RSS Kya Hai | What is RSS | RSS क्या है
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RSS Kya Hai | What is RSS | RSS क्या है

RSS Kya Hai | What is RSS | RSS क्या है

World के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन (organization) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की स्थापना केशव बलराम हेडगेवार (Balram hedgewar) ने की थी. भारत (India) को हिंदू राष्ट्र (Hindu Rashtra) बनाने के लक्ष्य के साथ 27 September 1925 को विजयदशमी के दिन आरएसएस (RSS) (RSS) की स्थापना की गई थी.

2025 में यह Rashtriya Swayamsevak Sangh संगठन (organization) 100 साल का हो जाएगा. Nagpur के अखाड़ों से start हुआ संघ (sangh) मौजूदा समय में shape ले चुका है.

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दो दर्जन से कम लोगों ने की शुरुआत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की पहली शाखा (branch) में सिर्फ 5 लोग ही शामिल हुए थे। और आज पूरे देशभर में 50 हजार से अधिक शाखा (branch) और उनसे जुड़े लाखों स्वयंसेवक (swayamsewak) हैं।

Friends, संघ (sangh) की पहली शाखा (branch) में सिर्फ 5 लोग शामिल हुए थे, जिसमें सभी बच्चे थे. उस वक़्त में लोगों ने हेडगेवार का काफी मजाक उड़ाया भी था के वह बच्चों को लेकर क्रांति करने के लिए आए हैं. लेकिन अब उसी संघ (sangh) ने खुद को विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी और हिंदू संगठन (sangathan) है.

संघ (sangh) के प्रथम सरसंघ (sangh)चालक हेडगेवार ने अपने घर पर 17 लोगों के साथ गोष्ठी में संघ (sangh) के गठन की योजना बनाई. इस बैठक में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि मौजूद थे.

संघ (sangh) का क्या नाम होगा, क्या क्रियाकलाप होंगे सब कुछ समय के साथ धीरे-धीरे तय होता गया. उस वक्त हिंदुओं को सिर्फ संगठित करने का विचार था.

यहां तक कि संघ (sangh) का नामकरण ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक (swayamsewak) संघ (sangh)’ भी 17 अप्रैल 1926 को हुआ. इसी दिन हेडगेवार को सर्वसम्मति से संघ (sangh) प्रमुख चुना गया, लेकिन सरसंघ (sangh) चालक वे नवंबर 1929 में बनाए गए.

ऐसे नाम पड़ा आरएसएस This is how RSS got its name

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (sangh) यह नाम अस्तित्व में आने से पहले विचार मंथन हुआ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक (swayamsewak) संघ (sangh), जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल इन तीन नामों (names) पर विचार हुआ. बाकायदा वोटिंग हुई नाम विचार के लिए बैठक में मौजूद 26 सदस्यों में से 20 सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक (swayamsewak) संघ (sangh) को अपना मत दिया, जिसके बाद आरएसएस (RSS) अस्तित्व में आया.

‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ प्रार्थना के साथ पिछले कई दशकों से लगातार देश के कोने कोने में संघ (sangh) की शाखा (branch)es लग रही हैं. हेडगेवार ने व्यायामशालाएं या अखाड़ों के माध्यम से संघ (sangh) कार्य को आगे बढ़ाया. स्वस्थ और सुगठित स्वयंसेवक (swayamsewak) होना उनकी कल्पना में था.

समय नाम
1925 से 1940 तक डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार
1940 से 1973 माधवराव सदाशिवराव गोलवरकर
1973 से 1994 बाला साहेब देवरस
1994 से 2000 प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह
2000 से 2009 के.एस. सुदर्शन
2009 से वर्तमान डॉक्टर मोहनराव भागवत

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद: Akhil Bhartiya Vidyarthi Parishad – ABVP

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की स्थापना मुंबई में 1 जुलाई 1941 को हुई थी। इसकी स्थापना का श्रेय प्रोफेसर ओमप्रकाश बहल (Professor Omprakash Bahal) को जाता है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को विश्व के सबसे बड़ा छात्र संगठन (organization) के रूप में भी जाना जाता है। विद्यार्थी परिषद का नारा है- ज्ञान, शील और एकता।

