NRC क्या है? What is National Register of Citizens?
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NRC क्या है? What is National Register of Citizens?

NRC क्या है? What is National Register of Citizens?

नमस्कार दोस्तों, हम आपके सामने फिर से प्रस्तुत है अपनी नयी पोस्ट जिसका नाम है, NRC क्या है? What is National Register of Citizens? दोस्तों आज इस पोस्ट में हम आपको National Register of Citizens यानी के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर की पूरी जानकारी देने जा रहे है, कृपया ध्यान से पोस्ट पढ़े और अच्छी लगने पर शेयर अवश्य करे.

एनआरसी का फुल फॉर्म क्या है | What is NRC Meaning

NRC का full form National Register of Citizens है। हिंदी में एनआरसी का फुल फॉर्म है राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर है। यह एक रजिस्टर (register) है जिसमें सभी real Indian Citizens के नाम है। राज्यसभा (Rajya Sabha) में Sh. Amit Shah ने कहा कि NRC में धर्म के base पर लोगों को बाहर करने का कोई प्रावधान (provision) नहीं है।

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को Assam State में update किया गया जिसमें लगभग 20 लाख लोगों को भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) से वंचित कर दिया गया है. इस article में आप यह जानेंगे कि असम के लोगों को अपनी नागरिकता (citizenship) सिद्ध करने के लिए किन-किन डाक्यूमेंट्स (documents) की जरूरत पड़ेगी?

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राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर  क्या है | What is National Register of Citizenship NRC

Assam में NRC को सबसे पहले 1951 में Citizens, उनके घरों और उनकी property को जानने के लिए तैयार किया गया था. Assam state में NRC को update करने की मांग 1975 से ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (All Assam Students Union – AASU) द्वारा उठाई गयी थी. हालाँकि इसी संगठन ने अब इसके खिलाफ केस भी फाइल किया है.

असम समझौता(1985); Bangladeshi Independence से एक दिन पहले 24 March 1971 की आधी रात को state में entry करने वाले बांग्लादेशी शरणार्थियों (Bangladeshi Refugee) के नाम मतदाता सूची (voting list) से हटाने और वापस Bangladesh भेजने के लिए बनाया गया था.

असम की आबादी लगभग 33 million है. यह एकमात्र state है जिसने NRC को update किया है. एनआरसी की प्रक्रिया 2013 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश पर शुरू हुई थी.

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के उद्देश्य | Objectives of NRC

असम में NRC update का मूल उद्देश्य; प्रदेश में Foreigner Citizen और Indian Citizen की पहचान करना है. ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (All Assam Students Union – AASU) जैसे संगठनों और असम के other citizens का दावा है कि बांग्लादेशी प्रवासियों (Bangaldeshi Refugee) ने उनके अधिकारों को लूट लिया है और वे state में हो रही आपराधिक गतिविधियों (illegal activities) में शामिल हैं. इसलिए इन शरणार्थियों को उनके देश बांग्लादेश वापिस भेज दिया जाना चाहिए.

NRC के बारे में डेटा:

Government ने NRC process पर लगभग 1200 करोड़ रुपये spend किए हैं, इसमें 55000 सरकारी अधिकारी (Government Officials) शामिल थे और पूरी प्रक्रिया में 64.4 मिलियन documents की जांच की गई थी.

असम का नागरिक कौन है | Who is citizen of Assam

25 March, 1971 से पहले असम में रहने वाले लोग citizen of Assam माने जाते हैं. इस state में रहने वाले लोगों को List A में दिए गए documents में से कोई एक deposit करना था. इसके अलावा दूसरी list B में दिए गए documents को अपने Assam के पूर्वजों से related स्थापित करने के लिए एक documents पेश करना, जिससे यह माना जा सके कि आपके पूर्वज असम (Assam) के ही थे.

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राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर क्या है? | What is national register of citizen?

NRC को कैसे अपडेट किया गया है? | How to Update National Register of Citizens

यदि कोई भी असम के नागरिकों (citizen of Assam) की selected list में अपना नाम देखना चाहता है, तो उसे 25 March, 1971 से पहले राज्य में अपना निवास proof करने के लिए ‘लिस्ट A’ में दिए गए किसी एक documents को NRC फॉर्म के साथ submit करना होगा.

