Top 4 Prernadayak Short Kahani in Hindi | 4 प्रेरणादायक कहानियाँ
Hindi Kahani Hindi Story Motivational Story In Hindi

Top 4 Prernadayak Short Kahani in Hindi | 4 प्रेरणादायक कहानियाँ

Top 4 Prernadayak Short Kahani in Hindi | 4 प्रेरणादायक कहानियाँ

Prernadayak Short Kahani

Prernadayak Short Kahani No. 1-  सेठ और तोता

एक सेठ और सेठानी रोज सत्संग (Satsang) में जाते थे।

सेठजी के एक घर एक पिंजरे में तोता (Parrot) पाला हुआ था।

तोता (Parrot) एक दिन पूछता हैं कि सेठजी,

आप रोज कहाँ जाते है।

सेठजी बोले कि सत्संग (Satsang) में ज्ञान सुनने जाते है।

तोता (Parrot) कहता है, सेठजी संत महात्मा (Mahatma) से एक बात पूछना कि में आजाद कब होऊंगा। सेठजी सत्संग (Satsang) खत्म होने के बाद संत से पूछते है कि महाराज (Maharaj) हमारे घर जो तोता (Parrot) है उसने पूछा हैं की वो आजाद कब होगा?

संत (Sant) जी ऐसा सुनते हीं बेहोश होकर गिर जाते है। सेठजी संत (Sant) की हालत देख कर चुप-चाप वहाँ से निकल जाते है। घर आते ही तोता (Parrot) सेठजी से पूछता है कि सेठजी संत (Sant) ने क्या कहा। सेठजी कहते है कि तेरे किस्मत ही खराब (badluck) है जो तेरी आजादी का पूछते ही वो बेहोश हो गए। तोता (Parrot) कहता है कोई बात नही सेठजी (seth ji) में सब समझ गया।

दूसरे दिन सेठजी सत्संग (Satsang) में जाने लगते है तब तोता (Parrot) पिंजरे में जानबूझ कर बेहोश होकर गिर जाता हैं। सेठजी उसे मरा (dead) हुआ मानकर जैसे हीं उसे पिंजरे (pinjra) से बाहर निकालते है, तो वो उड़ जाता है।

सत्संग (Satsang) जाते ही संत सेठजी को पूछते है कि कल आप उस तोते (parrot) के बारे में पूछ रहे थे ना अब वो कहाँ हैं। सेठजी कहते हैं, हाँ महाराज (Maharaj) आज सुबह-सुबह वो जानबुझ कर बेहोश (behosh) हो गया , मैंने देखा की वो मर (dead) गया है इसलिये मैंने उसे जैसे ही बाहर निकाला तो वो उड़ (fly) गया।

तब संत (Sant) ने सेठजी से कहा की देखो तुम इतने समय से सत्संग (Satsang) सुनकर भी आज तक सांसारिक मोह-माया के पिंजरे (pinjare) में फंसे हुए हो और उस तोते (parrot) को देखो बिना सत्संग (Satsang) में आये मेरा एक इशारा समझ कर आजाद हो गया।

Friends, इस कहानी से तात्पर्य ये है कि हम सत्संग (Satsang) में तो जाते हैं ज्ञान की बाते करते हैं या सुनते (listen) भी हैं,

Prernadayak Kahani

पर हमारा mind हमेशा सांसारिक बातों में हीं उलझा रहता हैं। सत्संग (Satsang) में भी हम सिर्फ उन बातों को like करते है जिसमे हमारा स्वार्थ (swarth) सिद्ध होता हैं।

जबकि सत्संग (Satsang) जाकर हमें सत्य को स्वीकार (Accept) कर सभी बातों को महत्व देना चाहिये और जिस असत्य, झूठ (lie) और अहंकार को हम धारण किये हुए हैं उसे साहस (bravery) के साथ मन से उतार कर सत्य को स्वीकार (accept) करना चाहिए

