सम्पत्ति जो कभी घटती नहीं – Sipahi ki Hindi Kahani
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सम्पत्ति जो कभी घटती नहीं – Sipahi ki Hindi Kahani

सम्पत्ति जो कभी घटती नहीं – Sipahi ki Hindi Kahani

एक सेनापति लड़ाई के मैदान में घायल पड़ा था। उसे बहुत जोरों की प्यास लगी थी। लेकिन वह किससे पानी माँगे? तभी उसे खोजते हुए उसके सैनिक उसके पास आ पहुँचे। उसने कराहते हुए कहा-“पानी।” (Sipahi ki Hindi Kahani)

सैनिक पानी ले आये। लेकिन तभी सेनापति ने देखा-उसके पास ही एक घायल सैनिक पड़ा है और पानी माँग रहा है। जब सैनिक सेनापति के मुँह में पानी डालने लगे, तो उसने मुँह फेर लिया और बोला-“पानी उस प्यासे सैनिक को दे दो।”

सेनापति की बात कौन टाले! सैनिक को पानी पिला दिया गया। उधर प्यासे सेनापति ने अपने प्राण त्याग दिये।

यह है प्रेम। प्रेम में अपना सुख छोटा हो जाता है, और दूसरे का दुःख बड़ा हो जाता है। बच्चो! न जाने कितने दूखी लोग तम्हारे प्रेम को पाने के लिए तरस रहे हैं।

तुम अपनी सुख-सुविधा की चिन्ता न करते हुए अपनी वस्तुएँ उन्हें दे कर उनकी आवश्यकताएँ पूरी कर दो; उनका आसू-भरी आँखों को देख कर रो पड़ो और उन आँखों पर अपनी उगलियाँ फेर दो.

सरदी में ठिठुर कर गठरी बने उनके शरीरों पर अपने कपड़े डाल कर प्रसन्नता का अनभव करोः उनका दुःख दूर करने में अपनी भूख-प्यास भल जाओ यही तो है प्रेम। इस प्रेम की सम्पत्ति कभी घटती नहीं। इसे जितना ही बाँटोगे, यह उतनी ही बढ़ेगी।

ऐसी होती है पढ़ाई – Hindi Kahani

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