दस्त रोग – Loose Motion
Health HindiMe India News Internet

दस्त रोग – Loose Motion

दस्त रोग – Loose Motion

यह भी कैसा विचित्र संसार है एक ओर तो कुछ लोग कब्ज रोग से दःखी है. दसरी और बार-बार सढास जाने से दःखी है इन खेलों का भी जवाब नहीं। (दस्त रोग – Loose Motion)

हर रोग के पीछे इन्सान की अपनी ही कोई न कोई है। प्रकृति किसी इन्सान को दुःख नहीं देना चाहती। परन्त र भी प्रकतिक सीमा को पार करने का प्रयत्न करता है तो उसे कोई तो कष्ट सहन करना ही पड़ता है। ‘दस्त रोग’ भी इन कष्टों का एक अंग है।

जब भी इन्सान में अपने खाने पीने में कहीं गड़बड़ की अर्थात् जरूरत से अधिक खाया वहीं उसको इस रोग ने आ घेरा। रोग पैना नहीं होते बल्कि हम स्वयं ही अपनी भूल के कारण उन्हें जन्म देते हैं।

दस्त रोग इन्सान को अंदर से तोड़कर रख देता है। ऐसे रोगी को हज़म तो कुछ नहीं होता किन्तु जो कुछ भी वह खाता है वह पानी की भांति दस्त बनकर बाहर निकल जाता है। (दस्त रोग – Loose Motion)

कब्ज का इलाज – Treatment of Constipation

दस्त रोग क्यों और कैसे?

Loose Motion बच्चों को उस समय शुरू होता है जब वे दांत निकालने लगते हैं और बड़ो को उस समय शुरू होता है जब वे गंदी, बासी तथा गर्म चीजें खाते हैं।

जिन औरतों ने गर्म और शीघ्र हज़म होने वाली चीजें खाई हों और वे अपने बच्चों को दूध पिलाती हो ऐसी औरतों के बच्चों को भी दस्त रोग लग जाता है। इन बच्चों वाली औरते इस रोग के दिनों में अपने बच्चों को दूध न पिलाए तो अच्छा है।

जिन बच्चों को लोग गाएं, भैस का बाजारी दूध पिलाते हैं। उनमें से बहुत से बच्चों को दस्त का रोग लग जाता है। ऐसे बच्चों को या तो फटा हुआ दूध दें या फिर उस दूध में बराबर का पानी मिला कर छोटी इलायची तुलसी के पत्ते दूध में डालकर उबला हुआ दूध दें। इस प्रकार से उन्हें दूध हज़म हो जाता है।

इस प्रकार से बच्चों के दस्त रोग का पूरा पूरा ध्यान रखें।

बाजारी दूध पीने वाले बच्चों को जब दस्त लगे तो उन्हें दूध फाड़कर भी दिया जाता है।

आजकल तो बडी बडी दवाई कम्पनियों जिनमें आयुर्वेदिक का भी कम्पनियां हैं दस्त से बचने के लिये विशेष प्रकार का घोल तयार कर रखा है जो बंद पैकेटों में मिलता है। दस्त के लिये बहुत लाभदायक दवा है।

यदि किसी कारणवश आप को वह घोल नहीं मिलता तो सादा

पानी लेकर उसमें नमक और चीनी मिलाकर अपना घोल तैयार लें। आपातकाल के लिये यह बहुत काम की दवा है। (दस्त रोग – Loose Motion)

फलों तथा भोजन द्वारा दस्तों की चिकित्सा

  1. दस्त रोगी यदि इस रोग में भोजन नहीं कर अच्छा होगा।
  2. खाने में दही और दही की लस्सी अधिक उपयोगी है।
  3. यदि आप शीघ्र और सस्ता उपचार चाहती हैं तो दही में इस्बगोल का छिलका मिलाकर दिन में चार बार खाएं और नींब का रस काले नमक के साथ सेवन करने से इस रोग से मुक्ति मिलती है।
  4. दस्त रोगी को मीट, अंडा, मछली जैसी गर्म वस्तुओं को सिरे से त्याग देना होगा।
  5. शराब पीने वालों को शराब का त्याग करना होगा।

नींबू द्वारा चिकित्सा उबला हुआ थोड़ा सा गर्म दूध में नींबू निचोड़कर पीने से पेचस रोगी को लाभ होता है।