“कौन बनेगा करोड़पति” में अमिताभ बच्चन के द्वारा एक प्रश्न के जवाब में ABVP को भारतीय जनता पार्टी का छात्र संगठन (organization) बताया गया था जबकि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक (swayamsewak) संघ (sangh) का छात्र संगठन (organization) है |

संघ -विचार परिवार (family) द्वारा देश में सात रक्त संग्रह केन्द्र चलाए जा रहे हैं, जिनमें से एक बंगलौर में है और छह महाराष्ट्र में। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुल प्रकल्पों की संख्या 3,112 है।

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भारतीय किसान संघ: Bhartiya Kissan Sangh

भारतीय किसान संघ (sangh) की स्थापना 7 March 1949 को राजस्थान के कोटा शहर में की गई। विलक्षण संगठन (organization) कुशलता के धनी, महान भारतीय तत्त्वचिंतक, आंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मजदूर नेता श्री दत्तोपंतजी ठेंगडी ने भारतीय किसानों के उत्थान हेतु इस संगठन (organization) को साकार किया।

बजरंग दल: Bajrang Dal

इसकी शुरुआत 1 अक्टूबर 1984 मे सबसे पहले भारत (India) के उत्तर प्रदेश प्रान्त से हुई जिसका बाद में पूरे भारत (India) में विस्तार हुआ।

अभी इसके 1,300,000 सदस्य हैं जिनमें 850,000 कार्यकर्ता शामिल हैं। संघ (sangh) की शाखा (branch) की तरह अखाड़े चलाती है जिनकी सँख्या लगभग ढाई हजार के आस पास है।

संघ का दायरा – RSS Sangh ka Dayra

आरएसएस (RSS) का दावा है कि उसके एक करोड़ से ज्यादा प्रशिक्षित सदस्य हैं. संघ (sangh) परिवार (family) में 80 से ज्यादा समविचारी या आनुषांगिक संगठन (organization) हैं. World के करीब 40 देशों में संघ (sangh) सक्रिय है. मौजूदा समय में संघ (sangh) की 56 हजार 569 दैनिक शाखा (branch)एं लगती हैं.

करीब 13 हजार 847 साप्ताहिक मंडली और 9 हजार मासिक शाखा (branch)es भी हैं. संघ (sangh) में सदस्यों का पंजीकरण नहीं होता. ऐसे में शाखा (branch)es में उपस्थिति के आधार पर अनुमान है कि फिलहाल 50 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक (swayamsewak) नियमित रूप से शाखा (branch)es में आते हैं. देश की हर तहसील और करीब 55 हजार गांवों में शाखा (branch) लग रही है.

तीन बार लगा प्रतिबंध – RSS Banned 3 Times

संघ (sangh) ने अपने लंबे सफर में कई उपलब्धियां अर्जित कीं जबकि तीन बार उसपर प्रतिबंध भी लगा. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या को संघ (sangh) से जोड़कर देखा गया, संघ (sangh) के दूसरे सरसंघ (sangh)चालक गुरु गोलवलकर को बंदी बनाया गया.

लेकिन 18 महीने के बाद संघ (sangh) से प्रतिबंध हटा दिया गया. दूसरी बार आपातकाल के दौरान 1975 से 1977 तक संघ (sangh) पर पाबंदी लगी. तीसरी बार छह महीने के लिए 1992 के दिसंबर में लगी, जब 6 दिसंबर को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी.

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संघ ने शुरू से अलग रास्ता अख्तियार किया – RSS Sangh took a different route from the beginning

आरएसएस (RSS) ना तो गांधी की अगुवाई में चलने वाले आंदोलन में हिस्सेदार बना, न कांग्रेस (Congress) से निकले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आंदोलन में साझेदार.

और ना ही कभी भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों से उसका वास्ता रहा. 1942 के भारत (India) छोड़ो आंदोलन के वक्त आरएसएस (RSS) की कोई भूमिका नहीं दिखी. आजादी के वक्त तो संघ (sangh) ने तिरंगे का विरोध तक किया था.

संघ का एक चेहरा ये भी रहाThis is also the face of the Sangh RSS

संघ (sangh) ने धीरे-धीरे अपनी पहचान एक अनुशासित और राष्ट्रवादी संगठन (organization) की बनाई. 1962 में चीन के धोखे से किए हमले से देश सन्न रह गया था. उस वक्त आरएसएस (RSS) ने सरहदी इलाकों में रसद पहुंचाने में मदद की थी.

इससे प्रभावित होकर प्रधानमंत्री Nehru ने 1963 में गणतंत्र दिवस (Republic Day) की Parade में संघ (sangh) को बुलाया था. 1965 में Pakistan से war के दौरान दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने में संघ (sangh) ने मदद की थी. 1977 में आरएसएस (RSS) ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) को विवेकानंद रॉक मेमोरियल का उद्घाटन करने के लिए बुलाया था.

आरएसएस (RSS) साफ तौर पर हिंदू समाज को उसके धर्म (Religion) और संस्कृति के आधार पर शक्तिशाली बनाने की बात करता है. संघ (sangh) से निकले स्वयंसेवकों ने ही बीजेपी को स्थापित किया.

हर साल विजयादशमी के दिन संघ (sangh) स्थापना के साथ ही शस्त्र पूजन की परम्परा निभाई जाती है. देश भर में पथ संचलन निकलते हैं. कभी 25 स्वयंसेवकों से शुरू हुआ संघ (sangh) आज विशाल संगठन (organization) के रूप में स्थापित है.

स्वयंसेवक ” – SwayamaSewak

इस शब्द का अर्थ होता है- स्वेच्छा से काम करने वाला। संघ (sangh) के विचारों को मानने वाले और नियमित तौर पर शाखा (branch) में जाने वाले लोगों को संघ (sangh) का स्वंयसेवक कहा जाता है।

प्रचारक” – Pracharak

ये संघ (sangh) के लिए पूर्णकालिक तौर पर काम करते हैं। संघ (sangh) के लिए काम करने के दौरान इन्हें अविवाहित रहना होता है। ये किसी भी पारिवारिक जिम्मेदारी से दूर रहते हैं।

विस्तारक” – Vistarak

ये ऐसे स्वयंसेवक (swayamsewak) होते हैं जो गृहस्थ जीवन में रहकर ही संगठन (organization) के विस्तार की दिशा में काम करते हैं। इनका काम किशोरों को संघ (sangh) के साथ जोड़ने का होता है।

सरसंघ चालक” – Sarsangh Chalak

संघ (sangh) का सबसे बड़ा पदाधिकारी सरसंघ चालक कहलाता है। वर्तमान में मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) आरएसएस (RSS) के सरसंघचालक हैं।सरसंघचालक की नियुक्ति मनोनयन द्वारा होती है। प्रत्येक सरसंघ चालक अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करता है।

इसके अलावा, शीर्ष पदाधिकारियों में सरकार्यवाह यानी जनरल सेक्रेटी होते हैं। सर कार्यवाह की मदद के लिए सह सरकार्यवाह होते हैं। इन्हें ज्वाइंट जनरल सेक्रेटी भी कहा जाता है।

ओटीसी “ – OTC

संघ (sangh) का प्रचारक बनने के लिए किसी भी स्वयंसेवक (swayamsewak) को तीन साल तक ओटीसी यानी ऑफिसर ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेना होता है।

इटीसी” – ETC

शाखा (branch) प्रमुख बनने के लिए आईटीसी यानी इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लेना होता है। यह प्रशिक्षण सात से पंद्रह दिनों का होता है।

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संघ क्या हैंउद्देश्य और कार्यप्रणाली The Aim and Methodology of Sangh RSS

बहुत से बालक और युवा लड़कों का समूह (group) एक जगह एकत्र होता हैं और केसरिया रंग का ध्वज जिसे भगवा (bhagwa) कहते हैं को सम्मान के साथ फहराया जाता हैं. एक निर्धारित प्रार्थना (नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि) के बाद कई तरह की एक्सरसाइज (exercise) होती हैं.जिनमे सूर्यनमस्कार भी शामिल हैं.

शाखा (branch) के कार्यकर्ताओं को स्वयंसेवक (swayamsewak) कहा जाता हैं, सभी स्वयंसेवकों के पास एक लकड़ी का “दंड” होता हैं,इससे विविध war कौशल के अभ्यास किये जाते हैं.

शाखा (branch) में सभी गतिविधियाँ अनुशासन में होती हैं. प्रार्थना और ग्रुप लीडर की सभी घोषणाएं संस्कृत में होती हैं.  प्रार्थना के अंत में “भारत (India)  माता की जय” का नारा लगाया जाता हैं.

शाखा (branch) किसी भी व्यक्ति में देश-प्रेम की भावना जगाने का काम करती हैं. संघ (sangh) के ढाँचे में कार्यवाहक से लेकर शाखा (branch) संचालित करने वाले तक के लिए विभिन्न पद होते हैं.

और इन पदों पर कार्यरत स्वयंसेवकों का निर्धारण उनके अनुभव और शाखा (branch) या संघ (sangh) सम्बन्धित गतिविधियों में क्रियाशीलता पर होता हैं.

संघ (sangh) में स्वयंसेवकों के लिए विभिन्न स्तर पर संघ (sangh)-शिक्षा वर्ग आयोजित किये जाते हैं. संघ (sangh) वर्ष भर में 6 राष्ट्रीय कार्यक्रम- नववर्ष-प्रतिपदा जो कि हिन्दू नव-वर्ष हैं, ज्येष्ठ चतुर्दशी को हिन्दू साम्राज्य दिनोत्स्व, छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक का दिवस,आषाढ़ पूर्णिमा को गुरुपूजा, विजयादशमी, श्रावण पूर्णिमा को रक्षा बंधन और मकर संक्रांति (makar Sakranti) मनाता हैं.

वर्ष में विभिन्न उत्सवों पर स्वयंसेवकों (swayamsewako) का पद-संचलन भी होता हैं,जिनमें गणवेश पहने स्वयमसेवक अनुशासित पंक्तियों में शहर भर में घूमते हैं, और कई जगह उनका पुष्प-वर्षा का स्वागत (welcome) भी किया जाता हैं.इसके अतिरिक्त संचलन में एक बैंड भी होता है,इन सबका प्रशिक्षण शाखा (branch) के विभिन्न वर्गों में दिया जाता हैं.

हिन्दू संगठन (organization) के रूप में विख्यात आरएसएस (RSS) का उद्देश्य देश में सामजिक समरसता,शान्ति और भारतीय संस्कृति (Indian heritage) की रक्षा करना हैं.

संगठन (organization) का अनुशासन और समाज के लिए नि:स्वार्थ सेवा ही इसकी पहचान हैं.

राष्ट्र पर आई कोई भी आपदा प्रबन्धन (emergency situation) में इसके कार्यकर्ता जिस तरह सेवा को आगे आते हैं उस हिसाब से इसे भारत (India) की घरेलू और अनऑफिशियल आर्मी भी कहा जा सकता हैं.

संघ (sangh) की संरचनात्मक इकाई शाखा (branch) हैं. और बिना किसी वेतन के भी अपने कर्तव्य के लिए प्रतिबद्ध इसके कार्यकर्ताओं के लिए अनुशासन और देश ही सर्वोपरी (pari) हैं.

1) कश्मीर सीमा पर निगरानी , विभाजन पीड़ितों को आश्रय – Close Watch on Kashmir

संघ (sangh) के स्वयंसेवकों ने अक्टूबर 1947 से ही कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना (army) की गतिविधियों पर बगैर किसी प्रशिक्षण (training) के लगातार नज़र रखी. यह काम न नेहरू-माउंटबेटन सरकार कर रही थी, न हरिसिंह सरकार.

उसी समय, जब पाकिस्तानी सेना (army) की टुकड़ियों ने कश्मीर की सीमा लांघने की कोशिश की, तो सैनिकों के साथ कई स्वयंसेवकों (swayamsewak) ने भी अपनी मातृभूमि की रक्षा करते हुए लड़ाई में प्राण दिए थे. विभाजन के दंगे भड़कने पर, जब नेहरू सरकार पूरी तरह हैरान-परेशान थी, संघ (sangh) ने Pakistan से जान बचाकर आए शरणार्थियों के लिए 3000 से ज़्यादा राहत शिविर लगाए थे.

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2) 1962 का war

सेना (army) की मदद के लिए देश भर से संघ (sangh) के स्वयंसेवक (swayamsewak) जिस उत्साह से सीमा पर पहुंचे, उसे पूरे देश (country) ने देखा और सराहा. स्वयंसेवकों ने सरकारी कार्यों में और विशेष रूप से जवानों की मदद (help) में पूरी ताकत लगा दी – सैनिक आवाजाही मार्गों की चौकसी, प्रशासन की मदद (help), रसद और आपूर्ति में मदद, और यहां तक कि शहीदों के परिवारों (families) की भी चिंता.

Jwahar Lal Nehru को 1963 में 26 जनवरी (January) की Parade में संघ (sangh) को शामिल होने का निमंत्रण देना पड़ा. Parade करने वालों को आज भी महीनों तैयारी (preparation) करनी होती है, लेकिन मात्र दो दिन पहले मिले निमंत्रण पर 3500 स्वयंसेवक (swayamsewak) गणवेश में उपस्थित हो गए.

निमंत्रण (invitation) दिए जाने की आलोचना होने पर नेहरू ने कहा- “यह दर्शाने के लिए कि केवल लाठी के बल पर भी सफलतापूर्वक (successfully) बम और चीनी सशस्त्र बलों से लड़ा सकता है, विशेष रूप से 1963 के गणतंत्र दिवस (Republic Day) Parade में भाग लेने के लिए आरएसएस (RSS) को आकस्मिक आमंत्रित (invite) किया गया.”

3) कश्मीर का विलय – Kashmir Fusion

कश्मीर के महाराजा (raja) हरि सिंह विलय का फ़ैसला नहीं कर पा रहे थे और उधर कबाइलियों के भेस में पाकिस्तानी सेना (army) सीमा में घुसती जा रही थी, तब नेहरू सरकार तो – हम क्या करें वाली मुद्रा में – मुंह बिचकाए बैठी थी. Sardar Patel ने गुरु गोलवलकर से मदद मांगी.

गुरुजी श्रीनगर पहुंचे, महाराजा (raja) से मिले. इसके बाद महाराजा (raja) ने कश्मीर के भारत (India)  में विलय पत्र का प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया. क्या बाद में महाराजा (raja) हरिसिंह के प्रति देखी गई Nehru की नफ़रत की एक जड़ यहां थी?

4) 1965 के war में क़ानून-व्यवस्था संभाली

Pakistan से war के समय लालबहादुर शास्त्री को भी संघ (sangh) याद आया था. शास्त्री जी ने क़ानून-व्यवस्था की स्थिति संभालने (situation handle) में मदद देने और दिल्ली का यातायात नियंत्रण अपने हाथ (hand) में लेने का आग्रह किया, ताकि इन कार्यों से मुक्त किए गए पुलिसकर्मियों को सेना (army) की मदद में लगाया जा सके.

घायल जवानों (injured officer’s) के लिए सबसे पहले रक्तदान करने वाले भी संघ (sangh) के स्वयंसेवक (swayamsewak) थे. War के दौरान कश्मीर की हवाईपट्टियों से बर्फ़ हटाने का काम संघ (sangh) के स्वयंसेवकों ने किया था.

5) गोवा का विलय – Goa Fusion

दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत (India) विलय में संघ (sangh) की निर्णायक भूमिका थी. 21 जुलाई 1954 को दादरा को पुर्तगालियों (Portugal) से मुक्त कराया गया, 28 जुलाई को नरोली और फिपारिया मुक्त कराए गए और फिर राजधानी (capital) सिलवासा मुक्त कराई गई.

संघ (sangh) के स्वयंसेवकों ने 2 अगस्त 1954 की सुबह पुतर्गाल का झंडा उतारकर भारत (India)  का तिरंगा फहराया, पूरा दादरा नगर हवेली पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त करा कर भारत (India) सरकार को सौंप दिया. संघ (sangh) के स्वयंसेवक (swayamsewak) 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में प्रभावी रूप से शामिल हो चुके थे.

गोवा में सशस्त्र हस्तक्षेप करने से Nehru के इनकार करने पर जगन्नाथ राव जोशी के नेतृत्व में संघ (sangh) के कार्यकर्ताओं ने गोवा पहुंच कर protest शुरू किया, जिसका परिणाम जगन्नाथ राव जोशी सहित संघ (sangh) के कार्यकर्ताओं को दस वर्ष की सजा सुनाए जाने में निकला. हालत बिगड़ने पर अंततः भारत (India) को सैनिक हस्तक्षेप करना पड़ा और 1961 में गोवा (Goa) आज़ाद हुआ.

