Maharana Pratap Biography in Hindi
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Maharana Pratap Biography in Hindi

Maharana Pratap Biography in Hindi

महाराणा प्रताप के बारे में कुछ तथ्य एवं जानकारी – Maharana Pratap facts and Information in Hindi

उपनाम  Nickname- प्रताप सिंह

शासन काल – Ruled 1568-1597

जन्म  Birthday- 9 मई 1540

जन्मस्थान  Birth Place- कुम्भलगढ़ दुर्ग राजस्थान, भारत

मृत्यु  Death- 19 जनवरी 1597 (उम्र 56)

पूर्वज Ancestor – उदय सिंह द्वितीय

उत्ताधिकारी  Authority- अमर सिंह प्रथम

पत्नी  Wife – महारानी अजबदे पुनवार

पुत्र  Son – अमर सिंह

राजसी घर  Family- सिसोदिया

पिता  Father- उदय सिंह

माता  Mother- महारानी जयवंताबाई

धर्म  Religion- हिन्दू

बच्चे Children – 17 पुत्र और 5 पुत्रियाँ

अंतिम दिन महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की मृत्यु 19 जनवरी 1597 को चावंड में हुई थी।

राज्याभिषेक प्रताप अपने पिता राणा उदय सिंह (rana uday singh) की पहली पसंद नहीं थे। वह अपने दूसरे पुत्र जगमल को राजा (king) बनाना चाहते थे।

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हल्दीघाटी (haldi ghati) का युद्ध 21 जून 1576 को मुगल सेना और महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) सेना के बीच हल्दीघाटी गोगुंडा (वर्तमान में राजस्थान) में युद्ध (war) हुआ जिसमें मुगल सेना की संख्या अधिक होने के कारण महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की सेना को वहाँ से भागना पड़ा।

महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का युद्ध से बच निकलना प्रचलित कथाएं बताती है कि महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के एक सेना नायक ने उनके वस्त्रों (clothes) को धारण कर लिया और उनके स्थान पर युद्ध (war) में लड़ने लगा था और इस प्रकार महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) वहाँ से बच निकले।

गुरिल्ला का युद्ध (gorilla war) अपने निर्वासन के दौरान अरावली की पहाड़ियों में छिपकर महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने गौरिल्ला युद्ध की तकनीक का प्रयोग करके उन लोगों (peoples) पर चढ़ाई करने का प्रयास किया।

भामाशाह की सहायता (help) दानवीर भामाशाह ने सेनापति के रूप में प्रताप की सहायता की थी ताकि महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) मालवा पर उनकी लूट और मुगलों के खिलाफ लड़ाई (war) जारी रख सकें।

देवगढ़ का युद्ध देवगढ़ का युद्ध मेवाड़ और महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के बीच हुआ था जिसमें महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की सेना ने जीत हासिल की और कई मेवाड़ राज्यों (Mewad states) पर कब्जा कर लिया, लेकिन चित्तौड़ पर कब्जा करने में असफल (fail) रहे। 

महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक बातें – Amazing History of Maharana Pratap in Hindi

Maharana Pratap Bharat के सबसे पहले स्वतंत्रता सेनानी माने जाते है| महाराणा प्रताप की वीरता विश्व (world famous) विख्यात है| उन्होंने अपनी मातृभूमि (motherland) की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपने सिंहासन (post of kingdom) को छोड़ दिया और जंगलों में अपना जीवन (living in jungle) बिताया लेकिन मुग़ल बादशाह अकबर (mughal baadshah akbar) के सामने मरते दम तक अपना शीश नहीं झुकाया|

इतिहास के पन्नों (pages of history) में महाराणा प्रताप की वीरता (bravery) और स्वाभिमान (attitude) हमेशा के लिए अमर हो गयी| आज महाराणा प्रताप करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा (source of motivation) का स्त्रोत है| (Maharana Pratap Biography in Hindi)

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महाराणा प्रताप का जीवन- Life Story of Maharana Pratap

Maharana Pratap का जन्म 9 मई, 1540 में मेवाड़ (राजस्थान- rajasthan) में हुआ| महाराणा प्रताप मेवाड़ के राजा (king of mewad) उदयसिंह के पुत्र थे| महाराणा प्रताप बचपन (childhood) से ही वीर और साहसी थे| उन्होंने जीवन भर (whole life) अपनी मातृभूमि की रक्षा (safety of motherland) और स्वाभिमान के लिए संघर्ष (struggle) किया|

जब पूरे हिन्दुस्तान (Hindustan) में अकबर का साम्राज्य (kingdom of akbar) स्थापित हो रहा था, तब वे 16वीं शताब्दी में अकेले राजा (only king) थे जिन्होंने अकबर के सामने खड़े होने का साहस (shows bravery to stand in front of akbar) किया| वे जीवन भर संघर्ष करते रहे लेकिन कभी भी स्वंय को अकबर के हवाले नहीं किया|