Prernadayak Short Kahani No. 2 –  गुरु मंत्र

एक बार एक पहुंचें हुए महात्मा (Mahatma) के पास 3 मित्र गुरु मंत्र (guru mantra) लेने पहुंचे| तीनो मित्रों ने बड़े ही नम्र भाव से गुरुवर (guruwar) को प्रणाम कर अपनी जिज्ञासा प्रकट की| महात्मा (Mahatma) ने तीनों को अपना शिष्य (student) बनाने से पहले तीनों की परीक्षा (test) लेने के मन से तीनों मित्रों से एक question पुछा,- “बताओ कान और आँख में कितना difference है ?”

एक मित्र ने उत्तर दिया– “केवल पांच अंगुल का गुरुवर” महात्मा (Mahatma) ने उसे एक और खड़ा करके, दुसरे से answer देने के लिए कहा| दुसरे मित्र ने उत्तर दिया, – “महाराज (Maharaj), आँख देखने का काम करती है और कान सुनने (listen) का इसलिए प्रमाणिकता की दृष्ठि (view) से देखा जाए तो आँख का महत्त्व (importance) अधिक माना जाएगा|

Prernadayak Short Kahaniya in Hindi

महात्मा (Mahatma) ने उसको भी एक और खड़ा कर दिया और तीसरे मित्र को अपना उत्तर देने के लिए कहा| महात्मा (Mahatma) की आगया पाकर तीसरे ने answer दिया, -” भगवन! कान का महत्त्व आँख (eye) से अधिक है, क्यों कि आँख केवल लोकिक और द्रश्यमान संसार को ही देख पाती है| लेकिन ears को इस संसार के साथ-साथ परलौकिक संसार का ज्ञान (knowledge) प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त है| इसीलिए कान का importance आँख से कई गुना अधिक माना जा सकता है|

महात्मा (Mahatma) तीसरे की बात सुनकर बहुत प्रसन्न (happy) हुए और उन्होंने तीसरे को अपने पास रोकते हुए बाकि दोनों (both) को कर्म और उपासना का उपदेश देते हुए अपनी विचार शक्ति (thinking power) को बढ़ाने हेतु संसार भ्रमण की आज्ञा (permission) देकर विदा कर दिया|

जादुई चक्की की कहानी | Jadui Chakki Ki Kahani

26 Motivational Story In Hindi

Prernadayak Short Kahani No. 3-  लक्ष्य

एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति (rich person) को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया| वह धन कमाने (money making) के लिए कई दिनों तक मेहनत (hard work) कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा (earn good money) लिया| इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई|

वह लड़का विद्वान के एश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित (shock) हो गया और अब उसने विद्वान (vidvan) बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने (quit making money) को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया| वह अभी अक्षर ज्ञान (alphabet knowledge) ही सिख पाया था की इसी बिच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ (musician) से हो गई|

उसको संगीत (music) में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई (study) बंद कर दी और music सिखने में लग गया|

इसी तरह काफी age बीत गई, न वह धनि हो सका ना विद्वान (knowledge) और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया| तब उसे बड़ा दुख हुआ| एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा (Mahatma) से हुई|

उसने महात्मन (Mahatma) को अपने दुःख का कारन बताया| महात्मा (Mahatma) ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा ! दुनिया (world) बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण (attract) ज़रूर दिखाई देगा|

एक निश्चय (determination) कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता (success) की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी नहीं तो दुनियां के problems में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे| बार-बार interest बदलते रहने से कोई भी progress नहीं कर पाओगे|”

Short kahani in Hindi

युवक महात्मन की बात को समझ गया और एक target निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा|

