मोहन भागवत जीवनी - Mohan Bhagwat Biography in Hindi
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Mohan Bhagwat Biography in Hindi – मोहन भागवत जीवनी

Mohan Bhagwat Biography in Hindi – मोहन भागवत जीवनी

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat), यह एक ऐसा नाम है, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है। वह world के सबसे बड़े स्वयंसेवी संस्थान माने जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS – आरएसएस) के छठवें प्रमुख हैं।

संघ के पांचवें प्रमुख रहे Sh. K. S. Sudarshan ji ने अपनी retirement पर मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को अपने उत्तराधिकारी के रूप में choose किया था। 

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat), जन्म: 11 September, 1950, Chandrapur, Maharashtra) एक animal doctor और 2009 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS – आरएसएस) के सरसंघचालक हैं।

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उनका complete name मोहनराव मधुकरराव भागवत है। 21 March, 2009 को उन्हें संघ के सरसंघचालक के रूप में select किया गया था। इनका पूरा परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS से जुड़ा हुआ था। मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के पिता मधुकर राव भागवत (Madhukar Rao Bhagwat) चंद्रपुर क्षेत्र के अध्यक्ष और Gujarat के प्रांत प्रचारक थे।

मधुकर राव ने ही Sh. Lal Krishan Adwani ji का RSS से परिचय करवाया था। मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) अपने brother’s and sister’s में सबसे बड़े हैं। इनके छोटे भाई चंद्रपुर RSS इकाई के अध्यक्ष भी हैं।

Emergency के दौरान underground work करने के बाद भागवत 1977 में अकोला (महाराष्ट्र) में promoter बन गए और बाद में उन्हें Nagpur and Vidarbh area का promoter बनाया गया।

Year 1991 में सारे देश में संघ कार्यकर्ताओं (Sangh workers) के physical fitness के लिए अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख बने और वे इस post पर 1999 तक रहे।

इसी वर्ष उन्हें सारे देश में full time काम करने वाले संघ कार्यकर्ताओं (sangh workers) का प्रभारी, head of Akhil Bhartiya Pracharak, बना दिया गया।

Year 2000 में जब राजेन्द्र सिंह (Rajendra Singh – रज्जू भैय्या) और एच.वी. शेषाद्रि (HV Sheshadri) ने क्रमश: संघ प्रमुख-सरसंघचालक और महासचिव (सरकार्यवाह) पद से resignation दिए तो K.S. Sudarshan को new संघ प्रमुख और मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को नया संघ प्रमुख और मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को सरकार्यवाह बनाया गया था। 

वर्ष 2009 में 21 March को मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को सरसंघचालक का designation दिया गया। संघ का chief बनने वाले वे youngest person’s में से एक हैं।

उन्हें संघ का clean and soft spoken और व्यवहारिक chief माना जाता है जोकि संघ को politics से दूर रखने की एक clear vision रखते हैं।  

भागवत पश्चिमी देशों के घोर विरोधी हैं। एक भाषण में उन्होंने कहा था कि ‘महिलाओं से house hold काम करने की अपेक्षा की जाती है’ और उनका कहना था कि ‘rape की घटनाएं इंडिया (पश्चिमपरस्त भारत – West indian thinking) में होती हैं भारत  (village और भारत  के अब तक नैतिक रूप से best parts) में नहीं।

Akola में district promoter रहे, फिर संघ की रचना में जिस तरह से districts का development किया है उसमें Vidarbh एक अलग district है. वे Vidarbh के district प्रचारक रहे.

Vidarbh के district प्रचारक रहते हुए वे Nagpur के संघ मुख्यालय (Sangh Head office) के contact में लगातार बने रहे. Vidarbh के बाद वे Bihar के area promoter रहे. 1987 में संघ की central working committee में आ गये और अखिल भारतीय सह शारिरीक Chief के बतौर काम करने लगे.

Central working committee में उन्होंने 1991 से 1999 तक शारीरिक Chief के रूप में काम किया फिर 1 year के लिए promotion chief हुए. सन 2000 में जब Sudarshan सरसंघचालक बने तो Mohan Rao Bhagwat सरकार्यवाह बनाये गये.

2000 से 2009 तक वे तीन संघ के caretaker बने रहे. आरएसएस की working committee में दूसरे नंबर का working person होता है.

Caretaker रहते हुए मोहनराव भागवत generally चुपचाप ही काम करते रहे और कभी संघ की सीमा के बाहर जाकर न तो media से बात की और न ही किसी प्रकार का कोई statement दिया.

संघ और उसके Relevant organizations के मंचों पर वे लगातार संघ को strong and powerful करने के लिए बोलते और कार्य करते रहे.

लेकिन 22 March 2009 को Nagpur में जब उन्हें आरएसएस का छठां सरसंघचालक (6th sarsanghchalak) बनाने की घोषणा की गयी तब maybe किसी को उम्मीद रही हो कि Mohanrao की संघवाली दृढ़ता भाजपा (BJP) के साथ भी applicable होगी और सबसे पहले उनके family friend और father के शिष्य लालकृष्ण आडवाणी (Sh. Lalkrishan Adwani) पर ही लागू होगी.

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) को एक active person के रूप में देखा जाता है। उन्होंने हिन्दुत्व (hindutva) के विचार को modernization के साथ आगे ले जाने की बात कही है।

उन्होंने बदलते time के साथ change दिया है। लेकिन इसके साथ ही association का base समृद्ध और प्राचीन भारतीय मूल्यों (Ancient Indian values) में दृढ़ बनाए रखा है।

Mohan Bhagwat कहते हैं कि इस प्रचलित धारणा के opposite के संघ old thinking और मान्यताओं से stick रहता है, इसने modernization को accept किया है और इसके साथ ही यह Bharat देश के लोगों को right proper way भी दे रहा है।

हिन्दू समाज (Hindu society) में जातीय असमानताओं के question पर,  Mohan Bhagwat ने कहा है कि untouchability के लिए कोई place नहीं होना चाहिए।

Sh. Bhagwat जी ने इसके साथ ही यह भी कहा कि अनेकता में एकता के सिद्धान्त (Principles of unity in diversity) के आधार पर स्थापित हिन्दू समाज (Hindu society) को अपने ही समुदाय के लोगों के against होने वाले भेदभाव के स्वाभाविक दोषों (natural flaws) पर special focus देना चाहिए।

केवल यही नहीं अपितु इस community के लोगों को society में प्रचलित इस तरह के भेदभावपूर्ण रवैये (Discriminatory attitude) को दूर करने का प्रयास करते रहना चाहिए और इसकी शुरुआत प्रत्येक हिन्दू (hindu house) के घर से होनी चाहिए।

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मोहन भागवत का दृष्टिकोण : View of Mohan Bhagwat

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) एक practical leader हैं। वह modernization के साथ हिंदुत्व (hindutva) को अपनाने की पैरवी भी करते हैं। संघ की मूलभूत विशिष्टताओं (Basic characteristics) को बरकरार रखते हुए मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) time के साथ change में believe रखते हैं।

मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) हिंदू धर्म (hindu dharma) और इसकी मान्यताओं (traditions) का पूरा समर्थन (support) करते हैं। लेकिन वह अस्पृश्यता (untochability) के बड़े विरोधी (against) हैं। उनका मानना है कि हिंदू धर्म (Hindu Dharma) अनेकता में एकता को अपने अंदर पूर्णरूप से समाहित किए हुए है, यहां बिना किसी प्रकार के भेदभाव के सभी अनुयायियों को एक बराबर ही स्थान और सम्मान मिलना चाहिए।

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