भगवान का सहारा – Ishwar ki Kahani
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भगवान का सहारा – Ishwar ki Kahani

भगवान का सहारा – Ishwar ki Kahani

महाभारत का युद्ध होने जा रहा था। भगवान कृष्ण से मदद माँगने के लिए पाण्डव और कौरव दोनों ही उनके पास आये थे। पाण्डवों की ओर से अर्जुन आये और कौरवों की ओर से दुर्योधन। (Ishwar ki Kahani)

भगवान् कृष्ण बोले-“या तो मैं अपने को दे सकता हूँ या यादवों की सेना को। तुम दोनों एक-एक चीज माँग लो।”

दुर्योधन ने सोचा–अकेले कृष्ण क्या दे पायेंगे सहायता! लड़ना है, तो सेना की ही जरूरत पड़ेगी।

अर्जुन ने सोचा-हमें भगवान् मिल जायें, तो हम पाँचों पाण्डवों को पाँच लाख योद्धाओं की ताकत मिल जायेगी।

दोनों ने अपने-अपने मन की बात कह दी। भगवान ने अपने को पाण्डवों को दे दिया। यादव-सेना कौरवों के साथ रही।

और, जीता कौन? अकेले भगवान् का सहारा ले कर पाण्डव लड़े और जीत गये। थोड़े-से थे पाण्डव, लेकिन जीते। उधर, सौ कौरव हजारों-लाखों की यादव-सेना की सहायता से लड़े और हार गये।

यह होता है शुभ परिणाम भगवान् का सहारा लेने का। भगवान का सहारा ले कर अपनी शक्ति, क्षमता और साधनों का उपयोग करो, तो सफलता मिलेगी ही। भगवान् का सहारा न लोगे, तो तुम्हारी क्या, समूची धरती के प्राणियों की ताकत भी किसी काम नहीं आयेगी।

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