अकबर बीरबल के 5 मजेदार किस्से

Prernadayak Short Kahani No. 4-  अहंकार

एक बार एक मूर्तिकार (Sculpture) ने अपने बेटे को मूर्तिकला सिखाने का निश्चय किया| बड़े होकर मूर्तिकार (Sculpture) का बेटा भी मूर्तिकार (Sculpture) ही बना| दोनों अब साथ में अपनी मूर्तियाँ (idols) बेचने बाज़ार जाता और अपनी-अपनी मूर्तियाँ (idols) बेचकर आते| बाप की मूर्तियाँ (idols) डेढ़-दो रूपए की बिकती, पर बेटे की मूर्तियों का मूल्य 10-15 आने से ज्यादा ना मिलता|

Market से आने के बाद मूर्तिकार (Sculpture) अपने बेटे को पास बिठाता और मूर्ति (idol) बनाने में हुई गलती के बारे में बताता और अगले दिन उस mistake improve करने के लिए समझाता| यह कार्य कई सालों तक ऐसे ही चलता रहा|

लड़का काफी समझदार था उसने अपने father की सभी बातों को बड़े ही carefully सुना करता और अपनी कला में improvement करने का प्रयत्न करता रहा| कुछ समय बाद उस लड़के की मूर्तियाँ (idols) भी डेढ़ रूपए तक sell होने लगी|

मूर्तिकार (Sculpture) अब भी अपने son को उसी तरह समझाता और मूर्ति (idol) बनाने में होने वाली mistake के बारे में अपने बेटे को बताता| Son ने अपनी कला पर और भी अधिक ध्यान दिया और उसकी art और भी अधिक improve होने लगी| अब मूर्तिकार (Sculpture) के बेटे की मूर्तियाँ (idols) पांच-पांच रूपए तक sell होने लगी|

Son की कला को improve करने का क्रम मूर्तिकार (Sculpture) ने अब भी बंद नहीं किया| एक दिन बेटे ने irritate होकर पिता से कहा, – “आप तो दोष निकालने की बात stop ही नहीं करते| मेरी art अब तो आप से भी better हो गई है|

अब तो मुझे मेरी मूर्तियों (idols) के लिए पांच रुपए तक मिल जाते हैं लेकिन आपकी मूर्तियों (idols) की कीमत अब भी दो-ढाई रूपए ही है|

Bhoot ki Kahani –  भूत की कहानी

परियों की कहानी – Pariyon ki Kahani

Prernadayak kahaniya in Hindi

मूर्तिकार (Sculpture) ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा – “बेटा ! जब में तुम्हारी उम्र (your age) का था तब मुझे मेरी कला का अहंकार (attitude of my art) हो गया था और फिर मेने अपनी कला के सुधार (improvement) की बात को छोड़ दिया| तब से मेरी प्रगति (growth) रुक गई और में दो रूपए से अधिक की मूर्तियाँ (idols) ना बना सका|

अपनी गलतियों (mistakes) को समझने और उसे सुधारने के लिए always ready रहो ताकि बहुमूल्य मूर्तियाँ (idols) बनाने वाले श्रेष्ठ कलाकारों की category में पहुँच सको|

दोस्तों, आप यह Article Prernadayak पर पढ़ रहे है. कृपया पसंद आने पर Share, Like and Comment अवश्य करे, धन्यवाद!!

Prernadayak Short Kahani

Hindi Kahaniya   | Kahaniya in Hindi  | Pari ki Kahani  | Moral Stories in Hindi  | Parilok ki Kahani  | Jadui Pariyon ki Kahani | Pari ki Kahani in Hindi | Prernadayak Kahaniya | Motivational Stories in Hindi | Thumbelina Story in Hindi | Rapunzel ki Kahani | Cinderella ki Kahani | Bhoot ki Kahani | Pariyon ki Kahani | Jadui Chakki Ki Kahani | Short Moral Stories in Hindi | Prernadayak Kahani in Hindi for Students | Motivational Story in Hindi | Short Moral Story in Hindi

विक्रम बेताल की कहानियाँ – ज्यादा पापी कौन?

150 रोचक तथ्य – 150 Interesting Facts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *