जीवन मार्ग के काँटे – Raja aur Bete ki Kahani
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जीवन मार्ग के काँटे – Raja aur Bete ki Kahani

जीवन मार्ग के काँटे – Raja aur Bete ki Kahani

एक राजा बहुत त्यागी और ईमानदार शासक थे। वह राज्य के कोष से बहुत थोड़ा मासिक वेतन लेते थे, इसलिए उनके पास धन का अभाव बना रहता था। वह अपने हाथ से कपड़े सिलते, रूखा-सूखा भोजन करते और चटाई पर सोते। (Raja aur Bete ki Kahani)

एक बार उनके पुत्र का कुरता फट गया। पैसे नहीं थे, इसलिए दूसरा कुरता नहीं बनवा पाये। लेकिन पुत्र जिद करके रोने लगा। बहुत बेमन से उन्होंने खजांची को एक रुक्का (पत्र) भेजा। लिखा कि दो रुपये पेशगी दे दें और अगले महीने के वेतन से काट लें।

खजांची ने उत्तर दिया-“यह सम्भव नहीं है। किसी के जीवन का क्या ठिकाना! आप हमेशा शत्रुओं से भिड़े रहते हैं। खुदा न करे, कल आप न रहे, तो पेशगी का धन कैसे वसूल किया जायेगा?”

खलीफ़ा ने उत्तर पढ़ा। फिर पुत्र से बोले-“अगले महीने तक सब करो। अभी पास में पैसे नहीं हैं।” उन्होंने खजानची की तरक्की (पदोन्नति) कर दी। उनका पुत्र उस महीने फटा कुरता पहने घूमता रहा।

राजा ने अपनी ईमानदारी और कर्तव्य-पालन का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है। वह राजा थे। उनके पास अधिकार ही अधिकार थे। वह चाहते, तो पूरा कोष अपने लिए खर्च देते। लेकिन तब वह अधिकारों का गलत उपयोग करते। (Raja aur Bete ki Kahani)

Sant Tukaram aur Raja ki Kahani

मिले हुए अधिकारों का उपयोग अपनी सुख-सुविधा के लिए करना, उनका गलत उपयोग है। दूसरों को अधिक-से-अधिक सुविधा मिले, इस बात को ध्यान में रख कर अधिकारों का उपयोग करना, उनका सही उपयोग है।

बच्चो! पढ़-लिख कर कभी तुम भी जिम्मेदारी का पद सँभालोगे। हज़रत उमर के जीवन की इस घटना को याद रखना। चाहे जितने अधिकार हों तुम्हारे पास, उनका गलत उपयोग कभी मत करना। अधिकारों का गलत उपयोग करोगे, तो जीवन के मार्ग पर काँटे-ही-काँटे आ जायेंगे। उनका सही उपयोग करोगे, तो इस मार्ग पर फूल-ही-फूल बिछेगे।

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