आज का युवा Sarkari Naukri को ही क्यों महत्व देता है, क्या जीवन सिर्फ Sarkari Naukri से ही चलता है, Sarkari Naukri Facts
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आज का युवा Sarkari Naukri को ही क्यों महत्व देता है | Sarkari Naukri Facts

आज का युवा Sarkari Naukri को ही क्यों महत्व देता है ? क्या जीवन सिर्फ Sarkari Naukri से ही चलता है? – Sarkari Naukri Facts

Sarkari Naukri Facts – मेरी टीम में एक कर्मचारी CA हैं उम्र 25 वर्ष। मेधावी इतने कि 21 वर्ष में ही CA कर लिया। लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) पाना है।

उन्हें पता है कि सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में आज की नौकरी से तनख्वाह कम मिलेगी लेकिन उनको लगता है जो मान सम्मान सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में है वो कही नहीं। रिज़र्व केटेगरी से है तो चांस भी ज्यादा है उनका।

मेरे हिसाब से हर्ज़ नहीं। और गांव में तो एक पटवारी का सम्मान किसी कंपनी के CEO से कम नहीं होता। CA महाशय की बातों को जानकर लगा क्यों सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) आज भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण है।

सबसे बड़ी बात सुरक्षा और स्थिरता। भगवान ना करें अगर कोई सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में चल बसता है तो उसके परिवार को उसके रिटायरमेंट तक की पूरी तनख्वाह मिलती है और फिर पेंशन। मेरे मामा जी जो कैंसर (cancer) से चल बसे 55 वर्ष की उम्र में और बैंक में कार्यरत थे।

न केवल उनके महंगे इलाज का खर्चा सरकार ने उठाया बल्कि उनकी पूरी तनख़्वाह हर महीने मामीजी को प्रदान की गई अगले 5 वर्ष तक जो की उनकी रिटायरमेंट आयु थी। पहले तो परिवार के ही एक सदस्य को सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) भी मिल जाती थी अब ऐसा नही है।

मतलब एक बार लग गए तो रिटायरमेंट (retirement) तक का सारा बीड़ा सरकार पर। और यहाँ एक सहकर्मी जो दुर्भाग्यवश जवानी में ही चल बसे उनके माँ बाप (parents) को धर धर भटकना पड़ रहा है मात्र प्रोविडेंट फण्ड के लिए और वो भी बहुत कम पैसा है। (Sarkari Naukri Facts)

Sarkari Naukri Facts

दूसरा मेरे CA कर्मचारी कहते है कि प्राइवेट नौकरी (private job) तो बहुत जल्दी ही तन और मन को ढाल देती है। मेरे पर ही तंज कस देते हैं कि अपना हाल ही देख लो। सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में काम भी अधिक नहीं होता और न ही कोई जवाबदेही।

ऐसा नहीं बिल्कुल काम नहीं है, पर सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) से व्यक्ति को निकाला नहीं जाता और प्राइवेट जॉब (private job) की तरह नौकरी जाने की तलवार नहीं लटकी रहती।

जिंदगी जीने के लिए बहुत समय मिलता है। यहाँ तो अपनी शादी में भी 4 दिन की छुट्टी मिली थी। अक्सर देखता हूँ सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) वाले का सोशल दायरा बहुत बड़ा होता है। यहाँ तो किसी रिश्तेदार (relative) के सुख दुख में जाने की भी छुट्टी नहीं मिलती।

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सबसे बड़ा फायदा कुंवारों को। सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) मिलते ही मानो उन्होंने सुंदरता की चरम सीमा को ही पा लिया हो। अच्छे अच्छे रिश्ते आ जाते हैं।

कोरोना काल में तो सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) वालों की महत्ता बढ़ गयी है। जैसे हमारी नानी कहती थी आंधी आए तूफान आए सरकारी तनख्वाह तो आती ही रहती है। यहाँ कुछ प्राइवेट नौकरी (private job) वालों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा वहीं नौकरी जिसकी सरकारी वो आज भी सबपे भारी।

युवावस्था में मुझे सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में कोई रुचि नहीं थी। हाँ आर्मी में अफसर बनने का शोंक था तो कुछ SSB तक भी पहुंचा। अब जब नहीं बना तो फ़िर पैसे कमाने (making money) का शोंक लगा। कमाए भी, बहुत मेहनत की। वो कहते हैं ना कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है तो वहीं हुआ।

पिछले 20 वर्षों से 10–12 घन्टे प्रतिदिन काम करके आगे तो बढ़े पर लगता है खोया भी कम नहीं। सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में शुरू में मेहनत और उसके बाद धीरे धीरे मेहनत कम होती जाती है बस अनुभव (experience) के सहारे ही बात बन जाती है। (Sarkari Naukri Facts)

प्राइवेट IT सेक्टर में तो 40 के बाद लोगों को निकाल ही देते हैं क्योंकि वक़्त की रफ्तार के साथ साथ हर कोई इतनी तेजी से बढ़ नहीं पाता। और सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में तो अब भी कुछ लोग कंप्यूटर कीबोर्ड पर लेटर ढूंढ ढूंढ कर पंच करते हैं।

युवा Sarkari Naukri

सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में वर्क लाइफ बैलेंस आ जाता है। प्राइवेट नौकरी में नामुनकिन है। सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) में जो काम आपका नहीं है आप सीधे सीधे मना कर सकते हैं। प्राइवेट (private job) में तो कभी भी कुछ भी करना पड़ता है। अब हमारा मेंटेनेंस मैनेजर , साहब के घर दीवाली पर बल्ब टांग रहा है। खैर सरकारी (government job) में भी कुछ लोग ऐसा करते हैं पर बाद्य नहीं है।

जीवन तो प्राइवेट नौकरी (private job) से भी अच्छा चलता है। पर जानिए फिल्मी दुनिया के हीरो हीरोइन भी बूढे हो जाने के बाद अपनी महत्ता खो देते हैं पर सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) वाला/ वाली ता उम्र हीरो हीरोइन बने रहते हैं।

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