लड़ाई करने वाले को ऐसे हराओ – Gandhi aur Angrej ki Kahani
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लड़ाई करने वाले को ऐसे हराओ – Gandhi aur Angrej ki Kahani

लड़ाई करने वाले को ऐसे हराओ – Gandhi aur Angrej ki Kahani

गान्धी जी यात्रा कर हरे थे। एक अँगरेज़ भी उनसे थोड़ी दरी पर बैठा हुआ था। उसने बहुत-से काग़ज़ों पर गान्धी जी के लिए गालियाँ लिखीं और आलपिन से नत्थी करके काग़ज़ों को उन्हें पकड़ा दिया। (Gandhi aur Angrej ki Kahani)

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गान्धी जी ने ऊपर की दो-चार लाइनें पढ़ीं। अपने लिए लिखी गालियाँ पढ़ कर भी वह शान्त रहे। फिर आलपिन निकाल कर काग़ज़ों को खिड़की से बाहर फेंक दिया। 5 अँगरेज़ यह सब देख रहा था। उसने समझा था कि गान्धी जी गालियाँ पढ़ कर बौखला उठेंगे जिससे उसे कुछ और गालियाँ देने का अवसर मिल जायेगा।

जब उसने देखा कि उसके काग़ज़ बाहर फेंक दिये गये, तब तो उसे गुस्सा आ गया। उनके पास जा कर व्यंग से बोला- “अरे, काग़ज़ों को पूरा तो पढ़ लेते। उनमें मैंने तुम्हारा गुणगान किया था।”

गान्धी जी मुस्करा कर बोले- “धन्यवाद। देखिए यह आलपिन। आपने जो गुणगान किया था, उसका सार यह आलपिन मैंने रख ली है; बाकी बेकार की चीजों को फेंक दिया है।” यह घटना हमें यह शिक्षा देती है कि कोई व्यक्ति मूर्खता करे, तो हमारी बुद्धिमानी इसमें है कि हम उसकी मूर्खता को न दोहरायें।

जो हमसे लड़ता है, वह चाहता है कि हम भी उससे लड़-तभी तो उसे बहादुरी दिखाने का मौका मिलेगा। अगर उसकी यह बात हमने मान ली तो वह जीत जायेगा और हम हार जायेंगे। उसे हराने का तरीका यही है कि हम शान्त हो जायें।

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