अगर कोई यह दावा करता है कि उसके पूर्वज Assam के मूल निवासी हैं, इसलिए वह भी Assam का निवासी है तो उसे ‘List B’ में उल्लिखित किसी भी एक document के साथ एक NRC form submit करना होगा.

लिस्ट A में कौन से दस्तावेज शामिल थे? | List of Documents in list “A”

लिस्ट A’ में मांगे गए important document इस प्रकार हैं;

  1. साल 1951 का NRC
  2. 24 मार्च 1971 तक voting list में शामिल नाम
  3. जमीन के मालिकाना हक के document
  4. Tenant होने का दस्तावेजी सबूत
  5. नागरिकता प्रमाण पत्र | Citizenship Certificate
  6. स्थायी निवासी प्रमाण पत्र | Permanent resident certificate
  7. शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र | Refugee registration certificate
  8. किसी सरकारी संस्था द्वारा जारी license या certificate
  9. Government या सरकारी उपक्रम में नियुक्ति का document
  10. बैंक या post office अकाउंट
  11. जन्म प्रमाण पत्र | Birth certificate
  12. राज्य के शिक्षा बोर्ड या university के सर्टिफिकेट
  13. अदालत के आदेश | Court order
  14. पासपोर्ट | Passport
  15. कोई भी बीमा पॉलिसी | Insurance Policy

Above given list of document में से कोई भी 24 मार्च 1971 के बाद का नहीं होना चाहिए. अगर असम के किसी citizen के पास इस date से पहले का कोई document नहीं है तो 24 March 1971 से पहले का इस तरह का अपने father or grand father का document दिखाया जा सकता है.

लेकिन ऐसे लोगों को नीचे दिए गए documents में से कोई एक दिखाकर अपने father or grand father से अपना relation prove करना होगा.

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लिस्ट B में शामिल दस्तावेज

  1. जन्म प्रमाणपत्र | Birth certificate
  2. जमीन के कागजात | Land Documents
  3. School बोर्ड या यूनिवर्सिटी के Proof
  4. Bank/ insurance/ post office के रिकॉर्ड
  5. राशन कार्ड | Ration Card
  6. मतदाता सूची में नाम | Name in Voting List
  7. Legally acceptable अन्य दस्तावेज
  8. Married Woman के लिए सर्कल अधिकारी या ग्राम पंचायत सचिव का certificate

फाइनल एनआरसी सूची जारी | Final NRC list released

असम में last NRC list 31 अगस्त 2019 को जारी की गई थी. इस list में 19,06,657 लोगों को शामिल नहीं किया गया जबकि 3.11 crore peoples इस नागरिकता सूची में add किये गये हैं. इस list में कुल 3.29 करोड़ लोगों ने apply किया था.

क्या सूची से बहिष्करण का मतलब विदेशी घोषित होना है? | Does exclusion from the list mean being declared foreign?

इसका साफ़ सा मतलब है, नहीं; जो लोग list से बाहर किए गए हैं, वे उन foreign tribunal पर आवेदन कर सकते हैं जो 1964 के कानून (Law) के तहत अर्ध न्यायिक निकाय (Quasi judicial body) हैं. ये लोग list जारी होने के 120 days के भीतर इन न्यायाधिकरणों से appeal कर सकते हैं.

यदि किसी को विदेशी ट्रिब्यूनल (foreign tribunal) में foreigner घोषित किया जाता है तो वह High Court का रुख कर सकता है. यदि किसी को Court द्वारा विदेशी घोषित किया जाता है तो उसे arrest करके नजरबंदी center में रखा जा सकता है. July 2019 तक; 1,17,264 व्यक्ति foreigner घोषित किए गए हैं, जिनमें से 1,150 arrest किये गए हैं.

