Bal Gangadhar Tilak ke 20 Prernadayak Suvichar | बाल गंगाधर तिलक के 20 प्रेरणादायक सुविचार
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Bal Gangadhar Tilak ke 20 Prernadayak Suvichar | बाल गंगाधर तिलक के 20 प्रेरणादायक सुविचार

Bal Gangadhar Tilak ke 20 Prernadayak Suvichar | बाल गंगाधर तिलक के 20 प्रेरणादायक सुविचार

बाल गंगाधर तिलक – Bal Gangadhar Tilak (जनम – 23 जुलाई 1856 – मृत्यु – 1 अगस्त 1920)

बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) वो व्यक्ति थे जिसने country की गुलामी को बहुत detailed से देखा था। इनके birth के एक बर्ष बाद ही अंग्रेजों के खिलाफ भारत (India) को आजाद कराने के लिये year 1857 की पहली क्रान्ति हुई थी।

गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) एक समस्या के अनेक पहलुओं पर thinking करते और फिर उस problem से निकलने का उपाय खाजते थे। बाल गंगाधर ने भारत (India) की गुलामी पर सभी types से सोचा, इसके बाद अंग्रेजों के खिलाफ strategy बनाकर उन्हीं की भाषा में करारा जबाव दिया।

बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) महान देशभक्त, Congress की उग्र विचारधारा के प्रवर्तक, great writer, चिन्तक, विचारक, समाज सुधारक और freedom fighter थे।

Indians की दशा में सुधार करने और लोगों को aware करने के लिये इन्होंने एक ओर तो पत्रिकाओं का प्रकाशन (Publication of magazines) किया वहीं दूसरी ओर देशवासियों को educated करने के लिये स्वंय से study center की स्थापना की साथ ही देशवासियों को unity के सूत्र में बाँधने के लिये ‘गणेशोत्सव’ (Ganesh Utsav) और ‘शिवाजी’ समारोह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों (sociala ctivities) को शुरु किया।

गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने अंग्रेजों पर तीनों ओर से मोर्चा लगा कर अंग्रेजों की नाक में दम करके रख दिया। अपने life की आखिरी सांस तक ये अंग्रेजों के खिलाफ struggle करते रहे।

बाल गंगाधर तिलक का बचपन और प्रारंभिक जीवन | Childhood and early life of Bal Gangadhar Tilak

गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) का जन्म 22 जुलाई, 1856 को Ratnagiri में मध्यवर्ती चिट्पावन ब्राह्मण परिवार (Chitpavan Brahmin Family) में हुआ था, दक्षिण-पश्चिमी महाराष्ट्र के एक छोटे से तटीय शहर (coastal city) में। उनके पिता, गंगाधर शास्त्री रत्नागिरी में एक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और स्कूल शिक्षक (Famous Sanskrit scholars and school teachers) थे।

उनकी mother का नाम परावली बाई गंगाधर था। अपने father के हस्तांतरण के बाद, यह पूना (अब पुणे) में shift हो गया। Year 1871 में तिलक का ताइपिबा से विवाह (marriage) हुआ, जिसे बाद में सत्यभामाइ के name से बदल दिया गया।

बाल गंगाधर तिलक की शिक्षा एवं करियर| Education and Career of Bal Gangadhar Tilak

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) एक बुद्धिमान छात्र थे, वे childhood से ही वे स्वाभाव में सच्चे और simple person थे. उनका दृष्टिकोण हमेशा से ही injustice के against होता था, उनकी इसके प्रति childhood से ही स्वतंत्र राय थी.

सन 1877 में Sanskrit और maths में इन्होने पुणे के डेक्कन कॉलेज (Deccan College) से स्नातक (बी ए) की degree प्राप्त की. उसके बाद उन्होंने मुंबई (mumbai) के सरकारी लॉ कॉलेज से एलएलबी का अध्ययन (LLB study) किया और सन 1879 में उन्होंने अपनी कानून की डिग्री (law degree)  प्राप्त की.

अपनी study पूरी करने के बाद उन्होंने Pune के एक private school में अंग्रेजी और गणित पढ़ाना शुरू किया. किन्तु school के अधिकारियों के साथ उनकी सहमति नहीं होने के कारण उन्होंने year 1880 में school में पढ़ाना छोड़ दिया और वे राष्ट्रवाद (nationalism) पर जोर देने लगे.

