5 परियों की कहानी – 5 Pariyon ki Kahani
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5 Pariyon ki Kahani – 5 परियों की कहानी

5 Pariyon ki Kahani – 5 परियों की कहानी

  1. सोने की गुफा – Golden Cave

परियों की कहानी Pariyon ki Kahani

एक दूसरे गाँव का businessman रामपुर गाँव में बैलगाड़ी से घूमने आया था। रामपुर गाँव बेहद बड़ा एवं खूब सुंदर था। उस वक़्त बरसात का मौसम था। व्यापारी उस गाँव में कच्ची सड़क से आ रहा था और रास्ते मे ही उसकी बैलगाड़ी एक नाले मे फंस गयी। और उसके बैल उस पहिये बाहर निकाल नही पा रहे थे।

व्यापारी ने उतरकर बैलगाड़ी को बाहर निकाला जिससे उसकी हालत खराब हो गयी। वहा पर पास में ही नदी था और व्यापारी वही नदी के पानी से जब हाथ पैर धोने गया तो उसे पानी में कुछ चमकता हुआ सा दिखाई दिया।

जब व्यापारी ने पानी को गौर से देखा तो उसमें उसे सोना चमकता हुआ दिख रहा था। व्यापारी सोचने लगा के यहाँ शायद यहां कोई गुफा है जहां से यह सोने वाला पानी आ रहा है। और फिर  व्यापारी उस नदी के बहने वाली दिशा की तरफ चल पड़ा।

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व्यापारी को आगे जाने के बाद उसे एक बेहद विशाल गुफा दिखाई देने लगी जिसे देखकर व्यापारी चौक गया और उसने देखा के नदी का पानी गुफा की तरफ से बह रहा है। व्यापारी चारो तरफ देखने के बाद गुफा के अंदर गया और जब उसने देखा तो गुफा के अंदर बहुत सारे आसपास कंकाल पड़े थे। और जब व्यापारी और अंदर गया तो वह देखकर चौक गया।

क्योकि गुफा के अंदर तो सोना ही सोना था जिस तरफ देखो वहां सोना ही सोना था। मानो गुफा में सोने का पूरा भंडारा भरा हुआ था। और वही पर एक बेहद बड़ा साँप सोया हुआ था जो उस व्यापारी को दिखाई नही दिया। व्यापारी को सोने को देखकर लालच आ गया और वह सोना हर हाल में ले जाना चाहता था।

वह झटपट से अपने गांव वापस आया तो उसे रास्ते मे उसे कुछ डाकू दिखे जिनके हाथो में हथियार थे। उन्होंने व्यापारी को पकड़ लिया और और उस से सोना मांगने लगे। उस व्यापारी ने उन्हें सोने की गुफा के बारे मे सब बता दिया और वह उनकों अपने साथ लेकर वहा गया।

डाकुओं ने जब सोने की गुफा की गुफा देखी तो उनके मन में लालच आ गया।

और फिर व्यापारी ने कहा :- हम सभी इस सोने को आपस में हिस्सों मे बाँट लेंगे।

डाकुओं ने ज्यादा सोना पाने की लालच मे व्यापारी को वही पर मार डाला। और एक बड़ा सा बोरा लेकर उसमे सोना भरने लगे और उनके द्वारा सोना भरने की आवाज़ से वहा पर सोया हुआ साँप उठ गया जैसे ही उस सांप ने उन डाकुओ को देखा साँप को बेहद क्रोध आ गया और उसने क्रोध में आकर सभी डाकुओ को को मार दिया और उन्हे खा गया।

और इस प्रकार से वह सोने वाली गुफा फिर से एक रहस्य ही बनकर रह गयी.

  1. असली कुल्हाड़ी – Asli Kulhadi

परियों की कहानी Pariyon ki Kahani

एक गांव मे दो भाई रहा करते थे। एक भाई का नाम अबू और दुसरे भाई का नाम लल्लू था।

अबू स्वभाव मे बेहद समझदार और काफी ईमानदार था। जबकि लल्लू अपने नाम के जैसा ही था, वह स्वभाव मे आलसी और मूर्ख था।

दोनो भाई अलग-अलग घरो मे रहते थे। दोनो भाई लकड़ी काटकर अपने घर का गुजारा चलाते थे।

अबू अधिक महेनत करके लकड़ी काटता था और फिर उसे बाजार मे बेचता था। और जब की लल्लू जंगल (jungle) मे जाता और पेड़ के नीचे जाके आराम से सो जाता था।

एक दिन जब अबू जंगल (jungle) मे लकड़ी काट रहा था तो अचानक से उसकी कुल्हाड़ी हाथ से निकलकर पास बहती नदी मे गिर गई.

अबू खाली हाथ वही पर उदास होकर बैठ गया। तभी अचानक से नदी मे से एक परी (Pari) सोने की कुल्हाड़ी हाथ में लेकर प्रकट हुई और अबू से बोली के.

परी (Pari) :- क्या ये कुल्हाड़ी तुम्हारी है ?

अबू :- नही पारी जी यह मेरी कुल्हाड़ी नही है।

(परी फिर वापस नदी मे जाती है और फिर वह से एक चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आती है और अबू से बोलती है)

परी (Pari) :- क्या ये वाली है तुम्हारी कुल्हाड़ी?

अबू :- नही पारी जी यह भी मेरी कुल्हाड़ी नही है।

(Pari फिर से वापिस नदी मे जाती है और वह से एक लोहे की कुल्हाड़ी लाकर बोलती है)

परी :- क्या यह है तुम्हारी कुल्हाड़ी ?

अबू :- जी हां पारी जी यही है मेरी कुल्हाड़ी।

परी अबू की इस ईमानदारी से बेहद खुश होती है और उसे सोने, चाँदी और लोहे की तीनो कुल्हाड़िया दे देती है।

अबू बहुत खुश होकर अपने घर जाता है और अपनी बीवी को सारी बात विस्तार से बता देता है।

लल्लू की पत्नी अबू की सोने और चांदी की कुल्हाड़ी को देख लेती है और अबू की बीवी से उस कुल्हाड़ी के बारे मे पूछती है तो अबू की बीवी सारी बात लल्लू की बीवी को बता देती है।

और फिर लल्लू की पत्नी साड़ी बात लल्लू को बता देती है और लल्लू तुरंत से उस जंगल (jungle) मे लकड़ी काटने के लिये चला जाता है।

लल्लू भी वही पर उस नदी के पास लकड़ी काटते– काटते अपनी कुल्हाड़ी जानबूझकर को नदी मे फैक देता है। और फिर वही पर उदास होकर बैठ जाता है

फिर अचानक से वही परी नदी मे से सोने की कुल्हाड़ी लेकर लल्लू के सामने आती है और लल्लू से बोलती है।

परी (Pari) :- क्या यह कुल्हाड़ी तुम्हारी है ? (Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी)

लल्लू :- एकदम से बोलता है, हां, हां पारी जी यही मेरी कुल्हाड़ी है।

(Pari तुरंत ही समझ जाती है के लल्लू एक लालची इंसान है) और फिर परी लल्लू को कहती है।

परी (Pari) :- मुर्ख लालची लकडहारे, तूने सोने की कुल्हाड़ी को पाने के लिये अपनी कुल्हाड़ी खुद ही पानी मे फैक दी और इस सोने की कुल्हाड़ी को अपनी बोल रहा है, जा तुझे कोई भी कुल्हाड़ी नही मिलेगा।

ऐसा बोलकर वह परी वहा से गायब हो गयी और लल्लू वही पर बैठा पछताता और रोता रहा है।

  1. उड़ने वाला पंखाUdne Wala Pankha

Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी

एक वृन्दावन नाम का गांव था। गांव मे एक शेरू नाम का बेहद मेहनती व्यक्ति रहता था। वह बहुत ही गरीब था। वह पेड़ की लकड़ी काटकर बेचा करता और अपना गुजर बसर चलाता था।

जंगल (jungle) उसके गांव से काफी दूर था। और उसे अपने घर से जंगल (jungle) तक जाने मे बहुत समय लग जाया करता था।

शेरू जंगल (jungle) से एक पेड़ काटता तो वहा पर कटे पेड़ की जगह एक पौधा लगा देता था जिससे के उसी जगह पर दुसरा पेड़ उग सके। इस प्रकार शेरू जल्दी से लकड़ी काटने जाता जाता था और पेड़ काटकर वह पौधा लगाकर घर लकड़ी लेकर आ जाता था.

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एस बार लकड़ी काटते वक़्त कहा पर शेरू पौधा लगा रहा था के तभी वहा अचानक से भगवान प्रकट हो गये। और शेरू से बोले..

भगवान :- शेरू मै तुमहारे इस कार्य से बेहद खुश हूँ। मांगो जो भी तुम वरदान मांगना चाहते हो मांग लो.

शेरू :- हे भगवान… मै रोज ही अपने गांव से जंगल (jungle) तक आता– जाता हूँ । जिसमें मेरा बहुत बहुत समय लग जाता है और ये जंगल (jungle) मेरे गांव से भी बहुत दूर है।

भगवान, क्या आपके पास कोई ऐसा उपाय है जिससे मेरी यह परेशानी दूर हो सके?

भगवान :- मै तुम्हे एक पंखा दे रहा हूँ, यह कोई साधारण पंखा नही है यह एक जादुई पंखा है

अगर तुम इस पंखे पर बैठ जाओ तो यह तुम्हे लेकर उड़ सकता हो और कटी हुई लकड़ी भी साथ में लेकर उड़कर तुम्हे तुम्हारे घर तक आसानी से ला सकता है.

(और फिर ऐसा बताकर, भगवान शेरू को पंखा देकर गायब हो जाते है) (Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी)

शेरू जंगल से लकड़ी काट लेता है और फिर लकड़ी को पंखे पर लेकर बैठ जाता है। पंखा तुरंत ही उड़ने लगता है और शेरू उसे अपने घर की दिशा बताता है।

पंखा शेरू और लकड़ी के साथ उसके घर पर पहुँचा देता है। इस प्रकार शेरू जल्दी से जल्दी लकड़ी काटता और जल्दी उसे बेचकर पैसे कमाता।

इस प्रकार से शेरू का काम काफी जल्दी से होने लगा और अब शेरू धीरे – धीरे धनवान होने लगा। अब शेरू के पास एक बड़ा सा बंगला हो गया था और शेरू अब शेरू सेठ बन गया था। 

अब शेरू ने काम करने के लिये दो कारीगर भी अपने पास काम पर रख लिए थे, जो उसके लिए काम करते थे. इस तरह से एक बार एक कारीगर जंगल (jungle) मे लकड़ी काटने गए शेरू का जादुई पंखा लेकर वह से भाग गया था।

वह जंगल (jungle) की लकड़ी काटने की जगह जादुई पंखा अपने साथ लेकर लेकर भाग गया और फिर दुबारा वापस नही आया।

जब शेरू को इस बात का पता चला तो वह बेहद पछताने लगा।

  1. ईमानदार शेरू Imandar Sheru

Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी

एक गरीब इंसान था, उसका नाम था विजय। उसने बहुत मेहनत से कुछ धन इक्कठा किया था। एक दिन उसके मन में तीर्थ मे जाने का विचार आया।

वह तीर्थ यात्रा करने के लिये धन इक्कठा करने लगा, परंतु बचे हुए धन को अगर वह अपने घर पर रखता तो डर था के चोर धन को चोरी कर लेगा।

यही सोचकर विजय अपने धन को सही जगह रखने के लिये सोचने लगा तो उसे अचानक से याद आया कि वह अपना धन रवि सेठ के पास रख देता हूँ.

और जब वह तीर्थ यात्रा करके आएगा तो अपने धन को सेठ से वापस ले लेगा, और यही सोचकर विजय ने तुरंत अपना सारा धन रवि सेठ के पास रख दिया. विजय ने रवि सेठ को अपने तीर्थ यात्रा पर जाने की बात कही और अपने धन को रवि सेठ को देकर तीर्थ यात्रा के लिये चल पड़ा. (Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी)

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और फिर एक महीने बाद जब शेरू तीर्थ यात्रा करके वापस अपने गांव आया , तो विजय के पास तीर्थ यात्रा के वक़्त उसका सारा धन खर्च हो चुका था.

शेरू रवि सेठ को अपने दिये हुए धन को वापस लेने के लिये गया और तीर्थ यात्रा का प्रसाद भी साथ लेकर गया।

विजय ने रवि सेठ को तीर्थ यात्रा का प्रसाद दिया और फिर सेठ से कहा….

राम :- सेठ जी अब मेरा सारा धन तीर्थ यात्रा मे खर्च हो चूका है अत: जो धन मैंने आपके पास रखा था वह आप मुझे वापस कर दीजिये. तो सेठ उस से बोला..

रवि सेठ :- कौन सा धन भाई, और कैसा धन, किसका धन, मै तो तुम्हारे किसी धन के बारे में नही जानता ?

विजय ने सेठ को बहुत समझाया परन्तु रवि सेठ ने धन वापस नही दिया.

विजय उदास हो गया और उदास होकर वह रास्ते से वापस आ रहा था के उसे रस्ते मे एक बूढ़ी माँ मिल गयी। उस बूढ़ी माँ ने विजय से उसके उदास होने का कारण पुचा तो रामु ने तुरंत सारी कहानी बूढ़ी माँ को बता दी.

बूढ़ी माँ विजय से बोली, बेटा तुम किसी प्रकार की कोई चिंता मत करो। मै तुम्हे तुम्हारा धन तुम्हे वापस दिलवाकर ही रहूंगी.

(बूढ़ी माँ ने फिर विजय को एक योजना बताई)

और फिर दुसरे दिन बूढ़ी माँ बहुत सारा धन लेकर सेठ के पास जाती है विजय भी उसी वक़्त  रवि सेठ के पास आता है।

बूढ़ी माँ :- सेठ जी कल में शहर में किसी काम से जा रही हूँ, कृपया करके तुम मेरे इस धन को अपने पास कुछ दिन के लिए रख लोगे?

(इतने मे विजय सेठ से कहता है) (Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी)

विजय :- सेठ जी मैंने जो तुम्हारे पास अपना कुछ धन रखा था। अब वह आप मुझे वापस दे दो।

(अब सेठ सोच मे पड़ गया के बूढ़ी माँ के पास विजय से ज्यादा धन है। और अगर उसने विजय का धन उसे वापस नही दिया तो बूढ़ी माँ अपना धन मुझे नही देगी) और यह बात सोचकर….

रवि सेठ :- हां- हां विजय जो तुम्हारा धन मेरे यहा जमा है, वोह तुम ले जाओ।

विजय अपना धन रवि सेठ से वापस ले लेता है और उतने में तभी बूढ़ी माँ सेठ से कहती है के….

बूढ़ी माँ :- सेठ जी रहने दो, अब मै गांव नही जाउंगी, अब मैं फिर किसी और दिन जाउंगी, अब मेरा विचार बदल गया है.

इस प्रकार बूढ़ी माँ चालाकी से विजय को उसका धन, लालची रवि सेठ से वापस दिलवा देती है। और इस प्रकार विजय को उसकी संपति लालची सेठ से वापस मिल जाती है।

  1. चॉकलेट की दुनिया – Chocolate ki Duniya

Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी

एक रिंकू नाम का लड़का रहता था। वह हमेशा अपनी मम्मी से चॉकलेट खाने की ज़िद करता था। और उसकी मम्मी उसे कभी कभी चॉकलेट दे भी देती थी।

लेकिन रिंकू हमेशा ही अपनी मम्मी से चॉकलेट मांगता था। एक बार रिंकू ने अपने मम्मी से चॉकलेट खाने के लिये पैसे मांगता है परन्तु उसकी मम्मी उसको पैसे देने से मना कर देती है (Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी)

और उसको डांट देती है तो रिंकू नारज वह से नाराज़ होकर अपने कमरे मे जाकर धम्म से उदास होकर बैठ जाता है। और तभी वहा पर एक परी प्रकट होती है और रिंकी को पूछती है.

परी ने कहा :- क्या हुआ रिंकू, तुम यहाँ पर क्यों उदास हो।

रिंकू ने कहा :- परी दीदी- पारी दीदी, मुझे ढेर साड़ी चॉकलेट चाहियें। परन्तु मेरी मम्मी मुझे चॉकलेट खरीदने के लिये पैसे नही दे रही है।

रिंकू की बात सुनकर परी अपनी जादुई छड़ी को घुमती है तो तुरंत से रिंकू चॉकलेट की दुनिया मे पहुँच जाता है। वह पर रिंकी को चारों तरफ केवल चॉकलेट ही चॉकलेट दिखाई देता है।

चॉकलेट की नदी, चॉकलेट का पेड़, चॉकलेट की जमीन, चॉकलेट की घास, चॉकलेट का पौधा, कहने का मतलब है, सभी जगह केवल चॉकलेट ही दिखाई दे रहा था।

रिंकू ने वह खूब सारी चॉकलेट खायी, उसने वह पर चॉकलेट की घास, चॉकलेट की जमीन, और चॉकलेट का पौधा तक भी खाया।

इतनी चॉकलेट खाने के बाद उसका पेट पूरी तरह से भर गया। और थोड़े देर वहा रहने के बाद रिंकी को उसकी मम्मी की याद सताने लगी। रिंकू ने परी दीदी को बुलाया

रिंकू :- परी दीदी, परी दीदी अब मुझे घर जाना है।

परी :- नही रिंकू, अब तुम अपने घर नही जा सकते हो।    

(यह बोलकर परी दीदी वहा से गायब हो गयी)

रिंकू यह सुनकर जोर जोर से रोने लग गया और chocolate ki duniya से निकलने के लिये रास्ता खोजने लगा। लेकिन वह पर तो चारो तरफ केवल चॉकलेट ही चॉकलेट थी। रिंकू वही पर बैठकर जोर जोर से रोने लग गया। (Pariyon ki Kahani – परियों की कहानी)

परी उसका रोना सुनकर उसके सामने आती है और अपनी जादुई छड़ी को घुमाकर रिंकू को एक शीशा ला देती है जिसमे से रिंकू को उसका कमरा दिखाई दे रहा था।

रिंकू शीशे के पास गया और उसने शीशे को हाथ लगाया तो उसका हाथ शीशे से बाहर जाने लगा। और रिंकू समझ गया के यही है बाहर जाने का रास्ता।

रिंकू जैसे ही शीशे मे घुसता है तो एकदम से अपने कमरे मे आ जाता है। और शीशा भी वह से गायब हो जाता है। यह देख रिंकू टी खुश हो गया के वह अब चॉकलेट की दुनिया से बाहर आ गया है। और फिर तब से रिंकू ने दुबारा चॉकलेट के लिये अपनी मम्मी से ज़िद करना बिलकुल बंद कर दिया।

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