यह थी राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National citizenship register) के बार में पूर्ण जानकारी इसमें हमने NRC के उद्देश्यों, असम की नागरिकता (citizenship of Assam) को साबित करने के लिए important प्रक्रिया और दस्तावेजों का वर्णन किया है. यह topic  यूपीएससी (UPSC) और अन्य राज्य सेवा आयोगों (STATE Service Commissions- SSC) के मुख्य परीक्षाओं के लिए बहुत important है.

NRC पूरे देश में हुआ लागू तो आपको भी दिखाना होगा यह documents

हर भारतीय नागरिक (Indian Citizen) के जहन में एक ही question आएगा कि मुझे अपनी citizenship prove करने के लिए कौन-कौन से documents दिखाने पड़ सकते हैं?

संसद (Sansad) के शीतकालीन सत्र में गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Sh. Amit Shah) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में कहा कि अवैध लोगों (illegal peoples) की पहचान के लिए पूरे देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर – National Register of Citizenship (NRC- एनआरसी) लागू होगा. Sh. Amit Shah ने कहा कि NRC में सभी religion और संप्रदाय के लोगों को शामिल किया जाएगा.

अभी तक देशवासियों के दिलोदिमाग में एनआरसी (NRC) का नाम सुनते ही Assam आता था, लेकिन अगर Assam की तरह देश के अन्य सभी States और Center Ruled States में NRC लागू हो जाय तो क्या होगा?

इस situation में हर भारतीय नागरिक (Indian Citizen) के मन में एक ही सवाल आएगा कि मुझे अपनी citizenship prove करने के लिए कौन-कौन से documents दिखाने पड़ सकते हैं?

असम में 30 July 2018 को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का last draft जारी कर दिया गया है. NRC में शामिल होने के लिए Assam में 3.30 करोड़ लोगों ने apply किया था, जिसमें से 40.07 लाख applicants को जगह नहीं मिली.

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असम में NRC में उन लोगों के नाम add किए गए हैं जो 25 मार्च 1971 के पहले से Assam के citizen हैं. अगर आपके पूर्वज असम में रहते थे, तब भी आप Assam की NRC  में शामिल हो सकते थे.

Important question यह है कि क्या देश के other state में NRC लागू करने में Assam वाला formula ही इस्तेमाल किया जायेगा? क्या different states के नागरिकों के लिए citizenship prove करने का अलग-अलग formula अपनाया जाएगा?

एक question यह भी है कि NRC के लिए किसी व्यक्ति को उस state का residence माना जा सकता है जहां का उसका परिवार मूल रूप से रहने वाला है?

अगर किसी व्यक्ति के माता-पिता (parents) दो अलग-अलग state से हैं तो उनके लिए क्या option दिया जा सकता है? इसके साथ ही Assam में NRC के लिए अपनाई जा रहे process को विशेषज्ञ काफी difficult बता रहे हैं, जिसे अगर पूरे देश में start कर दिया गया तो लोगों के लिए काफी problem होने वाली है.

अगर हम यह मान लें कि Assam में NRC में किसी व्यक्ति का name add करने के लिए जो formula लगाया है वही whole country में लागू होता है तो आपको below-written documents की जरूरत पड़ सकती है.

Assam में रहने वाले लोगों को NRC की new list में शामिल होने के लिए सूची A में दिए गए documents में से किसी एक को deposit करना था. इसके साथ ही list B में दिए गए documents में से भी कोई एक दिखाना था. इसकी help से आप अपने पूर्वजों से relation स्थापित कर सकते हैं.

इस process का motive यह prove करना है कि आपके पूर्वज Assam के ही रहने वाले थे.

कौन भारतीय नागरिक है और कौन नहीं? | Who is Indian Citizen and who is not?

संविधान में भारतीय नागरिक (Indian citizen) को स्पष्ट तौर पर पारिभाषित (define) किया गया है. संविधान का Article 5 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति भारत (India) में जन्म लेता है और उसके मां-बाप (parents) दोनों या दोनों में से कोई एक भारत (India) में जन्मा हो तो वो भारत (India) का नागरिक होगा. भारत (India) में संविधान लागू होने के 5 साल पहले यानी 1945 के पहले से रह रहा हर व्यक्ति भारत (India) का citizen माना जाएगा.

