प्रेम की वर्षा - Satyug ki Kahani
Hindi Kahani Hindi Story

प्रेम की वर्षा  – Satyug ki Kahani

प्रेम की वर्षा  – Satyug ki Kahani

प्राचीन काल की घटना है यह। एक किसान ने अपना खेत बेच दिया। खरीदने वाले किसान ने उस खेत को जोता। जोतते समय उसे खेत में एक छोटे-से बन्द बक्से में अशर्फियों की एक थैली मिली। उसने सोचा- “इस धन पर मेरा कोई अधिकार नहीं। इसे खेत के पुराने मालिक को लौटा देना चाहिए।’ (Satyug ki Kahani)

खेत के पुराने मालिक ने सारी बातें सनी, तो बोला- “मैं यह धन क्यों लूँ? खेत तो मैं बेच चुका। अब उस खेत पर या उससे निकलने वाली चीजों पर मेरा क्या अधिकार है? तुमने खेत खरीदा, तुम्हें धन मिला तो तुम्हारा ही इस धन पर अधिकार हुआ।”

खेत के नये मालिक ने ज़िद पकड़ ली। बोला-“अगर यह खेत पहले से ही मेरे पास होता और मैंने या मेरी जानकारी में किसी और ने यह धन इसमें गाड़ा होता, तो बात दूसरी थी। लेकिन यह खेत मेरे पास था ही नहीं; इसलिए न तो मेरा इस धन पर कोई अधिकार है. न मेरा इससे कोई सरोकार है।”

यह बातचीत काफी देर तक चलती रही। उन दोनों में से कोई भी दसरे की बात मानने के लिए तैयार नहीं था। धीरे-धीरे आसपास भीड़ इकट्ठी हो गयी।

उधर से एक साधु-बाबा निकल रहे थे। लोगों ने फैसला करवाने के लिए उन्हें बुला लिया। उन दोनों की बातें सुन कर वह कछ देर तक उन दोनों को बारी-बारी से देखते रहे।

फिर भीड़ की तरफ हाथ जोड़ कर बोले- “खुशियाँ मनाओ, सतयुग आ गया है। मैं किस बात का फैसला करूँ; यहाँ तो दोनों के हृदयों में भगवान् विराज रहे हैं।

जब हृदय के सिंहासन पर भगवान बैठ जाते हैं, तब वह अपने अधिकारों का विस्मरण करा देते हैं और दूसरों के अधिकारों की याद दिला देते हैं।

साथ ही, हृदय को प्रेम-रस से भी लबालब भर देते हैं। यहाँ तो एक-दूसरे को अधिकार सौंपने की प्रेम-भरी लड़ाई हो रही है। जो-कोई ऐसी लड़ाई करे, वह धन्य; जो इसे देखे, वह धन्य।

तुम दोनों महात्मा हो, अपने-अपने घर लौट जाओ। मिले हुए धन की बात भूल जाओ। बस दूसरों पर अपने प्रेम की वर्षा करते रहो; दूसरों को अपने अधिकार सौंपते रहो।”

माँ की कोख कब धन्य होती है

बच्चो, प्रेम की ऐसी वर्षा तम्हें भी करनी है। तुम्हारा अधिकार है। जिन-जिन वस्तुओं पर है, उन पर दूसरों का अधिकार है। दूसरे शब्दों में, जा-कुछ तुम्हारा है, वह दूसरों का है—ऐसी बातें सोचने से और उन्हें व्यवहार में लाने से प्रेम की यह वर्षा तम कर सकोगे।

तब इस वर्षों से लाभ-मोह समाप्त होगा। तब लोग अपने कर्तव्यों को याद रखेगा और दुसरो के कर्तव्यों को भूल जायेंगे; अपने अधिकारों को भूल जायेंगे और दूसरों के अधिकारों को याद रखेंगे।

दोस्तों, आप यह Article Prernadayak पर पढ़ रहे है. कृपया पसंद आने पर Share, Like and Comment अवश्य करे, धन्यवाद!!

सबसे बड़ा त्याग – Hindi Kahani

कब्ज़ रोग क्या है? – What is Constipation?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *