गज़ल किंग जगजीत सिंह की जीवनी Ghazal King Jagjit Singh Biography in Hindi
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Ghazal King Jagjit Singh Biography in Hindi – गज़ल किंग जगजीत सिंह की जीवनी

Ghazal King Jagjit Singh Biography in Hindi – गज़ल किंग जगजीत सिंह की जीवनी

यह जिंदगी किसी और की, कागज की कश्ती, और ना जाने कितने गीतों से श्रोताओं के दिल में बसने वाले गजल सम्राट जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने 70 के दशक में फीकी पड़ रही संगीत विधा में एक नई जान फूँकी और बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

अपने इतराती गज़लों के माध्यम से उर्दू को आम आदमी तक पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो सबसे पहले जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का नाम जुबां पर आता है जो कभी खालिस और नवाबों की मल्कियत समझी जाती थी।

उनकी ग़ज़लों ने न सिर्फ़ उर्दू के कम जानकारों के बीच शेरो-शायरी की समझ में इज़ाफ़ा किया बल्कि ग़ालिब, मीर, मजाज़, जोश और फ़िराक़ जैसे शायरों से भी उनका परिचय कराया। जगजीत सिंह (Jagjit Singh) की गजलों में गायकी का एक अलग ही अंदाज होता था जिसके चलते उनकी गायकी दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।

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Ghazal King Jagjit Singh Biography in Hindi – गज़ल किंग जगजीत सिंह की जीवनी

जगजीत सिंह का जन्म और शिक्षा – Early Life of Jagjit Singh

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) जी का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था इनके पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे जगजीत जी का परिवार पंजाब के रोपड़ ज़िले के दल्ला गांव का मूल निवासी था उनकी मां बच्चन कौर पंजाब के ही समरल्ला के उट्टालन गांव की रहने वाली थीं।

कहा जाता है कि बचपन में इनका नाम जगमोहन रखा गया था परंतु इनके पिता ने अपने धर्म गुरु के कहने पर इनके नाम में परिवर्तन कर जगजीत सिंह (Jagjit Singh) धीमान रख दिया।

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने अपने जीवन के सबसे सुनहरे पल राजस्थान के श्रीगंगानगर में ही बिताए थे इन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा श्रीगंगानगर की खालसा हाई स्कूल और गवर्नमेंट कॉलेज से की।

इसके बाद इन्होंने जालंधर जाकर डी ए वी कॉलेज से स्नातक किया और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से इतिहास में परस्नातक की डिग्री प्राप्त की। जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने बचपन में पंडित छगनलाल शर्मा के सानिध्य में दो साल तक शास्त्रीय संगीत सीखा और फिर सैनिया घराने के उस्ताद जमाल ख़ान साहब से ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद की बारीकियां सीखीं थी।

उनके पिताजी की ख्वाहिश थी कि उनका बेटा भारतीय  प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करें परंतु जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का मन गायकी में अधिक लगता था।

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जगजीत सिंह के संगीत का सफ़र – Jagjit Singh Musical Life and Career

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने अपनी गायकी के सफर को शुरू करते हुए सन 1961 में ऑल इंडिया रेडियो जालंधर में काम किया, इस दौरान उन्होंने कई गीतें लिखी।

वहीं साल 1962 में जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ° राजेंद्र प्रसाद के स्वागत में एक गीत लिखा था।

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान संगीत में उनकी दिलचस्पी देखकर कुलपति प्रोफ़ेसर सूरजभान ने जगजीत सिंह (Jagjit Singh) जी को काफ़ी उत्साहित किया और उन्हीं के कहने पर जगजीत सिंह (Jagjit Singh) सन 1965 में अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई आ गये। यहां पर उन्होंने एक विज्ञापन जिंगल्स के रूप में गायकी करना शुरू किया।

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) हिंदी फिल्म जगत में अपने पाश्र्वगायकी के सपने को लेकर संघर्ष कर ही रहे थे कि सन् 1967 में एक रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी मुलाकात चित्रा जी से हुई, चित्रा जी भी एक गायिका थी।

जिसके बाद चित्रा और जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने एक साथ एक एलबम में गाना गाया, इस एलबम को लोगों द्वारा काफी पसंद किया गया वहीं धीरे-धीरे जगजीत सिंह (Jagjit Singh) की आवाज का जादू लोगों पर चढ़ने लगा।

जिसके बाद जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने हिंदी फिल्म जगत की कई फिल्मों में गाने गाए और उनके यह गाने आज भी लोगों द्वारा बहुत पसंद किए जाते हैं।

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) और चित्रा जी ने दो सालों तक एक साथ काम किया और सन 1970 में परिणय सूत्र(विवाह) के बंधन में बंध गए। चित्रा जी का यह दूसरा विवाह था। उनकी पहले विवाह से एक पुत्री हुई थी।

उन दिनों तलत महमूद, मोहम्मद रफ़ी साहब, रफ़ी-किशोर-मन्नाडे जैसे महारथियों का दौर था , लोग इनके लिखे गीतो को बहुत पसंद किया करते थे, तब की मशहूर म्यूजिक कंपनी एच एम वी थी।

एचएमवी कंपनी ने सन 1975 में जगजीत को उनके पहले एल्बम ‘द अनफॉरगेटेबल्स’ का प्रस्ताव दिया जिसमें जगजीत और चित्रा की गजलें थीं। पारंपरिक सारंगी और तबले के साथ आधुनिक वाद्य यंत्रों को गजल गायिकी में लाने का श्रेय भी जगजीत को जाता है।

चित्रा और जगजीत की जोड़ी का पहला एल्बम ‘कम एलाइव’ आया। इसके बाद दो और एल्बम आए और दोनों के कंसर्ट होने शुरू हो गए, अब ऐसा समय आ चुका था कि जब जगजीत और चित्रा की जोड़ी ने अपने श्रोताओं के दिलों में एक अलग ही जगह बना ली थी। 

कुछ समय बाद उन्हें फिल्मों के प्रस्ताव आने लगे।  सन 1980 में उन्होंने ‘साथ साथ’ फिल्म में जावेद अख्तर की गजलों और नज्मों को अपनी आवाज दी , उसी साल महेश भट्ट की फिल्म ‘अर्थ’ से जगजीत और चित्रा की प्रसिद्धि आसमान छूने लगी।

जगजीत ने सन् 1987 में ‘बियोंड टाइम’ रिकॉर्ड किया, यह किसी भी भारतीय संगीतकार की पहली डिजिटल सीडी थी। जगजीत सिंह (Jagjit Singh) और चित्रा अपने पेशेवर ज़िन्दगी की बुलंदियों को छू ही रहे थे कि उनकी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी त्रासदी हो गई।

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जगजीत सिंह को बेटे की मृत्यु के बाद सदमा –  Shock of Death of Son

सन 1990 में उनका 18 वर्षीय बेटा विवेक एक कार दुर्घटना में मारा गया। बेटे की मौत  के सदमे ने मानो माता-पिता की दौड़ती जिंदगी पर विराम लगा दिया हों। चित्रा इस दर्द को सहन न कर पाई और अपनी आवाज खो बैठी फिर कभी दोबारा स्टेज पर ना लौटी।

जगजीत सिंह (Jagjit Singh) भी सदमे में चले गए और कई महीनों तक बोलना बंद कर दिया, लेकिन कुछ वक्त गुजरने के बाद जगजीत सिंह (Jagjit Singh) ने अपनी गायकी की शुरुआत की , अब उनकी गायकी में बहुत कुछ बदल चुका था क्योंकि अब वह गीतों के माध्यम से अपने दर्द को भुलाना चाहते थे।

जगजीत सिंह के सम्मान और पुरस्कार – Jagjit Singh Awards and Honors

भारत के ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। सन 1998 में जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को मध्य प्रदेश सरकार ने लता मंगेशकर सम्मान से नवाजा था। भारत सरकार द्वारा कला के क्षेत्र में सन 2003 में जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को पद्म भूषण सम्मान से पुरस्कृत किया गया था।

वही सन 2005 में दिल्ली सरकार द्वारा गालिब अकादमी पुरस्कार भी दिया गया था। इसके अलावा राजस्थान सरकार ने मरणोपरांत जगजीत सिंह (Jagjit Singh) को अपना उच्चतम नागरिक पुरस्कार यानी राजस्थान रत्न पुरस्कार प्रदान किया। संगीत नाटक पुरस्कार से भी इनको प्रोत्साहन और गायन के क्षेत्र में नया मुकाम मिला।

जगजीत सिंह की मृत्यु – Death of Jagjit Singh

हिंदी फिल्म जगत में गजल के बादशाह कहे जाने वाले जगजीत सिंह (Jagjit Singh) का 10 अक्टूबर 2011 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में देहावसान हो गया।

उन्हें ब्रेन हैमरेज होने के कारण 23 सितम्बर को भर्ती किया गया था बीमारी के चलते वो दो हफ्ते से भी अधिक समय तक कोमा में रहे। उनकी मृत्यु पर पूरे भारत ने शोक मनाया था। जगजीत जी के सम्मान में भारत सरकार द्वारा 2014 में उनकी तस्वीर लगी एक डाक टिकट जारी की।

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जगजीत सिंह की प्रमुख एल्बम – Popular Albums of Jagjit Singh

  •     इकॉस
  •     लाइव एट रॉयल अल्बर्ट हॉल लाइव
  •     द लेटेस्ट
  •     लाइव इन कॉन्सर्ट एट वेम्बली
  •     मैं और मेरी तंहाई
  •     अ माइलस्टोन
  •     अनफोरगेटबलस
  •     इश्क दी माला (आशा भोसले के साथ)
  •     जगजीत सिंह (Jagjit Singh) – पंजाबी हिट्स
  •     मन जीते जग जीत (गुरबाणी)
  •     सतनाम वाहेगुरु एही नाम है अधारा
  •     द ग्रेटेस्ट पंजाबी हिट्स ऑफ जगजीत एंड चित्रा सिंह
  •     इन्तेहा
  •     कोई बात चले
  •     तुम तो नहीं हो
  •     शहर
  •     मरासिम
  •     टूगेदर
  •     सिलसिले
  •     द प्लेबैक इअर्स
  •     लव इस ब्लाइड
  •     एटर्निटी

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