अगर कोई भारत (India) में नहीं भी जन्मा हो, लेकिन वो यहां रह रहा हो और उसके मां-बाप (parents) में से कोई एक भारत (India) में पैदा हुए हों तो वो भारत (India) का नागरिक माना जाएगा. अगर कोई व्यक्ति यहां 5 साल तक रह चुका हो तो वो भारत (India) की नागरिकता के लिए apply कर सकता है.

संविधान का अनुच्छेद 6 | Article 6 of the Constitution

संविधान का अनुच्छेद 6 Pakistan से भारत (India) आए लोगों की नागरिकता को पारिभाषित करता है. इसके मुताबिक 19 july 1949 से पहले पाकिस्तान से भारत (India) आए लोग भारत (India) के नागरिक माने जाएंगे.

इस date के बाद पाकिस्तान से भारत (India) आए लोगों को citizenship हासिल करने के लिए registration करवाना होगा. दोनों situations में व्यक्ति के parents या दादा-दादी का भारतीय नागरिक (Indian citizen) होना जरूरी है.

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संविधान का अनुच्छेद 7 | Article 7 of the Constitution

संविधान का अनुच्छेद 7 Pakistan जाकर वापस लौटने वाले लोगों के लिए है. इसके मुताबिक 1 March 1947 के बाद अगर कोई व्यक्ति Parkistan चला गया, लेकिन लेकिन रिसेटेलमेंट परमिट (Resettlement permit) के साथ तुरंत वापस लौट गया हो वो भी भारत (India) की नागरिकता हासिल करने का पात्र है. ऐसे लोगों को 6 महीने तक यहां रहकर नागरिकता के लिए registeration करवाना होगा. ऐसे लोगों पर 19 July 1949 के बाद आए लोगों के लिए बने rule लागू होंगे.

संविधान का अनुच्छेद 8 | Article 8 of the Constitution

संविधान का अनुच्छेद 8 foreign में रह रहे भारतीयों की नागरिकता (Indian citizens) को लेकर है. इसके मुताबिक foreign में पैदा हुए बच्चे को भी भारतीय नागरिक (Indian citizen) माना जाएगा अगर उसके मां-बाप या दादा-दादी में से से कोई एक भारतीय नागरिक (Indian citizen) हो. ऐसे बच्चे को नागरिकता (Indian citizen) हासिल करने के लिए भारतीय दूतावास (Embassy of India) से संपर्क कर registration करवाना होगा.

संविधान का अनुच्छेद 9 | Article 9 of the Constitution

संविधान का अनुच्छेद 9 भारत (India) की single citizenship को लेकर है. इसके मुताबिक अगर कोई भारतीय नागरिक (Indian citizen) किसी और देश की नागरिकता ले लेता है तो उसकी भारतीय नागरिकता (Indian citizen) अपने आप खत्म हो जाएगी.

संविधान का अनुच्छेद 10 | Article 10 of the Constitution

संविधान का अनुच्छेद 10 नागरिकता (citizenship) को लेकर संसद (Sansad) को अधिकार देता है. इसके मुताबिक अनुच्छेद 5 से लेकर 9 तक के rule का पालन करने वाले भारतीय नागरिक (Indian citizen) होंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार (central government) के पास नागरिकता को लेकर rule बनाने का अधिकार होगा. सरकार नागरिकता को लेकर जो rule बनाएगी उसके आधार पर किसी को citizenship दी जा सकेगी.

संविधान का अनुच्छेद 11 | Article 11 of the Constitution

संविधान का अनुच्छेद 11 संसद (Sansad) को नागरिकता पर कानून (Law) बनाने का अधिकार देता है. इस अनुच्छेद के मुताबिक किसी को citizenship देना या उसकी नागरिकता खत्म करने related Law बनाने का अधिकार भारत (India) की संसद (Sansad) के पास है.

