तेनालीराम की 4 मजेदार कहानिया – 4 Interesting Stories of Tenalirama
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तेनालीराम की 4 मजेदार कहानिया – 4 Interesting Stories of Tenalirama

तेनालीराम की 4 मजेदार कहानिया – 4 Interesting Stories of Tenalirama

तेनालीराम के कारनामे – 1 – TenaliRama Stories in Hindi – 1

कहानी: झूठ-सच का गड़बड़झाला

महाराजा कृष्णदेव राय तेनालीराम (tenalirama) को बहुत पसंद करते थे, इसलिए कुछ दरबारी तेनालीराम से जलते थे। वे उन्हें हमेशा महाराज के आगे नीचा दिखाने की कोशिश में लगे रहते थे।

एक दिन उन्होंने राजा (king) से कहा कि आपने तेनालीराम (tenalirama) को कुछ ज्यादा ही छूट दे रखी है। वह खुद को आपसे भी समझदार मानते हैं। राजा (king) ने तेनाली राम को दरबार में बुलाया और कहा, ‘मैंने सुना है तुम खुद को सबसे ज्यादा समझदार मानते हो। इसलिए हम तुम्हारी परीक्षा (test) लेना चाहते हैं।’

तेनाली राम : जैसे आप चाहें महाराज (king)।

महाराज: तुम कोई वाक्य बोलो। लेकिन अगर वह सच (true) हुआ तो तुम्हारा सिर तलवार से उड़ा दिया जाएगा और अगर वह झूठ (lie) हुआ तो तुम्हें फांसी दे दी जाएगी।

राजा (king) की बात सुन कर सारा दरबार हैरान हो गया। प्रधानमंत्री तेनालीराम (tenalirama) को पसंद करते थे। वह बहुत परेशान हो गए पर तेनाली हंसने लगे और राजा (king) से कुछ समय मांगा।

राजा (king) ने कहा: ठीक है।

कुछ देर तक सोचने के बाद तेनाली राम (tenalirama) ने कहा, ‘महाराज आप मुझे आज फांसी देने वाले हो।’

तेनालीराम की बात सुन कर प्रधानमंत्री (prime minister) खुशी से नाचने लगे। उन्होंने राजा (king) से कहा कि महाराज जी अब आप फंस गए।

महाराज ने पूछा : वह कैसे?

इस पर प्रधानमंत्री ने कहा: तेनालीराम (tenalirama) ने कहा है कि आप आज उन्हें फांसी देने वाले हैं। अगर आप ने अब कहा कि यह झूठ (lie) है तो आपको तेनालीराम (tenalirama) को फांसी देनी पड़ेगी। अगर ऐसा हुआ तो उनकी बात सच्ची (true) साबित होगी और आप को उनकी गर्दन तलवार (sword) से काटनी होगी। अब सिर पहले काटना है या पहले फांसी देनी है, यह कौन तय करेगा?

राजा (king) अब खुद की परीक्षा में ही बुरी तरह फंस (trapped) चुके थे।

वह बोले: मैं अपनी परीक्षा वापस लेता हूं। तेनालीराम (tenalirama) के दिमाग का कोई जवाब नहीं। महाराज ने तेनालीराम (tenalirama) को शाबाशी दी। तेनालीराम का बुरा चाहने वाले देखते रह गए। 

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तेनालीराम के कारनामे -2 – Tenali Raman Stories in Hindi – 2

 Tenali Raman Stories in Hindi  – मूर्खों की लिस्ट

एक बार की बात है कि घोड़ों (horse) का एक व्यापारी महाराज कृष्णदेव राय के दरबार में आकर महाराज (maharaj) से कहने लगा कि मैं घोड़ों का व्यापारी हूं| मेरे पास उत्तम किस्म के घोड़े हैं| मैं उन्हें आप को बेचना (sell) चाहता हूं| यदि आप उन्हें खरीदना चाहे तो आप मुझे 5000 सोने के सिक्के पेशगी के रूप में दे देंगे, तो मैं आपको 2 दिन बाद घोड़े लाकर दूंगा|

महाराज ने उसकी बातों पर विश्वास (believe) करके उसे 5000 सोने के सिक्के दे दिए| व्यापारी 2 दिन बाद आने का वायदा करके चला गया| व्यापारी (businessman) के जाने के बाद महाराज ने देखा कि तेनालीराम (tenalirama) कागज पर कुछ लिख रहा है|