वे उन youngsters में से एक थे, जोकि modern college की शिक्षा प्राप्त करने के लिए Indians की पहली पीढ़ी थी.

डेक्कन एजुकेशन society की स्थापना | Deccan Education Society Founder

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने अंग्रेजों द्वारा भारत (India) में कराई जा रही educational system का कठोरता से oppose किया. इसके साथ ही उन्होंने British students की तुलना में Indian students के साथ हो रहे असमान व्यवहार के against भी oppose किया, और भारत (India) की सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage) के लिए इसकी पूरी तरह से उपेक्षा की.

उनके अनुसार india को दी जाने वाली education पर्याप्त नहीं थी, और indians इससे अनजान और अज्ञानी बने रहते थे. इसलिए उन्होंने सन 1880 में indian युवाओं के लिए राष्ट्रवादी शिक्षा (Nationalist education) को प्रेरित करने एवं quality of study में सुधार करने के उद्देश्य से अपने college के साथी Vishnu Shastri Chiplunkar, Mahadev Ballal Namjoshi and Gopal Ganesh Agarkar के साथ मिलकर Deccan Education Society की शुरुआत की.

इस society की स्थापना एक नई प्रणाली बनाने के लिए की गई थी, जिसमें indian heritage पर जोर देते हुए युवाओं को indian राष्ट्रवाद के विचारों के बारे पढ़ाया गया.

इस society ने सन 1885 में secondary education के लिए New English School और उच्च शिक्षा के लिए Ferguson College की स्थापना की. Deccan education society अभी भी पुणे में Ferguson College की तरह संस्थान चलाती है.

उन्होंने Religious and cultural courses पर जोर देने के अलावा Independence की दिशा में एक जन आंदोलन भी शुरू किया. इसके बाद उन्होंने political career की ओर कदम रखा.

बाल गंगाधर तिलक का राजनीतिक करियर | Political Career of Bal Gangadhar Tilak

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) जी ब्रिटिशों के शासन को हटाकर indians ऑटोनोमी के लिए protest चलाने के लिए अपने political career की ओर चल दिए. Mahatma Gandhi से पहले, वे सबसे ज्यादा व्यापक रूप से जाने माने indians politician थे.

उन्हें उस समय का एक कट्टरपंथी राष्ट्रवादी (Radical nationalist) माना जाता था, लेकिन वे एक समाजिक रुढ़िवादी (Social conservative) थे. सन 1890 में वे indian National Congress Party में शामिल हुए. उन्होंने इस party के दृष्टिकोण का विरोध किया, जोकि स्व-शासन के लिए fight की ओर नहीं था.

उनका कहना था कि ब्रिटिशों के against अपने आप में सिंपल संवैधानिक आंदोलन (Simple constitutional movement) करना व्यर्थ है. इसके बाद वे प्रमुख Congress Politician गोपाल कृष्ण गोखले के against खड़े हुए. वे britishers को दूर करने के लिए एक सशस्त्र विद्रोह (Armed rebellion) चाहते थे.

लार्ड कर्ज़न द्वारा किये गये Bengal के division के समय तिलक जी ने स्वदेशी आंदोलन और British सामानों का बहिष्कार का दिल से support किया था. किन्तु उनके द्वारा की गई इस कोशिश ने indian National Congressऔर आंदोलन के अंदर कई विवादों को जन्म दिया.

इनके और party के दृष्टिकोण में इस अंतर के कारण Tilak को एवं उनके समर्थकों को indian National Congress Party के चरमपंथी (एक्सट्रीमिस्ट) विंग के रूप में जाना जाने लगा.

हालाँकि तिलक (Bal Gangadhar Tilak) जी के द्वारा किये गये प्रयासों का उन्हें Aurobindo Ghosh, VO Chidambaram Pillai and Muhammad Ali Jinnah सहित कई indians राष्ट्रीय कांग्रेस के politicians से support प्राप्त हुआ.

