट्रांसमिटर्स (neurotransmitter) का स्तर धीरे-धीरे करके बढ़ाते हैं. सेरोटॉनिन, नॉरपाइनफ़्राइन और डोपामाइन (dopamine) जैसे न्यूरोट्रांसमिटर्स इसमें शामिल हैं. यही वजह है कि अधिकतर लोगों को ये दवाएँ (medicines) कुछ हफ़्तों तक लेनी पड़ती हैं और उसके बाद ही इसका असर (effect) दिखना शुरू होता है.

एंटी डिप्रेसेंट (antidepressant) दवाएँ सबसे पहले सन् 1950 में बनी थीं और कुल चार तरह के एंटी डिप्रेसेंट्स (antidepressant)हैं. ये रसायन मस्तिष्क को कुछ अलग तरीक़ों से प्रभावित (effect) करते हैं.

सबसे आम तौर पर इस्तेमाल होने वाला एंटी डिप्रेसेंट (antidepressant)वो है जो सेरोटॉनिन का स्तर दिमाग़ में बढ़ा देता है. इसके अलावा सेरोटॉनिन (serotonin) और नॉरएड्रीनेलिन री-अपटेक इनहिबिटर्स यानी एसएनआरआई नए एंटी डिप्रेसेंट(antidepressant) हैं जो नॉरपाइनफ़्राइन को निशाना बनाते हैं.

ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स (antidepressant)और मोनोएमाइन-ऑक्सिडेज़ इनहिबिटर्स पुराने एंटी डिप्रेसेंट्स (antidepressant)हैं और आम तौर पर इस्तेमाल नहीं होते हैं क्योंकि उनमें साइट इफ़ेक्ट्स (side effects) भी होते हैं.

एंटी डिप्रेसेंट्स (antidepressant)अवसाद के कुछ लक्षणों में तो आराम पहुँचाते हैं मगर वे उसकी मूल वजह पर असर (effect) नहीं करते. यही वजह है कि ये बाक़ी उपचारों (other treatments) के साथ इस्तेमाल होते हैं अकेले नहीं. (Depression in Hindi)

डिप्रेशन   तनाव का कारण बन सकता है आपका गलत खानपान – Bad Eating Habits in Hindi

हरी सब्जियां ज्यादा खाएं – Eat Green Vegetables

डिप्रेशन (Depression)  या तनाव (Stress) से मुक्‍ती पाने के लिए अपनी डाइट में पालक और हरी सब्‍ज्यिों (green vegetables), या हरे पत्ते वाले साग को शामिल करें। डिप्रेशन (Depression)  की गंभीर स्थिति को मस्तिष्क की सूजन से(swelling in brain)  जोड़ा गया है।

हरी पत्तेदार साग-सब्जियां विटामिन ए, सी, ई, और के और मिनरल्‍स (minerals) व फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती हैं, जो कि डिप्रेशन (Depression)  या तनाव (Stress) से लड़ने में मदद (Help) गार हैं। इसके अलावा, अपने आहार में बीन्स, प्याज (onion) और मशरूम जैसी सब्जी को भी शामिल करें।

ओमेगा -3 फैटी एसिड – Omega-3 Fatty Acid

डिप्रेशन (Depression)  से लड़ने के लिए ओमेगा -3 फैटी एसिड भी बहुत जरूरी है। इसके लिए आप अखरोट, अलसी और चिया बीज (chia seeds) का सेवन करें, यह ओमेगा -3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं और यह मस्तिष्क (brain) के बेहतर प्रदर्शन के साथ अवसाद को कम करता है।

आप अपने आहार में समुद्री भोजन (sea food) जैसे मछली, सैल्मन, मैकेरल, टूना, हेरिंग और सार्डिन को शामिल कर सकते हैं। यह पोषक तत्वों (nutrients) से भरपूर हैं। इसके साथ ही  अलसी का तेल, सोयाबीन तेल और कनोला तेल (canola oil) भी डिप्रेशन (Depression)  से छुटकारा पाने में फायदेमंद है।

सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थ – Selenium Food

इसके लिए आप नट्स (nuts), मेवे, साबुत अनाज, बीन्स, सीफूड और लीन मीट लें। इनमें सेलेनियम होता है, जो अच्छे स्वास्थ्य (good health) के लिए आवश्यक है। क्‍योंकि सेलेनियम की कमी डिप्रेशन (Depression) का कारण बन सकती है। लेकिन याद रखें कि एक ही समय में बहुत अधिक सेलेनियम (selenium) न लें।

फलों का सेवन – Fruits

डिप्रेशन (Depression) को दूर करने के लिए आप रोजाना ढेर सारे फल (fruits) खाएं। जैसे आप जामुन खा सकते हैं, यह सेल-रिपेयरिंग एंटीऑक्सिडेंट (anti oxidant) से भरपूर है। इसके अलावा, ब्लूबेरी (blueberry), रास्पबेरी, स्ट्रॉबेरी और ब्लैकबेरी एंटीऑक्सिडेंट का सबसे अच्छा स्रोत (good source) हैं।

टमाटर का सेवन करना भी अच्छा है क्योंकि इसमें बहुत अधिक मात्रा में फोलिक एसिड (folic acid) और अल्फा-लिपोइक एसिड होते हैं, जो दोनों डिप्रेशन (Depression) से लड़ने के लिए अच्छे हैं। सेब का सेवन करने से सेलुलर स्‍तर cellular level) पर ऑक्सीकरण क्षति रोकने और मरम्मत में मदद (Help)  मिलती है। इसलिए इन फलों के सेवन से डिप्रेशन (Depression) को दूर रखा जा सकता है। (Depression in Hindi)

विटामिन डी – Vitamin D

विटामिन डी (vitamin D) आपकी हड्डियों व दांतों को मजबूत रखने के साथ डिप्रेशन (Depression)  को दूर करने में भी मदद (Help) गार है। मछली, टोफू और दूध में विटामिन डी होता है। इन खाद्य पदार्थों (eating products) को आप अपने दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं। विटामिन डी की कमी डिप्रेशन (Depression)  संबंधी लक्षणों का कारण बन सकती है।

डिप्रेशन से बाहर निकलने में लोगों कि भूमिका (Role) – Help of Peoples to Come out of Depression

डिप्रेशन (Depression)  के शुरुआती लक्षण को अगर आप समझ जाएं तो उस व्यक्ति (Person) को दोस्तों, रिश्तेदारों और समाज के बीच समय (time) बिताना चाहिए। डिप्रेशन (Depression) से परेशान इंसान लोगों से दूर भागता लेकिन उसके इलाज (Treatment) के लिए लोगों को उसे अपने पास रखने की कोशिश करनी चाहिए। डिप्रेशन (Depression) का लक्षण अगर दिखने लगे तो उसे ज्यादा से ज्यादा समय अपने लोगों (peoples) के साथ रहना चाहिए।

खुशी डिप्रेशन की दवा कैसे है ? – How Happiness is a Medicine of Depression

डिप्रेशन (Depression)  की दवा के लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत (hard work) की जरूरत नहीं है आपको खुश रहना है और अपने जीवन (life) में आनंद का स्थान सुरक्षित रखें। रचनात्मक बातों से डिप्रेशन (Depression) की परेशानी (Problem)  दूर होती है। क्या दवा से डिप्रेशन (Depression)  और शराब दोनों से मिल सकता है छुटकारा ?

काम का जुनून आपको डिप्रेशन से बचाता है – More Work Less Depression

जुनून को डिप्रेशन (Depression) की सबसे अच्छी दवा कहते हैं। अगर आपका कामकाज में मन नहीं लगता तो आप डिप्रेशन (Depression) के शिकार आसानी से हो सकते हैं। अगर आपको अपने काम (work) के प्रति जुनून रखते हैं तो आप डिप्रेशन (Depression)  से बचे रहते हैं। (Depression in Hindi)

फिजिकल फिटनेस और डिप्रेशन  – Physical Fitness and Depression in Hindi

एक्सपर्ट्स (experts) के अनुसार अगर इंसान फिजिकली फिट रहते हैं उनमें डिप्रेशन (Depression) का खतरा कम होता है। अगर आप अपने आपको सक्रिय (active) रखते हैं और रोजाना एक्सरसाइज करते हैं तो आप डिप्रेशन (Depression) से बचे रहते हैं।

जो लोग रोजाना एक्सरसाइज करते हैं उनमें खुशी (Happy)  वाले हार्मोन (Hormones) का निर्माण होता है और इससे इंसान का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर (better mental health) होता है। एरोबिक एक्सरसाइज से डिप्रेशन (Depression) होता है दूर, जानें इसके खास फैक्ट्स।

मेडिटेशन और योग से डिप्रेशन  का इलाज (Treatment)  – Meditation and Yoga in Depression in Hindi

