उपकार  - Sher aur Ghulam ki Kahani
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उपकार – Sher aur Ghulam ki Kahani

उपकार – Sher aur Ghulam ki Kahani

एक गुलाम था। उसका नाम एन्ड्रोक्लीज़ था। एक बार वह एक जंगल से हो कर जा रहा था। उसने किसी के कराहने की आवाज़ सुनी। उसने देखा कि थोड़ी दूरी पर एक शेर लेटा हुआ है और कराह रहा है। (Sher aur Ghulam ki Kahani)

एन्ड्रोक्लीज़ डरते-डरते उसकी ओर गया। उसने देखा कि शेर के पैर में एक काँटा चुभा हुआ है। पहले तो एन्ड्रोक्लीज़ को भय लगा, फिर भी कड़ा कर वह शेर के पास पहुँचा। उसने शेर के पैर को अपने हाथों में ले कर काँटा निकाल दिया।

शेर ने कतज्ञता के भाव से उसकी ओर देखा और चला गया।

इस घटना को हए कई वर्ष बीत गये। एक बार कोई अपराध करने पर एन्ड्रोक्लीज़ को मृत्युदण्ड दिया गया। जिन दिनों की यह बात है. उन दिनों मृत्युदण्ड पाये हए अपराधी के सामने भूखा शेर छोड़ दिया जाता था। इस भयानक तमाशे को देखने के लिए चारों ओर जनता एकत्र हो जाती थी।

संयोग की बात। एन्ड्रोक्लीज़ के सामने वही शेर छोड़ा गया. जिसका काँटा उसने निकाला था। शेर उसके सामने आया। लेकिन अरे, यह क्या हुआ! चारों ओर खड़े लोग आश्चर्य से आँखें फाड़े देखने लगे।

वे सोच रहे थे कि शेर थोड़ी ही देर में एन्ड्रोक्लीज़ का काम तमाम कर देगा। परन्तु शेर उसके पास आया, उसकी ओर देखने लगा और फिर पालतू कुत्ते की तरह बैठ कर उसके पैर चाटने लगा।

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बच्चो, पशु भी प्रेम और सहानुभूति पहचानते हैं। वे भी दूसरों के उपकार नहीं भूलते। फिर, हम तो इनसान हैं, हम दूसरों के उपकार क्यों भूलें? हमें पशुओं से शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए।

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