इसके अलावा President of Bengal बिपिन चन्द्र पाल और पंजाब के लाला लाजपत राय द्वारा उन्हें special support प्राप्त था, जिसके चलते उन्हें ‘लाल – बाल – पाल’ (Lal Bal Pal) के रूप में लोग जानने लगे.

Year 1907 के राष्ट्रीय सत्र में, indian National Congress Party के दोनों वर्गों (कट्टरपंथी एवं मध्यम) के बीच भारी controversy हुआ. इस विवाद का result यह निकला कि कांग्रेस को 2 भागों में divide होना पड़ा.

बाल गंगाधर तिलक को कारावास | Jail to Bal Gangadhar Tilak

Year 1896 के दौरान, Pune और पड़ोस क्षेत्रों में Plague की महामारी फैल गई और britishers ने इसे रोकने के लिए बेहद strong steps किए। आयुक्त WD Rand के निदेशकों के तहत, police and army ने निजी घरों पर हमला किया, व्यक्तियों की personal purity का उल्लंघन किया, निजी संपत्ति जला दी और लोगों को city से बाहर से आने और बाहर जाने से रोका।

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने ब्रिटिश प्रयासों के दमनकारी प्रकृति के against oppose किया और अपने news paper में इसके बारे में उत्तेजक लेख (Provocative article) लिखे।

उनके article ने Chapekar brothers को प्रेरित किया और उन्होंने 22 June, 1897 को आयुक्त रांड और Lieutenant Iyerst की हत्या कर दी। इसके परिणामस्वरूप, Tilak को हत्या के लिए उकसाने के लिए 18 months jail के लिए गिरफ़्तार किया गया।

1908-1914 के दौरान, बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) को मंडाले जेल, Burma में छह साल की सश्रम कारावास (Rigorous imprisonment) से गुजरना पड़ा। उन्होंने 1908 में क्रांतिकारियों Khudiram Bose and Praful Chaki के Chief Presidency Magistrate Douglas Kingsford की हत्या के प्रयासों का openly support किया।

उन्होंने अपने Jail के वर्षों के दौरान लिखना जारी रखा और सबसे major गीता रहस्य (Gita Rahasya) है ।

उनकी बढ़ती Fame and popularity के बाद, British Government ने भी अपने newspaper के प्रकाशन को रोकने की कोशिश की। Pune में उनकी पत्नी की death हो गई, जब वह Mandale Jail में थे।

तिलक और ऑल इंडिया होम रूल लीग (All India Home Rule League)

1915 में तिलक (Bal Gangadhar Tilak) भारत (India) लौट आए जब political situation तेजी से विश्वयुद्ध 1 (World War I) की छाया के नीचे बदल रही थी। Tilak के रिहा होने के बाद अभूतपूर्व उत्सव (Unprecedented celebration) हुआ। उसके बाद वह एक Soft view के साथ राजनीति में लौट आए।

अपने friendly राष्ट्रवादियों के साथ फिर से जुड़ने का decision किया, तिलक ने 1916 में All India Home Rule League की स्थापना Joseph Baptiste, Annie Besant and Muhammad Ali Jinnah के साथ हुई।

April 1916 तक,  league में 1400 सदस्य थे जो 1917 तक बढ़कर 32,000 हो गए।

वह indian National Congress में शामिल हुए लेकिन दो opposite thinking वाले गुटों के बीच harmony लाया नहीं जा सका।

बाल गंगाधर तिलक की किताबें (Bal Gangadhar Tilak Books)

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) जी ने indians संस्कृति, इतिहास और Hindu religion पर कई books लिखीं. इन्होने year 1893 में ‘वेदों के ओरियन एवं शोध’ के बारे में लिखा. इसके अलावा इन्होने year 1903 में ‘आर्कटिक होम इन द वेदास’ और year 1915 में ‘श्रीमद् भगवत गीता रहस्य’ जैसी books का प्रकाशन किया.

बाल गंगाधर तिलक का समाचार पत्र (Bal Gangadhar Tilak Newspaper)

अपने राष्ट्रवादी लक्ष्यों (Patriotism thinking) के लिए जाने जाने वाले बाल गंगाधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) जी ने सन 1881 में दो news papers का प्रकाशन किया, जोकि weekly किये जाते थे.