महाराज ने तेनालीराम (tenalirama) से पूछा:- ‘तुम क्या लिख रहे हो’? तेनालीराम बोला:- ‘महाराज, में मूर्खों की लिस्ट (list of stupids) बना रहा हूं| महाराज ने लिस्ट को देखा तो सबसे ऊपर महाराज (maharaj) का ही नाम लिखा था|

महाराज क्रोध से बोले- ‘यह क्या है’? क्या तुम मुझे मुर्ख समझते हो| इस पर तेनालीराम (tenalirama) बोला:- ‘महाराज, जब आप उस व्यापारी (businessman) को जानते ही नहीं, तो आपने उसकी बात पर विश्वास करके उसे 5000 सोने के सिक्के कैसे दे दिए|

यह सुनकर कृष्णदेव राय मुस्कुराए (smile) और बोले:- तुम्हें व्यापारी पर शक है कि वह वापस नहीं आएगा| परंतु हमें पूरा विश्वास (believe) है कि वह अवश्य वापस आएगा| उन्होंने तेनालीराम (tenalirama) से पूछा कि यदि वह वापस आया तो तुम इस लिस्ट (list) का क्या करोगे|

इस पर तेनालीराम (tenalirama) हंसकर बोला:- ‘महाराज, यदि व्यापारी वापस आया तो मैं आपका नाम हटाकर सबसे ऊपर उसका नाम (name) लिख दूंगा जो आपसे 5000 सोने के सिक्के लेकर भी वापस आएगा| तेनालीराम (tenalirama) की इस बात को सुनकर कृष्णदेव राय जोर-जोर से हंसने लगे|

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तेनालीराम के कारनामे – 3 – TenaliRama Stories in Hindi – 3 

 कुएं की शादी – Marriage of Well

एक बार की बात है कि महाराज कृष्णदेव राय और तेनालीराम (tenalirama) में किसी बात पर नोकझोंक हो गई| तेनालीराम नाराज होकर दरबार (leave darbar) छोड़कर कहीं दूर चले गए|

महाराज ने अपने सेवकों से तेनालीराम (tenalirama) को ढूंढने की बहुत कोशिश की परंतु तेलानीराम (tenalirama) का कोई सुराग नहीं मिला| इसके बाद राजा (king) को तेनालीराम को ढूंढने का एक उपाय (trick) सूझा| उन्होंने प्रत्येक राज्य के प्रत्येक गांव-कस्बों में मुनादी करवा दी कि महाराज (maharaj) अपने राजकीय कुएं का विवाह कर रहे |हैं इसलिए प्रत्येक गांव व कस्बों के मुखिया (head) अपने-अपने कुंओ के साथ विवाह में शामिल हो|

जो मुखिया विवाह (marriage) में शामिल नहीं होगा उसे 20000 स्वर्ण मुद्राएं जुर्माने के रुप में देनी होगी| इस घोषणा से सभी मुखिया (head) परेशान हो गए और सोचने लगे, भला कुआं भी कहीं ले जाया जा सकता है| अवश्य ही महाराज (maharaj) का दिमाग फिर गया है|

जिस गांव में तेलानीराम (tenalirama) रुका हुआ था वहां का मुखिया भी इस घोषणा को सुनकर परेशान (tense) हो गया| तेनालीराम समझ गया कि यह घोषणा राजा (king) ने उसे ढूंढने के लिए कराई है| इसलिए तेलानीराम (tenalirama) मुखिया के पास जाकर बोला कि आप इस घोषणा से चिंतित ना हो| आपने मुझे इस गांव (village) में आश्रय दिया है इसलिए मेरा भी कर्तव्य है कि मैं आपको इस मुसीबत (problem) से छुटकारा दिलाऊं|

आप मेरे साथ चलने की तैयारी (ready) शुरू करें| तेनालीराम, मुखिया और गांव के चार व्यक्ति विजय नगर (vijay nagar) की ओर चल दिए| विजयनगर के पास पहुंचकर वे लोग एक स्थान पर ठहर गए| तेनालीराम (tenalirama) के बताए हुए उपाय के अनुसार मुखिया, महाराज के पास जाकर बोला:-” महाराज, हमारे गांव (village) के कुछ लोग आपके कुएं के विवाह में शामिल होने के लिए आए हैं| यदि नगर के सारे कुएं उनके स्वागत (welcome) के लिए चलेंगे तो अच्छा होगा”|

यह सुनकर महाराज कृष्णदेव राय समझ गए कि यह तेनालीराम (tenalirama) की सूझबूझ हो सकती है महाराज ने मुखिया से कहा:- “सच सच बताओ, तुम्हें यह उपाय (trick) किसने बताया है”|