Maharana Pratap का कद (height) साढ़े सात फुट एंव उनका वजन (weight) 110 किलोग्राम था| उनके सुरक्षा कवच (safety cover) का वजन 72 किलोग्राम और भाले का वजन 80 किलो था|

कवच, भाला, ढाल और तलवार (sword) आदि को मिलाये तो वे युद्ध में 200 किलोग्राम से भी ज्यादा वजन उठाए (fight) लड़ते थे| आज भी महाराणा प्रताप का कवच (cover), तलवार (sword) आदि वस्तुएं उदयपुर राजघराने के संग्रहालय (museum of Udaipur) में सुरक्षित रखे हुए है|

अकबर ने प्रताप के सामने प्रस्ताव (offer) रखा था कि अगर महाराणा प्रताप उनकी सियासत को स्वीकार (accept his kingdom) करते है, तो आधे हिंदुस्तान (half hindustan) की सत्ता महाराणा प्रताप को दे दी जाएगी लेकिन महाराणा ने उनके इस प्रस्ताव को (did not accept the offer) ठुकरा दिया|

लगातार 30 वर्षों तक प्रयास करने के बावजूद अकबर महाराणा प्रताप को बंदी (cant make him slave) नहीं बना सका| (Maharana Pratap Biography in Hindi)

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Maharana Pratap Biography in Hindi

हल्दीघाटी का युद्ध- Battle of HaldiGhati

महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच हल्दीघाटी (haldighati war) का महायुद्ध 1576 ई. लड़ा गया| इस युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना में सिर्फ 20000 सैनिक तथा अकबर (akbar) की सेना के 85000 सैनिक थे|

अकबर की विशाल सेना (huge army) और संसाधनों (resources) की ताकत के बावजूद महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी (did not accept the loose) और मातृभूमि के सम्मान (respect) के लिए संघर्ष (struggle) करते रहे|

हल्दीघाटी का युद्ध इतना भयंकर (dangerous) था कि युद्ध के 300 वर्षों बाद भी वहां पर तलवारें (swords) पायी गयी| आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 को हल्दीघाटी (haldi ghati) में मिला था|

चेतक घोड़ा – Horse named Chetak

महाराणा प्रताप की वीरता (bravery) के साथ साथ उनके घोड़े चेतक की वीरता भी (horse chetak is also world famous) विश्व विख्यात है| चेतक बहुत ही समझदार (brainy) और वीर घोड़ा (brave horse) था जिसने अपनी जान दांव पर लगाकर 26 फुट गहरे दरिया (deep pond) से कूदकर महाराणा प्रताप की रक्षा (safety) की थी| हल्दीघाटी में आज भी चेतक का मंदिर (temple of chetak horse) बना हुआ है|

महाराणा प्रताप की म्रत्यु- Death of Maharana Pratap

ऐसा कहा जाता है कि महाराणा प्रताप की म्रत्यु की खबर (news of death) सुनकर अकबर भी सुन्न (shocked) हो गया था| अकबर जानता था (akbar knows) कि महाराणा प्रताप जैसा वीर पुरुष (brave men was not in the world) पूरे विश्व में नहीं है| (Maharana Pratap Biography in Hindi)

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महाराणा प्रताप से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य: Important Facts Related to Maharana Pratap Biography

1. हल्दीघाटी का युद्ध (war) मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था. अकबर और महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी (dangerous) सिद्ध हुआ था.

2. ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध (haldi ghati war) में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे. मुगलों के पास सैन्य शक्ति (army power) अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति (power) की कोई कमी नहीं थी.

3. महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था. उनके भाला, कवच (shield), ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था. (Maharana Pratap Biography in Hindi)

4. आपको बता दें हल्दी घाटी (haldighati) के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे और अकबर के पास 85000 सैनिक. इसके बावजूद महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष (struggle) करते रहे.

5. कहते हैं कि अकबर ने महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को समझाने के लिए 6 शान्ति दूतों को भेजा था, जिससे युद्ध (war) को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके, लेकिन महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने यह कहते हुए हर बार उनका प्रस्ताव ठुकरा दिया कि राजपूत योद्धा (warrior) यह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता.

6. महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने अपने जीवन में कुल 11 शादियां की थीं. कहा जाता है कि उन्होंने ये सभी शादियां (marriage) राजनैतिक कारणों से की थीं.

7. महाराणा प्रताप को बचपन 9childhood) में कीका के नाम से पुकारा जाता था.

8. Maharana Pratap का सबसे प्रिय घोड़ा चेतक था. महाराणा प्रताप की तरह ही उनका घोड़ा चेतक (horse chetak) भी काफी बहादुर था.

9. बताया जाता है जब युद्ध के दौरान मुगल सेना (mughal army) उनके पीछे पड़ी थी तो चेतक ने महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को अपनी पीठ पर बैठाकर कई फीट लंबे नाले को पार किया था.आज भी चित्तौड़ की हल्दी घाटी में चेतक की समाधि बनी हुई है.

10. हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की तरफ से लडने वाले सिर्फ एक मुस्लिम सरदार था -हकीम खां सूरी.

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