Pari ki Kahani in Hindi | हिंदी परी की कहानी
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Pari ki Kahani in Hindi | हिंदी परी की कहानी

Pari ki Kahani in Hindi | हिंदी परी की कहानी

Pari ki kahani in Hindi – रायगढ़ के राजा राजेश्वर सिंह बूढ़े हो चुके थे, उनके पांच पुत्र थे, लेकिन कोई बालिग नहीं था. रायगढ़ के बगल की रियासत शंकर गढ़ का राजा चंद्र सिंह बहुत कुटिल और चालाक किस्म का था.

रायगढ़ राजेश्वर सिंह के नेतृत्व में बहुत ही समृद्ध था. शंकर गढ के राजा चंद्र सिंह की निगाह में रायगढ़ हमेशा खटकता था. एक दिन राजेश्वर सिंह ने कुछ और रियासतों की help से रायगढ़ पर हमला कर दिया.

रायगढ़ की सेना वीरता से लदी, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा. इस लड़ाई में राजा राजेश्वर सिंह वीरगति को प्राप्त हो गये. रियासत पर चंद्र सिंह का कब्जा हो गया और रानी पांचों बच्चों के साथ jungle में चली गयीं.

इसी बीच रानी की तबीययत खराब रहने लगी और दवाइयों के अभाव में उन्होने ने भी इस दुनिया से विदा ले लिया. पांचों लकड़ियाँ तोड़कर उसे बाजार में बेचते, इसी से उनका गुज़ारा चल रहा था. एक दिन सभी भाई खाना खाने बैठे थे तभी सबसे छोटे भाई ने कहा ” यह भी क्या जिंदगी है. आख़िर हम राजा के लड़के हैं” (Pari ki Kahani)

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जब हम राजा के लड़की थे तब की बात दूसरी थी. आज हमारी पहचान एक “लकडहारे ” की है. उसी से हमारा पेट भरता है. दिन में सपने क्यों देखता है.- बड़े भाई ने गुस्से से कहा, “ठीक है, आप लोगों को यह लकड़हारे की जिंदगी मुबारक, लेकिन मैं कुछ बनकर ही वापस आऊंगा. ” सबसे छोटे भाई ने कहा और निकल गया.

उसे किसी ने रोकने की कोशिश भी नहीं की, उन्हें लगा कि वह नाराज़ है, कुछ समय में लौट कर आ जाएगा. लेकिन वह लौट कर नहीं आया. चलते-चलते वह एक jungle में पहुंच गया. वह बहुत थक चुका था और उसे बहुत तेज प्यास लगी थी.

हिंदी परी की कहानी

अचानक उसे एक कुँआ दिखाई दिया, उस बाल्टी और रस्सी रखी हुई थी. उसानी कुएँ से पानी निकाला, हाथ मुंह धोकर पानी पिया. तब उसे कुछ राहत महसूस हुई.

अब वह सोचने लगा कि इतने घने jungle में आखिर किसने यह बाल्टी रखी है. उसने चारो तरफ नजर दौड़ाई तो उसे एक महल नज़र आया. वह महल का निरीक्षण करने लगा तो पाया कि महल चारो तरफ से बंद था, उसमे कोई भी खिड़की या दरवाजे भी नहीं थे, उसके बाहरी दीवार पर खूबसूरत नक्शा बना हुआ था.

कहीं से भी अंदर जानने का मार्ग ना देख कर वह पुनः कुएं पर आया और पेड़ों से कुछ फल तोड़कर खाये. उसका नाम सूरज था. अब वही उसकी दिनचर्या हो चुकी थी. भाइयों के पास वह नहीं जाना चाहता था, क्योंकि उसे पता था भाई उसे ताना मारेंगे.

एक दिन सुबह कुछ विचित्र सी आवाजें सुनकर वह चौंककर उठा, तो देखा कि 6-7 बंदर उसे घेरे हुए खड़े थे और बार-बार कुएं की तरफ इशारा कर रहे थे. तभी एक बड़ा बंदर जो कि उनका सरदार था, उसने एक गोल सा पत्थर सूरज को दिया. पत्थर को हाथ में लेते ही उसमें से एक अजीब सी रोशनी निकली और उसके बाद सूरज उन बंदरों की हर बात को समझने लगा. (Pari ki Kahani)

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उसके बाद उस बड़े से बंदर ने हाथ जोड़कर कहा कि इस कुएं में उसका बच्चा गिर गया है, कृपया उसे बचा लीजिये. उसके बाद सूरज ने बड़ी मेहनत के बाद बाल्टी की सहायता से उस बंदर के बच्चे को निकाल दिया. बाकी सारे बंदर खुश होते हुये वहां से चले गये, लीकिन वह बंदरों का सरदार वहीं रुका और सूरज से यहां इस घने jungle मीन आने का कारण पूछा, तब सूरज ने सारी बातें उसे बता दी.

उसके बाद वह सूरज को अपने घर ले आया, वह रोज ताजे, मीठे फल सूरज के लिए लाता था. एक दिन सूरज से उस बंदर से पूछा “सरदार जी आप रोज कहां जाते हो” पहले तो बंदर सकुचाया, लेकिन बार-बार पूछे जाने पर उसने कहा कि ” मैं रोज इंद्र लोक जाता हूँ, वहीं से यह ताजे, मीठे फल लाता हूँ.”

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अरे वाह, मुझे भी ले चलो ना आज….सूरज खुश होते हुये बोला. नहीं..मैं तुम्हें वहां नहीं ले जा सकता, क्योंकि वहां मानव का जाना वर्जित है, हां फिर भी मैं कोशिश ज़रूर करूंगा….बंदर ने कहा.

कुछ दिन बीते, अचानक एक दिन इंद्र सभा का एक तबला वादक बीमार पड़ गया. अब इंद्रलोक में समस्या खड़ी हो गयी कि तबला कौन बजायेगा. तब बंदर ने चालाकी से सूरज का नाम दे दिया. सभी लोग मान गये. बंदर ने सूरज को एक “चोला” देते हुए सारी बात बताई और उसे वह ” चोला” पहन कर तैयार होने को कहा. तय समय पर वह सूरज को लेकर इंद्रलोक पहुंचा और उसे वही गोला अपने पास रखने को कहा, जिससे वहां की सारी बातें सूरज को समझ आ सके.

बंदर जब सभा में पहुंचा, तो वहां की मुख्य नर्तकी Pari  ने द्वार पर ही धीरे से सूरज से पूछा कि ” तबला बजा लेते हो”. जिस पर सूरज ने विनम्रता से कहा “नहीं’

ठीक है, कोई बात नहीं…तुम चाहे जैसा बजाना, मैं सब संभाल लूंगा…बंदर ने कहा और मन ही मन सोचा कि शायद इसे इस अनमोल पत्थर की पूरी जानकारी नहीं हुई है. उस दिन ऐसी समाँ बँधी कि समय का पता ही नहीं चला, सब लोग वाह-वाह का उठे. चलते समय उस नर्तकी के Pita ने कहा कि ” बेटा, आज तुमने पूरे इंद्रलोक को खुश कर दिया. मैं भी इस लोक का वासी हूँ. माँगों क्या माँगते हो, तुम जो मांगोगे मिलेगा…हीरा..मोती…सोने..रत्न, जो चाहो” (Pari ki Kahani)

नहीं, जाने दीजिए..मैं जो मागुंगा..आप उसे नहीं देंगे…सूरज ने कहा. ऐसी बात नहीं है बेटा, हम ज़बान के पक्के हैं…अगर हमारे बस में है तो हम उसे अवश्य देंगे….नर्तकी के Pita ने कहा.

ठीक है फिर, मुझे आपकी बेटी का हाथ चाहिए…आपने वचन दिया है और यह आपके हाथ में है और मैं आपको वचन देता हूँ कि मैं इसे हमेशा खुश रखूँगा…सूरज ने कहा. ठीक है..लेकिन मुझे अपनी बेटी से इस बारे में पूछना पड़ेगा…उसकी राय भी जननी ज़रूरी है…नर्तकी Pari  के Pita ने कहा. ठीक फिर…आप पूछ लीजिये..सूरज ने कहा.

नर्तकी के Pita ने सारी बात नर्तकी Pari को बताई, उसका नाम नम्रता था..उसने भी हां कह दी..क्योकि वह भी सूरज को पसंद करने लगी थी. दोनों की धूमधाम से शादी हो गयी. उसके बाद वानरों ने नम्रता के Pita की जादुई शक्तियों से चंद्र सिंह पर आक्रमण कर दिया. Yudh में चंद्र सिंह की सेना बुरी तरह हार गयी. (Pari ki Kahani)

चंद्र सिंह को बंदी बना लिया गया. उसके बाद सूरज ने अपने भाइयों का पता लगवाया. उनकी हालत  और हालात दोनों ही पहले की तरह बुरे थे. उनको पुरे सम्मान के साथ महल बुलाया गया. सूरज ने राज्य की गद्दी अपने बड़े भाई को दे दी. वानरों के सरदार को सेनापति बनाया गया. सभी लोग ख़ुशी से रहने लगे.

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