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अकेला राज्य जहां NRC लागू है

Assam देश का अकेला राज्य है, जहां सिटीजन रजिस्टर (citizen register) लागू है। राज्य में पहली बार नेशनल सिटीजन रजिस्टर (national Citizen Register) साल 1951 में बना था। तब बने सिटीजन रजिस्टर (citizen register) में उस साल हुई population counting में शामिल हर person को राज्य का citizen माना गया था।

इसके बाद past few years राज्य में एकबार फिर उसे update करने की मांग की जा रही थी। Actually, पिछले कई दशकों से राज्य में neighbor countries खासकर बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ की वजह से वहां population संतुलन बिगड़ने लगा था।

इसी वजह से वहां के लोग NRC  update करने की मांग कर रहे थे। इस मांग को लेकर और uncontrolled अवैध घुसपैठ के against में कई बार राज्यव्यापी हिंसक विरोध-प्रदर्शन (Statewide violent protests) भी हो चुके थे।

4 साल से 62 हजार कर्मचारी लिस्ट बनाने में जुटे थे

NRC list जारी होने के साथ ही 4 साल से जारी process complete हो गया। इस काम में 62 thousand employees 4 साल से लगे थे। असम में NRC office year 2013 में बना था, पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की निगरानी में काम 2015 से शुरू हुआ। पहली list 2017 और दूसरी list 2018 में publish हुई थी।

नाम न होने पर आगे के विकल्प | Other Options When Name not in the List

Final List में नाम नहीं होने के बावजूद लोगों को खुद को भारतीय नागरिक (Indian citizen) साबित करने के और chances दिए जाएंगे। ऐसे foreign peoples पहले ट्रिब्यूनल में जाएंगे, उसके बाद High court और फिर Supreme Court में अपील कर सकेंगे।

लोगों को State Government भी कानूनी मदद देगी। 2018 की list में 3.29 करोड़ लोगों में से करीब 10% को नागरिक (citizen) नहीं माना था।

राज्य में सुनवाई के लिए एक हजार ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे

Government के अनुसार NRC से बाहर होने वाले लोगों के मामले की सुनवाई के लिए State में एक हजार tribunal बनाए जाएंगे। State में 100 tribunal बनाए जा चुके हैं, जिनमें से 200 September पहले हफ्ते में शुरू हो जाएंगे। लोगों को इस related appeal करने के लिए 120 days की मोहलत मिलेगी।

6 डिटेंशन सेंटर में 1,000 लोग रह रहे है!

राज्य में फिलहाल 6 detention center चल रहे हैं। इनमें करीब एक हजार illegal peoples रह रहे हैं। इनमें ज्यादातर बांग्लादेश और म्यांमार (Bangladesh and Myanmar) के हैं, जो देश की सीमा में without documents घुस आए या Visa अवधि खत्म होने के बाद भी state में बने रहे। हालांकि Government ने clear कर दिया है कि नागरिकता खोने के बावजूद भी लोगों को detention center नहीं भेजा जाएगा।

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टाइमलाइन के जरिए NRC प्रक्रिया में हुए बड़े बदलावों के बारे में जानें

May 2005- तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (The then Prime Minister Manmohan Singh) की अध्यक्षता में केंद्र सरकार, Assam government और आसू (AASU- ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन) के representative’s के बीच त्रिपक्षीय बैठक हुई।

बैठक में 1985 में हुई असम संधि (Assam Sandhi) के दौरान किए गए promises को पूरा करने के लिए NRC को update करने को लेकर strong step उठाने को लेकर तीनों पक्षों के बीच सहमति बनी। इसके बाद Central Government ने असम सरकार से बात करने के बाद इसे start करने की प्रक्रिया तय की।

july 2009- ‘असम पब्लिक वर्क्स’ (Assam public Works) नाम के एक NGO (गैर सरकारी संगठन) ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में याचिका लगाते हुए उन प्रवासियों (emigrants) के नाम voting list से हटाने की मांग की, जिन्होंने अपने documents जमा नहीं कराए थे।

साथ ही इस NGO ने court से NRC  प्रक्रिया शुरू करवाने की request  भी की। ये पहला मौका था जब NRC का मामला Supreme Court पहुंचा था।