एक नींबू का रस आधे गिलास पानी में काली मिर्च और काले नमक के साथ मिलाकर पीने से दस्त रोगी को लाभ होता है।

जामुन से दस्त भागे जामुन की तीन चार पत्तियां लेकर उसे किसी भी प्रकार के सिलवटे अथवा माम जिस्ते में कूट पीसकर उसमें थोड़ा सा काला नमक मिला लें। रोगी को एक गोली सुबह, एक दोपहर, एक शाम को ठंडे जल के साथ सेवन करने से दस्त रूक जाते हैं।

अनार किसी ने ठीक ही कहा है“एक अनार सौ बीमार”

अर्थात एक अनार सौ रोगियों को भी ठीक कर सकता है और दस्त रोगियों के लिये तो अनार बहुत लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसका उपयोग इस प्रकार करें

एक अनार लेकर उसे मिट्टी का लेप करके आग में भून लें। जब वह अच्छी तरह भूना जाये तो उसे बाहर निकालकर दाने निकालकर दस्त रोगी को उसके रस को दिन में चार बार पिलाने से दस्त ठीक हो जाती है। (दस्त रोग – Loose Motion)

आंवला

सूखे आंवले और काला नमक लेकर उन्हें अच्छी तरह छानकर दही में मिलाकर दिन में चार बार खाने से पेना जाती है।

चावल

चावलों को उबालकर उनका पानी जो निकलता है उसे लोग बेकार समझकर फैंक देते हैं। वास्तव में यही चावलों से निकला पानी दस्त रोगियों को यदि एक-एक घंटे के पश्चात् पिलाएं तो रोगी को शीघ्र लाभ होता है।

बच्चों के लिये आधा कप काफी है। बड़ों के लिये एक कप चावल का पानी ठीक रहता है। यदि पीने में कोई कठिनाई महसूस हो तो थोडा सा काला नमक मिलाकर सेवन करें। (दस्त रोग – Loose Motion)

खसखस

खसखस के बारीक सफेद दानों को अच्छी तरह से पीसकर पानी में मिलाकर पीने से दस्त रोग ठीक हो जाता है।

पोदीना

दस्त रोगी को 4 चम्मच ताजा पोदीने का रस निकालकर दिन में चार बार पिलाने से दस्त रोग ठीक हो जाता है।

धनियां

हरा धनियां, काला नमक, काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर चटनी बनाकर चार-चार घंटे के पश्चात् रोगी को देते रहने से लाभ होता है।

घीया (लौकी)

दही को पतला करके उसमें घीया को कद्दू कस कर के डालें। यह रायता दस्त रोगी को हर तीन घंटे के पश्चात् एक छोटी कटोरी भरकर खिलाते रहें। दो दिन के प्रयोग से ही रोग ठीक हो जाएगा।

घोल बहुत गुणकारी और सफल नुसखा है जिसे हर आदमी बिना खर्च करके ही अपना उपचार कर सकता है। घोल तैयार करने का तरीका

ताजा पानी – आधा लिटर

चीनी – 20 ग्राम

नमक – 2, ग्राम

पानी को उबालकर ठंडा कर लें फिर उसमें चीनी और नमक मिला लें। बस आपका घोल तैयार है। रोगी बच्चा हो तो दो चम्मच बड़ा हो तो चार चम्मच हर दो घंटे के पश्चात् पिलाते रहें। (दस्त रोग – Loose Motion)

पीपल

पीपल के पत्ते 5 लेकर उन्हें धीरे-धीरे चबाते रहें। यदि चबाने म कुछ कष्ट महसूस होता हो तो इन पत्तों को उबालकर इनका पानी लेने से दस्त रोग से आराम मिलता है।

पपीता

कच्चे पपीते को काटकर पानी में अच्छी तरह उबालकर उसे लें और पानी को भी पी लें। इससे संग्रहणी जैसे रोग भी ठीक हो जाते

प्याज़

प्याज़ को कूट पीस कर नाभी पर लेप करने से दस्त रोग से मुक्ति मिल जाती है।

दोस्तों, आप यह Article Prernadayak पर पढ़ रहे है. कृपया पसंद आने पर Share, Like and Comment अवश्य करे, धन्यवाद!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *