खाना क्या है What is Food
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खाना क्या है? What is Food?

खाना क्या है? What is Food?

इस विचित्र संसार में मानव जाति के खाने के लिए कोई कमी नहीं परन्तु खाने के लिये प्रकृति ने जो पेट मानव को दिया है. उसके खाने की एक सीमा आवश्यक है। जो लोग उस पर सीमा से बाहर निकल जाते हैं वे रोगी होते हैं।

ऐसे लोगों को अक्सर यह कहते सुना गया है भैया सुख दुःख जीवन का अंग हैं जैसे सुख नहीं रहता वैसे दुःख भी नहीं रहेगा। यह सब तो प्रभु की माया है।

ऐसी बातें केवल कहने के लिए ही होती है। वरना सत्य तो यह है कि हम जब भी प्रकृति के नियमों की सीमा को पार कर जाते हैं तो ही हम रोगी होते हैं।

रोग ही मानव का सबसे बड़ा शत्रु हैं, जब भी इन्सान हार मानता है तो इनके रोगों से ही हार मानता है, यही रोग उसके लिये चिंता का कारण बनते हैं। और एक दिन यही चिंता चिता में बदल जाती है।

हम क्या खाएं – What Should We Eat

इसलिये आपको यही सलाह दूंगा कि अपने खाने के बारे में सदा ध्यान रखो कहीं यही खाना जिसे आप अमृत समझकर खा रहे हो पेट के अंदर जाते ही विष न बन जाए।

अमृत और विष का अंतर तो सब जानते हैं उन सबको पता है अमृत जीवन है और विष मृत्यु । परन्तु भोजन तो एक ही होता है। उसे यदि पेट की सीमा (भूख) तक ही खाया जाए तो वह अमृत होता है।

अब यह ज्ञान ही तो लोगों के पास नहीं है कि क्या खाए और कैसे खाए? और इसका लाभ क्या है ?

माना कि भोजन सुख जीवन व्यतीत करने का आधार है। लेकिन आप को यह ज्ञान तो हो कि इस भोजन की कितनी मात्रा आपके जीवन की नैय्या को चलाती है।

हमारे पास हर प्रकार का साहित्य है परन्तु ऐसे साहित्य का तो जैसे आकाल ही पड गया है जो जीवन सम्बन्धी है।

हमारे विद्वान बुद्धिजीवी भी शायद इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहे हा। हा बीमार होने पर यदि आप किसी डाक्टर के पास चले जाए तो डॉक्टर ज़रूर उन्हें यह बता देता है.

खट्टी चीजे न खाओं, तली हुई चीजें न खाएं, दूध अधिक पिओ, फलों का रस अधिक से अधिक पिओ, रोटी के स्थान पर डबल रोटी लो, विश्राम करो। ऐसे कई परहेज़ डाक्टर आप को बता देंगे।

उस समय तो आप डाक्टर की सलाह मानने के लिये तैयार होंगे क्योंकि आपको कष्ट जो हो रहा होगा। परन्तु जैसे ही आप स्वस्थ होंगे फिर उल्टे सीधे खाने खाना शुरु कर देंगे।

परिणामस्वरूप आप फिर रोगी बन कर डाक्टर के पास जाएंगे और डाक्टर आपको फिर उल्टी सीधी कड़वी कुसैली गोलिया देगा, टीके लगाएगा।

इस प्रकार से आप बार-बार बीमार होंगे और डाक्टर के पास जाते रहेंगे।

इससे आपको दो भारी नुकसान होंगे।

  1. आपकी सेहत दिन प्रतिदिन खराब होती चली जाएगी।
  2. आपको डाक्टरों को मुंह मांगा धन देना पड़ेगा।

इसके अलावा तीसरा बड़ा नुकसान होगा कि आप का स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण आप कोई भारी काम नहीं कर सकेंगे।

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