August 2013- असम पब्लिक वर्क्स (Assam public Works) की याचिका पर सुनवाई शुरू हुई।

December 2013- उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने NRC अपडेट करने के लिए process start करने का आदेश दिया।

February 2015- उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने वास्तविक नागरिकों और illegal रूप से रह रहे अप्रवासियों की पहचान के लिए December 2013 में ही NRC को update करने का आदेश दे दिया था। लेकिन इसकी real process February 2015 में जाकर शुरू हुई।

31 December 2017- Government ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC – National Register of Citizens) का first draft जारी किया।

30 July 2018- Assam Government ने NRC का second draft जारी किया। जिसमें राज्य में रहने वाले 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों को Indian citizen माना गया। इस दौरान 40 लाख से ज्यादा peoples का name add नहीं किया गया।

31 December 2018- सरकार द्वारा NRC का last draft जारी करने के लिए यही last date तय की गई थी। हालांकि इस date पर ये काम पूरा नहीं हो सका।

NRC Final List

26 June 2019- NRC से बाहर रहने वाले लोगों की list पर एक अतिरिक्त मसौदा प्रकाशित (Additional draft published) किया गया। इस सूची में कुल 1, 03,642 name थे, जिसके बाद register से बाहर रहने वाले लोगों की कुल संख्या 41, 11,178 हो गई।

NRC Final List 2019

31 July 2019- सरकार ने नेशनल सिटिजन रजिस्टर (National Citizen Register – एनआरसी) की आखिरी लिस्ट जारी की। यह फाइनल एनआरसी लिस्ट (final NRC List) 31 जुलाई को प्रकाशित होनी थी, पर एनआरसी अथॉरिटी (NRC Authority) द्वारा राज्य में flood का हवाला देने के बाद इसे 31 August तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया था।

इससे पहले 2018 में 30 July को एनआरसी का final draft आया था। list में शामिल नहीं लोगों को again verification के लिए एक साल का समय दिया था।

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NRC का इतिहास – NRC History in Hindi

NRC का इतिहास बहुत पुराना हैं। 1905 में जब अंग्रेजों ने division of Bengal किया, तब पूर्वी बंगाल और Assam के रूप में एक नया प्रांत बनाया गया था, तब असम को पूर्वी बंगाल (East Bengal) से जोड़ा गया था।

जब country का बंटवारा हुआ तो ये डर भी पैदा हो गया था कि कहीं ये East Pakistan के साथ जोड़कर India से अलग न कर दिया जाए।

तब गोपीनाथ बोर्डोली (Gopinath Bordoli) की अगुवाई में Assam Vidroh शुरू हुआ। Assam अपनी रक्षा करने में successful रहा। लेकिन सिलहट पूर्वी पाकिस्तान (Sylhet East Pakistan) में चला गया। 1950 में असम देश का state बना।

असम बनने के बाद तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (East Pakistan) और बाद के Bangladesh से असम में लोगों के illegal ways से आने का सिलसिला जारी रहा। Situation तब ज्यादा खराब हुए जब तब के पूर्वी पाकिस्तान (East Pakistan) यानी बांग्लादेश में language dispute को लेकर आंतरिक संघर्ष शुरू हो गया।

उस समय East Pakistan में situation इतनी हिंसक हो गई कि वहां रहने वाले Hindu and Muslim दोनों ही religions की एक बड़ी population ने भारत का रुख किया।

1971 में जब East Pakistan में पाकिस्तानी army ने दमनकारी कार्रवाई शुरू की तो करीब 10 लाख लोगों ने Bangladesh Border पार कर असम में शरण ली। हालांकि 16 December 1971 को जब Bangladesh को एक Independent Country घोषित कर दिया गया, उसके few days के बाद वहां पर हिंसा में कमी आई।

Violence कम होने पर बांग्लादेश से India आए बहुत सारे लोग अपने country Bangladesh लौट गए, लेकिन लाखों की संख्या में लोग Assam में भी रुक गए। इसके बाद से ही local peoples और संगठनो द्वारा बाहरी लोगो को out करने की आवाज उठाने लगी।