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6) आपातकाल – Emergency

1975 से 1977 के बीच आपातकाल के ख़िलाफ़ संघर्ष (sangh) और जनता पार्टी के गठन तक में संघ (sangh) की भूमिका की याद अब भी कई लोगों के लिए ताज़ा (fresh) है. सत्याग्रह में हजारों स्वयंसेवकों की गिरफ्तारी के बाद संघ (sangh) के कार्यकर्ताओं ने भूमिगत रह कर आंदोलन चलाना शुरु किया.

आपातकाल के खिलाफ पोस्टर (poster) सड़कों पर चिपकाना, जनता को सूचनाएं देना और जेलों में बंद विभिन्न राजनीतिक कार्यकर्ताओं–नेताओं के बीच संवाद सूत्र का काम संघ (sangh) कार्यकर्ताओं ने संभाला.

जब लगभग सारे ही नेता (politicians) जेलों में बंद थे, तब सारे दलों का विलय करा कर जनता पार्टी का गठन करवाने की कोशिशें संघ (sangh) की ही मदद से चल सकी थीं.

7) भारतीय मज़दूर संघ – Bhartiya Majdoor Sangh

1955 में बना भारतीय मज़दूर संघ (sangh) शायद विश्व का पहला ऐसा मज़दूर आंदोलन था, जो विध्वंस के बजाए निर्माण (development) की धारणा पर चलता था. कारखानों में विश्वकर्मा जयंती का चलन भारतीय मज़दूर संघ (sangh) ने ही शुरू किया था. आज यह विश्व का सबसे बड़ा, शांतिपूर्ण और रचनात्मक मज़दूर संगठन (organization) है.

8) ज़मींदारी प्रथा का ख़ात्मा – Abolition of Zamindari System

जहां बड़ी संख्या में ज़मींदार थे उस राजस्थान (Rajasthan) में ख़ुद सीपीएम को यह कहना पड़ा था कि भैरों सिंह शेखावत राजस्थान में प्रगतिशील शक्तियों के नेता हैं. संघ (sangh) के स्वयंसेवक (swayamsewak) शेखावत बाद में भारत (India)  के उपराष्ट्रपति भी बने.

भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षा भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, एकल विद्यालय, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना. विद्या भारती आज 20 thousand से ज्यादा स्कूल चलाता है, लगभग दो दर्जन शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज (college), डेढ़ दर्जन कॉलेज (college), 10 से ज्यादा रोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थाएं (institutions) चलाता है.

केन्द्र और राज्य (state) सरकारों से मान्यता प्राप्त इन सरस्वती शिशु मंदिरों में लगभग 30 लाख छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं और 1 लाख से अधिक शिक्षक (teacher) पढ़ाते हैं. संख्या बल से भी बड़ी बात है कि ये संस्थाएं भारतीय संस्कारों को शिक्षा (education) के साथ जोड़े रखती हैं.

अकेला सेवा भारती देश भर (India) के दूरदराज़ के और दुर्गम इलाक़ों में सेवा (for help) के एक लाख से ज़्यादा काम कर रहा है. लगभग 35 हज़ार एकल विद्यालयों (school’s) में 10 लाख से ज़्यादा छात्र अपना जीवन संवार रहे हैं.

उदाहरण के तौर पर सेवा भारती ने जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) से आतंकवाद से अनाथ हुए 57 बच्चों को गोद लिया है जिनमें 38 Muslim और 19 हिंदू बच्चे हैं.

9) सेवा कार्य – Service Work

1971 में ओडिशा (Odisha) में आए भयंकर चंक्रवात से लेकर भोपाल की गैस त्रासदी तक, 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों से लेकर गुजरात के भूकंप (earthquake) , सुनामी की प्रलय, उत्तराखंड की बाढ़ और कारगिल war के घायलों की सेवा तक, संघ (sangh) ने राहत और बचाव का काम हमेशा सबसे आगे होकर किया है. भारत (India) में ही नहीं, नेपाल, श्रीलंका और सुमात्रा तक में.

तो दोस्तों यह है RSS की वीरगाथा, उम्मीद है आपको बेहद पसंद आई होगी, share and like करना न भूले, अगर RSS को प्यार करते हो तो comment अवश्य करे, धन्यवाद.

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