दोनों ही news paper ने national independence के लिए actively प्रचार किया. इसके माध्यम से Tilak ने बड़े पैमाने पर study और राष्ट्रीय जागरूकता फ़ैलाने का target रखा. इसके साथ ही उन्होंने इन news papers से लोगों के social life में हस्तक्षेप करने के लिए government के विचारों का विरोध भी किया.

बाल गंगाधर तिलक एक समाज सुधार (Bal Gangadhar Tilak a Social Worker)              

अपनी study पूरी करने के बाद, तिलक ने government services के आकर्षक प्रस्तावों को रोका और राष्ट्रीय जागरण (National awakening) के बड़े कारण के लिए खुद को dedicated करने का निर्णय लिया।

वे एक great सुधारक थे और अपने पूरे life में उन्होंने महिलाओं की study और महिलाओं के empowerment के कारणों की वकालत की। Tilak ने अपनी सारी बेटियों को educated किया और उनसे 16 साल की उम्र तक marriage नहीं करवाया।

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने ‘गणेश चतुर्थी’ और ‘शिवाजी जयंती’ पर भव्य समारोह का offer रखा। उन्होंने इन festivals की कल्पना की जिसमें Indians के बीच एकता और उत्साही राष्ट्रवादी भावना (Nationalist sentiment) का भाव उभर आया। यह एक बड़ी त्रासदी है कि terrorism, तिलक और उनके tribution के प्रति उनकी निष्ठा को मान्यता (recognition) नहीं दी गई, वह वास्तव में योग्य थे।

बाल गंगाधर तिलक  की मृत्यु | Death of Bal Gangadhar Tilak

जलियावाला बाग हत्याकांड (Jallianwala Bagh Massacre) की क्रूर घटना से Tilak इतने निराश थे कि उनका स्वास्थ्य कम (health issue) हो रहा था। अपनी बीमारी के बावजूद Tilak ने भारतीयों को फोन जारी किया कि andolan को कोई नहीं रोक रहा है चाहे कुछ भी क्यों न हुआ हो ।

वह andolan का नेतृत्व करने के लिए प्रबल थे लेकिन उनके health ने अनुमति नहीं दी। तिलक (Bal Gangadhar Tilak) मधुमेह से infected थे और इस समय तक बहुत weak हो चुके थे। 1 July 1920 के मध्य में, उनकी स्थिति खराब हो गई और 1 August को उनकी death हो गई.

यहां तक ​​कि इस sad news फैल रही थी, लोगों का एक सच्चा सागर उनके house में बढ़ गया। अपने loving politician की आखिरी झलक पाने के लिए Bombay में उनके निवास पर 2 लाख से ज्यादा लोग gather हुए।

बाल गंगाधर तिलक की विरासत

हालांकि तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने मजबूत राष्ट्रवादी भावनाओं (Strong nationalist feelings) को विकसित किया, वह एक सामाजिक रूढ़िवादी (Social conservative) थे। वह एक हिंदू थे और हिंदू शास्त्रों (hindu shatsar) के आधार पर धार्मिक और दार्शनिक टुकड़े लिखते हुए अपना बहुत time बिताया था।

वह अपने समय के सबसे लोकप्रिय प्रभावकों (Popular influences) में से एक थे, एक महान वक्ता और मजबूत नेता (strong politician) जिन्होंने लाखों लोगों को अपने कारणों से motivate किया था। आज, Tilak द्वारा शुरू किया गया गणेश चतुर्थी, को Maharashtra और neighbor states में प्रमुख त्यौहार माना जाता है।

तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने indians स्वतंत्रता संग्राम के एक famous personality होने के लिए कई biography पत्रिकाओं में चित्रित किया है। Tilak द्वारा शुरू किया गया एक मराठी अखबार (marathi newspaper) अभी भी प्रचलन में है, हालांकि अब यह Tilak के समय के दौरान एक weekly के बजाय दैनिक है।

Bal Gangadhar Tilak ke Prernadayak Suvichar | बाल गंगाधर तिलक के प्रेरणादायक सुविचार