1971 से 1991 के बीच Assam में बड़ी संख्या में voters बढ़े, जिसने असम में illegal ways से लोगों के entry की तरफ इशारा किया। Especially बांग्लादेशियों के आने के कारण ही इस area में voters की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी (immense growth) हुई है।

हालांकि local protest को दरकिनार करते हुए Government (1991) ने इन सारे लोगों को voter list में शामिल कर लिया। केंद्रीय नेतृत्व (Central leadership) के इस व्यवहार से स्थानीय लोगों (local peoples) में आक्रोश फैल गया। ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) (All Assam Student Union- AASU) और असम गण संग्राम परिषद के नेतृत्व में लोग roads पर उतर गए।

आंदोलन के नेताओं ने claim किया कि state की population का 31 से 34 प्रतिशत हिस्सा बाहर से आए लोगों का है। यह आंदोलन 6 years तक जारी रहा। August, 1985 में Indian Government और इन दोनों संगठनों के बीच Assam Samjhota हुआ जिसके बाद हिंसा पर रोक लगी और Assam में new Government का गठन हुआ।

इस agreement का एक अहम भाग यह था कि 1951 की एनआरसी सूची (NRC list) में संशोधन किया जाएगा। और इसके तहत 1971 से पहले जो भी Bangladeshi असम में घुसे हैं, उन्हें India की नागरिकता दी जाएगी।

हालांकि इस पर काम start नहीं हो सका। 2005 में जाकर Congress Government ने इस पर काम शुरू किया। इसके बाद राज्य की गोगोई सरकार (Gogoi Government) ने मंत्रियों के एक समूह का गठन किया। उसके जिम्मे था कि वो Assam के कई संगठनों से बातचीत करके एनआरसी को अपडेट (NRC update) करने में मदद करें।

हालांकि इसका कोई benefit नहीं हुआ और process ठंडे बस्ते में चली गई। बाद में असम पब्लिक वर्क (Assam Public Work) नाम के एनजीओ सहित कई अन्य associations ने 2013 में इस issue को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जनहित याचिका दायर की।

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2015 में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देश पर इसमें तेजी आई। इसके बाद असम में citizens के सत्यापन का काम शुरू हुआ। Whole state में एनआरसी केंद्र (NRC center) खोले गए। असम का नागरिक होने के लिए वहां के लोगों को documents सौंपने थे। November 2017 में असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court)  से कहा था कि 31 December 2017 तक वो एनआरसी (NRC) को अपडेट कर देंगे।

31 December 2017 को बहु-प्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens) का पहला ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया। Legally भारत के नागरिक के रूप में Identity Card करने हेतु असम में लगभग 3.29 करोड application present किये गए थे, जिनमें से कुल 1.9 करोड़ लोगों के name को ही इसमें add किया गया है।

इसके बाद 2018 July में final draft पेश किया गया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने, जिन 40 लाख लोगों के नाम list में नहीं हैं, उन पर किसी तरह की सख्ती बरतने पर फिलहाल के लिए रोक लगाई है।

हालाँकि इस list को फिर से update किया गया और 2019 में जारी किया गया, जिसमे 19,06,675 का name शामिल नहीं हैं। Last list में कुल 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है।

वहीं चुनाव आयोग (Election commission) ने भी स्पष्ट किया है कि एनआरसी (NRC) से नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि voting list से भी ये नाम हट जायेंगे। केंद्र सरकार (central government) और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Chief Minister Sarbananda Sonowal) ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया है कि list में नाम न होने पर किसी भी व्यक्ति को हिरासत (under police custody) में नहीं लिया जाएगा और उसे अपनी citizenship साबित करने का हरसंभव मौका दिया जाएगा।

तो दोस्तों यह था राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Register of Citizens) से जुड़ा पूरा कच्चा-चिठा, हमने यह Article बहुत research and hard work के बाद लिखा है, अगर आपको इसमें कोई कमी या गलती दिखे तो कमेंट बॉक्स में बताये, ताकि हम उसको सुधार सके. आर्टिकल पसंद आया हो तो शेयर करना न भूले, धन्यवाद.

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