डिप्रेशन (Depression)  की परेशानी (Problem)  से छुटकारा पाने के लिए सबसे जरूरी काम शान्ति पाना होता है। डिप्रेशन (Depression)  की समस्या से छुटकारा पाने के लिए मेडिटेशन (meditation) सबसे कारगर उपायों में से एक माना जाता है। डिप्रेशन (Depression)  के इलाज (Treatment)  के तौर पर योग भी बहुत कारगर होता है।

योग, व्यायाम या मैडिटेशन (meditation) करें इनका हमारे मन पर बहुत गहरा और सुखद प्रभाव पड़ता है योग-मैडिटेशन (yog meditation) हमे शांत चित्त बनाते है ऐसा करने से हमें गुस्सा (anger) भी कम आता है और हम खुद को एकाग्र और उर्जावान महसूस करते हैं मानसिक तनाव (Stress) से लड़ने के लिए यह एक बेहद मजबूत हथियार है जरूर कोशिश करे. (Depression in Hindi)

डिप्रेशन  दूर करने के उपाय  – How to Overcome Depression in Hindi

अकेले रहने से बचें – Avoid to be Alone

डिप्रेशन (Depression) तब खतरनाक रूप अख्तियार कर लेता है जब हम खुद को अकेला महसूस (feeling alone) करने लगते हैं इससे उबरने का सबसे कारगर और आसान तरीका है अपने दोस्त बनाएं (make friends) या दोस्तों से मिलने जाएं उनसे हंसी-मजाक (fun and enjoy) करें दोस्तों को चाय पर घर बुलाएं कोई मूवी देखें बचपन के दोस्तों (childhood friends) से पुरानी यादों को साझा करें अपने खुशी (Happy)  के पल तलाशें ऐसा करने पर आपके मन से निराशा (emotions of sadness) का भाव दूर होगा और आप अच्छा महसूस (feel) करेंगे ये सब काम करने के लिए आपको एक तैयारी (ready) भी करनी चाहिए कब और किसके साथ आपको अपना दिन गुजरना है.

बाहर घूमने जाएं – Go For Outing

अपने दोस्तों या परिवार संग (friends and family members) किसी जगह घुमने जाना भी एक अच्छा उपाय है शहर से बाहर कोई ट्रिप प्लान (plan a trip) करें वहां नये-नये लोगों से मिलें और उन्हें अपना मित्र (make new friends) बनाएं इसी माध्यम से जीवन में नये आयामों को तलाशें (find) ऐसा करके हम अपने माहौल में बदलाव (change atmosphere) लाते हैं, जिसके फलस्वरूप हमारे मन के भावों में भी परिवर्तन (change) आता है और हम सकरात्मक विचारों के लिए रास्ता खोल देते हैं. (Depression in Hindi)

अपनी मन पसंद चीजें करने से खुद को ना रोकें – Do The Things You Like

कोई ऐसा काम करें जिसमें आपका मन लगता हो या जिसे करने से आपको खुशी (Happy) मिलती हो जैसे खेलना, गाना सुनना, पेंटिंग करना, मूवी देखना (watching movie) आदि डिप्रेशन (Depression)  का सबसे ज्यादा असर हमारे मन पर ही पड़ता है जो काम मन को भाता (like the work) हो उस काम में ध्यान लगाएं ऐसा करने पर हम अपने बचे हुए समय का भी सदुपयोग (use time) कर सकेंगे और इस दिक्कत से भी छुटकारा मिलेगा.

सोशल मीडिया से रहें दूर – Stay Away from Social Media

डिप्रेशन (Depression) की स्थिति में होने पर सोशल मीडिया या सोशल नेटवर्किंग साइट (social networking site) से खुद को दूर रखें द रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ और यंग हेल्थ मूवमेंट (young health movement) के संयुक्त तत्वावधान में हाल ही में किए गए एक सर्वे (survey) में पता चला है कि विभिन्न सोशल मीडिया (social media) का उपयोग करने वाले लोगों के मानसिक स्वास्थ्य (mental health) में गिरावट आई है.

कोई उपन्यास, कहानी (story) , किसी महापुरुष की जीवनी आदि पढ़ने से भी हमें मानसिक बल (mental strength) मिलता है और हम खुद को एक बेहतर स्थिति में महसूस करते हैं।

तो दोस्तों इन तरीकों से आप डिप्रेशन (Depression)  से पार पा सकते हैं और फिर से अच्छे दिनों की ओर बढ़ सकते हैं आज के लिए बस इतना ही हम फिर (again) से आपकी खिदमत में पेश होंगे तब तक के लिए नमस्कार.

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