  1. अगर हम किसी भी देश (history of country) के इतिहास के अतीत में जाएं, तो हम अंत में मिथकों (myths) और परंपराओं के काल में पहुँच जाते हैं जो आखिरकार अभेद्य अंधकार (darkness) में खो जाता है।
  1. जीवन एक ताश (game of cards) के खेल की तरह है, सही पत्तों का चयन हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमारी सफलता (success) निर्धारित करने वाले पत्ते खेलना हाथ में है।
  1. हम हमारे सामने सही रस्ते (right way) के प्रकट होने के इंतजार में अपने दिन खर्च (spend) करते हैं, लेकिन हम भूल (forget) जाते हैं कि रस्ते इंतजार करने के लिए नहीं, बल्कि चलने (walking) के लिए बने हैं।
  1. अगर आप रुके और हर भौंकने (barking dogs) वाले कुत्ते पर पत्थर फेंकेंगे तो आप कभी अपने गंतव्य (your target) तक नहीं पहुंचेंगे। बेहतर होगा कि हाथ में बिस्कुट (biscuit) रखें और आगे बढ़ते जाएं।

अपनी आमदनी लोगों को ना बताने के तीन फायदे

वर्क फ्रॉम होम को बनाये आसान यह 5 टिप्स

  1. मानव प्रक्रिया (human process) ही ऐसी है कि हम बिना उत्सवों के नहीं रह सकते! उत्सव (festive) प्रिय होना मानव स्वभाव है! हमारे त्यौहार (festival) होने ही चाहिएं।
  1. कर्तव्य पथ पर गुलाब-जल (rose water) नहीं छिड़का होता है और न ही उसमें गुलाब उगते हैं।
  1. भारत (india) को लहुलुहान किया जाता रहेगा जब तक केवल कंकाल (skeleton) अवशेष रहे… लोगों की पूरी जीवन शक्ति सोख ली जाती है और हमें गुलामी (slave) की एक क्षीण अवस्था में छोड़ दिया जाता है।
  1. जब लोहा गरम (metal getting hotel) हो तभी उस पर चोट कीजिये और आपको निश्चय ही सफलता (success) का यश प्राप्त होगा।
  1. आप केवल कर्म (hard work) करते जाईए, उसके परिणामों (results) पर ध्यान मत दीजिए।
  1. स्वराज मेरा जन्मसिद्ध (right from birth) अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा।
  1. अगर भगवान (bhagwan) अस्पर्शयता बर्दास्त करता है, तो मैं उसे भगवान (bhagwan) नहीं कहूँगा।
  1. गांवों में सद्भाव को नष्ट (destroy) करने के लिए किसानों के नाम पर हस्तक्षेप और साहूकार के साथ धोखा (ditch) है।
  1. एक अच्छे अखबार (newspaper) के शब्द अपने आप बोल देते हैं।
  1. आप मुश्किल समय में खतरों और असफलताओं (difficulties) के डर से बचने का प्रयास मत कीजिए। वे तो निश्चित रूप से आपके मार्ग (way) में आएंगे ही।

    15. प्रातः काल में उदय (sun rise) होने के लिए ही सूरज संध्या काल के अंधकार में डूब जाता है और अंधकार (darkness) में जाए बिना प्रकाश प्राप्त नहीं हो सकता।

111 Short Inspirational Quotes in Hindi  | 111 प्रेरणादायक कोट्स

15 Simple Tips to build confidence in kids

  1. गर्म हवा (hot wind) के झोंकों में जाए बिना, कष्ट उठाए बिना, पैरों (foot) में छाले पड़े बिना स्वतंत्रता नहीं मिल सकती। बिना कष्ट (without pain) के कुछ नहीं मिलता।
  1. महान उपलब्धियां कभी भी आसानी (easily) से नहीं मिलती और आसानी से मिली उपलब्धियां महान (great) नहीं होती।
  1. मनुष्य का प्रमुख लक्ष्य भोजन (food) प्राप्त करना ही नहीं है, एक कौवा भी जीवित (live) रहता है और झूठन पर पलता है।
  1. अपने हितों की रक्षा (safty) के लिए अगर हम जागरक नहीं होंगे तो दूसरा कौन होगा? हमें इस समय सोना (sleep) नहीं चाहिए, हमें अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए प्रयत्न (try) करना चाहिए।
  1. किसी देश में विदेशी शासन (foreign ruler) का बना रहना, ये असफल शासन की निशानी है।

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