मुखिया बोला:- “महाराज, हमारे गांव में एक परदेसी (foreigner) आकर ठहरा है, उसी ने हमें यह बात बताई है| वह व्यक्ति भी नगर के बाहर हमारे आदमियों (peoples) के साथ ठहरा है”|

महाराज यह सुनकर बहुत प्रसन्न (happy) हुए वह स्वयं नगर के बाहर गए और बड़ी धूमधाम के साथ तेनालीराम (tenalirama) को अपने साथ ले आए तथा गांव वालों को पुरस्कार देकर विदा किया|

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तेनालीराम के कारनामे – 4 – TenaliRama Stories in Hindi – 4 

बंद दरवाजे

एक बार की बात है कि राजा (king) कृष्णदेव राय ने दरबार में जादू का खेल देखने की इच्छा प्रकट की| एक मशहूर जादूगर (famous magician) को बुलाया गया, जिस का खेल देखकर दरबारियों ने जादूगर की बड़ी प्रशंसा की|

महाराज कृष्णदेव राय जादूगर से बोले:- “कोई ऐसा करतब (show) दिखाओ कि जो अब तक किसी ने ना दिखाया हो और ना आज तक ऐसा करतब (show) किसी ने देखा हो”|

महाराज की बात सुनकर जादूगर बोला:- “मैं जादू (magic) का एक ऐसा खेल दिखा सकता हूं कि जिसे आज तक किसी ने भी नहीं देखा होगा”| इसके लिए आपको पूर्णमासी की रात्रि (night) तक प्रतीक्षा करनी होगी| पूर्णमासी की रात्रि को आप और सभी दरबारियों (darbari) तथा नगर वासियों को लेकर जंगल में तालाब के किनारे आ जाएं| वहां मैं आप को साक्षात परियों (angels) से मिलवा दूंगा|

यह सुनकर राजा (king) बहुत प्रसन्न हुए| पूर्णमासी आने पर रात को महाराज, सभी दरबारी और नगरवासी (villager) को लेकर, जंगल के तालाब पर जाने के लिए नगर के द्वार (gate) पर पहुंचे, तो क्या देखते हैं कि नगर के फाटकों पर ताला लगा हुआ है| राजा (king) ने पता करवाया कि किसने फाटक पर ताला (gate) लगाया है| तो मालूम हुआ कि तेनालीराम के आदेश पर सब फाटकों पर ताला (gate) लगाया गया है|

महाराज कृष्णदेव राय ने तेनालीराम (tenalirama) को बुलवाया और क्रोध में आकर बोले:- “तेनालीराम, क्या तुम्हें पता नहीं है कि आज हम सब लोग जंगल (jungle) में तालाब के पास परियों (pari) से मिलने वाले हैं| तुमने यह आपराधिक कदम क्यों उठाया है”|

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तेनालीराम बोला:-” महाराज, आप जिन परियों (pari) को देखने के लिए तालाब पर जा रहे हैं,वे सब यहीं पर मौजूद है | यहां से वे परियां (pari) भाग न जाएं इसलिए तो फाटकों पर ताले डाले गए हैं| इसके बाद तेलानी राम (tenalirama) ने सैनिकों को सब परियों को लाने का आदेश दिया| सैनिकों (soldiers) को आज्ञा मिलने पर वे उन आदमियों को पकड़कर ले आए जिन्होंने परियों (angels) का वेष धारण कर रखा था|

महाराज बोले:- “यह क्या मजाक है, क्या मामला है?”

तेनालीराम ने बताया कि- महाराज, जब जादूगर ने साक्षात परियों से मिलवाने की घोषणा (announcement) की तो मुझे कुछ दाल में काला नजर आया और मैंने अपने गुप्तचर इस जादूगर (magician) के पीछे लगा दिए| मुझे पता चला कि यह जादूगर (magician) एक लुटेरा है|

यह आपको तथा सब दरबारियों व नगर वासियों (peoples) को रात्रि में तालाब के किनारे एकत्र करके पीछे से सारा खजाना (khajana) लेकर भागने वाला था| क्योंकि उस समय इसका विरोध करने वाला पूरे नगर (city) में कोई भी नहीं होता| यह सुनकर महाराज ने सैनिकों को आदेश दिया कि ‘जादूगर को पकड़कर कैदखाने में डाल दिया जाए’| तेनालीराम (tenalirama) की इस चतुराई के कारण राज्य का धन लुटने से बच गया|

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